न कुरैशी, न हाशमी, न सैय्यद, न पठान, न राजपूत, कुछ भी नहीं। बे हसब, बे नसब, बस एक नसल है, बस मुहम्मदी हैं। अबू लहब सगा चचा था हुज़ूर ए अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का मगर उसके बारे में कुरआन ने कहा अबू लहब बर्बाद हो गया और हज़रत बिलाल रज़ियल्लाहु अन्हु जिनके दादा का नाम मैंने आज तक किसी किताब में नहीं देखा।
ऐसा बेनाम इन्सान मुहम्मद मुस्तुफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सवारी की लगाम पकड़ कर साथ साथ, क्योंकि उनका नसब मुहम्मदी बन गया। और एक मर्तबा ग़ज़वाए ख़न्दक के मौके पर सलमान फारसी रज़ियल्लाहु अन्हु के बारे में बहस हो गई। जब सहाबा किराम रज़ियल्लाहु अन्हुम ख़न्दक खोदने लगे तो हांलाकि ये तो ईरानी थे और अरबों को अपने नसब पर बड़ा नाज़ था और होना भी चाहिए कि सबसे आला खनदान अरब है।
फिर उसमें भी आला कुरैश हैं फिर इसमें सबसे आला बनू अब्दुल मुनाफ है फिर इसमें सबसे आला बनू अब्दुल मुत्तलिब, फिर उनमें सबसे आला बनू हाशिम है, फिर उसमें सबसे आला हज़रम मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम हैं। अल्लाह ने उनका इन्तिख़ाब किया, तो अब वह तो ईरानी थे लेकिन उनके ईमान, अमल, ज़ौक की वजह से उनको यह दर्जा मिला कि खन्दक खोदने के लिए एक हिस्सा अन्सार को मिला यानी मदीने वालों को, एक हिस्सा मुहाजिरीन को मिला मक्का वालों को कि मक्का वाले यह हिस्सा खोदें, मदीने वाले यह हिस्सा खोदें। अब सलमान किस में जाएं?
तो अन्सारे मदीना कहने लगे सलमान हम में से हैं यहीं रहते हैं। मुहाजिरीन ने कहा सलमान हम में से हैं हिजरत करके गए हैं। अब यहीं सख़्ती आ गई बात बढ़ गई। वह कहते हैं हमारे साथ होगा वह कहते हैं हमारे साथ होगा।
आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया मैं फैसला करता हूँ। सलमान हम अहले बैत मे से हैं जबकि वो तो फारसी हैं तो किस चीज़ ने उन्हें अहले बैत में से बना दिया यहाँ हकीकी अहले बैत मुराद नहीं यह सलमान कैसे अहले बैत में से बन गया। सलमान हम में से है अहले बैत में से है किस वजह से ? अपने ईमान की वजह से, अपने तक़वे की वजह से, अपने ज़हद व फज़ल की वजह से, हांलाकि अबू लहब भी तो सैय्यदों में से था तो बिलाल हबशी रसूले पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के साथ जन्नत की तरफ जा रहे हैं।
खूबसूरत वाक़िआ:- जादूगर और अदब।
दरवाजे पर दस्तक हुई, अन्दर से पूछा रिज़वान ने कौन? कहा मैं हूँ मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, तो कहेंगे या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम आपका इन्तेज़ार हो रहा है। रब का हुक्म था जब तक आप न आएं दरवाज़ा न खोला जाए। दरवाज़ा खुलेगा आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सब से पहले दाखिल होंगे। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ आपकी उम्मत के फुकरा मसाकीन दाखिल होंगें।
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….
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