Dono Pairon Se Chal Nahi Sakta Tha
कभी-कभी इंसान की हालत देखकर हमें लगता है कि शायद वह यह काम नहीं कर पाएगा, लेकिन जब दिल में अल्लाह की मोहब्बत और इरादा मज़बूत हो तो इंसान बड़ी से बड़ी मुश्किल का सामना कर सकता है।
यह वाक़िया एक ऐसे नौजवान का है जिसके दोनों पैर चलने के क़ाबिल नहीं थे, लेकिन उसके दिल में हज की तड़प और अल्लाह के घर की ज़ियारत का जुनून इतना ज़्यादा था कि उसने गर्मी, थकान और रास्ते की मुश्किलों की परवाह नहीं की। वह अपने आपको अल्लाह की बारगाह में एक आजिज़ बंदा समझकर सफ़र पर निकल पड़ा।
उसकी बातों में जो इश्क़, आजिज़ी, सब्र और अल्लाह पर भरोसा नज़र आता है, वह दिल को झकझोर देता है। यह वाक़िया हमें याद दिलाता है कि सिर्फ़ ज़ुबान से अल्लाह की मोहब्बत का दावा करना आसान है, असल बात यह है कि हमारी ज़िंदगी में अल्लाह की रज़ा कितनी अहमियत रखती है।
आइए इस दिल को छू लेने वाले वाक़िए को पढ़ते हैं और देखते हैं कि उस नौजवान के दिल में अल्लाह और उसके घर की मोहब्बत किस क़दर थी।
हज़रत मालिक बिन दीनार रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि गर्मी का मौसम था और इतनी गर्मी थी कि परिन्दे भी पेड़ों के साए में छिपकर बैठ गए थे।
सूरज आग बरसा रहा था। कोई जानदार बाहर नज़र नहीं आ रहा था। इतने में मुझे किसी ज़रूरी काम से बाहर निकलना पड़ गया। मैंने देखा कि एक नौजवान जो दोनों पैरों से मुहताज है। वह अपने कुल्हों के बल ज़मीन के ऊपर घिसटता घिसटता आ रहा है।
मैं हैरान हुआ। जब क़रीब आया तो मैंने देखा कि उसका चेहरा गर्मी की वजह से लाल हो चुका था और उसके कपड़े पसीने से तर हो चुके थे। मैंने सलाम किया, उसने सलाम जवाब दिया। तार्रुफ़ हुआ। पूछा कहाँ जा रहे हो।
जवाब दिया हज के लिए जा रहा हूँ। मैंने उसे कहा कि देखो तुम मेरे घर के अन्दर थोड़ा आराम कर लो। जब गर्मी ज़रा कम होगी असर के वक्त तो फिर चल पड़ना वह कहने लगा कि मालिक बिन दीनार आप तो पाँव के बल चलते हो,
ये भी पढ़ें: तीर पर तीर लगते रहे, मगर नमाज़ नहीं छोड़ी! सहाबी की नमाज़ का ऐसा वाक़िया जो दिल हिला देगा
सफ़र जल्दी तय होता है मैं तो कूल्हों के बल घिसट घिसट कर चल रहा हूँ मुझे वक्त ज्यादा लगता है। मुझे डर है कि कहीं ऐसा न हो कि सफ़र लम्बा है, मुझे वक्त ज्यादा लग जाए और कहीं हज के दिन ही न निकल जाएं। इसलिए मैं रास्ते में रुक नहीं रहा।
मैंने कहा ऐ अल्लाह के बन्दे ! तुम रुक जाओ हम सवारी का इन्तेज़ाम कर देते हैं। तुम बजाए पैदल जाने के सवारी पर सवार होकर चले जाओ। कहते हैं कि जब यह कहा तो उस नौजवान ने गुस्से की नज़र से मेरी तरफ देखा और कहने लगा मालिक दीनार मैं तुम्हें अकलमंद समझता था।
आज पता चला कि तुम अकल से बिल्कुल कोरे हो। मैंने कहा वह कैसे ? अर्ज़ किया कि तुम बताओ अगर किसी गुलाम ने अपने मालिक का जुर्म किया हो, नाफरमानी की हो और फिर वह सोचे कि अपने मालिक को मनाने के लिए जाऊँ । अब बताओ उस गुलाम को सवार होकर जाना अच्छा लगता है या पैदल?
