Durood Sharif Ki Aisi Barkat!
दुरूद शरीफ ऐसी अज़ीम इबादत है जिसके ज़रिए हम अपने प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ पर सलाम और दुरूद भेजते हैं। इसकी फ़ज़ीलत और बरकत के बारे में बुज़ुर्गाने दीन ने बहुत से ईमान-अफ़रोज़ वाक़िआत बयान किए हैं।
आज का यह वाक़िया भी बड़ा हैरतअंगेज़ और दिल को छू लेने वाला है। एक नेक शख़्स 3000 दीनार के भारी कर्ज़ में मुब्तला था और उसके पास कर्ज़ अदा करने का कोई ज़रिया नज़र नहीं आ रहा था। उसने मायूसी के बजाय अल्लाह तआला की बारगाह में आजिज़ी के साथ दुआ की और दुरूद शरीफ पढ़ता रहा।
फिर उसके साथ ऐसे वाक़िआत पेश आए जिनसे उसकी परेशानी दूर होती चली गई और कर्ज़ अदा होने के साथ-साथ उसके घर और कारोबार के लिए भी आसानी पैदा हो गई। आइए इस ईमान-अफ़रोज़ वाक़िए को तफ़सील से पढ़ते हैं और जानते हैं कि दुरूद शरीफ की बरकत से इस नेक शख़्स की मुश्किल किस तरह आसान हुई।
एक नेक आदमी पर तीन हज़ार दीनार यानी 3000 सोने के सिक्के कर्ज थे, कर्ज़ ख़्वाह ने जब क़र्ज़ की वापसी का मुतालबा किया तो उस नेक शख़्स ने कहा कि फिलहाल तो मैं मजबूर हूं, मेरे पास पैसे नहीं हैं।
कर्ज़ ख़्वाह ने उस नेक शख़्स के खिलाफ काज़ी के यहां दावा दाइर कर दिया, काज़ी साहिब ने उस मरूज़ को बुलवाया और उस की बात सुनने के बाद उसे एक महीने की मोहलत दी और ताकीद की, कि इस मुद्दत में ज़रूर कर्ज़ की वापसी का इन्तिज़ाम कर लो।
वोह नेक शख़्स बहुत परेशान था और सोचने लगा कि क्या करूं? बहर हाल ! वोह किसी जगह बैठ कर अल्लाह पाक की बारगाह में आजिज़ी व इन्किसार के साथ मुतवज्जेह हुवा और साथ ही हुज़ूर नबिय्ये रहमत सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम पर दुरूदे पाक पढ़ना शुरू कर दिया, जब कुछ दिन गुज़र गए तो उसे रात को एक ख़्वाब दिखाई दिया, कोई कहने वाला कहता है: परेशान मत हो !
तुम्हारा कर्ज़ अदा हो जाएगा। तू अली बिन ईसा वज़ीरे सल्तनत के पास जा और जा कर उसे कह दे कि क़र्ज़ा अदा करने के लिये मुझे तीन हज़ार दीनार दे दे। वोह नेक आदमी जब बेदार हुवा तो बड़ा खुश था लेकिन फिर येह ख़याल भी आया कि मेरे पास तो अपने ख़्वाब को सच्चा साबित करने की कोई निशानी नहीं है, अगर वज़ीर साहिब ने दलील या कोई निशानी तलब की तो फिर मेरा क्या होगा ?
उस नेक आदमी का कहना है कि येही सोचते हुए दूसरी रात आ गई, जब मैं सोया तो मेरी सोई हुई किस्मत जाग उठी, मुझे आकाए दो जहां, रहमते दो आलमिय्यां सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का दीदार नसीब हुवा, हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने भी अली बिन ईसा वज़ीर के पास जाने का इरशाद फ़रमाया।
जब आंख खुली तो खुशी की इन्तिहा न थी, तीसरी रात फिर उम्मत के वाली नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम तशरीफ लाते हैं और फिर हुक्म फ़रमाते हैं कि वज़ीर अली बिन ईसा के पास जाओ ! मैं ने अर्ज किया : या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम! कोई निशानी या दलील इरशाद फ़रमा दीजिये जो मैं उस वज़ीर को बताऊं ।Durood Sharif Ki Aisi Barkat!
