06/08/2026
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हज़रत अली (रज़ि.) की शान और फ़ज़ीलत | सही हदीस की रौशनी में हर मुसलमान ज़रूर पढ़े |Hazrat Ali (R.A.) Ki Shaan Aur Fazilat | Sahi Hadees Ki Roshni Mein Har Musalman Zarur Padhe amazing story

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Hazrat Ali (R.A.) Ki Shaan Aur Fazilat
Hazrat Ali (R.A.) Ki Shaan Aur Fazilat

Hazrat Ali (R.A.) Ki Shaan Aur Fazilat

हज़रत अली (रज़ियल्लाहु अन्हु) इस्लाम की उन महान हस्तियों में से हैं जिनकी शान और फ़ज़ीलत कुरआन, सही हदीस और पूरी उम्मत में मशहूर है। आप नबी-ए-करीम ﷺ के चचेरे भाई, दामाद और अहले-बैत के अज़ीम फ़र्द थे। आपकी बहादुरी, इल्म, तक़वा और अल्लाह व उसके रसूल ﷺ से गहरी मुहब्बत की मिसालें इस्लामी तारीख़ में हमेशा याद रखी जाएंगी।

इस आर्टिकल में हम सही हदीस की रौशनी में हज़रत अली (रज़ि.) की शान, फ़ज़ीलत और उनकी ज़िंदगी के अहम वाक़ियात जानेंगे। अगर आप हज़रत अली (रज़ियल्लाहु अन्हु) की महान शख्सियत को बेहतर तरीके से समझना चाहते हैं, तो इस आर्टिकल को आखिर तक ज़रूर पढ़ें।

आपका शजरए नसब यह है अली इब्न अबी तालिब बिन अब्दुल मुत्तलिब बिन हाशिम बिन अब्द मोनाफ् बिन कसा बिन कलाब बिन मर्रा बिन कअब बिन लुई बिन ग़ालिब बिन फहरा इब्न मालिक बिन नज़र इब्न कनाना।

अबुल हसन व अबू तोराब कुनीयत हैं जो नबी-ए-करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम का अता करदा है। माँ का नाम फातमा बिन्त असद बिन हाशिम है। आप बच्चों में सबसे पहले ईमान लाये।

अशरए मोबश्शिरा में से एक हैं। सैयदतुन निसा अलआलमीन सैय्यदा फातिमा रजियल्लाहु अन्हा के शौहर मोहतरम, रसूलल्लाह के दामाद, साबिकीन अव्वलीन में से एक। आपने अपने बचपन में भी बुत परस्ती न की। हिजरत की रात अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी जगह लिटा दिया कि लोगों की अमानतें वगैरह उनके हवाले कर के फिर हिजरत करना।

नबी-ए-करीम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के साथ तमाम ग़ज़वात में शरीक हुए। सिवाए तबूक के क्योंकि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने इस मौके पर उन्हें मदीना का ख़लीफा बना दिया था।

तमाम गज़वात में नुमायाँ खिदमात अन्जाम दीं। मुख्तलिफ मौकों पर लवाए इस्लाम उन्हीं को दिया गया।

आपकी फज़ीलत अहादीस की रौशनी में :-

हज़रात शेखैन ने सऊद इब्ने अबी वकास से रिवायत किया कि जब रसूलल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने ग़ज़वए तबूक में आपको मदीना का खलीफा बना दिया तो अली रज़ियल्लाहु अन्हु ने अर्ज़ किया। “तख्लपनी फिन्निसाये वस्सिबयान”। मुझे बच्चों और औरतों में आप छोड़ रहे हैं।

क्या तुम इस बात पर राजी नही कि जिस तरह मूसा अलैहिस्सलाम के बाद हारून अलैहिस्सलाम ने मर्तबा लिया। ऐसे तुम रहो। सिवाए इसके कि मेरे बाद कोई नबी नहीं। और बुखारी व मुस्लिम ने तखरीज की सहल इब्न सअद से कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने खैबर के दिन फरमाया कि कल ऐसे को झण्डा दूंगा जिसके हाथ पर अल्लाह फतह देगा।

अल्लाह व रसूल उससे मुहब्बत करते हैं वह अल्लाह व रसूल से मुहब्बत करता है। रात भर लोग इस फिक्र में रहे कि सुबह झण्डा किसको दिया जाता है और सब के सब उसकी उम्मीद रखते थे तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया अइना अली। अली कहाँ हैं। कहा गया कि उनकी आँखें दुख रही हैं तो वह तशरीफ़ लाये तो नबी-ए-करीम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने लोआबे दहन उनकी आँखों में डाला और उनके लिए दुआ की तो उन्हें शिफा मिल गयी।

गोया उन्हें कोई तकलीफ़ न थीं चुनान्चे आपको झण्डा दिया गया और फतह हुई।

मुस्लिम ने सअद बिन वकास से तखरीज की। जब आयत मुबाहिला नाज़िल हुई तो नबी-ए-करीम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने अली, फातिमा, हसन व हुसैन को बुलाया। “फकाला अल्लाहुम्मा हाऊलाये अहली”।

