09/08/2026
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औरत का पर्दा और लिबास: कुरआन व हदीस में क्या है हुक्म? हर मुस्लिम बहन को पढ़ना चाहिए| Aurat Ka Parda Aur Libas: Quran Wa Hadees Mein Kya Hai Hukm? Har Muslim Behan Ko Padhna Chahiye

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Aurat Ka Parda Aur Libas
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Aurat Ka Parda Aur Libas

इस्लाम ने इंसान के लिए सिर्फ़ इबादत के तरीके ही नहीं बताए, बल्कि लिबास, शर्म-ओ-हया और पर्दे के बारे में भी साफ़ तालीम दी है। खास तौर पर औरत के लिए इस्लाम में हया और पर्दे की बहुत अहमियत बताई गई है।

कुरआन मजीद में अल्लाह तआला ने मोमिन औरतों को अपनी ज़ीनत की हिफाज़त करने और अपनी ओढ़नी को सीने पर डालने का हुक्म दिया है। साथ ही, घर से बाहर निकलने और गैर-महरम लोगों के सामने पेश आने के बारे में भी इस्लामी आदाब बताए गए हैं।

इस विषय में अलग-अलग जगहों पर कई बातें सुनने को मिलती हैं, इसलिए बेहतर है कि हम कुरआन और भरोसेमंद हदीस की रोशनी में समझें कि पर्दा, लिबास और ज़ीनत के बारे में इस्लाम की असल तालीम क्या है।

आइए आसान भाषा में जानते हैं कि मुस्लिम औरत के लिए पर्दे और लिबास के क्या आदाब हैं और कुरआन व हदीस इस बारे में हमें क्या सिखाते हैं।

शरीअत में एक हुक्म तो लिबास और सतर का है और ये हुक्म मर्द व औरत दोनों के लिए है। मर्दों के लिए नाफ़ से घुटने तक अपनी बीवी के सिवा हर एक से छिपाने का हुक्म है और औरतों के लिये चेहरा और गट्टे तक हाथ और टखने तक पैर के सिवा पूरा बदन अपने शौहर के सिवा हर एक से छिपाने का हुक्म है।

हदीस:- नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया- चेहरा और गट्टे तक हाथ के सिवा बालिग़ औरत के बदन का कोई हिस्सा नज़र न आना चाहिए।’ (अबू दाऊद शरीफ)

इतना बारीक और चुस्त लिबास भी पहनना हराम है, जिससे बदन अंदर से झलकने लगे या बदन की बनावट मालूम होने लगे ।

हदीस:- हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की साली हज़रत अस्मा बिन्ते अबू बक्र रज़ियल्लाहु अन्हा एक बार हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने बारीक लिबास पहन कर हाज़िर हुई तो हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फौरन नज़र फेर ली, फ़रमाया-‘अपने चेहरे और हाथ की तरफ़ इशारा करते हुए हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया, ऐ अस्मा ! बालिग़ औरत के बदन का कोई हिस्सा नज़र न आना चाहिए।’ (अबू दाऊद शरीफ़)

उम्मुल मोमिनीन हज़रत आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा की ख़िदमत में उनकी भतीजी हफ़्सा बिन्ते अब्दुर्रहमान बारीक ओढ़नी ओढ़कर हाज़िर हुई तो हज़रत आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा ने इस बारीक ओढ़नी को फाड़ दिया और मोटी ओढ़नी इनको उढ़ा दी ।(मिश्कात, किताबुल्-लिबास)

आज मुसलमान घरानों में औरतें ठीक वही लिबास पहनती हैं, जिस के बारे में हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इर्शाद फ़रमाया था, जहन्नमियों की दो किस्में हैं, जिनको मैंने देखा नहीं है, इसके बाद दोनों किस्मों की निशानियाँ बतायी गयी हैं। दूसरी किस्म के जहन्नमियों की निशानियाँ इन लफ़्जों में हैं ।

और जो औरतें कपड़े पहन कर भी नंगी ही रहें, दूसरों को रिझाएं और खुद भी दूसरों पर रीझें, उनके सर पर बालो की आराइश ऊंटनी के कोहानों की तरह हो, नाज़ से गरदन टेढ़ी करके चलें, वे जन्नत में दाखिल न होंगी, न उसकी खुश्बू पाएंगी, हालांकि जन्नत की खुश्बू बहुत दूर से आती है।'(मिश्कात, किताबुल जिनायात )

