Jitni Ayyashi Kar Lo Maut Nahi Talegi
दुनिया की ज़िन्दगी कितनी भी हसीन क्यों न हो, इंसान चाहे जितनी दौलत, आराम और ऐश-ओ-इशरत हासिल कर ले, मौत का वक़्त आने पर सब कुछ यहीं छोड़कर जाना पड़ता है। यही वह हक़ीक़त है जिसे इंसान अक्सर भूल जाता है।
सुलेमान बिन अब्दुल मलिक की ज़िन्दगी से जुड़ा यह वाक़िया हमें दुनिया की नापायदार ज़िन्दगी और आख़िरत की हक़ीक़त पर गौर करने का मौक़ा देता है। एक तरफ़ दुनिया की शान-ओ-शौकत और ऐश-ओ-इशरत है, तो दूसरी तरफ़ वही इंसान कुछ ही अरसे बाद एक तंग कब्र में होता है।
इस वाक़िए का मक़सद दुनिया की जायज़ नेमतों को छोड़ देना नहीं, बल्कि यह समझना है कि दुनिया हमारी मंज़िल नहीं, बल्कि एक इम्तिहान है। माल-दौलत, महल, हुस्न और जवानी सब फानी हैं, जबकि हमारा असल सफ़र आख़िरत की तरफ़ है।
आइए इस वाक़िए से सबक लेते हैं और अपने आप से सवाल करते हैं कि हम अपनी ज़िन्दगी का कितना हिस्सा दुनिया के पीछे और कितना हिस्सा अल्लाह तआला की रज़ा और आख़िरत की तैयारी में लगा रहे हैं।
जितनी अय्याशी कर लो मगर मौत ज़रूर आएगी,
सुलेमान बिन अब्दुल मलिक बड़ा खूबसूरत था। वह एक वक़्त में चार निकाह करता था। चार दिन के बाद चारों को तलाक देकर चार और करता था। फिर उनको तलाक देकर चार और करता था। बाँदिया अलग थीं लेकिन पैंतिस साल की उम्र में मर गया।
चालीस साल भी पूरे नहीं किए। दुनिया में कितनी अय्याशी की इसके मुकाबले में उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ हैं इक्तालिस साल उनके भी पूर नहीं हुए लेकिन उसने अल्लाह को राज़ी करना शुरू कर दिया। अब देखिए कि जब सुलेमान को कब्र में रखने लगे तो उसका जिस्म हिलने लगा तो उसके बेटे अय्यूब ने कहा मेरा बाप ज़िन्दा है।
हज़रत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ रहमतुल्लाह अलैह ने कहा बेटा तेरा बाप ज़िन्दा नहीं है, अज़ाब जल्दी शुरू हो गया है। जल्दी दफन करो हाँलाकि ज़ाहिरी तौर पर सुलेमान बिन अब्दुलमलिक बनू उमैय्या के खूबसूरत शहज़ादों में से था। अब्दुल अज़ीज़ रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं कि मैंने उसको कब्र में उतारा और चेहरे से कपड़े को हटाकर देखा तो चेहरा किबले से हटकर दूसरी तरफ पड़ा था और रंग स्याह हो गया था।
कब्र के कीड़ों ने जो छोड़ा तो कब्र की गर्मी ने हड्डियों को भी गला दिया, उसकी राख बना दी। वह खूबसूरत चेहरा वह हसीन आँखें, एक हदीस में आता है मेरे बन्दे दुनिया को हवस की नज़र से मत देख सबसे पहले कब्र में कीड़ा जिस चीज़ को खाता है वह तेरी आँख है। आँख झुका ले, नज़र को अपनी आँख को बेहया न बना।
ये आँखें इसलिए नहीं हैं कि तू औरों की बेटियों और बीवियों को देखे और नादानों के बनाए हुए महल देखकर कुछ साँस, कुछ घंटे, कुछ हफ़्तों के लिए करोड़ों के घर बनाकर बैठा हुआ है, करोड़ों के बंगले बनाकर बैठा हुआ है। इनसे बड़ा नादान भी कोई है जो गिरती हुई शाख़ पर आशियाना बनाए, जो टूटी हुई दीवारों पर घर की बुनियाद रखे।
जो गिरती हुई दीवार से टेक लगाने की कोशिश करे जो ऐसे जहाँ से दिल लगाने की कोशिश करे जो मछर का पर और धोके का घर और मिट्टी वाला घर है, मकड़ी का जाला है और जिसके पल का भी भरोसा न हो। इसी दुनिया ने हर एक से बगावत की, यह गद्दार दुनिया, यह बे वफा दुनिया न मेरे बाप के पास रही न मेरे पास रहेगी।
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आज हम उस टूट जाने वाले घर पर सब कुछ लगाकर बैठे हुए हैं। जब जनाज़ा कब्र में डलेगा, कीड़े खाएंगे, कब्र की तपिश उसके गोश्त को गलाएगी, उसकी हड्डियों को चूरा करेगी फिर एक दिन आएगा ज़मीन अंगड़ाई लेगी नीचे का ऊपर और ऊपर का नीचे और ऊपर से ज़ालिम हवा आएगी। इस शहज़ादे की हड्डियों की राख को उड़ाकर गुम कर देगी जैसे यहां पहले कुछ न था।
आज फिर कुछ न रहा यह मेरा यह तेरा यह कर लिया, यह कर रहा हूँ मेरे भाईयो यह सारी ज़िन्दगी की मेहनत जब मौत से ज़रब खाएगी तो नतीजा सिफर हो जाएगा तो उसकी तैयारी करो जिधर हर लम्हे हमारा सफर जारी है। जो मरता है उसकी कयामत तो आ जाती है। एक कयामत तो सारी काएनात की भी है।
अल्लाह तआला एतदाल से चलने की दावत देता है। हमारा मज़हब रहबानियत नहीं सिखाता कि दुनिया को छोड़कर बैठ जाओ।
FAQ – जितनी अय्याशी कर लो, मौत नहीं टलेगी
सवाल 1: इस वाक़िए का सबसे बड़ा सबक क्या है?
