07/08/2026
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हमबिस्तरी का सुन्नत तरीका क्या है? | कुरआन और सही हदीस की रौशनी में हर शादीशुदा मुसलमान ज़रूर पढ़े|Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai? | Quran Aur Sahih Hadees Ki Roshni Mein Har Shadishuda Musalman Zarur Padhe amazing story

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Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai?
Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai?

Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai?

शौहर और बीवी का रिश्ता इस्लाम में बहुत ही पाक, मुहब्बत भरा और रहमत वाला रिश्ता माना गया है। इस रिश्ते को मज़बूत बनाने के लिए इस्लाम ने सिर्फ़ हमबिस्तरी की इजाज़त ही नहीं दी, बल्कि उसके भी कुछ आदाब, दुआएँ और सुन्नत तरीके बताए हैं, ताकि यह अमल अल्लाह की रज़ा और बरकत का ज़रिया बने।

इस आर्टिकल में हम कुरआन और सही हदीस की रौशनी में हमबिस्तरी का सुन्नत तरीका, उससे पहले पढ़ी जाने वाली दुआ, शौहर-बीवी के हुक़ूक़, और उन अहम बातों को आसान ज़बान में जानेंगे जिनका ख़याल हर शादीशुदा मुसलमान को रखना चाहिए। अगर आप अपनी शादीशुदा ज़िंदगी को सुन्नत के मुताबिक़ और बरकत वाली बनाना चाहते हैं, तो इस लेख को आखिर तक ज़रूर पढ़ें।

अल्लाह रब्बुल ईज्ज़त इरशाद फ़रमाता है- तर्जुमा :- तो अब उन से सोहबत करो और तलब करो जो अल्लाह ने तुम्हारे नसीब में लिखा हो ।(तर्जुमा :- कन्जुल ईमान, पारा 2, सूरए बक्र, आयत 187 )

इस बात का हमेशा ख्याल रखे कि जब कभी भी हमबिस्तरी का इरादा हो तो येह जान ले के कही औरत हैज़ (माहवारी) की हालत में तो नहीं है ? चुनाँचे औरत से साफ साफ पूछ ले।

अगर औरत हैज़ की हालत में हो तो हरगिज़ हरगिज़ सोहबत न करें क्योंकि इस हालत में औरत से हमबिस्तरी करना बहुत बड़ा गुनाह है।

औरत का फर्ज़ है कि अगर वोह हैज़ की हालत में हो तो बे झिझक अपने शौहर को बता दें । अक्सर औरतें शादी की पहली रात (सुहाग रात) को शर्म की वजह से बताती नहीं हैं या कह भी दें तो मर्द सब्र नहीं कर पाते और हमबिस्तरी कर बैठते है,

और फिर इस जल्दबाज़ी की सज़ा उम्र भर डॉक्टरों और हकीमों की फीस की शक्ल में भुगत्ते फिरते हैं । लिहाजा मर्द और औरत दोनों को ऐसे मौकों पर सब्र से काम लेना चाहिये । कुछ मर्द मतलब प्रस्त होते है उन्हें सिर्फ अपने मतलब से ही लेना होता है

ये दूसरे की खुशी का कोई अहमियत नहीं देते.. वोह येह ही वसूल अपनी बीवी के साथ भी रखते है चुनानचे जब वोह सोहबत का इरादा करते हैं तो यह नहीं देखते कि औरत सोहबत करना चाहती है या नहीं, वह कही किसी बीमारी या दुख दर्द में मुबतेला तो नहीं है।

इन सब से उन्हें कोई मतलब नहीं होता वोह बेसबरी के साथ औरत पर टूट पड़ते हैं और अपना मतलब पूरा कर लेते है । इस हरकत से औरत की निगाह में मर्द की इज्ज़त कम हो जाती है और वोह मर्द को मतलब प्रस्त समझने लगती है, साथ ही सोहबत का वोह लुत्फ हासिल नहीं हो पता ।

हदीस:- रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम ने इरशाद फरमाया– “तुम में से जो कोई अपनी बीवी के पास जाए तो पर्दा कर ले और गधों की तरह न शुरू हो जाए” ।
(इब्ने माजा, जिल्द 1 बाब नं. 616, हदीस नं. 1990, सफा 538 )

हदीस:- हज़रत इमाम गज़ाली रजिअल्लाहो तआला अन्हो रिवायत करते हैं कि सरकारे आलम सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्ला, ने इरशाद फ़रमाया- ” मर्द को न चाहिये कि अपनी औरत पर जानवर की तरह गीरे, हमबिस्तरी से पहले कासिद (पैगाम पहुँचाने वाला) होता है”

सहाबा -ए-किराम ने अर्ज़ किया “या रसूलुल्लाह ! वोह कासिद क्या है ? आप ने इरशाद फ़रमाया”वोह बोस व किनार (चूम्मन, Kiss) वग़ैरा है” यानी हमबिस्तरी से पहले चुम्मन वगैरा से औरत को राजी करें। ( कीम्या-ए-सआदत, सफा नं. 266)

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हदीस :- उम्मुल मोमिनीन हज़रत आएशा रजिअल्लाहो तआला अन्हा से रिवायत है कि रसूले अकरम सल्लल्लम तआला अलैहि व सल्लम ने इरशाद फ़रमाया- -“जो मर्द अपनी बीवी का हाथ उसको बहलाने के लिए पकड़ता है, अल्लाह तआला उसके लिए एक नेकी लिख देता है,Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai?

