09/07/2026
1783517870693

नबी ﷺ की मुहब्बत का बेमिसाल वाक़िआ| Nabi ki Mohabbat ka bemisal waqia.

Share now
Nabi ki Mohabbat ka bemisal waqia.
Nabi ki Mohabbat ka bemisal waqia.

सिद्दीके अकबर के इश्क़ व वफ़ा की हद तो देखिए

एक दफा नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हरम शरीफ में थे। कुफ़्फ़ार ने आकर नबी अलैहिस्सलातु वस्सलाम को तकलीफ़ पहुँचानी शुरू कर दी। एक काफिर कहीं बाहर से निकला।

उसने अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु को देखा और कहने लगा कि तू अपने दोस्त का ख़्याल कर कि उसको तो कुफ़्फ़ार तकलीफ़ पहुँचा रहे हैं। आप भागे हुए मस्जिद में पहुँचे और मजमे को चीरकर अन्दर गये और फरमाने लगे क्या तुम उस हस्ती को मारना चाहते हो जो यह कहते हैं कि मेरा रब अल्लाह है?

अब काफिरों ने नबी अलैहिस्सलातु वस्सलाम को छोड़कर उनको मारना शुरू कर दिया। रिवायत में आया है कि सिद्दीके अकबर रज़ियल्लाहु अन्हु ज़बान से सिर्फ इतना कह रहे थे تباركت يا ذا الجلال والاكرام काफिरों ने इतना मारा कि बेहोश हो गए।

उस वक़्त उनके कबीले के लोग वहाँ पहुँचे और उन्हें उठाकर घर ले आए, बहुत देर के बाद होश में आए, रात गुज़र गई। जब होश में आए तो वालिदा ने कहा बेटा कुछ खा लो। उस वक़्त अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु ने अपनी वालिदा से पूछा अम्मा! मुझे बताओ कि नबी अलैहिस्सलातु वस्सलाम किस हाल में हैं?

उसने कहा बेटा! तेरा अपना हाल यह है कि जिस्म ज़ख़्मों से चूर-चूर हो चुका है। अब भी पूछ रहे हो कि उनका क्या हाल है? फरमाया हाँ, जब तक मुझे उनके हाल का पता नहीं चलेगा मैं कुछ नहीं खाऊँगा। उनकी वालिदा ने कहा मुझे तो नहीं पता कि वह किस हाल में है? अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु ने उम्मे जमील रज़ियल्लाहु अन्हा का नाम बताया और फरमाया कि उनके पास जाइए, वह आपको बताएंगी।

लिहाजा उनसे पूछा गया तो उन्होंने बताया कि दारे अरकम में हैं। जब नबी अलैहिस्सलातु वस्सलाम को पता चला तो अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु अपनी वालिदा के साथ दारे अरकम पहुँचे। रिवायत में आता है कि जब सिद्दीके अकबर दारे अरकम पहुँचे तो सिद्दीके अकबर रज़ियल्लाहु अन्हु की इस कैफियत को देखकर नबी अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु का बोसा लिया और उसके बाद सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम ने अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु का बोसा लिया, सुब्हानअल्लाह ।

खूबसूरत वाक़िआ:जब साँप ने हज़रत अबूबक्र को काटा |Jab saanp Ne Hazrat Abu Bakar ko kata.

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *