Fajr Ki Namaz Padhne Ka Tarika
अस्सलामु अलैकुम दोस्तों,
आज हम फ़ज़्र की नमाज़ के बारे में पूरी जानकारी आसान तरीके से जानेंगे। फ़ज़्र की नमाज़ पाँच वक़्त की नमाज़ों में सबसे पहली नमाज़ है, जिसका वक़्त सुबह सादिक़ से शुरू होता है और सूरज निकलने तक रहता है।
इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि फ़ज़्र की नमाज़ का वक़्त कब से कब तक होता है, इसमें कितनी रकअत होती हैं, 2 रकअत सुन्नत और 2 रकअत फ़र्ज़ किस तरह अदा की जाती हैं, नियत कैसे की जाती है और नमाज़ पढ़ने का पूरा तरीका क्या है।
अगर आपको भी फ़ज़्र की नमाज़ के तरीके को सही और आसान अंदाज़ में समझना है, तो इस वीडियो को आखिर तक ज़रूर देखिए। इंशाअल्लाह आपको बहुत सी ज़रूरी बातें सीखने को मिलेंगी।
तो चलिए बिस्मिल्लाह करते हैं और जानते हैं फ़ज़्र की नमाज़ का सही तरीका। 🤲
इस्लाम में 5 वक़्त की नमाज़े मुसलमानों पर फ़र्ज़ हैं उनमें से जो सबसे पहली नमाज़ हैं उसे फ़ज़्र की नमाज़ कहा जाता हैं। यह नमाज़ बहुत अफ़ज़ल नमाज़ है अगर आप इस नमाज़ को अदा करते है तो आपका पूरा दिन अच्छे से निकलता हैं और आप पुरे दिन काफी सारी बलाओं से महफूज़ रहते है।
फ़ज़्र की नमाज़ का वक़्त : इस नमाज़ का वक़्त सूरज की पहली किरण के निकलने से कुछ देर पहले रहता हैं यानि की अगर आपके यहाँ 6 बजे सूरज की पहली रौशनी निकाल जाती हैं
तो आप फ़ज़्र की नमाज़ उससे पहले पढ़ ले सूरज की रौशनी निकलते ही इस नमाज़ का वक़्त ख़त्म हो जाता है। आमतौर पर हमारे इलाको में देखा जाता हैं
अभी के मौसम में फ़ज़्र की नमाज़ के लिए अज़ान 5 बजकर 15 मिनट पर हो जाती हैं और 6बजे से पहले नमाज़ पढ़ ली जाती है क्यूंकि सुबह करीब 6:30 बजे तक सूरज निकल जाता हैं और इस नमाज़ का वक़्त ख़त्म हो जाता है।
लिहाज़ा आप कोशिश करिये की जब अज़ान हो तो जल्दी से वज़ू करके नमाज़ अदा कर ले नहीं तो आपकी नमाज़ छूट जाएगी और आपको फिर कज़ा पढ़नी पड़ेगी।
सर्दियों के मौसम में फिर इस नमाज़ का वक़्त बदल जाता हैं। फिर भी आप को फ़ज़्र की नमाज़ का वक़्त जानना हो तो आप आस पास की मस्जिद में जाकर इस नमाज़ के वक़्त का पता लगा सकते है
क्यूंकि कई इलाकों में हम अज़ान की आवाज़ से नमाज़ के लिए उठ जाते है लेकिन अगर आस पास मस्जिद नहीं हैं तो हम अज़ान नहीं सुन पाते और नमाज़ पढ़ने के लिए उठ नहीं पाते।
बेहतर है अगर आपके आस पास मस्जिद नहीं है तो आप वक़्त पता करके मोबाइल में अलॉर्म रख दे और सही वक़्त पर नमाज़ के लिए उठ जाये।
फ़ज़्र की नमाज़ में कितनी रकात होती है?