अपने मालिक की ख़िदमत में तो आजिज़ी के साथ पेश होना अच्छा लगता है। मालिक बिन दीनार रह० फरमाते हैं कि मुझे उसकी बात ने हैरान कर दिया। ख़ैर वह तो चला गया और मैं बात भूल गया। फ़रमाते हैं कि मैंने उसी साल हज किया और जब मैं शैतान को कंकरियाँ मारकर वापस लौटा तो मैंने देखा कि एक जगह मजमा जमा है।
मैंने पूछा क्या है। कहने लगे एक नौजवान है दुआएं मांग रहा है और उसकी दुआएं ऐसे इश्क़ व मुहब्बत में डूबी हुई हैं। की लोग खड़े सुन रहे हैं। मैंने कहा ज़रा मुझे भी देखने दो। रास्ता लिया, जब देखा कि तो वही नौजवान ‘दुआएं कर रहा था।Dono Pairon Se Chal Nahi Sakta Tha
और कह रहा था कि ऐ अल्लाह तेरी मेहरबानी शामिले हाल हो जाए, मैंने तेरे घर का तवाफ़ किया, हजरे असवद को भी बोसा दिया, मैंने मकामे इब्राहीम पर भी सज्दे किए, काबे के गिलाफ़ को पकड़कर भी दुआएं मांगी, अल्लाह वक़ूफ़े अरफात में भी हाज़िर हुआ, मुज़दलफा में भी हाज़िर हुआ।Dono Pairon Se Chal Nahi Sakta Tha
ऐ मालिक मैंने शैतान को भी कंकरियाँ माकर अपनी दुश्मनी का इज़हार भी कर दिया। ऐ अल्लाह अब क़ुर्बानी का वक्त आ गया है। सब गुंजाइश वाले लोग खड़े हैं ये जाएंगे और जानवरों को क़ुर्बान करेंगे और मालिक तू जानता है कि मेरे पास तो एहराम के कपड़ों के सिवा कुछ और नहीं ।
ऐ अल्लाह आज मैं अपनी जान आपके नाम पर क़ुर्बान करना चाहता हूँ। मेरे मालिक मेरी इस कुर्बानी को कुबूल कर लीजिए। कहते हैं मजमे के सामने उसने यह बात कही और कलिमा पढ़ा और उसकी रूह परवाज़ कर गई। अल्लाह के चाहने वाले ऐसे भी गुज़रे हैं।
अल्लाह की मुहब्बत में जान देने वाले और अल्लाह के नाम पर जान देने वाले, अल्लाहु अकबर ।
FAQ – अल्लाह की मोहब्बत और हज के सफ़र से जुड़े सवाल-जवाब
सवाल 1: इस वाक़िए से हमें क्या सबक मिलता है?
जवाब: इस वाक़िए से हमें सब्र, आजिज़ी, अल्लाह की मोहब्बत और उसके हुक्म पर भरोसा रखने का सबक मिलता है। मुश्किल हालात में भी नेक काम का इरादा छोड़ना नहीं चाहिए।Dono Pairon Se Chal Nahi Sakta Tha
सवाल 2: क्या मुश्किल होने की वजह से इबादत छोड़ देनी चाहिए?
जवाब: नहीं। अपनी हैसियत और सेहत के मुताबिक़ इबादत करनी चाहिए। अल्लाह तआला बंदे की नीयत और उसकी कोशिश को जानता है।Dono Pairon Se Chal Nahi Sakta Tha
सवाल 3: हज के लिए सफ़र करने वाले इस नौजवान की सबसे बड़ी खूबी क्या थी?
जवाब: उसके अंदर अल्लाह के घर की ज़ियारत की सच्ची तड़प थी। उसने अपनी शारीरिक मुश्किल को अपने नेक इरादे के रास्ते में रुकावट नहीं बनने दिया।Dono Pairon Se Chal Nahi Sakta Tha
सवाल 4: क्या सिर्फ़ मुश्किल उठाना ही इबादत है?
जवाब: नहीं। इस्लाम में इबादत के साथ अपनी सेहत और जान की हिफ़ाज़त भी ज़रूरी है। इंसान को अपनी ताक़त और शरीअत के अहकाम के मुताबिक़ फैसला करना चाहिए।Dono Pairon Se Chal Nahi Sakta Tha
सवाल 5: अल्लाह की मोहब्बत की निशानी क्या है?
जवाब: अल्लाह की मोहब्बत का तक़ाज़ा यह है कि इंसान उसके फ़राइज़ अदा करे, गुनाहों से बचे, नेक काम करे और उसकी रज़ा हासिल करने की कोशिश करे।Dono Pairon Se Chal Nahi Sakta Tha
सवाल 6: क्या गरीब या मजबूर इंसान भी अल्लाह का क़रीबी बंदा बन सकता है?
जवाब: बिल्कुल। अल्लाह के नज़दीक इंसान की असल क़ीमत उसके माल या जिस्मानी ताक़त से नहीं, बल्कि उसके ईमान, तक़वा और नेक अमल से होती है।Dono Pairon Se Chal Nahi Sakta Tha
सवाल 7: हमें अपनी मुश्किलों के समय क्या करना चाहिए?
जवाब: सब्र करना चाहिए, अल्लाह से दुआ करनी चाहिए और अपनी जायज़ कोशिश जारी रखनी चाहिए। परेशानी के वक़्त मायूस होने के बजाय अल्लाह की रहमत से उम्मीद रखनी चाहिए।Dono Pairon Se Chal Nahi Sakta Tha
सवाल 8: क्या यह वाक़िया हमें हज की अहमियत भी याद दिलाता है?
जवाब: जी हाँ। यह वाक़िया हज की अज़मत, अल्लाह के घर की मोहब्बत और नेक नीयत की अहमियत की तरफ़ ध्यान दिलाता है। साथ ही हज के असल अहकाम के लिए भरोसेमंद उलमा और प्रमाणित फ़िक़्ही स्रोतों से रहनुमाई लेना बेहतर है।Dono Pairon Se Chal Nahi Sakta Tha
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Dono Pairon Se Chal Nahi Sakta Tha
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Dono Pairon Se Chal Nahi Sakta Tha
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Dono Pairon Se Chal Nahi Sakta Tha
जज़ाकल्लाह खैर….
