Asar ki Namaz padhne ka tariqa
अस्सलामु अलैकुम दोस्तों,
आज हम असर की नमाज़ के बारे में आसान और तफ्सील से बात करेंगे। पाँच वक़्त की नमाज़ों में असर की नमाज़ तीसरी नमाज़ है, जो ज़ोहर के बाद और मग़रिब से पहले अदा की जाती है। रोज़मर्रा की मसरूफ़ियत और काम-काज के दौरान अक्सर लोग इस नमाज़ के वक़्त से ग़ाफ़िल हो जाते हैं, इसलिए ज़रूरी है कि हम इसके वक़्त और तरीके को अच्छी तरह समझें।
इस ब्लॉग पोस्ट में हम जानेंगे कि असर की नमाज़ का वक़्त कब शुरू होता है और कब तक रहता है, इसमें कितनी रकअत होती हैं और 4 रकअत सुन्नत और 4 रकअत फ़र्ज़ किस तरह अदा की जाती हैं। साथ ही हम नियत से लेकर सलाम फेरने तक के ज़रूरी तरीक़े को आसान अल्फ़ाज़ में समझेंगे।
अगर आप असर की नमाज़ का सही तरीका सीखना चाहते हैं या अपने बच्चों और घरवालों को नमाज़ सिखाना चाहते हैं, तो इस पोस्ट को आखिर तक ज़रूर पढ़ें। इंशाअल्लाह, आपको असर की नमाज़ से जुड़ी ज़रूरी मालूमात एक ही जगह पर आसानी से मिल जाएगी।
तो चलिए बिस्मिल्लाह करते हैं और जानते हैं असर की नमाज़ का सही तरीका, इसका वक़्त और इसमें पढ़ी जाने वाली रकअतों की पूरी जानकारी। 🤲
असर की नमाज़ पांच वक़्त की नमाज़ो में से तीसरी नमाज़ होती हैं। जो की ज़ोहर की नमाज़ के बाद होती हैं। असर की नमाज़ के पहले ज़ोहर और उसके बाद मगरिब की नमाज़ होती हैं। हदीसों में असर की नमाज़ की बहुत फ़ज़ीलत बताई गयी हैं,
क्यूंकि ये नमाज़ उस वक़्त होती हैं जब लोग अपने कामों में मसरूफ होते हैं या बाज़ारों में कुछ खरीददारी के लिए निकलते हैं। ऐसे वक़्त में जब बंदा इस नमाज़ को अदा करता हैं तो अल्लाह ऐसे बन्दों को अपने बहुत करीब रखता हैं।
एक हदीस के मुताबिक जो शख्स असर की नमाज़ को बेवजह छोड़ देता हैं वह शख्स बहुत बड़ा गुनहगार बन जाता हैं। एक और हदीस में आया हैं की जो शख्स फ़ज़्र और असर की नमाज़ पाबन्दी से पढता है। वह जहन्नम के अज़ाब से बच जाता हैं। खैर हम सब को कोशिश करना चाहिए की हम कोई भी नमाज़ को पढ़ना न भूले।
असर की नमाज़ का वक़्त
ज़ोहर की नमाज़ का वक़्त ख़त्म होते ही असर की नमाज़ का वक़्त शुरू हो जाता हैं। यह वक़्त सर्दी और गर्मी में अलग अलग रहता हैं, जैसे अभी के टाइम तो असर की नमाज़ का वक़्त शाम 4:30 बजे से सूरज डूबने के 20 मिनट पहले तक रहता हैं।
सर्दी में यही वक़्त थोड़ा जल्दी हो जाता हैं यानि सर्दी में ये वक़्त 4 बजे से लेकर सूरज डूबने के 20 मिनट पहले तक रहता हैं। आप कोशिश करिये की सूरज जैसे ही डूबने वाला हो उसके 20 मिनट पहले तक असर की नमाज़ अदा कर ले नहीं तो आपकी नमाज़ कज़ा हो जाएगी और आप गुनहगार हो जायेंगे।
सूरज जैसे ही डूबना शुरू करता हैं उस वक़्त मगरिब की नमाज़ का वक़्त शुरू हो जाता हैं। लिहाज़ा आप ऊपर बताये वक़्त के मुताबिक असर की नमाज़ अदा कर ले।
असर की नमाज़ में कितनी रकात होती हैं?
