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क़ियामत के दिन आपके हाथ, पैर और ज़मीन कैसे गवाही देंगे? | हदीस और क़ुरआन की रौशनी में|Qiyamat Ke Din Aapke Haath, Pair Aur Zameen Kaise Gawahi Denge? | Hadees Aur Quran Ki Roshni Mein

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Qiyamat Ke Din Aapke Haath, Pair Aur Zameen Kaise Gawahi Denge?
Qiyamat Ke Din Aapke Haath, Pair Aur Zameen Kaise Gawahi Denge?

Qiyamat Ke Din Aapke Haath, Pair Aur Zameen Kaise Gawahi Denge?

क्या आपने कभी सोचा है कि क़ियामत के दिन इंसान के खिलाफ सबसे बड़े गवाह कौन होंगे? क्या हमारे अपने हाथ, पैर, ज़मीन और जिस्म के दूसरे अंग भी हमारे किए हुए हर अच्छे और बुरे अमल की गवाही देंगे? यह सवाल हर मुसलमान के लिए बेहद अहम है, क्योंकि क़ुरआन और सही हदीस में इस हक़ीक़त को साफ़ तौर पर बयान किया गया है।

इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि क़ियामत के दिन आमालनामा कैसे पेश किया जाएगा, इंसान के मुंह पर मुहर क्यों लगा दी जाएगी, उसके हाथ-पैर और ज़मीन किस तरह उसके आमाल की गवाही देंगे, और उस दिन किसी को अपने गुनाह छिपाने का मौका क्यों नहीं मिलेगा। यह बयान हमें अपने हर अमल का हिसाब याद दिलाता है और आख़िरत की तैयारी की तरफ़ ध्यान दिलाता है।

अगर आप क़ियामत के दिन की सच्चाई, आमालनामे की हक़ीक़त और क़ुरआन व हदीस की रौशनी में आख़िरत का हाल जानना चाहते हैं, तो इस पूरे लेख को आखिर तक ज़रूर पढ़ें। शायद यही नसीहत हमारी ज़िंदगी बदल दे और हमें नेक अमल करने की तौफ़ीक़ मिल जाए।

बदन के अंगों की गवाही

इंसान बड़ा झगड़ालू है और उसकी बहस की तबीयत कियामत के दिन भी अपना रंग दिखायेगी और अल्लाह तआला से भी हुज्जत करेगा।

उस वक़्त गवाहों के जरिए उसकी हुज्जत ख़त्म कर दी जाएगी। खुद इंसान के अंग उसके ख़िलाफ़ गवाही देंगे। जैसा कि सूरह यासीन में फ़रमाया : तर्जुमा :- आज हम उनके मुंहों पर मुहर लगा देंगे और उनके हाथ हमसे कलाम करेंगे और उनके पांव उन कामों की गवाही देंगे।’

हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु ने रिवायत ब्यान फ़रमायी कि एक बार आंहज़रत सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में हम बैठे हुए थे कि उसी बीच अचानक आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम को हँसी आ गयी और हमसे फ़रमाया, क्या तुम जानते हो मैं क्यों हँस रहा हूं? हमने अर्ज़ किया कि अल्लाह और उसको रसूल ही खूब जानते हैं।

फ़रमाया कि क़ियामत के दिन बन्दे जो अल्लाह से सवाल व जवाब करेंगे, उस मंज़र को याद करके मुझे हँसी आ गयी। बन्दा कहेगा कि ऐ रब! क्या आपने मुझे जुल्म से बचाने का एलान फरमाकर मुत्मईन नहीं फ़रमाया है। अल्लाह तआला फ़माएंगे कि हां, मैंने यह वादा किया है।

इसके बाद बन्दा कहेगा कि मैं अपने मामले में किसी की गवाही न मानूंगा। हां, अगर मेरे ही अंदर से कोई गवाही दे दे तो एतबार कर सकता हूं। अल्लाह तआला फ़रमायेंगे कि आज अपने बारे में तेरा खुद गवाह होना काफी है और लिखने वालों की गवाही भी काफी है।

आंहज़रत सैयदे आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि इसके बाद उसके मुंह पर मुहर लगा दी जाएगी और अल्लाह की तरफ से उसके अंगों को हुक्म होगा कि बोलो। चुनांचे उसके अंग उसके अमल को ज़ाहिर कर देंगे।

यह किस्सा देखकर बंदा अपने अंगों से कहेगा कि दूर! दूर! तुम ही को अज़ाब से बचाने के लिए तो मैं बहस कर रह था। (मुस्लिम शरीफ)

हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि आंहज़रत सैयदे आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इन आयत ‘यौ म इज़िन तुहद्दिसु अख्बारहा’ उस दिन ज़मीन अपनी ख़बरें ब्यान कर देगी तिलावत फरमाकर सवाल फ़रमाया, क्या तुम जानते हो ज़मीन के ख़बर देने का क्या मतलब है?

