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लड़के और लड़की के पेशाब का हुक्म क्या है? | हदीस की रौशनी में इस्लाम का सही तरीका |Ladke aur Ladki ke Peshaab ka Hukm Kya Hai? | Hadees ki Roshni Mein Islam ka Sahi Tareeqa

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Ladke aur Ladki ke Peshaab ka Hukm Kya Hai?
Ladke aur Ladki ke Peshaab ka Hukm Kya Hai?

Ladke aur Ladki ke Peshaab ka Hukm Kya Hai?

इस्लाम हमें ज़िंदगी के हर पहलू के बारे में सही और साफ़ रहनुमाई देता है। तहारत (पाकीज़गी) भी दीन का एक अहम हिस्सा है। बहुत से लोगों के मन में यह सवाल होता है कि लड़के और लड़की के पेशाब के बारे में शरीअत का क्या हुक्म है और हदीस में इसके बारे में क्या बताया गया है।

इस आर्टिकल में हम हदीस की रौशनी में जानेंगे कि दूध पीने वाले लड़के और लड़की के पेशाब के बारे में क्या हुक्म है, दोनों में क्या फर्क बताया गया है, और इस मसले की सही समझ क्या है। साथ ही यह भी जानेंगे कि बच्चों के साथ नर्मी और रहमत का व्यवहार करने की इस्लामी तालीम क्या है। आइए, इस अहम मसले को आसान और भरोसेमंद अंदाज़ में समझते हैं।

लड़के और लड़की के पेशाब का हुक्म

हदीसः हज़रत लुबाबा रज़ियल्लाहु अन्हा फरमाती हैं कि जब हज़रत हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु की पैदाईश हुई तो मैंने अर्ज़ किया या रसूलल्लाह ! इस बच्चे को मुझे दे दीजिये ताकि मैं इसकी परवरिश करूँ और अपना दूध पिलाऊँ। आपने मेरी दरख्वास्त कबूल फरमायी और बच्चा मुझे इनायत फरमा दिया।

मैं कभी-कभी आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में लाया करती थी एक दिन आपके पास लायी तो आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इनको अपने सीने पर रख लिया। यानी लिटा लिया या बैठा लिया। हज़रत हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु ने पेशाब कर दिया जो आपके तहबन्द मुबारक में लग गया।

मैंने अर्ज़ किया या रसूलल्लाह! अपना तहबन्द मुझे इनयात फरमा दीजिये ताकि धो दूँ। आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि लड़के के पेशाब पर पानी डाला जाता है और लड़की के पेशाब को धोया जाता है।

दूसरी रिवायत में यूँ है कि लड़की के पेशाब की वजह से कपड़ा धोया जाता है और लड़के के पेशाब की वजह से पानी छिड़क दिया जाता है। (शरह मआनियुल आसार)

तशरीहः हज़रत लुबाबा रज़ियल्लाहु अन्हा उम्मुल-मोमिनीन हज़रत मैमूना रज़ियल्लाहु अन्हा की बहन और हज़रत अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु की बीवी थीं। और उनके बेटे हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास की वालिदा थीं। हुजूरे अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में उनका अकसर आना-जाना रहता था।

उन्होंने एक बार अर्ज कियाः या रसूलल्लाह ! मैंने ख़्वाब देखा है कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जिस्म मुबारक का एक टुकड़ा मेरे घर में गिरा है। आपने इसकी ताबीर इस तरह से दी कि फातिमा के एक बच्चा पैदा होगा और तुम उसे दूध पिलाओगी।

जब हज़रत हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु पैदा हुए तो यह उनको ले गईं और उनकी परवरिश शुरू कर दी। एक बार उनको लेकर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में हाज़िर हुईं तो उन्होंने सरवरे आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर पेशाब कर दिया। जैसे बड़े आदमियों का पेशाब नापाक है ऐसे ही बच्चा और बच्ची का पेशाब भी नापाक है।Ladke aur Ladki ke Peshaab ka Hukm Kya Hai?