जब मर्द प्यार से औरत के गले में हाथ डालता है उसके हक में दस नेकियाँ लिखी जाती है, और जब औरत से हमबिस्तरी करता है तो दुनिया और जो कुछ उसमें है उन सबसे बेहतर हो जाता है” ।(गुन्यतुत्तालेबीन, सफा 113)

हमबिस्तरी से पहले खुद बे चैन न हो जाए अपने आप पर पूरा इतमिनान रखे जल्दबाजी न करे पहले बीवी से प्यार मुहब्बत की बात चीत करे फिर बोस व किनार (चूम्मन, Kiss) वग़ैरा से उसको राजी करे और इसी दौरान दिल ही दिल में येह दुआ पढ़े-

दुआ :- बिस्मिल्लाहिल अलीयुल अज़ीमे अल्लाहो अकबर अल्लाहो अकबर तर्जमा :- अल्लाह के नाम से जो बुजुर्ग व बरतर अजमत वाला है अल्लाह बहुत बड़ा है अल्लाह बहुत बड़ा है ।

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इसके बाद जब मर्द, औरत, हमबिस्तरी का इरादा कर लें तो कपड़े जिस्म से अलग करने से पहले एक मरतबा “सूरए इख्लास” पढ़े- कुल हुवल्लाहो अहद 0 अल्लाहुस समद 0 लम-य-लिद ० वलम यूलद वलम य कुल्लाहु कुफुवन अहद 0
सूरए इख्लास पढ़ने के बाद यह दुआ पढ़े-
दुआ :- बिस्मिल्लाहि अल्लाहुम्मा जननिबनश शैताना व जननि बिश शैताना म रजकतना।Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai?

हदीस :- हजरत इब्ने अब्बास रजिअल्लाह तआला अन्हु से रिवायत है के रसूले अकरम सल्लल्लाहो तआला अलैह व सल्लम ने इरशाद फरमाया– “जो शख्स इस दुआ को हमबिस्तरी के वक्त पढ़ेगा

(वही दुआ जो उपर लिखी गई) तो अल्लाह उस पढ़ने वाले को अगर औलाद अता फरमाए तो उस औलाद को शैतान कभी भी नुकसान नही पहुँचा सकेगा ” (बुखारी शरीफ, जिल्द 3 सफा नं. 85. तिर्मिजी शरीफ, जिल्द 1 सफा 557)

होशियार : इस हदीस की तशरीह (अर्थ, Explanation) में हजुर गौसे आज़म शेख अब्दुल कादिर जीलानी व हजरत मुहक्किके इस्लाम शेख अब्दुल हक़ मोहदिस दहलवी, और आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खाँ रजिअल्लाहो तआला अन्हम इरशाद फरमाते है-

अगर कोई शख्स हमबिस्तरी के वक्त दुआ न पढ़े यानी शैतान से पनाह न माँगे तो उस शख्स की शर्मगाह से शैतान लिपट जाता हैं और उस मर्द के साथ शैतान भी उसके औरत से हमबिस्तरी करने लगता है।Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai?

और जो औलाद पैदा होती है वोह न फरमान, बुरी आदतों वाली, बेगैरत, बद्दीन, होती है शैतान की इस दखल अन्दाज़ी की वजह से औलाद में तबाहकारी आ जाती है” ।(गुन्यातुत्तालबीन, सफा 116, अश्अतुल लम्आत, फतावा-ए रजवीया, जिल्द 9 सफा 461)

हदीस : “बुखारी शरीफ” के एक हदीस में है की हज़रत सअद बिन ऊबादा रजिअल्लाहू तआला अन्हु ने फरमाया-
“अगर मैं अपनी बीवी के साथ किसी को देख लूँ तो तलवार से उस का काम तमाम कर दूँ”।

उन की इस बात को सुन कर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम ने इरशाद फरमाया- – “लोगों तुम्हें सआद की इस बात पर तअज्जुब आता है हालांकि मैं उन से बहुत ज़्यादा गैरत वाला हूँ और अल्लाह तआला मुझ से ज़्यादा ग़ैरत वाला है”। (बुखारी शरीफ, जिल्द 3. बाब नं. 137. सफा नं. 104)

क्या आप गवारा करेगे कि आप की बीवी के साथ आप के अलावा भी कोई और मर्द हमबिस्तरी करे । यकीनन अगर आप में ग़ैरत का ज़रा सा भी ज़र्रा मौजूद है तो आप यह हरगिज़ गवारा नहीं करेंगे।

फिर भला बताइये आप कैसे गवारा कर लेते है कि आप की बीवी के साथ शैतान मरदूद भी हमबिस्तरी करे ! लिहाज़ा इस मुसीबत से बचने के लिए जब भी हमबिस्तरी करे तो याद करके यह दुआ पढ़ लिया करें ।Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai?

