27/08/2026
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हज़रत काब बिन मालिक (रज़ि.) का हैरतअंगेज़ वाक़िया | रसूल ﷺ से सच्चा इश्क़ और तौबा की क़ुबूलियत| Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia | Rasool ﷺ Se Saccha Ishq Aur Tauba Ki Qabooliyat

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Hazrat Ka'b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia.
Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

हज़रत काब बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु का यह वाक़िआ ईमान, सच्चाई, सब्र और इश्क़-ए-रसूल ﷺ का ऐसा दिल को छू लेने वाला सबक है, जिसे पढ़कर इंसान देर तक सोचता रह जाता है। एक तरफ़ कई दिनों तक समाजी बाइकाट, तन्हाई और सख़्त आज़माइश थी, तो दूसरी तरफ़ अल्लाह और उसके रसूल ﷺ से वफ़ादारी का इम्तिहान।

इसी मुश्किल वक़्त में जब उनके पास मुल्के शाम के बादशाह की तरफ़ से एक ख़त आया और उन्हें अपनी तरफ़ बुलाकर इज़्ज़त और आराम का लालच दिया गया, तब भी हज़रत काब रज़ियल्लाहु अन्हु ने अपने ईमान और रसूल ﷺ की मोहब्बत को दुनिया की हर चीज़ पर तरजीह दी।

फिर वह वक़्त भी आया जब पचास रातों की आज़माइश के बाद अल्लाह तआला ने उनकी तौबा क़ुबूल फ़रमाई। यह वाक़िआ हमें सिखाता है कि मुश्किल चाहे कितनी भी लंबी हो, अगर बंदा सच्चाई और सब्र के साथ अल्लाह की तरफ़ रुजू करे तो उसकी रहमत से मायूस नहीं होना चाहिए।

काब बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु का चालीस दिन से लगातार समाजी बाइकाट है। गैरों का जिक्र ही क्या, क़रीबी अज़ीज़ व रिश्तेदार, यहां तक कि जीवन-साथी भी इस्लाम और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हुक्म पर परवानावार निसार होते हुए काब का बाइकाट किए हुए हैं, गोया इस तरह काब पर ख़ुदा की ज़मीन तंग हो गई है।

वह इस मायूसी और हैरानी की हालत में मदीना के बाज़ार से गुज़र रहे हैं कि अचानक मुल्के शाम का एक नबती पुकारता हुआ नज़र आया, मुझको कोई काब बिन मालिक तक पहुंचा दे।’

लोगों ने हाथ के इशारे से बताया कि काब यह जा रहे हैं, नबती आगे बढ़ा और काब की राह रोक कर उनकी खिदमत में एक ख़त पेश किया। काब ने पढ़ा तो शाहे ग़स्सान का ख़त था, उसमें लिखा था-

अम्मां बाद! मुझको मालूम हुआ है कि तुम्हारे साथी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तुम पर बड़ा जुल्म कर रखा है। ख़ुदा ने तुम जैसी हस्ती को इस जिल्लत और बरबादी के लिए नहीं बनाया, पस तुम फ़ौरन यहां चले आओ, हम तुम्हारी ख़ातिरख़्वाह इज़्ज़त करेंगे। (फ़तहुलबारी)

हज़रत काब रज़ियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं, ख़त पढ़ते ही मुझको सख़्त रंज व मलाल हुआ और मैंने दिल में कहा कि यह आज़माइश व बला पहली आज़माइश से भी ज़्यादा कठिन है। मैं और शाहे ग़स्सान को मेरे बारे में यह गुमान कि इस इम्तिहान से घबरा कर उसके पास भाग जाऊं और ख़ुदा और ख़ुदा के रसूल से मुंह मोड़ लूं।

आह, यह बहुत ही तक्लीफ़ देने वाली सूरतेहाल है। बहरहाल शाहे ग़स्सान की इस ज़लील हरकत पर मुझे ऐसा गुस्सा आया कि मैं एक तन्नूर के सामने पहुंचा और उसके ख़त को उसमें झोंक कर नबती से कहा, यह है तेरे बादशाह के ख़त का जवाब और मैं ख़िदमते अक़्दस में हाज़िर होकर बेचैनी के साथ अर्ज़ करने लगा, शाहे हर दूसरा, आख़िर यह एराज़ यानी मुंह फेरना क्यों इस दर्जे को पहुंच गया कि अब मुश्शिक भी मुझे फुसलाने की जुर्रात करने लगे।