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सहाबा ने अर्ज किया कि अल्लाह और उसके रसूल ही खूब जानते हैं। आंहज़रत सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि ज़मीन के ख़बर देने का मतलब यह है कि वह मर्द व औरत के ख़िलाफ़ उसके आमाल की गवाही देगी जो उसकी पीठ पर किये थे। वह कहेगी कि उसने मुझ पर फ़्लां-फ़्लां दिन फ़्लां-फ़्लां अमल किया था। यह है ज़मीन की ख़बर देना ।(अहमद व तिर्मिज़ी शरीफ)

कियामत के दिन आमालनामे पेश किये जाएंगे। किरामन कातिबीन जो दुनिया में बन्दों के आमाल रिकार्ड करते हैं। आमालनामे की शक्ल में पेश कर दिए जाएंगे।

सूरह जासिया में फ़रमाया 

और उस दिन आप हर फिर्के को देखेंगे कि ख़ौफ़ की वजह से ज़ानू के बल गिरे पड़े होंगे।

हर फ़िर्का अपने नामा-ए-आमाल की तरफ बुलाया जाएगा और उनसे कहा जाएगा कि आज तुमको तुम्हारे कामों का बदला दिया जाएगा। यह हमारा दफ़्तर है जो तुम्हारे मुकाबले में ठीक-ठीक बोल रहा है और हम तुम्हारे आमाल को लिखवा लिया करते थे।

एक हदीस में है कि उसकी रान और गोश्त और हड्डियां उसके अमल की गवाही देंगी। (मुस्लिम शरीफ)

सूरह बनी इस्राईल में फ़रमाया

और हमने हर इंसान का अमल उसके गले का हार कर रखा है और क़ियामत के दिन हम उसका आमालनामा निकाल कर सामने कर देंगे जिसको वह खुला हुआ देख लेगा और उससे कहेंगे पढ़ ले अपना आमालनामा । आज तू खुद अपना हिसाब लेने वाला काफी है।Qiyamat Ke Din Aapke Haath

FAQ – सवाल और जवाब

1. क़ियामत के दिन इंसान के खिलाफ सबसे पहले कौन गवाही देगा?
क़ुरआन और हदीस के मुताबिक क़ियामत के दिन इंसान के अपने हाथ, पैर, चमड़ी और जिस्म के दूसरे अंग उसके आमाल की गवाही देंगे।Qiyamat Ke Din Aapke Haath

2. क्या इंसान उस दिन अपने गुनाहों का इंकार कर सकेगा?
शुरुआत में इंसान बहस और इंकार करने की कोशिश करेगा, लेकिन जब उसके अपने अंग गवाही देंगे तो उसके लिए इंकार की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी।Qiyamat Ke Din Aapke Haath

3. क्या ज़मीन भी इंसान के आमाल की गवाही देगी?
जी हाँ। क़ुरआन और हदीस में बयान है कि जिस ज़मीन पर इंसान ने जो अमल किया होगा, क़ियामत के दिन वही ज़मीन उसकी गवाही देगी।Qiyamat Ke Din Aapke Haath

4. आमालनामा (Book of Deeds) क्या होता है?
आमालनामा वह रिकॉर्ड है जिसमें इंसान के हर छोटे-बड़े अच्छे और बुरे अमल को फ़रिश्ते लिखते रहते हैं। क़ियामत के दिन यही आमालनामा इंसान के सामने पेश किया जाएगा।Qiyamat Ke Din Aapke Haath

5. इंसान के मुंह पर मुहर क्यों लगा दी जाएगी?
जब इंसान अपने गुनाहों का इंकार करेगा, तब अल्लाह तआला उसके मुंह पर मुहर लगा देंगे ताकि उसके हाथ, पैर और दूसरे अंग सच्ची गवाही दे सकें।Qiyamat Ke Din Aapke Haath

6. क्या कोई भी अमल अल्लाह से छिप सकता है?
नहीं। अल्लाह तआला हर चीज़ को जानते हैं। इंसान का हर अमल, चाहे खुला हो या छिपा, सब दर्ज किया जाता है और क़ियामत के दिन उसका हिसाब होगा।Qiyamat Ke Din Aapke Haath

7. इस बयान से हमें क्या सबक मिलता है?
हमें हर वक्त अपने आमाल का ख़याल रखना चाहिए, गुनाहों से बचना चाहिए, तौबा करते रहना चाहिए और ऐसे नेक काम करने चाहिए जो आख़िरत में हमारे लिए नजात का ज़रिया बनें।Qiyamat Ke Din Aapke Haath

8. क़ियामत के दिन कामयाब कौन होगा?
वही इंसान कामयाब होगा जो ईमान के साथ नेक अमल करेगा, अल्लाह की फ़रमांबरदारी करेगा, गुनाहों से बचेगा और अपनी ज़िंदगी क़ुरआन और सुन्नत के मुताबिक गुज़ारेगा।Qiyamat Ke Din Aapke Haath

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Qiyamat Ke Din Aapke Haath

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Qiyamat Ke Din Aapke Haath

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Qiyamat Ke Din Aapke Haath

जज़ाकल्लाह खैर….

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