जब हज़रत लुबाबा रज़ियल्लाहु अन्हा ने देखा कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का तहबन्द नापाक हो गया तो कहने लगीं कि लाइये धो दूँ। इस पर आपने फरमाया कि लड़के के पेशाब पर पानी डाला जाता है। खूब अच्छी तरह मल-मलकर धोने की ज़रूरत नहीं और लड़की के पेशाब को धोया जाता है। दूसरी रिवायत में पानी डालने के बजाय छिड़कने के अलफाज़ हैं। यानी लड़के के पेशाब पर पानी छिड़क दिया जाता है। इस छिड़कने का मतलब छींटे मारना नहीं है बल्कि खूब मलकर न धोने को छिड़कने के अलफाज़ से ताबीर फरमाया है।

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लड़का हो या लड़की, जब दोनों ही का पेशाब नापाक है तो फर्क क्यों हुआ, कि लड़की के पेशाब को खूब अच्छी तरह धोना लाज़िम हुआ और लड़के के पेशाब पर मले बगैर ही पानी बहा देने से कपड़ा पाक करार दे दिया गया। इसकी वजह आलिमों ने यह लिखी है कि लड़की के पेशाब में गाढ़ापन होता है और बदबू ज़्यादा होती है, इसलिए अच्छी तरह धोने को फरमाया।Ladke aur Ladki ke Peshaab ka Hukm Kya Hai?

और लड़के के पेशाब में यह बात नहीं है, इसलिए पानी बहा देना ही काफी हो जाता है। लेकिन यह मसला उसी बच्चे के पेशाब के बारे में है जो दूध पीता हो, अगर दूध पीने का ज़माना ख़त्म हो गया तो उस वक़्त यह हुक्म न होगा, बल्कि उस सूरत में लड़के का पेशाब भी अच्छी तरह धोया जायेगा, जैसा कि अभी दूसरी हदीस में आता है।

हदीसः हज़रत उम्मे कैस रज़ियल्लाहु अन्हा का बयान है कि मैं अपने बच्चे को हुजूरे पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में लेकर हाज़िर हुई। उस बच्चे ने खाना शुरू न किया था। दूध पर गुज़ारा था। उसको मैंने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की गोद में बैठा दिया, उसने पेशाब कर दिया। फिर आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने बस इतना ही किया कि कपड़े पर पानी छिड़क दिया यानी खूब अच्छी तरह से नहीं धोया।

तशरीहः खूब अच्छी तरह से न धोने को पानी छिड़कने से ताबीर किया है। इस हदीस से साफ मालूम हो गया कि जिस लड़के के पेशांब को अच्छी तरह धोने की ज़रूरत नहीं बल्कि उसपर पानी बहा देना ही काफी है, यह उस बच्चे के पेशाब के बारे में है जो दूध पीता बच्चा हो।Ladke aur Ladki ke Peshaab ka Hukm Kya Hai?

साथ ही यह भी मालूम हुआ कि हज़रात सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम मर्द और औरत अपने बच्चों को बरकत के लिए हुजूरे अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में हाज़िर किया करते थे। और यह भी मालूम हुआ कि हुजूरे पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम अपने बच्चों के अलावा दूसरे मुसलमानों के बच्चों से भी मुहब्बत फ़रमाते थे। और उनको गोद में बैठा लेते थे। बाज़ मर्तबा ये बच्चे आपके ऊपर पेशाब भी कर देते थे। इससे आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को बिल्कुल नागवारी नहीं होती थी।

फायदाः जब कोई लड़का या लड़की पेशाब करने लगे चाहे किसी भी बड़े आदमी पर हो तो उसको डाँट-डपट न करो। ऐसा करने से पूरा पेशाब न कर सकेगा, दरमियान में रोक लेगा। और इससे पेशाब रुकने की तकलीफ हो जाने का अन्देशा हो जायेगा।

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एक बार हज़रत हसन या हज़रत हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हुमा में से किसी ने नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मुबारक पेट पर पेशाब कर दिया। वहाँ मौजूद लोगों ने उनको पकड़ना चाहा, आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया छोड़ो मेरे बच्चे का पेशाब, न रोको। चुनाँचे उनको छोड़े रखा। जब पूरा पेशाब कर लिया तो आपने पानी मंगाया और उसपर डाल दिया। (कन्जुल उम्माल)Ladke aur Ladki ke Peshaab ka Hukm Kya Hai?

