Hazrat Umar Razi. Apni Biwi Ko Aadhi Raat Jungle Mein Kyun Le Gaye?
हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु की ज़िंदगी हमारे लिए सादगी, इंसाफ़ और गरीबों की ख़िदमत का बेहतरीन नमूना है। यह वाक़िया भी उनके इसी ख़ूबसूरत अख़लाक़ को सामने लाता है, जब एक मुसाफ़िर अपनी बीवी के साथ जंगल में परेशान था और उसकी बीवी ज़चगी के दर्द में मुब्तिला थी।
हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु चाहते तो किसी और को भेज सकते थे, लेकिन उन्होंने खुद उसकी मदद करने का फैसला किया और अपनी अहलिया को भी साथ लेकर रात के वक़्त जंगल पहुंच गए। इतना ही नहीं, उन्होंने उस परिवार की ज़रूरत का इंतज़ाम किया और खुद उनके लिए खाना तैयार किया।
यह वाक़िया हमें सिखाता है कि असल बड़ाई माल-दौलत या ओहदे में नहीं, बल्कि इंसानियत, आजिज़ी और ज़रूरतमंद की ख़िदमत में है। आइए, इस ईमान-अफ़रोज़ वाक़िए को पढ़ते हैं और देखते हैं कि हमारे बुज़ुर्गों के अख़लाक़ कितने आला थे।
हज़रत उमर रजि० का अपनी बीवी को ज़चगी में ले जाना
अमीरुल मोमिनीन हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु अपने खिलाफत के ज़माने में बसा औकात रात को चौकीदारी के तौर पर शहर की हिफाजत भी करते थे। एक मर्तबा इसी हालत में एक मैदान में गुजर हुआ, देखा कि एक खेमा बालों का बना हुआ लगा हुआ है, जो पहले वहां नहीं देखा था।
उसके करीब पहुंचे तो देखा कि एक साहब वहां बैठे हैं और खेमे से कुछ कराहने की आवाज आ रही है। सलाम करके उन साहब के पास बैठ गये और दर्याप्त किया कि तुम कौन हो ? उन्होंने कहा, एक मुसाफिर हूं, जंगल का रहने वाला हूं। अमीरुल मोमिनीन के सामने कुछ अपनी जरूरत पेश करके मदद चाहने के वास्ते आया हूं।
दर्याफ्त फ़रमाया कि यह खेमे में से कैसी आवाज आ रही है। इन साहब ने कहा, मियां जाओ, अपना काम करो। आपने इसरार फ़रमाया कि नहीं बता दो, कुछ तक़्लीफ की आवाज है। इन साहब ने कहा औरत की विलादत का वक़्त करीब है, दर्दे जे़ह हो रहा है। आपने दर्याप्त फ़रमाया कि कोई दूसरी औरत भी पास है। उन्होंने कहा, कोई नहीं।
आप वहां से उठे और मकान तशरीफ ले गये और अपनी बीवी उम्मे कुल्सूम रज़ियल्लाहु अन्हा से फरमाया कि एक बड़े सवाब की चीज मुक़द्दर से तुम्हारे लिए आई है। उन्होंने पूछा, क्या है ? आपने फ़रमाया, एक गांव की रहने वाली बेचारी तन्हा है उसको दर्द जे़ह हो रहा है।
उन्होंने इरशाद फ़रमाया कि हां, हां तुम्हारी सलाह हो, तो मैं तैयार हूं और क्यों न तैयार होती कि यह भी आखिर हज़रत सैयदा फातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा की ही साहबजादी थीं। हजरत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु ने फ़रमाया कि बिलादत के वास्ते जिन चीजों की जरूरत पड़ती हो, तेल गूदड़, वगैरह, ले लो और एक हांडी और कुछ घी और दाने वगैरह भी साथ ले लो। वह लेकर चलीं।
हजरत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु खुद पीछे-पीछे हो लिये। वहां पहुंचकर हजरत उम्मे कुल्सूम रज़ियल्लाहु अन्हा तो खेमें चली गयीं और आपने आग जलाकर उस हांड़ी में दाने उबाले, और घी डाला। इतने में विलादत से फरागत हो गई। अन्दर से हजरत उम्मे कुल्सूम रज़ियल्लाहु अन्हा ने आवाज देकर अर्ज़ किया, अमीरुल मोमिनीन ! अपने दोस्त को लड़का पैदा होने की बशारत’ दीजिए।
अमीरुल मोमिनीन का लफ़्ज़ जब उन साहब के कान में पड़ा तो वह बड़े घबराये। आपने फ़रमाया घबराने की बात नहीं। वह हांडी खेमे के पास रख दी कि उस औरत को भी कुछ खिला दें। हजरत उम्मे कुल्सूम रज़ियल्लाहु अन्हा ने उसको खिलाया। इसके बाद हांडी बाहर दे दी।
हजरत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु ने उस बहू से कहा कि लो तुम भी खाओ, रात भर तुम्हारे जागने में गुजर गई। इसके बाद अहिलया को साथ लेकर घर तशरीफ ले आये और उन साहब से फर्मा दिया कि कल आना तुम्हारे लिए इंतिजाम कर दिया जायेगा ।
हमारे जमाने का कोई बादशाह या रईस नहीं। कोई मामूली हैसियत का मालदार भी ऐसा है, जो गरीब की जरूरत में मुसाफिर की मदद के वास्ते इस तरह बीवी को रात में जंगल में ले जाये और खुद अपने आप चूल्हा धौंक कर पकाए।
ये भी पढ़ें: बड़े को बड़ाई दो” हुज़ूर ﷺ की प्यारी नसीहत | बड़ों का अदब क्यों ज़रूरी है?