गालेबन आज कल ज्यादा तर इस्लामी भाई एैसे होंगे जो हमबिस्तरी के वक्त दुआ नहीं पढ़ते । शायद यही वजह है कि औलादें बे गैरत, ना फरमान और दीन से दूर नज़र आ रही हैं ।

हमारा और आप का रोज़ मरह का मुशाहिदह है कि मसलन औलद से बाप कहता है बुजुर्गों की मजारात पर हाज़िर होना चाहिये, बेटा बुजुर्गों की मज़ारों पर जाने को जिना और कत्ल कर देने से ज्यादा बुरा समझता है ।

बाप का अकीदह है कि रसूलुल्लाह हमारे आका व मौला है, बेटा रसूले अकरम को अपना बड़ा भाई कहता हुआ नज़र आ रहा है, गर्ज के दुनियावी मामला हो या फिर दीनी, औलाद अपने बाप से बागी नज़र आती है। अल्लाह तआला मुसलमानों को तौफीक दें ।

FAQ (सवाल व जवाब)

1. हमबिस्तरी से पहले कौन-सी दुआ पढ़नी चाहिए?

हमबिस्तरी से पहले यह दुआ पढ़ना सुन्नत है:

“Bismillahi Allahumma Jannibnash Shaytana Wa Jannibish Shaytana Ma Razaqtana.”Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai?

सही हदीस के मुताबिक, अगर इस दुआ के बाद औलाद पैदा हो तो अल्लाह तआला उसे शैतान के नुकसान से महफूज़ रखते हैं।Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai?

2. क्या हैज़ (माहवारी) की हालत में हमबिस्तरी करना जायज़ है?

नहीं। कुरआन करीम के मुताबिक हैज़ की हालत में हमबिस्तरी करना हराम है। इस दौरान सब्र करना और पाक होने का इंतज़ार करना चाहिए।Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai?

3. क्या हमबिस्तरी से पहले प्यार और मुहब्बत का इज़हार करना सुन्नत है?

जी हाँ। हदीस में आया है कि शौहर को चाहिए कि वह जल्दबाज़ी न करे, बल्कि पहले प्यार, नरमी और मुहब्बत से अपनी बीवी का दिल खुश करे।Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai?

4. क्या हमबिस्तरी के दौरान जल्दबाज़ी करना सही है?

नहीं। इस्लाम शौहर और बीवी दोनों की खुशी और आराम का ख़याल रखने की तालीम देता है। जल्दबाज़ी और सख्ती से बचना चाहिए।Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai?

5. क्या शौहर-बीवी दोनों की रज़ामंदी ज़रूरी है?

जी हाँ। इस्लामी तालीमात के मुताबिक शौहर और बीवी दोनों को एक-दूसरे के जज़्बात, सेहत और आराम का ख़याल रखना चाहिए।Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai?

6. हमबिस्तरी से पहले सूरह इख़लास पढ़ना चाहिए?

कुछ उलमा ने नेक अमल के तौर पर इसका ज़िक्र किया है, लेकिन हमबिस्तरी से पहले सबसे मज़बूत और सही हदीस से साबित दुआ “Bismillahi Allahumma Jannibnash Shaytan…” है।Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai?

7. क्या हमबिस्तरी भी सवाब का ज़रिया बन सकती है?

जी हाँ। अगर शौहर-बीवी अल्लाह की रज़ा, सुन्नत की पैरवी और हलाल रिश्ते की नियत से यह अमल करें, तो इस पर भी सवाब मिलता है।Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai?

8. इस्लाम शौहर-बीवी के रिश्ते के बारे में क्या सिखाता है?

इस्लाम शौहर और बीवी के रिश्ते को मुहब्बत, रहमत, इज़्ज़त, हया और एक-दूसरे के हुक़ूक़ अदा करने पर क़ायम रखने की तालीम देता है।Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai?

9. अगर किसी को इस बारे में जानकारी न हो तो क्या करना चाहिए?

उसे चाहिए कि कुरआन, सही हदीस और भरोसेमंद अहले-इल्म की रहनुमाई से इस्लामी आदाब सीखे और बिना इल्म के किसी बात पर अमल न करे।Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai?

10. इस लेख का सबसे अहम पैग़ाम क्या है?

निकाह और हमबिस्तरी का रिश्ता सिर्फ़ जिस्मानी ज़रूरत नहीं, बल्कि इबादत और सुन्नत भी है। अगर इसे इस्लामी आदाब, दुआओं और अच्छे अख़लाक़ के साथ निभाया जाए, तो यह दुनिया और आख़िरत दोनों में बरकत का ज़रिया बनता है।Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai?

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai?

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai?

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Hambistari Ka Sunnat Tariqa Kya Hai?

जज़ाकल्लाह खैर….

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