Roza-e-Rasool ﷺ Tak Surang Khoodne Ki Koshish
मदीना मुनव्वरा वह मुक़द्दस शहर है, जहां हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ आराम फरमा रहे हैं। रोज़ा-ए-रसूल ﷺ से हर मुसलमान के दिल में बेपनाह मोहब्बत और अकीदत है।
इसी मुबारक जगह से जुड़ा एक बेहद हैरतअंगेज़ ऐतिहासिक वाक़िया मशहूर है, जिसमें दो मुसाफ़िरों के बारे में कहा जाता है कि वे मदीना मुनव्वरा में रहकर एक ख़ुफ़िया सुरंग खोद रहे थे। जब इस बात का राज़ खुला तो लोगों के होश उड़ गए।
इस वाक़िए को सुल्तान नूरुद्दीन ज़ंगी रहमतुल्लाह अलैह से भी जोड़ा जाता है। लेकिन एक बात का ख़याल रखना ज़रूरी है कि यह मशहूर ऐतिहासिक रिवायत है, इसे सहीह हदीस समझकर पेश नहीं करना चाहिए।
आइए जानते हैं कि आखिर वह दो मुसाफ़िर कौन थे, सुरंग क्यों खोदी जा रही थी और नूरुद्दीन ज़ंगी रहमतुल्लाह अलैह को इस मामले का पता कैसे चला।
रोज़ा-ए-रसूल ﷺ तक सुरंग खोदने की कोशिश: नूरुद्दीन ज़ंगी और दो मुसाफ़िरों का हैरतअंगेज़ वाक़िया
मदीना मुनव्वरा की एक मशहूर ऐतिहासिक रिवायत
मदीना मुनव्वरा वह मुक़द्दस शहर है जहां हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ आराम फरमा रहे हैं। दुनिया भर के मुसलमान इस मुक़द्दस शहर से बेपनाह मोहब्बत रखते हैं और रोज़ा-ए-रसूल ﷺ की ज़ियारत को अपने लिए बड़ी सआदत समझते हैं।
इसी मुक़द्दस जगह से जुड़ा एक बेहद हैरतअंगेज़ ऐतिहासिक वाक़िया किताबों में बयान किया गया है। रिवायत के मुताबिक़ सुल्तान नूरुद्दीन ज़ंगी के दौर में दो मुसाफ़िर मदीना मुनव्वरा में रहने लगे। बाहर से देखने में वे बहुत इबादतगुज़ार और नेक दिखाई देते थे, लेकिन उनके बारे में एक बेहद ख़तरनाक राज़ सामने आया।
दो मुसाफ़िर और मदीना में उनका क़याम
मशहूर रिवायत के मुताबिक़ ये दोनों आदमी मदीना मुनव्वरा में एक मकान किराए पर लेकर रहने लगे। वे ज़ाहिर में इबादत करते, सदक़ा-ख़ैरात करते और लोगों के सामने नेक और परहेज़गार होने का इज़हार करते थे।
लेकिन उनकी असल नियत के बारे में बाद में जो बात सामने आई, उसने लोगों को हैरान कर दिया।
कहा जाता है कि वे रात के वक़्त चुपके से ज़मीन के नीचे सुरंग खोद रहे थे, जिसका रुख़ हुज़ूर ﷺ के हुजरे मुबारक की तरफ था। इस घटना की तफ़सील बाद के ऐतिहासिक स्रोतों में मिलती है, हालांकि इसके अलग-अलग भी बयान हुए हैं।
सुल्तान नूरुद्दीन ज़ंगी को क्या इशारा मिला?
