21/07/2026
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आयतुल कुर्सी की फ़ज़ीलत: 10 हैरतअंगेज़ फ़ज़ाइल और बरकतें | कुरआन व हदीस की रोशनी में |Ayatul Kursi Ki Fazilat: 10 Hairatangez Fazail Aur Barkatein | Quran Aur Hadith Ki Roshni Mein powerful story

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Ayatul Kursi Ki Fazilat: 10 Hairatangez Fazail Aur Barkatein | Quran Aur Hadith Ki Roshni Mein
Ayatul Kursi Ki Fazilat: 10 Hairatangez Fazail

Ayatul Kursi Ki Fazilat: 10 Hairatangez Fazail

आयतुल कुर्सी कुरआन-ए-करीम की सबसे अज़ीम और फ़ज़ीलत वाली आयतों में से एक है। इसमें अल्लाह तआला की बड़ाई, उसकी कुदरत, उसकी हिफाज़त और उसकी बेपनाह रहमत का बयान है। सहीह अहादीस में आयतुल कुर्सी की तिलावत की बहुत फ़ज़ीलतें बयान हुई हैं। इसे पढ़ने वाला अल्लाह की हिफाज़त में रहता है, उसके घर में बरकत आती है और शैतान से हिफाज़त की उम्मीद होती है।

इस आर्टिकल में हम कुरआन और हदीस की रोशनी में आयतुल कुर्सी की फ़ज़ीलत, उसकी अहमियत, उसे पढ़ने के मुबारक मौके और उससे मिलने वाली बरकतों के बारे में आसान भाषा में जानेंगे। अगर आप चाहते हैं कि अल्लाह तआला की रहमत, हिफाज़त और बरकत आपकी ज़िंदगी में शामिल हो, तो इस लेख को पूरा ज़रूर पढ़ें। इंशाअल्लाह, यह जानकारी हर मुसलमान के लिए फ़ायदेमंद साबित होगी।

आयतुल कुर्सी की फ़ज़ीलत।

एक शख़्स ने अर्ज़ किया कि या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलैही वसल्लम मुझे ऐसी चीज बताएं कि मुझे उससे फायदा हो आप रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने फरमाया आयतुल कुर्सी पढ़ा करो,

अल्लाह तेरी और तेरी औलाद की निगरानी करेगा और निगाह रखेगा तेरे घर पर यहां तक के तेरे पड़ोसी और उनके घर भी अल्लाह की हिफाज़त में होंगे।

हुजूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम इरशाद फ़रमाया है कि जो शख़्स हर फ़र्ज़ नमाज के बाद एक बार आयतुल कुर्सी हमेशा पढ़ता रहा तो जन्नत उस पर वाजिब कर दी गई जन्नत और उसके दरमियान सिवाए मौत के कोई चीज़ ना हाेगी।

एक शख़्स ने नबी-ए-करीम सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम से अर्ज़ किया कि या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मेरे घर में खैरो बरकत नहीं आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि तुम आयतुल कुर्सी क्यों नहीं पढ़ते।

आयतुल कुर्सी के बारे में और भी कई हादीशे मुबारक है जिन से ज़ाहिर होता है कि इसमें बहुत सी करामात और बरकत हैं।

एक बार हजरत अबू हुरैरा रजिअल्लाह ताला अन्हु फरमाते हैं की हुजूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने सदका फितर की हिफाजत का काम मेरे सुपूर्द फरमाया एक रात एक आने वाला आया और गला भरने लगा मैंने उसको पकड़ लिया।

और उससे कहा कि मैं तुझे हुजूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम की खिदमत में पेश करूंगा तो वह कहने लगा कि मैं मोहताज और अयालदार हूं सख़्त ज़रूरत मंद हूं इसलिए मैंने उसे छोड़ दिया जब सुबह हुई तो हुजूर नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि अबु हुरेरा तुम्हारे रात के कैदी का क्या हुआ

मैंने अर्ज़ किया कि या हुजूर नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम उसने मुझे सख्त जरुरत और अयालदारी का वास्ता दिया था इसलिए मुझे उस पर रहम आ गया और मैंने उसे छोड़ दिया हुज़ूर नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि उसने झूठ बोला वह फिर आएगा!