फ़ज़्र की नमाज़ में 4 रकात होती हैं। पहली 2 रकात सुन्नत होती है और आखरी 2 रकात फ़र्ज़ होती है इन दोनों रकात को पढ़ने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगता हैं लिहाज़ा आप इस नमाज़ को पढ़ने में सुस्ती न करे।
फ़ज़्र की नमाज़ पढ़ने का तरीका :
सबसे पहले वज़ू करले अगर आप सोहबत या हमबिस्तरी की हालत में नापाक हो गए हैं तो आप पहले ग़ुस्ल कर ले ग़ुस्ल का तरीका जानने के लिए हम ने दुसरी विडियो अपलोड कर रखी है।
ग़ुस्ल या वज़ू करके किसी पाक जगह चादर या जानमाज़ बिछा कर काबा की तरफ मुँह करके खड़े हो जाये और नियत करे 2 रकात नमाज़ सुन्नत की जो इस तरह हैं,
2 रकात नमाज सुन्नत की नियत
नियत की मैंने 2 रकात नमाज़ सुन्नत, वास्ते अल्लाह तआला के वक़्त फ़ज़्र का, मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ और फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए
अपने दोनों हाथ उठा कर अपने कानों तक ले जाये फिर दोनों हाथों को नाफ़ के नीचे बांध ले और सूरह सना पढ़े जो इस तरह हैं
“सुबहानका अल्लाहुम्मा व बिहम्दीका व तबा रकस्मुका व तआला जद्दुका वाला इलाहा गैरुका” इसके बाद आप अउजू बिल्लाहि मिनश शैतान निर्रजिम बिस्मिल्लाहीर्रहमानिररहीम पढ़े।
उसके बाद सूरह फातेहा पढ़े। सूरह फातेहा पढ़ने के बाद कोई एक सूरह पढ़े जैसे कुल्हुवल्लाह, या कुल अऊजु बिरब्बिल फलक या कोई और जो आपको याद हो।
सूरह पढ़ने के बाद आप अल्लाहो अकबर कहते हुए रुकू में जाये रुकू में जाने के बाद 3 मर्तबा “सुबहान रब्बी अल अज़ीम” पढ़े। इस वक़्त आपको अपनी नज़र अपने पैर के अंगूठे पर रखनी हैं।
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इसके बाद आप “समीअल्लाहु लिमन हमीदह” कहते हुए रुकू से खड़े हो जाये और रब्बना व लकल हम्द कहते हुए उसके बाद अल्लाहो अकबर बोलते हुए सजदे में जाये। सजदे में इस तरह जाये की आपका सीधा घुटना पहले ज़मीन पर लगे।
फिर सजदे में 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े। 3 बार सुबहाना रब्बी अल आला पढ़ने के बाद फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए उठे और वापिस सजदे में जाये। वापिस 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े।
आप फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए खड़े हो जाये और हाथ बांध ले और फिर से अल्हम्दु शरीफ पढ़े और उसकी बाद कोई दूसरी सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े।
उसके बाद फिर से अल्लाहु अकबर कहते हुए रुकू में जाये। रुकू में जाने के बाद वापिस 3 मर्तबा “सुबहाना रब्बी अल अज़ीम” पढ़े। इसके बाद वापिस आप “समीअल्लाहु लिमन हमीदह” कहते हुए रुकू से खड़े हो जाये
और दोबारा रब्बना व लकल हम्द कहते हुए उसके बाद अल्लाहो अकबर कहते हुए सजदे में जाये। सजदे में वापिस 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े फिर वापिस अल्लाहु अकबर कहते हुए दोबारा सजदे में सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े। फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए बैठ जाये।
ध्यान रहे आप जब बैठे तो सीधे पैर के अंघूठे के बल पर पांचो अँगुलियों समेत बैठे। उल्टा पैर आप ज़मीन पर टिका सकते हैं।
अगर कोई परेशानी आ रही हैं इस तरह बैठने में या अंगूठा हिल जाता है तो कोई मसला नहीं। लेकिन जान बूझकर अंगूठा हिलाना या दोनों पैर ज़मीन पर टिका कर बैठना गलत हैं।Fajr Ki Namaz Padhne Ka Tarika
फिर आप अत्तहिय्यात पढ़े अत्तहिय्यात पढ़ने के दौरान आपको अशहदु अल्लाह अल्फ़ाज़ आते ही शहादत की ऊँगली को उठाना हैं। अत्तहिय्यात पढ़ने के बाद आप दरूदे इब्राहिम एक मर्तबा पढ़े।
इसके बाद आप दुआ ए मसुरा पढ़े। ये दुआ पढ़ने के बाद सलाम फेर ले जैसे अस्सलामो अलैकुम वरहमतुल्लाह पहले सीधे हाथ की तरफ फिर उलटे हाथ की तरफ सलाम फेर कर नमाज़ को पूरी करे। इस तरह आपकी 2 रकत नमाज़ सुन्नत हो गयी।
2 रकात नमाज़ फ़र्ज़ की नियत
जैसे आपने 2 रकात सुन्नत पढ़ी उसी तरह आपको फ़र्ज़ नमाज़ भी पढ़नी है। बस इसमें नियत में मामूली से बदलाव हैं जो इस तरह हैं,
नियत की मैंने 2 रकात नमाज़ फ़र्ज़ वास्ते अल्लाह तआला के अगर आप मस्जिद में नमाज़ पढ़ रहे हैं तो पीछे इस इमाम के बोल सकते है घर पर पढ़ रहे हैं तो ये लाइन बोलने की ज़रूरत नहीं वक़्त फ़ज़्र का, मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ और फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए
अपने दोनों हाथ उठा कर अपने कानों तक ले जाये फिर दोनों हाथों को नाफ़ के नीचे बांध ले। फिर जो जो आयतें और सूरह और तरीका हमने सुन्नत नमाज़ में पढ़ने के लिए बताया हैं वही तरीका अपनाये इस तरह आपकी फ़र्ज़ नमाज़ भी हो जाएगी।Fajr Ki Namaz Padhne Ka Tarika
इंशाल्लाह आपको फ़ज़्र की नमाज़ को पढ़ने से जुड़ी मुश्किलात नहीं आएगी। अल्लाह हम सबको पंजवक्ता नमाज़ पढ़ने की तौफ़ीक़ अता फरमाए आमीन।
फ़ज़्र की नमाज़ — FAQ
सवाल 1: फ़ज़्र की नमाज़ में कितनी रकअत होती हैं?
