20/08/2026
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दुआ माँगने की फ़ज़ीलत: कुरआन और सहीह हदीस की रोशनी में हर मुसलमान को ज़रूर जानना चाहिए |Dua Mangne Ki Fazilat: Quran Aur Sahih Hadith Ki Roshni Mein Har Musalman Ko Zarur Janna Chahiye amazing story

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Dua Mangne Ki Fazilat
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Dua Mangne Ki Fazilat

दुआ मोमिन की सबसे बड़ी ताक़त, सबसे बेहतरीन इबादत और अल्लाह तआला से अपना रिश्ता मज़बूत करने का सबसे आसान ज़रिया है। जब इंसान दिल की गहराइयों से अपने रब के सामने हाथ उठाता है, तो अल्लाह तआला उसकी फ़रियाद को सुनते हैं और अपनी हिकमत के मुताबिक़ उसे बेहतरीन बदला अता फ़रमाते हैं। कुरआन-ए-करीम और सहीह अहादीस में दुआ की फ़ज़ीलत, उसकी अहमियत और उसकी क़ुबूलियत के बारे में कई बेशकीमती रहनुमाई मौजूद है।

इस आर्टिकल में आप कुरआन और सहीह हदीस की रोशनी में दुआ माँगने की फ़ज़ीलत, दुआ क्यों करनी चाहिए, दुआ से मिलने वाले फ़ज़ाइल और दुआ की क़ुबूलियत की हिकमत को आसान भाषा में जानेंगे। अगर आप चाहते हैं कि आपकी दुआएँ अल्लाह तआला की बारगाह में क़ुबूल हों और आपकी दुनिया व आख़िरत बेहतर बने, तो इस आर्टिकल को पूरा ज़रूर पढ़ें। यह जानकारी हर मुसलमान के लिए बेहद फ़ायदेमंद है।

दुआ माँगने की फ़ज़ीलत

हदीस शरीफ में आया है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया: “दुआ मांगना भी बिल्कुल इबादत करने की तरह है। फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने दलील के तौर पर कुरआन करीम की यह आयत तिलावत फ़रमाई, तर्जुमा “और तुम्हारे पर्वरदिगार ने फरमाया है मुझ से दुआ माँगा करो, मैं तुम्हारी दुआ कुबूल करूँगा। बेझिझक, जो लोग तकब्बुर की वजह से मेरी इबादत से मुंह मोड़ते है वह जलील और रुसवा हो कर जरूर ही जहन्नम में दाखिल होगे।

एक और हदीस में आया है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व स्ललम ने फरमायाः “तुम में से जिस शख्स के लिये दुआ का दर्वाजा खोल दिया गया यानी दुआ माँगने की तौफीक दे दी ,उस के लिये रहमत के दर्वाजे खोल दिये गये अल्लाह पाक से जो दुआएँ माँगी जाती हैं उन में अल्लाह पाक को सब से अधिक पसंद यह है कि उस से दुनिया और आखिरत में अम्न और शान्ति की। दुआ माँगी जाये।Dua Mangne Ki Fazilat

एक और हदीस में आया है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया: “दुआ के अलावा कोई चीज़ तकदीर के फैसले को रद्द नहीं कर सकती, नेक अमल के अलावा कोई चीज उम्र को बढ़ा नहीं सकती।

एक और हदीस में आया है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया तकदीर के फैसले से बचने में कोई उपाय काम नहीं देता हाँ अल्लाह से दुआ माँगना उस आफत और मुसीबत में फायदा पहुँचाता है जो नाजिल हो चुकी है, और उस मुसीबत में भी जो अभी तक नाज़िल नही हुई। और बेशक बला नाजिल होने को होती है कि इतने में दुआ उस से जा मिलती है, इसलिये कयामत तक इन दोनों में खींचा तानी होती रहती है और इस तरह इन्सान दुआ की बदौलत उस बला और मुसीबत से छुटकारा पा जाता है।Dua Mangne Ki Fazilat

एक और हदीस में आया है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया अल्लाह पाक के नज़दीक दुआ से अधिक और किसी चीज की अहमियत नही।

एक और हदीस में नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया:जो शख्स अल्लाह से कोई सवाल नहीं करता, अल्लाह पाक उस से नाराज़ हो जाते हैं।

एक और हदीस में आया है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने सहाबा को मुतवज्जह कर के फरमाया “तुम अल्लाह से दुआ माँगने में आजिज़ न बनो (यानी कोताही न करो ) इसलिए कि दुआ करते रहने की सूरत में कोई शख्स हरगिज़ ( अचानक किसी आफत से) हलाक नही होगा। “Dua Mangne Ki Fazilat

एक और हदीस में आया है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : जो शख्स यह चाहे कि अल्लाह तआला उस की दुआ मुसीबत और परेशानी के समय कुबूल फरमायें उसे चाहिये कि वह अच्छी हालत में भी अधिक से अधिक दुआ माँगा करे।”

एक और हदीस में आया है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया: दुआ मोमिन का हथियार है, दीन का सुतून है, आसमान और ज़मीन का नूर है। रोज़ा के फज़ाईल अहादीष की रोशनी में