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चेहरा और हाथ-पैर के सिवा पूरा बदन छिपाने के बाद भी औरत का फ़ितरी हुस्न या ज़ेवर और लिबास वगैरह का बनाव सिंगार, जो खुद-ब-खुद बिला इरादा ज़ाहिर जो जाता हो, औरत अपने बाप, ससुर, बेटे, भाई, भतीजे, भांजे के सामने तो इस ज़ीनत और बनाव- सिंगार को ज़ाहिर कर सकती है, मगर इनके सिवा जितने मर्द हैं, उनके सामने ज़ाहिर करने की इजाज़त नहीं है।

हदीस:- हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इर्शाद फरमाया है अजनबियों में बन-संवर कर नाज़ व अंदाज़ से चलने वाली औरत ऐसी है, जैसी कियामत के दिन तारीकी कि उसमें कोई नूर नहीं।’ (तिर्मिज़ी)

खुद कुरआन पाक में अल्लाह तआला फ़रमाता है: तर्जुमा- और औरतें अपनी ज़ीनत को ज़ाहिर न करें, सिवाए उस ज़ीनत के, जो अपने आप ज़ाहिर हो जाए और अपने सीने पर दोपट्टे ओढ़े रहा करें।’ (सूरः नूर, पारा 17)

इस आयत का साफ़ मतलब यह है कि तुम अपनी तरफ़ से अपना बनाव-सिंघार और ज़ीनत व आराइश ग़ैरों से छिपाने की कोशिश करो, फिर भी अगर कोई चीज़ ज़ाहिर हो जाए, मगर तुममें यह जज़्बा और शौक हरगिज़ न हो कि अपना बनाव-सिंघार गैरों को दिखाओ,Aurat Ka Parda Aur Libas

सर और सीना ख़ास तौर पर ज़ीनत की जगह है, इसलिए इसको ढांकने और छिपाने की भी ख़ास ताकीद की गई है।

यह तो सतर का वह हुक्म है, जिसमें औरत अपने शौहर के सिवा महरम या गैर महरम किसी मर्द के सामने अपने चेहरे, हाथ और पैर के सिवा बदन का कोई हिस्सा नहीं खोल सकती। इसके बाद दूसरा हुक्म परदे का है।

जिन रिश्तेदारों के सामने चेहरा और हाथ-पैर खुला रखने की इजाज़त दी गयी है। उनके अलावा और जितने मर्द हैं, उनके सामने खुले चेहरे के साथ औरत को आने की इजाज़त नहीं है। किसी ज़रूरत से घर से बाहर जाना हो, तो इस तरह बाहर निकलना चाहिए कि चेहरा नज़र न आए। कुरआन मजीद में है-

तर्जुमा: अपने ऊपर अपनी चादरों से घूंघट डाल लिया करो।”(सूरः अहज़ाब)

इस आयत में ख़ास चेहरे को छिपाने का हुक्म है, क्योंकि घूंघट डालने का मक्सद चेहरे को छिपाना है, अब यह घूंघट से छिपाया जाए या बुर्के की नक़ाब से या किसी और तरीके से ।

यह हुक्म किसी ज़रूरत और मजबूरी से बाहर जाने के लिए है, सिर्फ तफ़रीह या बगैर मजबूरी के बाज़ार करने के लिए नहीं है । काम को पूरा करना या कराना शौहर का फ़र्ज़ है । हाँ अगर शौहर या कोई दूसरा मर्द न हो तो मजबूरन इसकी भी इजाज़त हैं।Aurat Ka Parda Aur Libas

आज की हमारी बहनें जिस तरह बन-ठन कर अपना हुस्न और बनाव सिंघार दिखाने के लिए बाहर आज़ादी से घूमती-फिरती हैं, कदीम जाहिलिय्यत में भी इसी तरह घूमा करती थीं। अल्लाह तआला ने हुक्म किया कि तुम वकार के साथ अपने घरों में जमी बैठी रहो।

कुरआन पाक में इर्शाद है: तर्जुमा-और अपने घरों में जमी रहो, कदीम जाहिलियत के तरीके पर अपने को दिखाती मत फिरो ।” (सूर अहज़ाब)

इस आयत के नाज़िल होने के बाद मुसलमान औरतें अपने चेहरे पर नकाब डालने लगीं और खुले चेहरे के साथ घुमने फिरने का रिवाज बन्द हो गया और बे-ज़रूरत घर से बाहर निकलना ही रुक गया।

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अल्लाह तआला मुसलमान औरतों को तौफ़ीक़ दे कि कुरआन व हदीस के अहकाम के मुताबिक़ अपने सतर और परदे का एहतिमाम रखें और मौजूदा दौर की बेहयाई और बेपरदगी से बचें। आमीनAurat Ka Parda Aur Libas

