01/08/2026
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सूरह फील और अबाबील का वाकिआ: अल्लाह ने कैसे काबा की हिफाज़त की? | कुरआन की सच्ची कहानी| Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia: Allah Ne Kaise Kaaba Ki Hifazat Ki? | Quran Ki Sachi Kahani amazing story

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Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia
Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

सूरह फ़ील और अबाबील का वाक़िआ इस्लामी तारीख़ के सबसे महान और ईमान अफ़रोज़ मोजिज़ों में से एक है। यह वह ऐतिहासिक वाक़िआ है जब अल्लाह तआला ने अपने मुबारक घर खाना-ए-काबा की हिफ़ाज़त के लिए छोटे-छोटे अबाबील परिंदों को भेजा और यमन के बादशाह अबरहा की विशाल हाथियों वाली फ़ौज को चंद कंकड़ियों के ज़रिए तबाह कर दिया। इस वाक़िआ का ज़िक्र कुरआन मजीद की सूरह फ़ील में मौजूद है और यह अल्लाह की कुदरत, मदद और अपने घर की हिफ़ाज़त का ज़िंदा सबूत है।

इस आर्टिकल में आप सूरह फ़ील का पूरा वाक़िआ, अबरहा ने काबा पर हमला क्यों किया, हज़रत अब्दुल मुत्तलिब रहमतुल्लाह अलैह का किरदार, अबाबील परिंदों का मोजिज़ा, और इस घटना से मिलने वाले अहम सबक़ कुरआन और हदीस की रोशनी में जानेंगे। अगर आप इस्लामी इतिहास (Islamic History) और कुरआनी वाक़ियात को सही और आसान अंदाज़ में समझना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए बेहद फ़ायदेमंद साबित होगा।

सूरह फील और अबाबील का वाकिआ

सूरह फील और अबाबील का वाकिआ हमारे नबी-ए-करीम सल्ललाहु ताआला अलैहि वसल्लम के दादा अब्दुल मुत्तलिब के दौर मे पेश आया हुज़ूरे अक्दस सल्ललाहु ताआला अलैहि वसल्लम के दादा अब्दुल मुत्तलिब का असली नाम शैबा है। येह बड़े ही नेक नफ़्स और आबिदो जाहिद थे। गारे हिरा में खाना पानी साथ ले कर जाते और कई कई दिनों तक लगातार खुदा की इबादत में मसरूफ़ रहते ।

रमज़ान शरीफ़ के महीने में अकसर गारे हिरा में एतिकाफ़ किया करते थे, और खुदा के ध्यान में गोशा नशीन रहा करते थे। रसूलुल्लाह सल्ललाहु ताआला अलैहि वसल्लम का नूरे नुबुव्वत इन की पेशानी में चमक्ता था और इन के बदन से मुश्क की खुश्बू आती थी ।Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

अहले अरब खुसूसन कुरैश को इन से बड़ी अकीदत थी। मक्का वालों पर जब कोई मुसीबत आती या कहत पड़ जाता तो लोग अब्दुल मुत्तलिब को साथ ले कर पहाड़ पर चढ़ जाते और बारगाहे खुदा वन्दी में इन को वसीला बना कर दुआ मांगते थे तो दुआ मक़बूल हो जाती थी।

येह लड़कियों को ज़िन्दा दरगोर करने से लोगों को बड़ी सख्ती के साथ रोकते थे और चोर का हाथ काट डालते थे। अपने दस्तर ख़्वान से परिन्दों को भी खिलाया करते थे इस लिये इन का लकब मुतइमुत्तीर (परिन्दों को खिलाने वाला) है। शराब और जिना को हराम जानते थे। और अकीदे के लिहाज़ से मुवहिद थे।