असर की नमाज़ में कुल 8 रकात होती हैं जो इस तरह हैं,
4 रकात सुन्नत ,4 रकात फ़र्ज़ पहले 4 सुन्नत नमाज़ पढ़ी जाएगी उसके बाद 4 फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ी जाएगी।
अज़ान होने के बाद करीब 15 मिनट के बाद मस्जिद में फ़र्ज़ नमाज़ शुरू हो जाती हैं अगर आप मस्जिद में यह नमाज़ पढ़ने जा रहे हैं तो अज़ान के 15 मिनट के अंदर सुन्नत नमाज़ अदा कर ले क्यूंकि उसके बाद मस्जिद के इमाम साहब आपको 4 फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ाएंगे। अगर आप घर पर पढ़ रहे हैं तो पहले 4 सुन्नत और बाद में 4 फ़र्ज़ नमाज़ पढ़े।
असर की नमाज़ पढ़ने का तरीका
जैसे की हमने पहले कहा है की हर नमाज़ की नियत काफी हद तक एक जैसी रहती हैं वैसी ही नियत के बाद जो सूरह और नमाज़ पढ़ने का तरीका होता हैं वह भी लगभग एक जैसा होता हैं।
सबसे पहले नमाज़ की नियत करे जो इस तरह है नियत की मैंने 4 रकात नमाज़ सुन्नत, वास्ते अल्लाह तआला के, वक़्त असर का, मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ और फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए अपने दोनों हाथ उठा कर अपने कानों तक ले जाये फिर दोनों हाथों को नाफ़ के नीचे बांध ले।Asar ki Namaz padhne ka tariqa
बस कोई नमाज़ छोटी है तो कोई बड़ी। जैसे असर में 4 रकात सुन्नत या फ़र्ज़ पढ़नी होती हैं तो फ़ज़्र की नमाज़ में 2 रकात सुन्नत या फ़र्ज़ पढ़नी होती हैं। बाकि हर नमाज़ में जो सूरह और आयत पढ़नी होती हैं वही आपको हर नमाज़ में पढ़नी होती हैं। नियत के बारे में हमने ऊपर आपको बता ही दिया हैं चलिए उसके बाद क्या पढ़ना है वो हम आपको बताते हैं।
4 रकात नमाज़ सुन्नत का तरीका
जैसे ही आप नियत के बाद दोनों हाथो को नाफ की नीचे बांधेंगे उसके बाद आपको सूरह सना पढ़ना हैं जो ये है सुबहानका अल्लाहुम्मा व बिहम्दीका व तबा रकस्मुका व तआला जद्दुका वाला इलाहा गैरुका” इसके बाद आप अउजू बिल्लाहि मिनश शैतान निर्रजिम बिस्मिल्लाहीर्रहमानिररहीम पढ़े। उसके बाद सूरह फातेहा पढ़े।Asar ki Namaz padhne ka tariqa
सूरह फातेहा पढ़ने के बाद कोई एक सूरह पढ़े जैसे कुल्हुवल्लाह, या कुल अऊजु बिरब्बिल फलक या कोई और सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े। सूरह पढ़ने के बाद आप अल्लाहो अकबर कहते हुए रुकू में जाये रुकू में जाने के बाद 3 मर्तबा “सुबहान रब्बी अल अज़ीम” पढ़े।
इस वक़्त आपको अपनी नज़र अपने पैर के अंगूठे पर रखनी हैं। इसके बाद आप “समीअल्लाहु लिमन हमीदह” कहते हुए रुकू से खड़े हो जाये और रब्बना व लकल हम्द कहते हुए उसके बाद अल्लाहो अकबर बोलते हुए सजदे में जाये।
ये भी पढ़ें: ज़ोहर की नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा।12 रकअत कैसे पढ़ें? 4 सुन्नत, 4 फ़र्ज़, 2 सुन्नत और 2 नफ़िल|
सजदे में इस तरह जाये की आपका सीधा घुटना पहले ज़मीन पर लगे। फिर सजदे में 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े। 3 बार सुबहाना रब्बी अल आला पढ़ने के बाद फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए उठे और वापिस सजदे में जाये। वापिस 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े।Asar ki Namaz padhne ka tariqa
आप फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए खड़े हो जाये और हाथ बांध ले और फिर से सूरह फातेहा (अल्हम्दु शरीफ) पढ़े और उसकी बाद कोई दूसरी सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े। उसके बाद फिर से अल्लाहु अकबर कहते हुए रुकू में जाये। रुकू में जाने के बाद वापिस 3 मर्तबा “सुबहाना रब्बी अल अज़ीम” पढ़े।