जवाब: फ़ज़्र की नमाज़ में कुल 4 रकअत होती हैं। पहले 2 रकअत सुन्नत और उसके बाद 2 रकअत फ़र्ज़ अदा की जाती हैं।Fajr Ki Namaz Padhne Ka Tarika
सवाल 2: फ़ज़्र की नमाज़ का वक़्त कब से शुरू होता है?
जवाब: फ़ज़्र का वक़्त सुबह सादिक़ से शुरू होता है और सूरज निकलने तक रहता है।Fajr Ki Namaz Padhne Ka Tarika
सवाल 3: क्या सूरज निकलने के बाद फ़ज़्र की नमाज़ पढ़ सकते हैं?
जवाब: सूरज निकलने के बाद फ़ज़्र का वक़्त ख़त्म हो जाता है। अगर नमाज़ छूट जाए तो उसकी क़ज़ा के मसाइल के लिए अपने इलाक़े के भरोसेमंद आलिम से पूछना बेहतर है।Fajr Ki Namaz Padhne Ka Tarika
सवाल 4: फ़ज़्र की 2 रकअत सुन्नत पहले पढ़नी हैं या फ़र्ज़?
जवाब: आम तौर पर पहले 2 रकअत सुन्नत और उसके बाद 2 रकअत फ़र्ज़ अदा की जाती हैं।Fajr Ki Namaz Padhne Ka Tarika
सवाल 5: क्या फ़ज़्र की सुन्नत घर पर पढ़ सकते हैं?
जवाब: जी हाँ, फ़ज़्र की सुन्नत घर पर पढ़ना जायज़ है। मस्जिद में जमाअत के लिए जाने वाले लोग अपनी स्थिति और मस्जिद के अमल के मुताबिक़ पढ़ सकते हैं।Fajr Ki Namaz Padhne Ka Tarika
सवाल 6: अगर मस्जिद की अज़ान सुनाई नहीं देती तो क्या करें?
जवाब: अपने इलाक़े में फ़ज़्र का सही वक़्त मालूम कर लें और मोबाइल में अलार्म लगा लें, ताकि नमाज़ वक़्त पर अदा की जा सके।Fajr Ki Namaz Padhne Ka Tarika
सवाल 7: फ़ज़्र की नमाज़ में कौन-सी सूरह पढ़ें?
जवाब: सूरह फ़ातिहा के बाद क़ुरआन की कोई भी सूरह पढ़ी जा सकती है जो आपको याद हो।Fajr Ki Namaz Padhne Ka Tarika
सवाल 8: क्या फ़ज़्र की नमाज़ अकेले पढ़ सकते हैं?
जवाब: जी हाँ, अगर जमाअत मयस्सर न हो तो फ़ज़्र की नमाज़ अकेले भी अदा की जा सकती है।Fajr Ki Namaz Padhne Ka Tarika
सवाल 9: फ़ज़्र की नमाज़ पढ़ने से पहले वुज़ू ज़रूरी है?
जवाब: जी हाँ, नमाज़ के लिए वुज़ू की पाकीज़गी ज़रूरी है। अगर किसी पर ग़ुस्ल फ़र्ज़ हो तो पहले ग़ुस्ल करना होगा।Fajr Ki Namaz Padhne Ka Tarika
सवाल 10: अगर फ़ज़्र की नमाज़ के लिए नींद से न उठ पाएँ तो क्या करें?
जवाब: जब आँख खुले तो नमाज़ के बारे में किसी भरोसेमंद आलिम से क़ज़ा के सही मसले की जानकारी लेकर नमाज़ अदा करें। साथ ही आगे के लिए अलार्म लगाना और समय पर सोने की कोशिश करें।Fajr Ki Namaz Padhne Ka Tarika
सवाल 11: फ़ज़्र की नमाज़ के बाद क्या करना चाहिए?
जवाब: नमाज़ के बाद ज़िक्र, दुआ और क़ुरआन की तिलावत करना बहुत अच्छी इबादत है। अपनी हैसियत के मुताबिक़ अल्लाह का ज़िक्र और दुआ कर सकते हैं।Fajr Ki Namaz Padhne Ka Tarika
सवाल 12: क्या फ़ज़्र की नमाज़ रोज़ाना पढ़ना ज़रूरी है?
जवाब: जी हाँ, पाँचों वक़्त की फ़र्ज़ नमाज़ें मुसलमानों पर फ़र्ज़ हैं, इसलिए फ़ज़्र की नमाज़ भी पाबंदी से अदा करनी चाहिए।Fajr Ki Namaz Padhne Ka Tarika
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Fajr Ki Namaz Padhne Ka Tarika
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Fajr Ki Namaz Padhne Ka Tarika
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Fajr Ki Namaz Padhne Ka Tarika
खुदा हाफिज़…..