ज़मज़म शरीफ़ का कुंआं जो बिल्कुल पट गया था आप ही ने उस को नए सिरे से खुदवा कर दुरुस्त किया, और लोगों को आबे ज़मज़म से सैराब किया। आप भी काबे के मुतवल्ली और सज्जादा नशीन हुए। अस्हाबे फील का वाक़िआ आप ही के वक्त में पेश आया। एक सौ बीस बरस की उम्र में आप की वफात हुई ।

हुज़ूरे अकरम सल्ललाहु ताआला अलैहि वसल्लम की पैदाइश से सिर्फ पचपन दिन पहले यमन का बादशाह अबरहा हाथियों की फ़ौज लेकर काबा ढाने के लिये मक्का पर हमलावर हुवा था।

इस का सबब येह था कि अबरहा ने यमन के दारुस्सल्तनत सन्आ में एक बहुत ही शानदार और आलीशान गिरजा घर बनाया और येह कोशिश करने लगा कि अरब के लोग बजाए खान काबा के यमन आ कर इस गिरजा घर का हज किया करें ।Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

जब मक्का वालों को येह मालूम हुवा तो क़बीलए किनाना का एक शख्स गैजो ग़ज़ब में जल भुन कर यमन गया, और वहां के गिरजा घर में पाखाना फिर कर उस को नजासत से लतपत कर दिया।

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जब अबरहा ने येह वाकिआ सुना तो वोह तैश में आपे से बाहर हो गया और खानए काबा को ढाने के लिये हाथियों की फौज ले कर मक्का पर हमला कर दिया। और उस की फ़ौज के अगले दस्ते ने मक्का वालों के तमाम ऊंटों और दूसरे मवेशियों को छीन लिया उस में दो सौ या चार सौ ऊंट अब्दुल मुत्तलिब के भी थे।

अब्दुल मुत्तलिब को इस वाकिए से बड़ा रन्ज पहुंचा। चुनान्वे आप इस मुआमले में गुफ्तगू करने के लिये उस के लश्कर में तशरीफ़ ले गए । जब अबरहा को मालूम हुवा कि कुरैश का सरदार इस से मुलाकात करने के लिये आया है तो उस ने आप को अपने खेमे में बुला लिया।

और जब अब्दुल मुत्तलिब को देखा कि एक बुलन्द कामत, रोबदार और निहायत ही हसीनो जमील आदमी हैं जिन की पेशानी पर नूरे नुबुव्वत का जाहो जलाल चमक रहा है तो सूरत देखते ही अबरहा मरऊब हो गया। और बे इख़्तियार तख़्ते शाही से उतर कर आप की ताज़ीमो तक्रीम के लिये खड़ा हो गया ।Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

और अपने बराबर बिठा कर दरयाप्त किया कि कहिये : सरदारे कुरैश ! यहां आप की तशरीफ़ आवरी का क्या मक्सद है? अब्दुल मुत्तलिब ने जवाब दिया कि हमारे ऊंट और बकरियां वगैरा जो आप के लश्कर के सिपाही हांक लाए हैं आप उन सब मवेशियों को हमारे सिपुर्द कर दीजिये ।

येह सुन कर अबरहा ने कहा कि ऐ सरदारे कुरैश ! मैं तो येह समझता था कि आप बहुत ही हौसला मन्द और शानदार आदमी हैं। मगर आप ने मुझ से अपने ऊंटों का सवाल कर के मेरी नज़रों में अपना वकार कम कर दिया। ऊंट और बकरी की हक़ीक़त ही क्या है?

मैं तो आप के काबा को तोड़ फोड़ कर बरबाद करने के लिये आया हूं, आप ने उस के बारे में कोई गुफ़्तगू नहीं की ! अब्दुल मुत्तलिब ने कहा कि मुझे तो अपने ऊंटों से मतलब है काबा मेरा घर नहीं है बल्कि वोह खुदा का घर है। वोह खुद अपने घर को बचा लेगा।