इस पर मुझे यक़ीन हो गया कि वह जरूर आएगा इसलिए कि यह बात हुज़ूर नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने इर्शाद फरमाई है मैं रात के वक्त उस का इंतजार करने लगा कि उसी वक्त वह आ गया जिस वक्त वह कल आया था और गला भरने लगा मैंने उसको पकड़ लिया और कहा कि तुझे हुजूर नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की खिदमत में पेश करूंगा वह कहने लगा कि मुझे छोड़ दो मैं मोहताज और अयालदार हू अब नहीं आऊंगा।

मुझे फिर उस पर रहम आ गया और मैंने उसे छोड़ दिया जब सुबह हुई तो हुजूर नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया अबू हुरैरा तुम्हारा कैदी का क्या हुआ मैंने अर्ज़ किया कि या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम उस पर आज फिर मुझे रहम आ गया और मैंने उसको छोड़ दिया।

हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने फरमाया कि उसने तुमसे झूठ बोला है वह फिर आएगा! मैं उसके इंतजार में था और वह फिर आ गया और गलला भरना शुरू कर दिया बस मैंने उसे पकड़ लिया और कहा कि आज तो मैं तुम्हें नहीं छोडूंगा और हुजूर नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के पास तुम्हें जरूरी लेकर जाऊंगा वह बोला तुम मुझे छोड़ दो मैं तुम्हें ऐसे चंद कलमात सिखाता हूं जिनके पढ़ने से अल्लाह ताला तुम्हें नफा देगा।

वह यह है कि जब तुम सोने लगो तो आयतुल कुर्सी पढ़कर सोया करो उससे अल्लाह ताला तुम्हारी हिफाजत फरमाएगा सुबह तक यह आयत तुम्हारी अल्लाह ताला की तरफ से निगहबान होगी और शैतान तुम्हारे नजदीक नहीं आ सकेगा चुनांचे मैंने उसे छोड़ दिया जब सुबह हुजूर नबी-ए-करीम सल्ललाहु ताआला अलैहि वसल्लम की खिदमत में हाजिर हुआ तो हुजूर नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि अबू हुरैरा तुम्हारे कैदी का क्या हुआ मैंने अर्ज़ किया किया रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम उसने मुझे चंद कलमात सिखाएं जिनसे अल्लाह ताला नफा देगा।Ayatul Kursi Ki Fazilat: 10 Hairatangez Fazail

हुज़ूर सरवरे कायनात रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने फरमाया कि अबू हुरैरा उसने आयतुल कुर्सी पढ़कर सोने वाली बात सच कहीं हालांकि वह खुद बड़ा झूठा है क्या तुम जानते हो कि वह 3 रात तक रोजाना आने वाला चोर कौन है मैंने अर्ज़ किया हुजूर नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम मैं नहीं जानता हूं रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने फरमाया कि वह शैतान था ।

हजरत अली रज़ियल्लाहु अन्हु का इरशाद है कि हुज़ूर नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि जिस घर में अतुल कुर्सी पढ़ी जाती है शैतान भाग जाता है और 3 दिन तक उस घर में दाखिल नहीं होता और 40 दिन तक उस मकान पर सेहेर का असर नहीं हो सकता हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने फरमाया कि जो कोई रात को सोते वक्त आयतुल कुर्सी पढ़ता है अल्लाह तआला उसकी हिफाजत के लिए दो फरिश्ते मुकर्रर फरमा देता है जो सुबह तक उसकी हिफाज़त करते हैं,

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बुजुरगाने दिन ने भी आयतुल कुर्सी को अपने खास बरकात और असरात के एतबार से निहायत अफजलो अशरफ करार दिया है

हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी रहमतुल्लाह अलेह फरमाते हैं कि फतावा जहरीया में तहरीर है कि हुजूर नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने फरमाया है कि जो शख़्स आयतुल कुर्सी पढ़कर घर से निकले तो अल्लाह ताला 70000 मलाइका को हुक्म देता है कि उसके वापस आने तक उसके लिए मगफिरत की दुआ करते रहो और जो शख्स आयतुल कुर्सी पढ़कर घर में दाखिल होगा ।