इसके बाद वापिस आप “समीअल्लाहु लिमन हमीदह” कहते हुए रुकू से खड़े हो जाये और दोबारा रब्बना व लकल हम्द कहते हुए उसके बाद अल्लाहो अकबर कहते हुए सजदे में जाये। सजदे में वापिस 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े फिर वापिस अल्लाहु अकबर कहते हुए दोबारा सजदे में सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े। फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए सीधे पैर के पंजो के बल पर बैठ जाये।
ध्यान रहे आप जब बैठे तो सीधे पैर के अंघूठे के बल पर पांचो अँगुलियों समेत बैठे। उल्टा पैर आप ज़मीन पर टिका सकते हैं। अगर कोई परेशानी आ रही हैं इस तरह बैठने में या अंगूठा हिल जाता है तो कोई मसला नहीं लेकिन जानबूझकर अंगूठा हिलाना या दोनों पैर ज़मीन पर टिका कर बैठना गलत हैं।Asar ki Namaz padhne ka tariqa
फिर आप अत्तहिय्यात पढ़े अत्तहिय्यात पढ़ने के दौरान आपको अशहदु अल्लाह अल्फ़ाज़ आते ही शहादत की ऊँगली को उठाना हैं। फिर आप अल्लाहो अकबर बोलते हुए तीसरी रकात के लिए फिर से खड़े हो जाये। जैसे आपने ये 2 रकात पढ़ी उसी तरह आपको 4 सुन्नत की आखरी 2 और रकात पढ़नी हैं।
बस आखिर की 2 रकात में अत्तहिय्यात के बाद दरूदे इब्राहिम एक बार और दुआ ए मसुरा एक एक बार पढ़ना हैं। उसके बाद सलाम फेरना हैं। इस तरह आपकी 4 रकात नमाज़ सुन्नत हो जाएगी।
4 रकात नमाज़ फ़र्ज़ का तरीका
जैसे आपने सुन्नत नमाज़ पढ़ी। बस वैसे ही आपको फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ना हैं क्यूंकि दोनों में 4 रकात ही हैं। बस 4 फ़र्ज़ नमाज़ में कुछ बदलाव हैं। इसकी नियत भी सुन्नत की तरह हैं सिर्फ आपको 4 सुन्नत की जगह 4 फ़र्ज़ बोलना हैं ।Asar ki Namaz padhne ka tariqa
और जब आप पहली 2 रकात फ़र्ज़ पढ़कर तीसरी रकात के लिए खड़े होंगे, उसमे आपको सूरह फातेहा पढ़ने के बाद सीधे रकू में चले जाना हैं। सूरह फातेहा के बाद कोई सूरह जैसे कुल्हुवल्लाह, या कुल अऊजु बिरब्बिल फलक नहीं पढ़ना हैं।
ये भी पढ़ें: फ़ज़्र की नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा।2 सुन्नत + 2 फ़र्ज़ | फ़ज़्र की नमाज़ की पूरी जानकारी
आपको सीधे रकू में जाना हैं और जो बाकि का तरीका हैं वही इस नमाज़ में भी करना हैं। बस ऐसे आपकी 4 फ़र्ज़ नमाज़ भी हो जाएगी।
उम्म्मीद करते हैं आज आपने असर की नमाज़ को भी अच्छी तरह से पढ़ना समझ लिया होगा। इंशाल्लाह ये नमाज़ का तरीका पढ़ने के बाद कोई दिक्कत नहीं आएगी।
अल्लाह हम सबको पंजवक्ता नमाज़ पढ़ने की तौफीक अता फरमाए आमीन।Asar ki Namaz padhne ka tariqa
असर की नमाज़ — FAQ सवाल-जवाब
सवाल 1: असर की नमाज़ में कुल कितनी रकअत होती हैं?
जवाब: आम तौर पर असर की नमाज़ से पहले 4 रकअत सुन्नत और उसके बाद 4 रकअत फ़र्ज़ अदा की जाती हैं। यानी कुल 8 रकअत।Asar ki Namaz padhne ka tariqa
सवाल 2: असर की नमाज़ का वक़्त कब शुरू होता है?
जवाब: असर का वक़्त ज़ोहर के वक़्त के बाद शुरू होता है। इसका सही वक़्त शहर, तारीख़ और फ़िक़्ही तरीक़े के हिसाब से अलग हो सकता है, इसलिए अपने इलाक़े की मस्जिद या भरोसेमंद नमाज़ टाइमिंग देखना बेहतर है।Asar ki Namaz padhne ka tariqa
सवाल 3: असर की नमाज़ का वक़्त कब तक रहता है?