इस वाक़िए से जुड़ी मशहूर रिवायत में आता है कि सुल्तान नूरुद्दीन ज़ंगी ने एक ख्वाब देखा जिसमें हुज़ूर ﷺ की तरफ से उन्हें दो लोगों के बारे में आगाह किया गया।
सुल्तान इस ख्वाब से बेहद परेशान हुए और मदीना मुनव्वरा जाने का फैसला किया। वहां पहुंचकर उन्होंने लोगों से मुलाक़ात की और शहर के हालात का जायज़ा लिया।
कुछ रिवायतों में आता है कि उन्होंने मदीना के लोगों को सदक़ा और तोहफ़े देने के लिए बुलाया और यह मालूम करने की कोशिश की कि क्या कोई ऐसा शख़्स है जो इस मजलिस में नहीं आया।
आख़िरकार दो मुसाफ़िरों का पता चला जो एक मकान में रहते थे।
मकान की तलाशी और खुल गया राज़
सुल्तान नूरुद्दीन ज़ंगी को जब उन दोनों पर शक हुआ तो उनके रहने की जगह की तलाशी ली गई।
मशहूर रिवायत के मुताबिक़ एक जगह फ़र्श के नीचे छिपा हुआ रास्ता मिला। जब उसे देखा गया तो पता चला कि वहां से एक सुरंग खोदी जा रही थी, जिसका रुख़ हुजरे मुबारक की तरफ था।
यह देखकर वहां मौजूद लोग सख़्त हैरान और परेशान हो गए।
पूछताछ के दौरान उन दोनों से उनके मक़सद के बारे में सवाल किया गया। मशहूर ऐतिहासिक विवरणों में उन्हें ईसाई बताया गया है और कहा गया है कि उनका मक़सद रोज़ा-ए-रसूल ﷺ तक पहुंचना और एक नापाक साज़िश को अंजाम देना था।
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सुल्तान नूरुद्दीन ज़ंगी ने क्या किया?
रिवायत के मुताबिक़ सुल्तान ने इस साज़िश को नाकाम बनाया और भविष्य में ऐसी कोशिश को रोकने के लिए रोज़ा-ए-मुबारक के चारों तरफ़ सुरक्षा का इंतज़ाम करवाया।Roza-e-Rasool ﷺ Tak Surang Khoodne Ki Koshish
कुछ ऐतिहासिक स्रोत बताते हैं कि हुजरे मुबारक के चारों तरफ़ गहरी खाई बनाई गई और उसमें पिघला हुआ सीसा डाला गया, ताकि नीचे से कोई सुरंग बनाकर वहां तक पहुंचने की कोशिश न कर सके।
इस वाक़िए से हमें क्या सबक मिलता है?
इस मशहूर ऐतिहासिक वाक़िए से सबसे अहम बात यह समझ आती है कि रोज़ा-ए-रसूल ﷺ की हिफ़ाज़त और उसकी हुरमत मुसलमानों के लिए कितनी अहम है।
साथ ही हमें यह भी समझना चाहिए कि हर मशहूर कहानी को बिना तहक़ीक़ के सहीह हदीस या यक़ीनी तारीखी हक़ीक़त कहना मुनासिब नहीं।
इस वाक़िए के बारे में अलग-अलग तारीखी किताबों और स्रोतों में अलग-अलग तफ़सीलात मिलती हैं। इसलिए इसे मशहूर ऐतिहासिक रिवायत के तौर पर बयान करना ज्यादा एहतियाती तरीका है। एक अकादमिक अध्ययन भी इस घटना को ऐसी रिवायतों के संदर्भ में रखता है जिनकी तफ़सीलात समय के साथ अलग-अलग रूपों में बयान हुईं।Roza-e-Rasool ﷺ Tak Surang Khoodne Ki Koshish
रोज़ा-ए-रसूल ﷺ से मोहब्बत
मदीना मुनव्वरा और हुज़ूर ﷺ से मोहब्बत हर मुसलमान के दिल की दौलत है। हमें चाहिए कि हम इस मोहब्बत को सिर्फ़ ज़बान तक सीमित न रखें, बल्कि हुज़ूर ﷺ की सुन्नत पर अमल करें, दरूद शरीफ़ की कसरत करें, अच्छे अख़लाक़ अपनाएं और अपनी ज़िंदगी को इस्लामी तालीमात के मुताबिक़ गुज़ारने की कोशिश करें।
अल्लाह तआला हमें अपने प्यारे महबूब ﷺ की सच्ची मोहब्बत, अदब और सुन्नत पर चलने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।
ज़रूरी नोट
यह आर्टिकल एक मशहूर ऐतिहासिक रिवायत पर आधारित है। इसे सहीह हदीस समझकर पेश नहीं किया गया है। इस घटना की तारीख़, दोनों व्यक्तियों की पहचान और कुछ दूसरी तफ़सीलात के बारे में ऐतिहासिक स्रोतों में इख़्तिलाफ़ पाया जाता है।Roza-e-Rasool ﷺ Tak Surang Khoodne Ki Koshish
अल्लाह तआला हमें इल्म सीखने, सही बात को समझने और उसे दूसरों तक पहुंचाने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।
FAQ – रोज़ा-ए-रसूल ﷺ तक सुरंग खोदने की मशहूर रिवायत
सवाल 1: रोज़ा-ए-रसूल ﷺ तक सुरंग खोदने की यह घटना क्या है?
जवाब: यह एक मशहूर ऐतिहासिक रिवायत है, जिसके मुताबिक़ दो मुसाफ़िर मदीना मुनव्वरा में रहकर रोज़ा-ए-रसूल ﷺ की तरफ़ सुरंग खोदने की कोशिश कर रहे थे। बाद में उनकी यह साज़िश सामने आने का ज़िक्र मिलता है।Roza-e-Rasool ﷺ Tak Surang Khoodne Ki Koshish
सवाल 2: इस वाक़िए का ताल्लुक़ किस सुल्तान से बताया जाता है?
जवाब: मशहूर रिवायत में इस वाक़िए को सुल्तान नूरुद्दीन ज़ंगी रहमतुल्लाह अलैह से जोड़ा जाता है।Roza-e-Rasool ﷺ Tak Surang Khoodne Ki Koshish
सवाल 3: नूरुद्दीन ज़ंगी रहमतुल्लाह अलैह को इस मामले का पता कैसे चला?
जवाब: मशहूर तारीखी बयान के मुताबिक़ उन्हें एक ख़्वाब के ज़रिए इस मामले की तरफ़ मुतवज्जेह किया गया और फिर वह मदीना मुनव्वरा पहुंचे। हालांकि इस तफ़सील को सहीह हदीस के तौर पर पेश नहीं करना चाहिए।Roza-e-Rasool ﷺ Tak Surang Khoodne Ki Koshish
सवाल 4: क्या यह वाक़िया सहीह हदीस में मौजूद है?
जवाब: नहीं, इसे सहीह हदीस कहना दुरुस्त नहीं। यह एक मशहूर ऐतिहासिक रिवायत है और इसकी तफ़सीलात अलग-अलग तारीखी स्रोतों में अलग अंदाज़ से मिलती हैं।Roza-e-Rasool ﷺ Tak Surang Khoodne Ki Koshish
सवाल 5: उन दोनों मुसाफ़िरों के बारे में क्या बताया जाता है?
जवाब: मशहूर रिवायत में बताया जाता है कि वे ज़ाहिर में इबादतगुज़ार मुसाफ़िर बनकर रहते थे, लेकिन उन पर रोज़ा-ए-रसूल ﷺ तक पहुंचने के लिए सुरंग खोदने की साज़िश का इल्ज़ाम बताया गया है।Roza-e-Rasool ﷺ Tak Surang Khoodne Ki Koshish
सवाल 6: इस वाक़िए से हमें क्या सबक मिलता है?
जवाब: इससे हमें मदीना मुनव्वरा, मस्जिद-ए-नबवी और रोज़ा-ए-रसूल ﷺ की हुरमत व अदब की अहमियत समझ में आती है। साथ ही किसी भी मशहूर वाक़िए को बयान करते समय उसकी तारीखी हैसियत और सहीह हदीस के बीच फर्क रखना चाहिए।Roza-e-Rasool ﷺ Tak Surang Khoodne Ki Koshish
सवाल 7: मुसलमानों को हुज़ूर ﷺ से कैसी मोहब्बत रखनी चाहिए?
जवाब: हुज़ूर ﷺ से सच्ची मोहब्बत का तक़ाज़ा है कि हम आप ﷺ पर कसरत से दरूद भेजें, आपकी सुन्नतों पर अमल करें, अच्छे अख़लाक़ अपनाएं और आपकी तालीमात को अपनी ज़िंदगी में उतारने की कोशिश करें।Roza-e-Rasool ﷺ Tak Surang Khoodne Ki Koshish
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Roza-e-Rasool ﷺ Tak Surang Khoodne Ki Koshish
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Roza-e-Rasool ﷺ Tak Surang Khoodne Ki Koshish
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Roza-e-Rasool ﷺ Tak Surang Khoodne Ki Koshish
खुदा हाफिज़…..