ग़रज़ इसी तरह पचास रातें गुज़र गईं और हमारी महरूमी की गिरह न खुली और अल्लाह के इरशाद के मुताबिक़ ख़ुदा की जमीन फैली होने के बावजूद हम पर तंग हो गई और अपनी जान वबाल नज़र आने लगी कि यकायक सुबह की नमाज़ के बाद सलअ की चोटी पर से एक पुकारने वाले ने पुकारा, ‘ऐ काब! बशारत हो।’

मैं तो इस हालत में इन्क़िलाब आने के इंतिज़ार में ही था, फ़ौरन समझ गया कि अल्लाह के दरबार में तौबा कुबूल हो गई। अब क्या था मारे ख़ुशी के फूला न समाया और वहीं सज्दे में गिर गया।

अब गिरोह-दर-गिरोह लोग आ रहे हैं और तौबा के कुबूल होने की खुशखबरी सुना रहे हैं और जीवन-साथी की तरफ़ से भी मुबारकबाद पेश की जा रही है। सबसे पहले जिस आदमी ने मुझसे तौबा कुबूल करने की तफ्सील से खुशखबरी सुनाई, वह एक सवार था। मैंने इंतिहाई ख़ुशी में जो कपड़े पहने हुए था, उतार कर उसको दे दिए।Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

ख़ुदा की शान कि मेरे पास और कपड़े भी नहीं थे, इसलिए उधार मांग कर पहने और रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के दरबार में हाज़िर हुआ, राह में भी लोगों का तांता बंधा हुआ था और मुझ पर मुबारकबादियों और खुशखबरियों के फूल बरसाए जा रहे थे। रसूल-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के दरबार में पहुंचा, तो आंहज़रत सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम आगे बढ़े और मुझसे मुसाफ़ा किया और मुबारकबाद पेश की।

इसी खुशी के साथ मैं ने आपके चेहरे पर नज़र डाली तो देखा कि मुबारक चेहरा मारे ख़ुशी के बिजली की तरह चमक रहा है, मुस्कराते हुए इरशाद फ़रमाया, इस मुबारक दिन में बशारत हासिल कर, तेरी पैदाइश से आज तक इससे बेहतर कोई दिन नहीं आया।’

मैंने अर्ज़ किया, ऐ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ! तौबा का यह कुबूल होना आपकी तरफ़ से है या अल्लाह की तरफ़ से ?

नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया, ‘मेरी तरफ़ से नहीं, ख़ुदा की तरफ़ से है।’ आपने यह जवाब दिया और रुखे अनवर चांद की तरह रोशन नज़र आने लगा। मैं ने खुश होकर कहा, ‘ऐ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ! तौबा के मेरे कुबूल होने का एक हिस्सा यह भी हो जाए कि मैं अपना कुल माल अल्लाह के रास्ते में सदका़ कर दूं।’

आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया, ‘बेहतर यह है कि कुछ हिस्सा अपने लिए रख लो।’

“मैंने अर्ज़ किया, खैबर का जो हिस्सा मेरे पास है उसे रोके लेता हूं। ‘मैंने यह भी अर्ज़ किया, ऐ अल्लाह के रसूल! यह सच्चाई का सदका़ है कि आज बेपनाह माल से मालामाल हूं, इसलिए अहद करता हूं कि उम्र भर सच कहने के अलावा मेरा शिआर कुछ न होगा।’

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हज़रत काब रज़ियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं, मेरे इस मामले में रंज व ग़म के हर दो साथी का भी ख़ुशी में यही हाल हुआ और हमारी तौबा कुबूल होने पर जो फ़ज़्ल की आयतें उतरी थीं, नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमारे सामने उनकी तिलावत फ़रमाई।

तौबा का कुबूल होना और सूरः तौबा

तर्जुमा- ‘बेशक अल्लाह अपनी खुशी से नबी पर मुतवज्जह हो गया और मुहाजिरों और अंसार पर भी, जिन्होंने बड़ी तंगी और बेसर व सामानी की हालत में उसके पीछे क़दम उठाया और उस वक्त उठाया कि क़रीब था उनमें से एक गिरोह के दिल डगमगा जाएं, फिर वह अपनी रहमत से उन सब पर मुतवज्जह हो गया,