मुझे काबे की ज़रा भी फिक्र नहीं है। येह सुन कर अबरहा अपने फ़िरऔनी लहजे में कहने लगा कि ऐ सरदारे मक्का ! सुन लीजिये ! मैं काबे को ढा कर उस की ईंट से ईंट बजा दूंगा, और रूए ज़मीन से इस का नामो निशान मिटा दूंगा क्यूं कि मक्का वालों ने मेरे गिरजा घर की बड़ी बे हुर्मती की है।Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

इस लिये मैं इस का इन्तिकाम लेने के लिये काबे को मिस्मार कर देना ज़रूरी समझता हूं। अब्दुल मुत्तलिब ने फ़रमाया कि फिर आप जानें और खुदा ‘जाने। मैं आप से सिफारिश करने वाला कौन ? इस गुफ़्तगू के बाद’ अबरहा ने तमाम जानवरों को वापस कर देने का हुक्म दे दिया ।

और अब्दुल मुत्तलिब तमाम ऊंटों और बकरियों को साथ ले कर अपने घर चले आए और मक्का वालों से फ़रमाया कि तुम लोग अपने अपने माल और मवेशियों को ले कर मक्का से बाहर निकल जाओ। और पहाड़ों की चोटियों पर चढ़ कर और दरों में छुप कर पनाह लो।

मक्का वालों से येह कह कर फिर खुद अपने खानदान के चन्द आदमियों को साथ ले कर खानए काबा में गए और दरवाज़े का हल्का पकड़ कर इन्तिहाई बेक़रारी और गिर्या व ज़ारी के साथ दरबारे बारी में इस तरह दुआ मांगने लगे कि Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

ऐ अल्लाह ! बेशक हर शख़्स अपने अपने घर की हिफ़ाज़त करता है। लिहाजा तू भी अपने घर की हिफ़ाज़त फ़रमा, और सलीब वालों और सलीब के पुजारियों (ईसाइयों) के मुकाबले में अपने इताअत शिआरों की मदद फ़रमा ।

अब्दुल मुत्तलिब ने येह दुआ मांगी और अपने खानदान वालों को साथ ले कर पहाड़ की चोटी पर चढ़ गए और खुदा की कुदरत का जल्वा देखने लगे । अबरहा जब सुबह को काबा ढाने के लिये अपने लश्करे जर्रार और हाथियों की कितार के साथ आगे बढ़ा और मकामे मगमस में पहुंचा तो खुद उस का हाथी जिस का नाम महमूद था एक दम बैठ गया।Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

हर चन्द मारा, और बार बार ललकारा मगर हाथी नहीं उठा । इसी हाल में कहरे इलाही अबाबीलों की शक्ल में नुमूदार हुवा और नन्हे नन्हे परिन्दे झुंड के झुंड जिन की चोंच और पन्जों में तीन तीन कंकरियां थीं समुन्दर की जानिब से हुरमे काबा की तरफ आने लगे ।

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अबाबीलों के इन दल बादल लश्करों ने अबरहा की फ़ौजों पर इस जोर शोर से संगबारी शुरू कर दी कि आन की आन में अबरहा के लश्कर, और उस के हाथियों के परखचे उड़ गए।Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

अबाबीलों की संगबारी खुदा वन्दे क़हार व जब्बार के कहरो ग़ज़ब की ऐसी मार थी कि जब कोई कंकरी किसी फ़ील सुवार के सर पर पड़ती थी तो वोह उस आदमी के बदन को छेदती हुई हाथी के बदन से पार हो जाती थी ।

अबरहा की फौज का एक आदमी भी जिन्दा नहीं बचा और सब के सब अबरहा और उस के हाथियों समेत इस तरह हलाक व बरबाद हो गए कि उनके जिस्मों की बोटियां टुकड़े टुकड़े हो कर ज़मीन पर बिखर गई ।Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

चुनान्चे कुरआने मजीद की “सूरए फील” में खुदा वन्दे कुद्दूस ने इस वाकए का ज़िक्र करते हुए इर्शाद फ़रमाया कि : कि यानी ऐ महबूब आप के रब ने उन हाथी वालों का क्या हाल कर डाला क्या उन के दाऊं को तबाही में न डाला और उन पर परिन्दो की टुकड़ियां भेजीं ताकि उन्हें कंकर और पत्थरों से मारें तो उन्हें चबाए हुए भुस जैसा बना डाला।

