28/07/2026
Surah Mulk Ki Fazilat | Kabar Ke Azab Se Bachane Wali 30 Aayaton Ki Azeem Surah

सूरह मुल्क की फ़ज़ीलत | कब्र के अज़ाब से बचाने वाली 30 आयतों की अज़ीम सूरह |Surah Mulk Ki Fazilat | Kabar Ke Azab Se Bachane Wali 30 Aayaton Ki Azeem Surah

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Surah Mulk Ki Fazilat | Kabar Ke Azab Se Bachane Wali 30 Aayaton Ki Azeem Surah
Surah Mulk Ki Fazilat |

Surah Mulk Ki Fazilat |

सूरह मुल्क क़ुरआन मजीद की एक बेहद फ़ज़ीलत वाली सूरह है, जिसमें कुल 30 आयतें हैं। हदीसों में इसकी बड़ी अहमियत बयान की गई है। बताया गया है कि जो आदमी इसे रोजाना पढ़ता है, यह सूरह क़ब्र के अज़ाब से उसकी हिफाज़त के लिए अल्लाह के सामने सिफ़ारिश करती है। इसी वजह से बहुत से मुसलमान हर रात सोने से पहले सूरह मुल्क पढ़ने की आदत बनाते हैं।

इस आर्टिकल में हम हदीस की रौशनी में जानेंगे कि सूरह मुल्क की क्या फ़ज़ीलत है, इसे पढ़ने के क्या फायदे बताए गए हैं, और क्यों इसे हर मुसलमान की रोज़मर्रा की तिलावत का हिस्सा बनाना चाहिए। आइए, इस मुबारक सूरह की अहमियत को आसान और समझने लायक अंदाज़ में जानते हैं।

हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि प्यारे नबी सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के एक सहाबी ने एक कब्र पर खेमा लगाया और उनको पता न था कि यह कब्र है। खेमे में बैठे-बैठे अचानक देखते क्या हैं कि इसमें एक इंसान है,

जो सूरह तबारकल्लज़ी बियदिहिल मुल्क पढ़ रहा है। पढ़ते-पढ़ते उसने पूरी सूरह ख़त्म कर दी। यह वाकिया उन्होंने हज़रत रसूले करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की खिदमत में अर्ज़ किया तो आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि यह सूरह अज़ाब रोकने वाली है और इसको अल्लाह के अज़ाब से बचा रही है।’

हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि बिला शुबहा क़ुरआन में एक सूरह है जिसकी 30 आयतें हैं। उसने एक शख़्स की सिफारिश की। यहां तक कि वह बख़्श दिया गया। फिर फ़रमाया कि वह सूरह तबारकल्लज़ी बियदिहिल मुल्क है।

ये भी पढ़ें : सूरह अल-फातिहा की फ़ज़ीलत और फायदे | हर मुसलमान को जाननी चाहिए सूरह फातिहा की अहमियत|

हज़रत ख़ालिद बिन मेदानताबई रहमतुल्लाह अलैह सूरह तबारकल्लज़ी बियदिहिल मुल्क’ और सूरह ‘अलिफ़-लाम-मीम सज्दा’ के बारे में फ़रमाया करते थे कि ये दोनों सूरतें अपने पढ़ने वालों के लिए कब्र में अल्लाह से झगड़ेंगी और दोनों में से हर एक कहेगी कि ऐ अल्लाह !

अगर मैं तेरी किताब में से हूं तो इसके हक में मेरी सिफारिश कुबूल फरमा और अगर मैं तेरी किताब में से नहीं हूं तो मुझे अपनी किताब से मिटा दे। यह भी फ़रमाते थे कि परिन्दों की तरह अपने पढ़ने वाले पर फैला देंगी और उसे कब्र के अज़ाब से बचा लेंगी।’

इन दोनों सूरतों को कब्र के अज़ाब से बचाने में बड़ा दखल है। जैसा कि इस रिवायत से ज़ाहिर हुआ। आँहज़रत सैयदे आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इन दोनों सूरतों को पढ़े बगैर न सोते थे।’

फायदाः जिस तरह सूरह अलिफ़-लाम-मीम और सूरह मुल्क कब्र के अज़ाब से बहुत ज़्यादा बचाने वाली हैं, उसी तरह चुगलखोरी करना और पेशाब से न बचना, दोनों काम कब्र के अज़ाब में बहुत ज़्यादा डाल देने वाले हैं।

पेट के मर्ज़ में मरने वाला:-

हज़त सुलैमान बिन सरूर रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि जिसको उसके पेट के मर्ज़ ने कत्ल किया उसको कब्र मे अज़ाब न दिया जाएगा।

पेट के कई मर्ज़ हैं। इनमें से जो भी मौत की वजह बन जाए, उसको कब्र में अज़ाब न होगा। हर एक को हदीस का मज़मून शामिल है, जैसे प्यास का मर्ज़, हैज़ा, पेट का दर्द वगैरह।

जुमा की रात या जुमा के दिन मरने वाला:-

हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हु रिवायत करते हैं कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि जो भी मुसलमान जुमे के दिन या जुमे की रात में मरता है, उसको खुदा कब्र के फ़ित्ने से बचाये रखता है।

ये भी पढ़ें: सूरह फील और अबाबील का वाकिआ: अल्लाह ने कैसे काबा की हिफाज़त की? | कुरआन की सच्ची कहानी|

FAQ (सवाल-जवाब)

1. सूरह मुल्क में कितनी आयतें हैं?