येह सुन कर मंगतों की झोलियां भरने वाले दाता, सखावत के दरिया बहाने वाले आका सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि अगर वज़ीर तुझ से कोई निशानी पूछे तो कह देना कि तुम नमाज़े फज्र के बाद किसी के साथ बात करने से पहले रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की ज़ात पर पांच हज़ार (5000) बार दुरूदे पाक पढ़ते हो, जिसे अल्लाह पाक और किरामन कातिबीन के सिवा कोई नहीं जानता।
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येह फ़रमा कर सय्यिदे दो आलम, नूरे मुजस्सम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम तशरीफ़ ले गए, मैं बेदार हुवा,
नमाज़े फज्र के बाद मस्जिद से बाहर कदम रखा, गौर किया तो मालूम हुवा कि आज मोहलत को मुकम्मल एक महीना गुज़र चुका था।Durood Sharif Ki Aisi Barkat!
मैं वज़ीर साहिब की रिहाइश गाह पर पहुंचा और वज़ीर साहिब से सारा क़िस्सा कह सुनाया, जब वज़ीर साहिब ने कोई निशानी मांगी और मैं ने आका करीम,रसूले अज़ीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का इरशाद सुनाया तो वज़ीर साहिब खुशी व मसर्रत से झूम उठे, वोह घर के अन्दर गए और नव हज़ार (9000) दीनार ले कर आ गए, उन में से तीन हज़ार (3000) मुझे दिये और कहा : येह तुम्हारे कर्ज़ की अदाएगी के लिये हैं, फिर तीन हज़ार और दिये और कहा : Donate Now
येह तुम्हारे बाल बच्चों के अख़्राजात के लिये हैं, फिर तीन हज़ार और दिये और कहा : येह तुम्हारे कारोबार के लिये हैं। जब मुझे रुख़्सत करने लगे तो क़सम दे कर कहा : ऐ भाई ! तू मेरा दीनी भाई है, येह मोहब्बत वाला तअल्लुक़ न तोड़ना और जब भी कोई काम हो, किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो मेरे पास आ जाना, मैं तुम्हारा मस्अला हल कर दिया करूंगा।
उस शख़्स का बयान है कि मैं वोह रक़म ले कर सीधा काज़ी साहिब की अदालत में पहुंच गया और जब फ़रीकैन का बुलावा हुवा तो मैं आगे बढ़ा और मैं ने तीन हज़ार (3000) दीनार काज़ी साहिब के सामने रख दिये । अब क़ाज़ी साहिब ने सुवाल कर दिया कि तू तो मुफ़्लिस और कंगाल था फिर तू येह इतनी सारी रकम कहां से ले कर आया है?
मैं ने सारा वाक़िआ बयान कर दिया, काज़ी साहिब ने येह सुना तो खामोश हो गए, फिर उठ कर अपने घर गए और घर से तीन हज़ार दीनार ले कर आ गए और कहने लगे: मैं भी उसी आकाए मदीना, करारे कल्बो सीना सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के दर का गुलाम हूं, तुम्हारा येह तमाम क़र्ज़ा मैं अपने पास से अदा करता हूं।Durood Sharif Ki Aisi Barkat!
जब क़र्ज़ ख़्वाह ने येह मुआमला देखा तो वोह कहने लगा : मैं अल्लाह पाक और उस के रसूले अज़ीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की रिज़ा के लिये इस बन्दे का क़र्ज़ मुआफ करता हूं। येह देख कर उस मरूज़ ताजिर ने काज़ी साहिब से कहा : जनाब आप का बहुत-बहुत शुक्रिया।
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आप अपनी रकम संभाल लीजिये, अब मुझे इस की ज़रूरत नहीं रही। तो क़ाज़ी साहिब कहने लगे : मैं अल्लाह और उस के प्यारे रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की महब्बत में जो दीनार लाया हूं वोह वापस नहीं लूंगा, येह दीनार आप के हैं और आप इन्हें ले जाएं।
वोह साहिब कहते हैं : मैं जो पहले कर्जे में जकड़ा हुवा था, अब बारह हज़ार (12000) दीनार ले कर घर आ गया, मेरा क़र्ज़ा भी मुआफ़ हो गया, घर के लिये अखराजात भी मिल गए और कारोबार करने के लिये भी अच्छी खासी रकम मिल गई। येह सारी बरकतें दुरूदे पाक पढ़ने की वजह से ज़ाहिर हुई ।
FAQ – दुरूद शरीफ की बरकत और 3000 दीनार के कर्ज़ का वाक़िया
सवाल 1: इस वाक़िए में नेक शख़्स पर कितना कर्ज़ था?