इसी से मिलता-जुलता अरब के एक देहाती का किस्सा है। उन्होंने अपनी ना-जानकारी की वहज से मस्जिद के एक कोने में खड़े होकर पेशाब करना शुरू कर दिया। जो सहाबा किराम रज़ियल्लाहु अन्हुम उस वक़्त वहाँ हाज़िर थे, उन्होंने कहा हाय-हाय ! जिसका मक्सद पेशाब से रोकना था। हुजूरे अक्दस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मौजूद हज़रात को रोका और फ़रमायाः “उसको पेशाब कर लेने दो और पेशाब में रुकावट पैदा न करो” चुनाचे सब ने उनको छोड़ दिया। जब उन्होंने पेशाब कर लिया तो नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनको बुलाकर नर्मी से समझा दिया और पेशाब की जगह पर एक डोल पानी बहाने का हुक्म दे दिया। (मुस्लिम शरीफ)

बात यह है कि पेशाब रुकने की तकलीफ अगर किसी बच्चे या बड़े आदमी को हो जाये तो यह ज़्यादा परेशानी की चीज़ है। रहा कपड़े और ज़मीन वगैरह का धोना तो यह आसान है।

FAQ (सवाल और जवाब)

1. क्या लड़के और लड़की के पेशाब का हुक्म अलग है?
जी हाँ, दूध पीने वाले बच्चे के बारे में हदीस में अलग हुक्म बयान किया गया है।Ladke aur Ladki ke Peshaab ka Hukm Kya Hai?

2. दूध पीने वाले लड़के के पेशाब के बारे में क्या हुक्म है?
हदीस के मुताबिक़ उसके पेशाब वाली जगह पर पानी बहा देना या छिड़क देना काफी बताया गया है।Ladke aur Ladki ke Peshaab ka Hukm Kya Hai?

3. दूध पीने वाली लड़की के पेशाब का क्या हुक्म है?
हदीस के अनुसार उसके पेशाब से लगी जगह को अच्छी तरह धोने का हुक्म है।Ladke aur Ladki ke Peshaab ka Hukm Kya Hai?

4. क्या यह हुक्म हर उम्र के बच्चों पर लागू होता है?
नहीं। यह हुक्म खास तौर पर उस बच्चे के लिए है जो अभी सिर्फ दूध पीता हो। जब बच्चा खाना खाने लगे, तो दोनों का हुक्म एक जैसा हो जाता है।Ladke aur Ladki ke Peshaab ka Hukm Kya Hai?

5. इस मसले की दलील किस हदीस में मिलती है?
इस बारे में कई हदीसें मौजूद हैं, जिनमें हज़रत लुबाबा (रज़ि.) और हज़रत उम्मे कैस (रज़ि.) की रिवायतें मशहूर हैं।Ladke aur Ladki ke Peshaab ka Hukm Kya Hai?

6. अगर बच्चा किसी के कपड़े पर पेशाब कर दे तो क्या करना चाहिए?
घबराने या बच्चे को डाँटने के बजाय शरीअत के बताए तरीके के अनुसार कपड़े को पाक कर लेना चाहिए।Ladke aur Ladki ke Peshaab ka Hukm Kya Hai?

7. क्या पेशाब करते समय बच्चे को रोकना चाहिए?
नहीं। हदीस में बच्चे को पेशाब पूरा करने देने की तालीम दी गई है, क्योंकि बीच में रोकना उसके लिए तकलीफ़ का कारण बन सकता है।Ladke aur Ladki ke Peshaab ka Hukm Kya Hai?

8. क्या नबी ﷺ बच्चों से मोहब्बत करते थे?
जी हाँ। रसूलुल्लाह ﷺ बच्चों से बेहद मोहब्बत करते थे, उन्हें गोद में उठाते थे और उनके साथ नर्मी का व्यवहार करते थे।Ladke aur Ladki ke Peshaab ka Hukm Kya Hai?

9. इस हदीस से हमें क्या सीख मिलती है?
हमें तहारत (पाकीज़गी) का सही तरीका अपनाना चाहिए और बच्चों के साथ रहमत, सब्र और नरमी से पेश आना चाहिए।Ladke aur Ladki ke Peshaab ka Hukm Kya Hai?

10. इस मसले में मुसलमान को क्या करना चाहिए?
हर मुसलमान को चाहिए कि वह कुरआन और सही हदीस की रोशनी में दीन सीखे, उसी पर अमल करे और बिना जानकारी के किसी बात पर यकीन न करे।Ladke aur Ladki ke Peshaab ka Hukm Kya Hai?

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Ladke aur Ladki ke Peshaab ka Hukm Kya Hai?

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Ladke aur Ladki ke Peshaab ka Hukm Kya Hai?

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

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