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जब अबरहा और उस के लश्करों का यह अन्जाम हुवा तो अब्दुल मुत्तलिब पहाड़ से नीचे उतरे और खुदा का शुक्र अदा किया। उनकी इस करामत का दूर दूर तक चर्चा हो गया और तमाम अहले अरब इन को एक खुदा रसीदा बुजुर्ग की हैषिय्यत से काबिले एहतिराम समझने लगे।Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

FAQ (Sawal wa Jawab) – Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

1. सूरह फ़ील किस बारे में है?

जवाब: सूरह फ़ील में अल्लाह तआला द्वारा खाना-ए-काबा की हिफाज़त और अबरहा की हाथियों वाली फ़ौज को अबाबील परिंदों के ज़रिए तबाह करने का वाक़िआ बयान किया गया है।Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

2. अबरहा कौन था?

जवाब: अबरहा यमन का ईसाई हाकिम था। उसने सनआ में एक बड़ा गिरजाघर बनवाया और चाहता था कि लोग काबा की बजाय वहीं हज करें। जब ऐसा नहीं हुआ तो उसने काबा को गिराने का इरादा किया।Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

3. अबाबील कौन से परिंदे थे?

जवाब: अबाबील ऐसे परिंदे थे जिन्हें अल्लाह तआला ने अपनी खास मदद के लिए भेजा। वे अपनी चोंच और पंजों में छोटे-छोटे पत्थर लेकर आए और उनसे अबरहा की फ़ौज को तबाह कर दिया।Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

4. हाथियों वाली फ़ौज का क्या हुआ?

जवाब: अल्लाह के हुक्म से अबाबीलों ने उन पर पत्थर बरसाए, जिससे पूरी फ़ौज तबाह हो गई और काबा महफूज़ रहा।Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

5. इस घटना का ज़िक्र कुरआन में कहाँ है?

जवाब: यह घटना कुरआन मजीद की सूरह फ़ील (सूरह 105) में बयान की गई है।Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

6. हज़रत अब्दुल मुत्तलिब ने क्या किया था?

जवाब: उन्होंने अल्लाह पर पूरा भरोसा किया, अपने ऊँट वापस लिए और काबा की हिफाज़त अल्लाह के सुपुर्द करते हुए दुआ की।Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

7. सूरह फ़ील से हमें क्या सबक मिलता है?

जवाब: इससे पता चलता है कि जो अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसकी मदद फ़रमाता है। अल्लाह अपने दीन और अपने घर की हिफाज़त करने पर पूरी कुदरत रखता है।Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

8. क्या सूरह फ़ील पढ़ने की कोई फ़ज़ीलत है?

जवाब: सूरह फ़ील कुरआन की एक मुबारक सूरह है। इसकी तिलावत सवाब का ज़रिया है। इसकी अलग से कोई खास फ़ज़ीलत सहीह हदीस से साबित नहीं है, लेकिन पूरे कुरआन की तिलावत नेक अमल है।Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

9. यह वाक़िआ हमारे नबी ﷺ की पैदाइश से कब हुआ?

जवाब: मशहूर रिवायत के मुताबिक यह वाक़िआ नबी-ए-करीम ﷺ की पैदाइश से लगभग 55 दिन पहले पेश आई थी।Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

10. मुसलमानों को सूरह फ़ील का वाक़िआ क्यों जानना चाहिए?

जवाब: क्योंकि यह वाक़िआ अल्लाह की कुदरत, उसके वादे की सच्चाई और ईमान वालों के लिए बड़ी नसीहत है। इससे तवक्कुल (अल्लाह पर भरोसा) और यक़ीन मज़बूत होता है।Surah Feel Aur Ababeel Ka Waqia

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

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