जवाब: सबसे बड़ा सबक यह है कि दुनिया की दौलत, हुस्न, जवानी और ऐश-ओ-इशरत सब फ़ानी हैं। इंसान को हमेशा अपनी आख़िरत की तैयारी करते रहना चाहिए।Jitni Ayyashi Kar Lo Maut Nahi Talegi
सवाल 2: क्या इस्लाम दुनिया की जायज़ नेमतों से मना करता है?
जवाब: नहीं। इस्लाम जायज़ तरीके से माल कमाने और दुनिया की नेमतों से फ़ायदा उठाने से मना नहीं करता। लेकिन दुनिया की मोहब्बत को दिल पर हावी करना और आख़िरत को भूल जाना सही नहीं।Jitni Ayyashi Kar Lo Maut Nahi Talegi
सवाल 3: मौत से कोई इंसान बच सकता है?
जवाब: नहीं। हर इंसान को मौत का सामना करना है। कुरआन मजीद में भी है कि हर जान को मौत का मज़ा चखना है।Jitni Ayyashi Kar Lo Maut Nahi Talegi
सवाल 4: कब्र की याद इंसान के लिए क्यों ज़रूरी है?
जवाब: कब्र की याद इंसान को अपनी असल मंज़िल की तरफ़ मुतवज्जेह करती है और गुनाहों से बचने तथा नेक अमल करने की फ़िक्र पैदा करती है।Jitni Ayyashi Kar Lo Maut Nahi Talegi
सवाल 5: क्या माल-दौलत आख़िरत में हमारे साथ जाएगी?
जवाब: दुनिया का माल यहीं रह जाता है। इंसान के साथ उसके नेक और बुरे अमल जाते हैं। इसलिए माल को अल्लाह की रज़ा वाले कामों में खर्च करना बड़ी नेमत है।Jitni Ayyashi Kar Lo Maut Nahi Talegi
सवाल 6: दुनिया की ज़िन्दगी को इस्लाम किस तरह देखने की तालीम देता है?
जवाब: दुनिया को इम्तिहान और आख़िरत की तैयारी का मौक़ा समझना चाहिए। इंसान दुनिया के काम भी करे, लेकिन अल्लाह तआला की इताअत और आख़िरत की फ़िक्र को न भूले।Jitni Ayyashi Kar Lo Maut Nahi Talegi
सवाल 7: जवानी और हुस्न हमेशा कायम रहते हैं?
जवाब: नहीं। जवानी, हुस्न, ताक़त और सेहत सब वक़्ती नेमतें हैं। वक़्त के साथ इनमें बदलाव आता है और आखिरकार इंसान को मौत का सामना करना पड़ता है।Jitni Ayyashi Kar Lo Maut Nahi Talegi
सवाल 8: मौत की तैयारी कैसे की जा सकती है?
जवाब: तौबा, नमाज़ की पाबंदी, नेक अमल, लोगों के हक़ अदा करना, हराम से बचना, सदक़ा-ए-जारिया करना और अल्लाह तआला की रज़ा हासिल करने की कोशिश करना मौत की बेहतर तैयारी में शामिल है।Jitni Ayyashi Kar Lo Maut Nahi Talegi
सवाल 9: क्या सिर्फ़ दुनिया छोड़ देना ही आख़िरत की तैयारी है?
जवाब: नहीं। इस्लाम रहबानियत की तालीम नहीं देता। इंसान हलाल रोज़गार, परिवार और दुनिया की ज़िम्मेदारियाँ निभाते हुए भी अल्लाह की इताअत और आख़िरत की तैयारी कर सकता है।Jitni Ayyashi Kar Lo Maut Nahi Talegi
सवाल 10: हमें इस वाक़िए के बाद क्या करना चाहिए?
जवाब: अपने अमल का जायज़ा लेना चाहिए और सोचना चाहिए कि हमारी ज़िन्दगी कहाँ खर्च हो रही है। दुनिया की ज़रूरतें पूरी करते हुए अल्लाह की रज़ा और आख़िरत को अपनी असल मंज़िल बनाना चाहिए।Jitni Ayyashi Kar Lo Maut Nahi Talegi
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Jitni Ayyashi Kar Lo Maut Nahi Talegi
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Jitni Ayyashi Kar Lo Maut Nahi Talegi
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Jitni Ayyashi Kar Lo Maut Nahi Talegi
खुदा हाफिज़…..