उसके घर से अल्लाह ताला उसके घर से मुफलिशी को दूर कर फरमा देंगे आप रहमतुल्लाह अलेह ने मजिद फरमाया कि मैने जामयुल ईकायात में लिखा हुआ देखा है कि बगदाद में एक दरवेश का एक रात का जिक्र है कि 10 चोर उसके घर में दाखिल हुए वह दरवेश आयतुल कुर्सी पढ़कर कहीं गया हुआ था वह चोर सब के सब अंधे हो गए जब दरवेश घर आया तो उन लोगों को देखकर पूछा कि तुम लोग कौन हो और क्यों आए हो उन्होंने कहा कि हम चोर हैं चोरी करने आए थे ।Ayatul Kursi Ki Fazilat: 10 Hairatangez Fazail

आप हमारे लिए दुआ फरमाइए की हमारी बिनाई वापस आ जाए हम इस काम से तौबा करते हैं और आपके सामने इस्लाम कुबूल करते हैं वह दरवेश मुस्कुराए और कहा के अल्लाह ताला की हुकुम से आंखें खोलो सबकी आंखें खुल गई और वह बीना हो गए सबने उसी वक्त तोबा की और मुसलमान हो गए ।

हजरत बाबा फरीद गंज शकर रहमतुल्लाह अलेह आयतुल कुर्सी की फजीलत बयान करते हुए ऐसा फरमाया है कि जिस दिन आए तल कुर्सी नाजिल हुई तो 70000 फरिश्ते उसके इर्द-गिर्द थे,

हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम हुजूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की खिदमत में हाजिर हुए और कहा लीजिए हुजूर नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने बड़े एजाजो इकराम से उसे ले लिया हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम ने कहा की या अल्लाह के रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम अल्लाह ताला इरशाद फरमाते हैं कि जो बंदा आयतुल कुर्सी पढ़ेगा ,

हर हर्फ के बदले हजार हजार बरस का सवाब उसके नामा ए आमाल में लिखा जाएगा 70000 फरिश्ते जो कुर्सी के इर्द गिर्द हैं आयतुल कुर्सी का सवाब उसके नाम लिखते हैं और वह शख्स अल्लाह ताला के मुकरबीन में शामिल किया जाता है।

हज़रत शेख अब्दुल वहाब सदरानी रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं कि जो शख्स दिन-रात 1000 मर्तबा आयतुल कुर्सी 40 दिनों तक पढ़ेगा परवरदिगार की कसम इस आयत का रूहानी असर उसको दिखाई देगा मलाइका उसकी जियारत को आएंगे और उसके तमाम मकासिद और दिलि मुरादें पूरी होगी।Ayatul Kursi Ki Fazilat: 10 Hairatangez Fazail

दोस्तों जिंदगी का तजुर्बा ये बताता है कि अल्लाह ताला की मदद जैसी कोई मदद नहीं मुश्किल से मुश्किल सूरते हाल अचानक अपना रुख बदलने लगती है गेब से असबाब पैदा हो जाते हैं कभी कभी दिमाग में कोई ऐसी बात आ जाती है कि आदमी महसूस करता है कि ये इसके लिए आलम ए गेब से रहनुमाई हुई है।

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बाजवकात ऐसी जगह से मदद पहुंचती है जो आदमी के तस्वुर में भी नहीं होता लेकिन यह सब उसी वक्त मुमकिन है कि जब आपको अल्लाह तबारक व तआला पर कामिल भरोसा दुनियावी कामों के लिए दुनियावि अस्बाब इख्तियार करना और जायज तरीकों से हर मुमकिन कोशिश करना जरूरी है बल्कि ऐसा करना इस्लामी नुक्ता ए नजर से फ़र्ज़ है।Ayatul Kursi Ki Fazilat: 10 Hairatangez Fazail

लेकिन कोशिश का अंजाम अल्लाह तआला के हाथ में है वह चाहे तो बजवाकत मामूली कोशिश भी फायदेमंद साबित होती है और अगर वो ना चाहे तो इंतहाई जद्दोजहद भी बेकार जाती है इसलिए हर हाल में अल्लाह तबारक व तआला से मदद का तलबगार रहना चाहिए क्योंकि अल्लाह तआला हकीकी कार साज है।

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मेरे प्यारे दोस्तों खुद सोचें कि यह तो एक आयत है जिसके पढ़ने का इतना अजम है तो सोचे कि पूरा कुरान पढ़ने की कितनी फजीलत होगी तो दोस्तों कुरआन को पढ़िए समझीए है उस पर अमल कीजिए यही कामयाबी है