बेशक वह मुहब्बत रखने वाला रहमत करने वाला है और उन तीन आदमियों पर भी अपनी रहमत के साथ रुजू हुआ जो लटकी हालत में छोड़ दिए गए थे, यहां तक कि नौबत यह आई कि ज़मीन अपने तमाम फैलाव के बावजूद उन पर तंग हो गई थी और वे खुद भी अपनी जान से तंग आ गए थे और उन्होंने जान लिया था कि अल्लाह से भाग कर उन्हें कोई पनाह नहीं मिल सकती, मगर खुद उसी के दामन में, पस अल्लाह उन पर अपनी रहमत के साथ लौट आया, ताकि वह रुजू करें।

बेशक अल्लाह ही बड़ा तौबा कुबूल करने वाला है, बड़ा ही रहमत वाला, ऐ ईमान वालो! अल्लाह का लिहाज़ करो, डरते रहो और सच्चों का साथ अख्तियार करो।’ (9 : 117-119)Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

FAQ — काब बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु का वाक़िआ

1. हज़रत काब बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु कौन थे?

हज़रत काब बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु रसूलुल्लाह ﷺ के सहाबी थे। ग़ज़वा-ए-तबूक के मौके पर उनसे एक कोताही हुई, जिसके बाद उन्हें सख़्त इम्तिहान और समाजी बाइकाट का सामना करना पड़ा।Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

2. हज़रत काब बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु का समाजी बाइकाट क्यों किया गया?

ग़ज़वा-ए-तबूक में शरीक न होने के बाद उन्होंने कोई झूठा बहाना बनाने के बजाय अपनी गलती का सच्चाई से इकरार किया। रसूलुल्लाह ﷺ के हुक्म से कुछ समय के लिए उनसे समाजी ताल्लुक़ात रोक दिए गए।Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

3. हज़रत काब रज़ियल्लाहु अन्हु का बाइकाट कितने दिनों तक रहा?

उनका इम्तिहान लगभग पचास रातों तक जारी रहा। इस दौरान उनकी हालत बहुत मुश्किल हो गई और उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि ज़मीन अपनी पूरी वुसअत के बावजूद उनके लिए तंग हो गई है।Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

4. क्या उनके क़रीबी लोगों ने भी उनसे बात करना बंद कर दिया था?

जी हाँ। रसूलुल्लाह ﷺ के हुक्म की पैरवी करते हुए लोगों ने उनसे सामाजिक दूरी बनाए रखी। यह वाक़िआ सहाबा-ए-किराम की इताअत और रसूल ﷺ से सच्ची मोहब्बत का बड़ा उदाहरण है।Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

5. शाहे ग़स्सान ने हज़रत काब रज़ियल्लाहु अन्हु को क्या पैग़ाम भेजा?

शाहे ग़स्सान ने उन्हें अपने पास आने की दावत दी और यह जताने की कोशिश की कि रसूलुल्लाह ﷺ ने उन पर ज़ुल्म किया है। उसने उन्हें इज़्ज़त और पनाह देने का लालच दिया।Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

6. हज़रत काब रज़ियल्लाहु अन्हु ने शाहे ग़स्सान के ख़त के साथ क्या किया?

उन्होंने उस ख़त को पढ़कर आग में डाल दिया। यह उनके ईमान, रसूलुल्लाह ﷺ से वफ़ादारी और दुनिया की लालच के सामने अपने दीन को तरजीह देने की शानदार मिसाल है।Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

7. हज़रत काब रज़ियल्लाहु अन्हु की तौबा कब क़ुबूल हुई?

जब उनकी आज़माइश की मुद्दत पूरी हुई तो सुबह के वक़्त उन्हें उनकी तौबा क़ुबूल होने की खुशखबरी दी गई। ख़ुशी में वह सज्दे में गिर पड़े।Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

8. तौबा क़ुबूल होने की खबर सुनकर हज़रत काब रज़ियल्लाहु अन्हु ने क्या किया?

वह बेहद खुश हुए और तुरंत अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए सज्दे में गिर गए। बाद में वह रसूलुल्लाह ﷺ की ख़िदमत में हाज़िर हुए।Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

9. रसूलुल्लाह ﷺ ने हज़रत काब रज़ियल्लाहु अन्हु से कैसे मुलाक़ात की?