जवाब: उस नेक शख़्स पर 3000 दीनार का कर्ज़ था और उसके पास उस वक़्त कर्ज़ अदा करने के लिए रकम मौजूद नहीं थी।Durood Sharif Ki Aisi Barkat!
सवाल 2: कर्ज़ की परेशानी में उस नेक शख़्स ने क्या किया?
जवाब: उसने मायूस होने के बजाय अल्लाह तआला की बारगाह में आजिज़ी के साथ दुआ की और दुरूद शरीफ पढ़ता रहा।Durood Sharif Ki Aisi Barkat!
सवाल 3: उसे वज़ीर के पास जाने का कैसे पता चला?
जवाब: वाक़िए के मुताबिक़ उसे ख़्वाब में वज़ीर अली बिन ईसा के पास जाने का इशारा मिला। बाद में उसने हुज़ूर ﷺ की ज़ियारत का भी ख़्वाब बयान किया।Durood Sharif Ki Aisi Barkat!
सवाल 4: वज़ीर ने उस नेक शख़्स की कितनी मदद की?
जवाब: वज़ीर ने उसे 9000 दीनार दिए—3000 दीनार कर्ज़ अदा करने के लिए, 3000 घर के अख़राजात के लिए और 3000 कारोबार के लिए।Durood Sharif Ki Aisi Barkat!
सवाल 5: काज़ी साहिब ने क्या किया?
जवाब: जब काज़ी साहिब को पूरा वाक़िया मालूम हुआ तो उन्होंने भी अपनी तरफ़ से 3000 दीनार देने की पेशकश की।Durood Sharif Ki Aisi Barkat!
सवाल 6: आखिर कर्ज़ देने वाले ने क्या किया?
जवाब: कर्ज़ख़्वाह ने यह देखकर कि अल्लाह तआला ने उस नेक शख़्स के लिए आसानी पैदा कर दी है, अल्लाह की रज़ा के लिए उसका कर्ज़ माफ़ कर दिया।Durood Sharif Ki Aisi Barkat!
सवाल 7: क्या दुरूद शरीफ पढ़ने से कर्ज़ ज़रूर माफ़ हो जाता है?
जवाब: दुरूद शरीफ बहुत बड़ी इबादत है और इसकी फ़ज़ीलत बयान हुई है, लेकिन किसी खास रकम का कर्ज़ सिर्फ़ दुरूद पढ़ने से ज़रूर माफ़ होने की गारंटी देना सही नहीं। बंदे को दुआ के साथ हलाल तरीके से मेहनत करके कर्ज़ अदा करने की कोशिश भी करनी चाहिए।Durood Sharif Ki Aisi Barkat!
सवाल 8: कर्ज़ की परेशानी में क्या सिर्फ़ दुआ करनी चाहिए?
जवाब: दुआ के साथ अमली कोशिश भी ज़रूरी है। अल्लाह पर भरोसा रखते हुए हलाल रोज़ी तलाश करें, फिज़ूलखर्ची से बचें और कर्ज़ अदा करने की पूरी कोशिश करें।Durood Sharif Ki Aisi Barkat!
सवाल 9: इस वाक़िए से हमें क्या सबक मिलता है?
जवाब: मुश्किल हालात में मायूस नहीं होना चाहिए। अल्लाह तआला की बारगाह में दुआ, दुरूद शरीफ और नेक अमल के साथ अपनी परेशानी का हल तलाश करना चाहिए और दूसरों की मदद करने का जज़्बा भी रखना चाहिए।Durood Sharif Ki Aisi Barkat!
सवाल 10: दुरूद शरीफ क्यों पढ़ना चाहिए?
जवाब: दुरूद शरीफ पढ़ना हुज़ूर ﷺ से मोहब्बत का इज़हार है और एक अज़ीम इबादत है। मुसलमान को अपनी ज़िंदगी में कसरत से दुरूद शरीफ पढ़ने की कोशिश करनी चाहिए।Durood Sharif Ki Aisi Barkat!
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Durood Sharif Ki Aisi Barkat!
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Durood Sharif Ki Aisi Barkat!
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Durood Sharif Ki Aisi Barkat!
खुदा हाफिज़…..