मालदार को छोड़िए, कोई दीनदार भी ऐसा करता है? सोचना चाहिए कि हम जिनके नाम लेवा हैं और उन जैसी बरकात की हर बात में उम्मीदें रखते हैं कोई काम भी हम उन जैसा कर लेते हैं।Hazrat Umar Razi. Apni Biwi Ko Aadhi Raat Jungle Mein Kyun Le Gaye?
FAQ – हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु का हैरतअंगेज़ वाक़िया
सवाल 1: हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु रात में जंगल में क्यों गए थे?
जवाब: हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु रात को शहर की हिफाज़त और लोगों के हालात जानने के लिए निकलते थे। इसी दौरान उन्होंने एक मुसाफ़िर के ख़ेमे से ज़चगी के दर्द की आवाज़ सुनी और उसकी मदद के लिए वहां रुके।Hazrat Umar Razi. Apni Biwi Ko Aadhi Raat Jungle Mein Kyun Le Gaye?
सवाल 2: उस मुसाफ़िर की परेशानी क्या थी?
जवाब: उसकी बीवी की विलादत का वक़्त करीब था और वह दर्द-ए-ज़ेह में मुब्तिला थी। उनके पास मदद के लिए कोई दूसरी औरत भी मौजूद नहीं थी।Hazrat Umar Razi. Apni Biwi Ko Aadhi Raat Jungle Mein Kyun Le Gaye?
सवाल 3: हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु ने अपनी बीवी को क्यों बुलाया?
जवाब: उन्होंने अपनी अहलिया हज़रत उम्मे कुलसूम रज़ियल्लाहु अन्हा से उस मजबूर औरत की मदद करने के लिए कहा, ताकि उसकी विलादत में आसानी हो सके।Hazrat Umar Razi. Apni Biwi Ko Aadhi Raat Jungle Mein Kyun Le Gaye?
सवाल 4: हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु ने खुद क्या ख़िदमत की?
जवाब: उन्होंने खुद आग जलाई, हांडी में खाना पकाया और उस परिवार के लिए खाने का इंतज़ाम किया। यह उनकी आजिज़ी और गरीबों की ख़िदमत का बेहतरीन नमूना है।Hazrat Umar Razi. Apni Biwi Ko Aadhi Raat Jungle Mein Kyun Le Gaye?
सवाल 5: इस वाक़िए से हमें क्या सबक मिलता है?
जवाब: हमें सबक मिलता है कि किसी गरीब, मुसाफ़िर या मुसीबतज़दा इंसान की मदद करने में शर्म नहीं करनी चाहिए। असल इज़्ज़त लोगों की ख़िदमत और उनके दुख-दर्द में काम आने में है।Hazrat Umar Razi. Apni Biwi Ko Aadhi Raat Jungle Mein Kyun Le Gaye?
सवाल 6: क्या गरीब और ज़रूरतमंद की मदद करना इस्लाम में अहम है?
जवाब: जी हां, इस्लाम में ज़रूरतमंदों की मदद, गरीबों की ख़ैरख़्वाही और इंसानों के साथ हुस्न-ए-सुलूक की बहुत ताकीद की गई है।Hazrat Umar Razi. Apni Biwi Ko Aadhi Raat Jungle Mein Kyun Le Gaye?
सवाल 7: हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु की ज़िंदगी हमें क्या सिखाती है?
जवाब: उनकी ज़िंदगी हमें इंसाफ़, सादगी, आजिज़ी, जिम्मेदारी और रियाया की ख़िदमत का पैग़ाम देती है।Hazrat Umar Razi. Apni Biwi Ko Aadhi Raat Jungle Mein Kyun Le Gaye?
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Hazrat Umar Razi. Apni Biwi Ko Aadhi Raat Jungle Mein Kyun Le Gaye?
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Hazrat Umar Razi. Apni Biwi Ko Aadhi Raat Jungle Mein Kyun Le Gaye?
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Hazrat Umar Razi. Apni Biwi Ko Aadhi Raat Jungle Mein Kyun Le Gaye?
खुदा हाफिज़…..
