Jaisa Booge Waisa Hi Paaoge
कभी-कभी जिंदगी में इंसान को ऐसे हालात का सामना करना पड़ता है, जहां सही और गलत के बीच फैसला करना बहुत मुश्किल हो जाता है। लेकिन इंसान की नीयत, उसके कर्म और उसकी नजर की पाकीज़गी का असर उसकी जिंदगी पर जरूर पड़ता है।
आज की यह कहानी एक नेक और शरीफ बाप और उसकी बेटी की है। यह कहानी हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है कि हमें अपनी नजरों की हिफाजत करनी चाहिए और किसी गैर औरत को बुरी नजर से नहीं देखना चाहिए। क्योंकि हम जैसा करते हैं, उसका असर किसी न किसी रूप में हमारी जिंदगी पर जरूर पड़ सकता है।
आइए, इस दिल छू लेने वाली कहानी को पूरा पढ़ते हैं और जानते हैं कि आखिर उस नेक बाप की नेकी का उसकी बेटी की जिंदगी पर क्या असर हुआ।
एक आदमी जिसका नाम रहीम था जो बोहोत नेक और शरीफ इंसान था जिसने कभी अपनी जिंदगी में किसी गैर औरत को बुरी निगाह से नहीं देखा उस आदमी के घर की हालत बोहोत खराब हो गई थी नौबत यहां तक पहुंच गई के घर में फाके हो गए उस आदमी की एक जवान बेटी थी,
जब फाके हद से बढ़ गए तो वो लड़की अपने छोटे बहन भाई की हालत देखकर बोहोत परेशान होने लगी उसके दिमाग में तरह तरह के सवाल उठने लगे उसने सोचा के क्यूं ना मैं घर से निकल कर किसी काम की तलाश करूं जिससे मैं अपने घर वालों का पेट भर सकूं।
उस लड़की ने ये सोच कर घर से बाहर अपने कदम निकाल लिए और काम की तलाश में बाजार में निकल पड़ी कभी किसी के घर में काम मांगने गई तो कभी किसी की दुकान में मगर किसी ने उसे काम नही दिया वो थक हार कर अपने घर वापस लौट आई ,
कई दिन तक रोज वो ऐसे ही काम की तलाश में घर से बाहर जाती और शाम को थक हार के घर लौट आती जब कहीं भी उसे कोई काम नहीं मिला तो वो लड़की गलत कदम उठाने पर मजबूर हो गई, दिल में इरादा करके घर से निकली कि आज मैं अपना शरीर बेचूगी और कुछ खाना खरीदूगी,
वो लड़की घर से बाजार जा पहुंची जिस्म बेचने लड़की वहां गई और लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करना शुरू कर दिया, वो लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करने की कोशिश करती रही लेकिन किसी ने भी उस पर ध्यान नहीं दिया।Jaisa Bo’oge Waisa Hi Paaoge
ध्यान तो दूर किसी ने उसकी ओर निगाह तक उठा कर नहीं देखा, लोग आते और उसकी ओर नज़र उठाए बिना निकल जाते इसी तरह खड़े खड़े लड़की को शाम हो गई, वो परेशान होकर घर की ओर कदम बढ़ाने लग गई ! जब घर पहुंची तो अपने वालिद को परेशानी में देखा दरवाज़े पर बाप ने बेटी को देखा और पुछा “बेटी कहाँ गई थी?”
लड़की अपने वालिद की बात सुन कर उनके पेरो में गिर कर रोने लगी और माफ़ी मांगने लगी और फिर रो रो कर सारा माजरा बयान किया कि अब्बा हुजूर मुझसे अपने भूख से बिलखते हुए भाई बहन की हालत देखी नहीं गई और मैं मजबूर होकर जि”स्म बे”चने गयी थी लेकिन एक भी आदमी ने भी मेरी तरफ़ नज़र तक उठाकर नहीं देखा !
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पूरी बात सुनने के बाद बाप ने अपनी बेटी से कहा कि बेटा तुम्हारे बाबा ने आज तक कभी किसी गैर औरत को आंख उठाकर नहीं देखा तो यह कैसे हो सकता था कि कोई तुम्हे नज़र उठाकर देखता,
इसलिए अपनी गन्दी निगाह किसी औरत पर मत डालो, क्योंकि नज़र गर्म बीज होता है जैसा बोओगे कल को वैसा ही पाओगे।आज आप अपने आप को खबरदार करेंगे तो कल तुम्हारी औलाद भी महफूज़ रहेगी।Jaisa Bo’oge Waisa Hi Paaoge
❓ FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल 1: इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
जवाब: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि इंसान को अपनी नज़र और नीयत की हिफाज़त करनी चाहिए और हर हाल में गलत काम से बचने की कोशिश करनी चाहिए।Jaisa Bo’oge Waisa Hi Paaoge
सवाल 2: इस्लाम में बुरी नज़र के बारे में क्या शिक्षा दी गई है?
जवाब: इस्लाम इंसान को अपनी निगाहों की हिफाज़त करने और गैर-महरम को गलत नजर से देखने से बचने की शिक्षा देता है।Jaisa Bo’oge Waisa Hi Paaoge
सवाल 3: क्या मुश्किल हालात में भी इंसान को हराम काम से बचना चाहिए?
जवाब: जी हां। मुश्किल हालात बहुत कठिन हो सकते हैं, लेकिन मुसलमान को हलाल रास्ते की तलाश करते हुए अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए।Jaisa Bo’oge Waisa Hi Paaoge
सवाल 4: नज़र की हिफाज़त क्यों जरूरी है?
जवाब: नज़र की हिफाज़त इंसान की पाकीज़गी, शर्म-ओ-हया और दिल की सफाई के लिए जरूरी है। इसलिए किसी को गलत नज़र से देखने से बचना चाहिए।Jaisa Bo’oge Waisa Hi Paaoge
सवाल 5: क्या इस कहानी को दूसरों तक पहुंचाना चाहिए?
जवाब: अगर किसी अच्छी और सही इस्लामी सीख को दूसरों तक पहुंचाने से उन्हें फायदा हो सकता है, तो उसे साझा करना नेक काम हो सकता है। लेकिन किसी कहानी को धार्मिक हदीस या प्रमाणित वाकिया बताने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांचनी चाहिए।Jaisa Bo’oge Waisa Hi Paaoge
सवाल 6: “जैसा बोओगे वैसा ही पाओगे” का क्या मतलब है?
जवाब: इसका मतलब है कि इंसान के कर्मों का असर उसकी जिंदगी पर पड़ सकता है। इसलिए हमें अच्छे काम करने और बुरे कामों से बचने की कोशिश करनी चाहिए।Jaisa Bo’oge Waisa Hi Paaoge
सवाल 7: इस कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
जवाब: इस कहानी का मुख्य संदेश है कि अपनी निगाह, नीयत और चरित्र की हिफाज़त करें और मुश्किल समय में भी गलत रास्ते के बजाय सही और हलाल रास्ता तलाश करें।Jaisa Bo’oge Waisa Hi Paaoge
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Jaisa Bo’oge Waisa Hi Paaoge
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Jaisa Bo’oge Waisa Hi Paaoge
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Jaisa Booge Waisa Hi Paaoge
जज़ाकल्लाह खैर….