FAQ – औरत का पर्दा और लिबास

सवाल 1: इस्लाम में औरत के लिए पर्दे की क्या अहमियत है?
जवाब: इस्लाम में हया और पर्दे को बहुत अहमियत दी गई है। कुरआन में मोमिन औरतों को अपनी ज़ीनत की हिफाज़त करने और अपनी ओढ़नी को सीने पर डालने की हिदायत दी गई है। (सूरह अन-नूर 24:31)Aurat Ka Parda Aur Libas

सवाल 2: क्या कुरआन में औरतों के पर्दे का ज़िक्र है?
जवाब: जी हाँ। सूरह अन-नूर 24:31 में औरतों को अपनी ज़ीनत की हिफाज़त करने और ख़ुमुर यानी ओढ़नियों को अपने सीने पर डालने का हुक्म दिया गया है। सूरह अल-अहज़ाब 33:59 में भी बाहर निकलते समय अपने ऊपर चादरें डालने की हिदायत दी गई है।Aurat Ka Parda Aur Libas

सवाल 3: क्या सिर्फ़ कपड़े पहन लेना ही पर्दा है?
जवाब: पर्दे में सिर्फ़ कपड़ा ही नहीं, बल्कि लिबास की शरई शर्तें, हया, ज़ीनत की हिफाज़त और गैर-महरम से उचित व्यवहार भी शामिल हैं। कपड़े ऐसे होने चाहिए जो शरीर को ढकें और पारदर्शी न हों।Aurat Ka Parda Aur Libas

सवाल 4: क्या बहुत तंग या पारदर्शी कपड़े पहनना सही है?
जवाब: ऐसे कपड़े जो शरीर को ठीक से न ढकें या शरीर की बनावट को बहुत स्पष्ट करें, पर्दे के मक़सद के खिलाफ़ हैं। इसलिए लिबास ढीला और शरीर को पर्याप्त रूप से ढकने वाला होना चाहिए।Aurat Ka Parda Aur Libas

सवाल 5: गैर-महरम मर्द से क्या मतलब है?
जवाब: गैर-महरम वह मर्द है जिससे किसी औरत का निकाह शरई तौर पर हो सकता है। ऐसे लोगों के सामने पर्दे और हया के अहकाम का ध्यान रखना चाहिए।Aurat Ka Parda Aur Libas

सवाल 6: क्या घर से बाहर निकलते समय भी पर्दे का ध्यान रखना चाहिए?
जवाब: जी हाँ। अगर किसी ज़रूरत से बाहर जाना हो तो शरई हया और पर्दे का ध्यान रखना चाहिए। कुरआन में मोमिन औरतों को अपने ऊपर अपनी चादरें डालने की हिदायत दी गई है। (सूरह अल-अहज़ाब 33:59)Aurat Ka Parda Aur Libas

सवाल 7: क्या इस्लाम औरत को हर समय घर से बाहर निकलने से रोकता है?
जवाब: ऐसा कहना सही नहीं कि औरत किसी भी हालत में घर से बाहर नहीं निकल सकती। ज़रूरत और जायज़ कामों के लिए बाहर निकलने के साथ इस्लामी हया और पर्दे का ध्यान रखना चाहिए।Aurat Ka Parda Aur Libas

सवाल 8: क्या पर्दा केवल औरतों के लिए है?
जवाब: नहीं। इस्लाम ने मर्दों को भी निगाहों की हिफाज़त और पाकदामनी का हुक्म दिया है। (सूरह अन-नूर 24:30) इसके बाद मोमिन औरतों को भी अपनी निगाहों और पाकदामनी की हिफाज़त का हुक्म दिया गया है। (सूरह अन-नूर 24:31)Aurat Ka Parda Aur Libas

सवाल 9: पर्दे का असल मक़सद क्या है?
जवाब: पर्दे का मक़सद सिर्फ़ कपड़े से शरीर ढकना नहीं, बल्कि हया, पाकदामनी, इज़्ज़त और अल्लाह के हुक्म की पैरवी करना भी है।Aurat Ka Parda Aur Libas

सवाल 10: हमें पर्दे के बारे में क्या सीख मिलती है?
जवाब: हमें चाहिए कि इस्लामी अहकाम को समझकर, बिना किसी पर ताना या दबाव डाले, अपनी ज़िंदगी में लागू करने की कोशिश करें। साथ ही मर्द और औरत दोनों अपनी-अपनी निगाह, लिबास और हया की हिफाज़त करें।Aurat Ka Parda Aur Libas

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Aurat Ka Parda Aur Libas

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Aurat Ka Parda Aur Libas

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Aurat Ka Parda Aur Libas

जज़ाकल्लाह खैर….

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