रसूलुल्लाह ﷺ ने उनका इस्तिक़बाल किया, उनसे मुसाफ़हा किया और उन्हें तौबा क़ुबूल होने की मुबारकबाद दी। यह उनके लिए बेहद खुशी और राहत का लम्हा था।Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

10. हज़रत काब रज़ियल्लाहु अन्हु ने अपना सारा माल सदक़ा करने की बात क्यों कही?

तौबा क़ुबूल होने की खुशी में उन्होंने अपने माल को अल्लाह की राह में सदक़ा करने का इरादा किया। रसूलुल्लाह ﷺ ने उन्हें अपना कुछ माल अपने पास रखने की हिदायत दी।Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

11. हज़रत काब रज़ियल्लाहु अन्हु ने तौबा के बाद क्या अहद किया?

उन्होंने सच्चाई को अपनी ज़िंदगी का शिआर बनाने का अहद किया। उन्होंने इस वाक़िआ से यह सबक़ हासिल किया कि मुश्किल हालात में भी झूठ के बजाय सच का दामन नहीं छोड़ना चाहिए।Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

12. इस वाक़िआ से सच्चाई की क्या अहमियत मालूम होती है?

इस वाक़िआ से मालूम होता है कि सच्चाई कभी-कभी इंसान को मुश्किल इम्तिहान में डाल सकती है, लेकिन उसका अंजाम बहुत बेहतर होता है। हज़रत काब रज़ियल्लाहु अन्हु ने झूठा बहाना बनाने के बजाय सच बोला और आख़िरकार अल्लाह ने उनकी तौबा क़ुबूल फ़रमाई।Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

13. इस वाक़िआ में रसूलुल्लाह ﷺ से मोहब्बत का क्या सबक़ मिलता है?

इस वाक़िआ से पता चलता है कि सच्ची मोहब्बत सिर्फ़ ज़बान से दावा करने का नाम नहीं, बल्कि रसूलुल्लाह ﷺ की इताअत और आपके हुक्म को अपनी पसंद और दुनिया के फ़ायदों पर तरजीह देने का नाम है।Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

14. इस वाक़िआ का ज़िक्र क़ुरआन में कहाँ मिलता है?

इस वाक़िआ का ज़िक्र सूरह अत-तौबा की आयत 117 से 119 में मिलता है। खास तौर पर आयत 118 में उन तीन सहाबा की तौबा क़ुबूल होने का ज़िक्र है, जिनमें हज़रत काब बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु भी शामिल थे।Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

15. सूरह अत-तौबा की आयत 119 से हमें क्या पैग़ाम मिलता है?

आयत 119 में ईमान वालों को अल्लाह से डरने और सच्चों का साथ देने की हिदायत दी गई है। इससे यह साफ़ होता है कि सच्चाई ईमानदार ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा है।Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

16. हज़रत काब रज़ियल्लाहु अन्हु के वाक़िआ का सबसे बड़ा सबक़ क्या है?

इस वाक़िआ का सबसे बड़ा सबक़ यह है कि मुश्किल वक़्त में भी सच का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। दुनिया की तरफ़ से रास्ते बंद दिखाई दें, तब भी अल्लाह की रहमत से मायूस नहीं होना चाहिए और सच्ची तौबा के साथ उसी की तरफ़ रुजू करना चाहिए।Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

17. क्या अल्लाह सच्ची तौबा क़ुबूल करता है?

जी हाँ। अल्लाह तआला तौबा क़ुबूल करने वाला और बहुत रहमत फ़रमाने वाला है। इंसान से गलती हो जाए तो उसे मायूस होने के बजाय सच्चे दिल से अल्लाह की तरफ़ लौटना चाहिए।Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

18. इस वाक़िआ से आज के मुसलमानों को क्या सीखना चाहिए?

आज के मुसलमानों के लिए इस वाक़िआ में कई सबक़ हैं—सच बोलना, गलती का इकरार करना, अल्लाह की रहमत से मायूस न होना, मुश्किल में सब्र करना और दीन के मामले में दुनिया के लालच को ठुकराना। सबसे बढ़कर, इंसान को हर हाल में सच्चाई का साथ देना चाहिए।Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Hazrat Ka’b Bin Malik (RA) Ka Hairatangez Waqia

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
खुदा हाफिज़…..

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