एक और हदीस में आया है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एक ऐसी कौम के पास से गुजरे जो किसी मुसीबत में गिरिफ्तार देख कर आप ने फरमाया उन की हालत को ऐसा मालूम होता है कि यह लोग अल्लाह पाक से अम्न और शान्ति की दुआ नहीं माँगा करते थे। ”

एक और हदीस में आया है कि नबी करीम सल्लल्लाहु व सल्लम ने फ़रमाया :”जो भी मुसलमान कुछ माँगने के लिये अल्लाह पाक की ओर अपना मुँह उठाता है ( दुआ माँगता है) तो अल्लाह पाक उस को वह चीज जरूर देते हैं या वही चीज उस को तुरन्त ‘दे देते हैं, या उस के वास्ते ( दुनिया और आखिरत में ) उस को जमा कर देते हैं।

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यानी दुआ के कुबूल होने की तीन सूरतें होती हैं।

1- अगर अल्लाह पाक बेहतर समझता है तो उस की माँग पूरी कर देता है।

2- अगर तुरन्त पूरी करना बेहतर नहीं समझता तो देर से सही समय पर माँग पूरी करता है।

3- अगर तुरन्त और देर से भी नहीं पूरी करता है तो उस का कोई अच्छा बदला दुनिया और आखिरत में दे देता है, लेकिन अल्लाह पाक से दुआ माँगने का बदला तो हर हाल में मिल ही जाता है, इसलिये कोई भी दुआ किसी भी हाल में रद्द नहीं की जाती।

अल्लाह पाक हम सब के गुनाहो को मु’आफ फरमाए और ज्यादा से ज़्यादा अपने बारगाह मे हमारी दुआए कुबूल फरमाए आमीन।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

1. दुआ क्या है?

जवाब: दुआ अल्लाह तआला से अपनी ज़रूरत, परेशानी और खैर की मांग करना है। यह एक बहुत बड़ी इबादत है और बंदे को अपने रब के करीब लाती है।Dua Mangne Ki Fazilat

2. क्या दुआ करना भी इबादत है?

जवाब: जी हाँ। हदीस शरीफ़ में आया है कि “दुआ ही इबादत है।” इसलिए हर मुसलमान को हर हाल में अल्लाह से दुआ करनी चाहिए।Dua Mangne Ki Fazilat

3. क्या अल्लाह हर दुआ क़ुबूल करते हैं?

जवाब: जी हाँ। अल्लाह तआला हर दुआ सुनते हैं। दुआ की क़ुबूलियत तीन तरीकों से होती है—या वही चीज़ दे दी जाती है, या बेहतर समय के लिए रोक दी जाती है, या उससे बेहतर बदला दुनिया या आख़िरत में अता किया जाता है।Dua Mangne Ki Fazilat

4. दुआ कब ज़्यादा क़ुबूल होती है?

जवाब: तहज्जुद के वक़्त, रमज़ान में, शबे क़द्र, अरफ़ा के दिन, जुमे के दिन, सज्दे में, अज़ान और इक़ामत के बीच तथा रोज़ेदार की दुआ क़ुबूल होने की खास उम्मीद होती है।Dua Mangne Ki Fazilat

5. क्या सिर्फ़ मुसीबत में ही दुआ करनी चाहिए?

जवाब: नहीं। हदीस में आया है कि जो चाहता है कि मुसीबत के समय उसकी दुआ क़ुबूल हो, उसे खुशहाली के दिनों में भी अल्लाह से खूब दुआ करनी चाहिए।Dua Mangne Ki Fazilat

6. क्या दुआ तक़दीर बदल सकती है?

जवाब: हदीस के मुताबिक़, दुआ अल्लाह के हुक्म से तक़दीर के फैसले के असर को टालने का ज़रिया बन सकती है। इसलिए दुआ कभी नहीं छोड़नी चाहिए।Dua Mangne Ki Fazilat

7. अगर दुआ पूरी न हो तो क्या करें?

जवाब: सब्र रखें, अल्लाह पर पूरा भरोसा रखें और दुआ जारी रखें। अल्लाह वही फैसला करते हैं जो बंदे के लिए सबसे बेहतर होता है।Dua Mangne Ki Fazilat

8. दुआ करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

जवाब: इख़लास, यक़ीन, हलाल रोज़ी, तौबा, अल्लाह की हम्द, नबी ﷺ पर दुरूद और अदब के साथ दुआ करना दुआ की क़ुबूलियत के अहम असबाब हैं।Dua Mangne Ki Fazilat

9. क्या अपने लिए और दूसरों के लिए दुआ करना चाहिए?

जवाब: जी हाँ। अपने लिए, माता-पिता, परिवार, तमाम मुसलमानों और पूरी उम्मत के लिए दुआ करना बहुत बड़ा नेक अमल है।Dua Mangne Ki Fazilat

10. दुआ की सबसे बड़ी फ़ज़ीलत क्या है?

जवाब: दुआ बंदे और अल्लाह के बीच सीधा रिश्ता है। यह गुनाहों की माफी, रहमत, सुकून, बरकत और दुनिया व आख़िरत की कामयाबी का अहम ज़रिया है।Dua Mangne Ki Fazilat

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

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