जवाब: असर का वक़्त सूरज डूबने तक रहता है, लेकिन नमाज़ को इतना देर करना मुनासिब नहीं कि सूरज डूबने का वक़्त क़रीब आ जाए। कोशिश करनी चाहिए कि नमाज़ वक़्त रहते अदा कर ली जाए।Asar ki Namaz padhne ka tariqa
सवाल 4: क्या असर की नमाज़ से पहले 4 रकअत सुन्नत पढ़ना ज़रूरी है?
जवाब: 4 रकअत सुन्नत फ़र्ज़ नहीं हैं, लेकिन इन्हें पढ़ना सवाब का काम है। फ़र्ज़ नमाज़ को हर हाल में अहमियत देनी चाहिए।Asar ki Namaz padhne ka tariqa
सवाल 5: असर की 4 रकअत फ़र्ज़ कैसे पढ़ी जाती हैं?
जवाब: असर की 4 रकअत फ़र्ज़ में नियत करके नमाज़ शुरू की जाती है। पहली दो रकअत में सूरह फ़ातिहा के साथ कोई सूरह पढ़ी जाती है और बाकी रकअतों में फ़िक़्ही तरीक़े के मुताबिक़ क़िराअत की जाती है।Asar ki Namaz padhne ka tariqa
सवाल 6: क्या असर की नमाज़ घर पर पढ़ सकते हैं?
जवाब: जी हाँ, अगर किसी वजह से मस्जिद में जमाअत मयस्सर न हो तो घर पर नमाज़ अदा की जा सकती है। मर्दों के लिए मस्जिद की जमाअत की अपनी अहमियत है।Asar ki Namaz padhne ka tariqa
सवाल 7: क्या असर की नमाज़ अकेले पढ़ सकते हैं?
जवाब: जी हाँ, असर की नमाज़ अकेले भी अदा की जा सकती है। अगर जमाअत का मौक़ा मिले तो जमाअत के साथ नमाज़ पढ़ना बेहतर है।Asar ki Namaz padhne ka tariqa
सवाल 8: अगर असर की नमाज़ छूट जाए तो क्या करें?
जवाब: नमाज़ जान-बूझकर नहीं छोड़नी चाहिए। अगर किसी वजह से नमाज़ छूट जाए तो क़ज़ा के सही मसले के लिए अपने भरोसेमंद आलिम से पूछकर नमाज़ अदा करें।Asar ki Namaz padhne ka tariqa
सवाल 9: क्या असर की नमाज़ में कोई भी सूरह पढ़ सकते हैं?
जवाब: जी हाँ, सूरह फ़ातिहा के बाद क़ुरआन मजीद की कोई भी सूरह पढ़ सकते हैं जो आपको याद हो।Asar ki Namaz padhne ka tariqa
सवाल 10: क्या असर की नमाज़ सफ़र में भी पढ़नी होती है?
जवाब: जी हाँ, सफ़र में भी नमाज़ के अहकाम होते हैं। मुसाफ़िर के लिए क़स्र का मसला लागू हो सकता है, इसलिए अपनी स्थिति के मुताबिक़ किसी भरोसेमंद आलिम से मसला मालूम करना बेहतर है।Asar ki Namaz padhne ka tariqa
सवाल 11: असर की नमाज़ के वक़्त का सही पता कैसे लगाएँ?
जवाब: अपने इलाक़े की मस्जिद की नमाज़ टाइमिंग, अज़ान या किसी भरोसेमंद नमाज़ टाइमिंग ऐप से वक़्त मालूम कर सकते हैं। मौसम और जगह के हिसाब से वक़्त बदलता रहता है।Asar ki Namaz padhne ka tariqa
सवाल 12: क्या असर की नमाज़ को जान-बूझकर देर करना सही है?
जवाब: नमाज़ को जान-बूझकर टालना या इतना देर करना कि वक़्त निकलने का अंदेशा हो, सही नहीं है। कोशिश करनी चाहिए कि नमाज़ अपने वक़्त में इत्मीनान के साथ अदा की जाए।Asar ki Namaz padhne ka tariqa
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Asar ki Namaz padhne ka tariqa
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Asar ki Namaz padhne ka tariqa
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Asar ki Namaz padhne ka tariqa
खुदा हाफिज़…..