आपको पढ़ने समझने में दिक्कत हो तो उलमा ए किराम से राब्ता कीजिए और उससे दिल लगाकर सीखिए क्योंकि कब्र की उन शक्तियों और आखिरात के उन माराहिल में कोई दुनियावी में डिग्रियां काम नहीं आएगी अगर कोई चीज काम आएगी तो वह कुरान का सीखना सिखाना और उस पर अमल पैरा होना है।

❓FAQ – आयतुल कुर्सी की फ़ज़ीलत (सवाल व जवाब)

1. आयतुल कुर्सी किस सूरह में है?

जवाब: आयतुल कुर्सी सूरह अल-बक़रह की आयत नंबर 255 है।Ayatul Kursi Ki Fazilat: 10 Hairatangez Fazail

2. आयतुल कुर्सी पढ़ने की सबसे बड़ी फ़ज़ीलत क्या है?

जवाब: सहीह हदीस के अनुसार, जो व्यक्ति हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ता है, उसके लिए जन्नत में दाख़िल होने से मौत के अलावा कोई रुकावट नहीं रहती।Ayatul Kursi Ki Fazilat: 10 Hairatangez Fazail

3. क्या रात को सोने से पहले आयतुल कुर्सी पढ़नी चाहिए?

जवाब: जी हाँ। सहीह हदीस में है कि सोने से पहले आयतुल कुर्सी पढ़ने वाले की अल्लाह तआला सुबह तक हिफाज़त फ़रमाते हैं और शैतान उसके क़रीब नहीं आता।

4. क्या आयतुल कुर्सी घर की हिफाज़त का ज़रिया है?

जवाब: अहादीस में आयतुल कुर्सी की तिलावत की बड़ी फ़ज़ीलत बयान हुई है। मुसलमान अल्लाह से हिफाज़त की दुआ करते हुए इसकी तिलावत करते हैं और अल्लाह पर भरोसा रखते हैं।Ayatul Kursi Ki Fazilat: 10 Hairatangez Fazail

5. आयतुल कुर्सी कब-कब पढ़नी चाहिए?

जवाब: फ़र्ज़ नमाज़ के बाद, सोने से पहले, सुबह-शाम के अज़कार में और दूसरे मुबारक मौक़ों पर इसकी तिलावत करना फ़ायदेमंद बताया गया है।Ayatul Kursi Ki Fazilat: 10 Hairatangez Fazail

6. क्या आयतुल कुर्सी बच्चों के लिए भी पढ़ी जा सकती है?

जवाब: जी हाँ। माता-पिता अपने बच्चों पर दुआ और बरकत की नीयत से आयतुल कुर्सी पढ़ सकते हैं।

7. क्या आयतुल कुर्सी मुसीबत और परेशानी के समय पढ़नी चाहिए?

जवाब: मुसलमान हर हाल में अल्लाह से मदद मांगता है। आयतुल कुर्सी की तिलावत भी बरकत और अल्लाह की हिफाज़त की उम्मीद के साथ की जाती है।Ayatul Kursi Ki Fazilat: 10 Hairatangez Fazail

8. क्या आयतुल कुर्सी सिर्फ़ अरबी में पढ़ना ज़रूरी है?

जवाब: तिलावत अरबी में की जाती है। साथ ही उसका तर्जुमा और मतलब समझना भी बहुत फ़ायदेमंद है ताकि उस पर अमल किया जा सके।Ayatul Kursi Ki Fazilat: 10 Hairatangez Fazail

9. क्या आयतुल कुर्सी रोज़ पढ़नी चाहिए?

जवाब: जी हाँ। इसे रोज़ाना पढ़ने की आदत बनाना एक अच्छा अमल है, ख़ास तौर पर फ़र्ज़ नमाज़ों के बाद और सोने से पहले।Ayatul Kursi Ki Fazilat: 10 Hairatangez Fazail

10. आयतुल कुर्सी हमें क्या सबक़ देती है?

जवाब: आयतुल कुर्सी हमें अल्लाह तआला की अज़मत, उसकी कुदरत, उसके इल्म, उसकी हिफाज़त और उसी पर पूरा भरोसा (तवक्कुल) रखने का सबक़ देती है।

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

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