जवाब: सूरह मुल्क में कुल 30 आयतें हैं। इसे क़ुरआन की 67वीं सूरह कहा जाता है।Surah Mulk Ki Fazilat | Kabar Ke Azab Se Bachane Wali 30 Aayaton Ki Azeem Surah

2. सूरह मुल्क कब पढ़नी चाहिए?

जवाब: हदीसों में रात को सोने से पहले सूरह मुल्क पढ़ने की फ़ज़ीलत बयान की गई है। इसलिए इसे हर रात पढ़ने की कोशिश करनी चाहिए।Surah Mulk Ki Fazilat | Kabar Ke Azab Se Bachane Wali 30 Aayaton Ki Azeem Surah

3. क्या सूरह मुल्क कब्र के अज़ाब से बचाती है?

जवाब: हदीस में आता है कि सूरह मुल्क अपने पढ़ने वाले के लिए अल्लाह से सिफ़ारिश करती है और कब्र के अज़ाब से बचाने का ज़रिया बनती है।Surah Mulk Ki Fazilat | Kabar Ke Azab Se Bachane Wali 30 Aayaton Ki Azeem Surah

4. क्या रोज़ सूरह मुल्क पढ़ना ज़रूरी है?

जवाब: रोज़ पढ़ना फ़र्ज़ नहीं है, लेकिन इसकी नियमित तिलावत करना बहुत फ़ज़ीलत और सवाब का काम है।Surah Mulk Ki Fazilat | Kabar Ke Azab Se Bachane Wali 30 Aayaton Ki Azeem Surah

5. क्या सूरह मुल्क बिना याद किए पढ़ सकते हैं?

जवाब: जी हाँ, अगर सूरह याद नहीं है तो क़ुरआन देखकर भी पढ़ सकते हैं।Surah Mulk Ki Fazilat | Kabar Ke Azab Se Bachane Wali 30 Aayaton Ki Azeem Surah

6. क्या महिलाएँ भी सूरह मुल्क पढ़ सकती हैं?

जवाब: जी हाँ, महिलाएँ भी इसकी तिलावत कर सकती हैं। हालांकि माहवारी (हैज़) के दौरान क़ुरआन की तिलावत के बारे में अलग-अलग फ़िक़्ही मसाइल हैं, इसलिए अपने मान्य आलिम से मार्गदर्शन लें।Surah Mulk Ki Fazilat | Kabar Ke Azab Se Bachane Wali 30 Aayaton Ki Azeem Surah

7. सूरह मुल्क पढ़ने का सबसे बड़ा फ़ायदा क्या है?

जवाब: हदीस के मुताबिक यह सूरह अपने पढ़ने वाले की सिफ़ारिश करती है और कब्र के अज़ाब से बचाने का ज़रिया बनती है।Surah Mulk Ki Fazilat | Kabar Ke Azab Se Bachane Wali 30 Aayaton Ki Azeem Surah

8. क्या सिर्फ़ जुमे की रात ही सूरह मुल्क पढ़नी चाहिए?

जवाब: नहीं, इसे हर रात पढ़ना बेहतर बताया गया है। जुमे की रात भी पढ़ सकते हैं, लेकिन इसे सिर्फ़ उसी रात तक सीमित नहीं किया गया।Surah Mulk Ki Fazilat | Kabar Ke Azab Se Bachane Wali 30 Aayaton Ki Azeem Surah

9. क्या बच्चों को भी सूरह मुल्क सिखानी चाहिए?

जवाब: जी हाँ, बच्चों को छोटी उम्र से ही सूरह मुल्क याद करवाना और इसकी फ़ज़ीलत बताना एक अच्छी आदत है।Surah Mulk Ki Fazilat | Kabar Ke Azab Se Bachane Wali 30 Aayaton Ki Azeem Surah

10. क्या सूरह मुल्क पढ़ने से अल्लाह की रहमत मिलती है?

जवाब: जी हाँ, क़ुरआन की तिलावत अल्लाह की रहमत, बरकत और सवाब का ज़रिया है। सूरह मुल्क की फ़ज़ीलत भी हदीसों में विशेष रूप से बयान की गई है।Surah Mulk Ki Fazilat | Kabar Ke Azab Se Bachane Wali 30 Aayaton Ki Azeem Surah

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Surah Mulk Ki Fazilat | Kabar Ke Azab Se Bachane Wali 30 Aayaton Ki Azeem Surah

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

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