तिर्मिजी ने अबू सरहहा व जैद इब्न अरकम से रिवायत की है कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया “मन कुन्तो मौलाहो फअली मौलाहो। जिसका मैं मौला हूँ अली उसके मौला हैं। और तिबरानी ने यूँ रिवायत की ऐ अल्लाह जो उन से मोहब्बत रखे तू उस से मोहब्बत कर और जो उनसे दुश्मनी करे उसको दुश्मन रख।

तिर्मिज़ी ने इब्न उमर से रिवायत की। यानी तुम दुनिया व आखिरत में मेरे भाई हो।

ये भी पढ़ें: आयतुल कुर्सी की फ़ज़ीलत: 10 हैरतअंगेज़ फ़ज़ाइल और बरकतें | कुरआन व हदीस की रोशनी में |

मुस्लिम ने हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु से तखरीज की। यानी मुझसे मोमिन मोहब्बत रखेगा और मुनाफिक बोग्ज़ रखेगा। यह ही नबी उम्मी ने मुझसे फरमाया।

तिर्मिजी व हाकिम ने अली से रिवायत की। नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया मैं इल्म का शहर हूँ। अली उसके दरवाज़े हैं।Hazrat Ali (R.A.) Ki Shaan Aur Fazilat

अबू यअला और बज़ार ने सअद बिन वकास से तख़रीज जिस ने अली को अज़ियत दी उसने मुझे तकलीफ पहुँचाया।

दूसरी हदीस में यूँ भी आया है कि दो जमाअतें अली की मोहब्बत में हलाक होंगी। एक हद से ज़्यादा मोहब्बत करने की वजह से और एक अदावत रखने की वजह से।

तिबरानी औसत ने उम्मे सलमा से तखरीज की। कालत समेअता रसूलल्लाहे सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम बकौले अली. अली कुरआन के साथ हैं और कुरआन अली के साथ। दोनों एक दूसरे से अलग न होंगे यहाँ तक कि हौज़ पर मुलाकात करेंगे। (तारीखुल खोलफा)Hazrat Ali (R.A.) Ki Shaan Aur Fazilat

अल्लाह रब्बुल इज्ज़त हमे कहने सुनने से ज्यादा अमल की तौफीक दे, हमे एक और नेक बनाए, सिरते मुस्तक़ीम पर चलाये, हम तमाम को नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और इताअत की तौफीक़ आता फरमाए, खात्मा हमारा ईमान पर हो। जब तक हमे ज़िन्दा रखे इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखे, आमीन ।

FAQ (सवाल व जवाब)

1. हज़रत अली (रज़ियल्लाहु अन्हु) कौन थे?

हज़रत अली (रज़ियल्लाहु अन्हु) नबी-ए-करीम ﷺ के चचेरे भाई, दामाद और अहले-बैत के अज़ीम फ़र्द थे। आप इस्लाम कबूल करने वालों में सबसे पहले बच्चों में शामिल थे और अशरा-ए-मुबश्शरा में भी आपका नाम है।Hazrat Ali (R.A.) Ki Shaan Aur Fazilat

2. हज़रत अली (रज़ि.) की सबसे बड़ी फ़ज़ीलत क्या है?

सही हदीसों में नबी ﷺ ने हज़रत अली (रज़ि.) की कई फ़ज़ीलतें बयान फ़रमाई हैं। ख़ैबर के दिन झंडा उन्हें देना, उनसे मोहब्बत की तालीम देना और उनकी इल्मी व बहादुरी की तारीफ़ करना उनमें से कुछ हैं।Hazrat Ali (R.A.) Ki Shaan Aur Fazilat

3. क्या नबी ﷺ हज़रत अली (रज़ि.) से मोहब्बत करते थे?

जी हाँ। सही हदीसों में आता है कि नबी ﷺ ने फ़रमाया कि अल्लाह और उसका रसूल उससे मोहब्बत करते हैं और वह अल्लाह और उसके रसूल से मोहब्बत करता है, और यह फ़ज़ीलत हज़रत अली (रज़ि.) के बारे में बयान फ़रमाई गई।Hazrat Ali (R.A.) Ki Shaan Aur Fazilat

4. ग़ज़वा-ए-ख़ैबर में हज़रत अली (रज़ि.) का क्या किरदार था?

ग़ज़वा-ए-ख़ैबर के मौके पर नबी ﷺ ने झंडा हज़रत अली (रज़ि.) को दिया। अल्लाह तआला ने उनके हाथों मुसलमानों को फ़तह अता फ़रमाई।Hazrat Ali (R.A.) Ki Shaan Aur Fazilat

5. क्या हज़रत अली (रज़ि.) अहले-बैत में शामिल हैं?

जी हाँ। हज़रत अली (रज़ियल्लाहु अन्हु), सैय्यदा फ़ातिमा (रज़ि.), हज़रत हसन (रज़ि.) और हज़रत हुसैन (रज़ि.) अहले-बैत में शामिल हैं।Hazrat Ali (R.A.) Ki Shaan Aur Fazilat

6. हज़रत अली (रज़ि.) से मोहब्बत का क्या महत्व है?

हर मुसलमान के लिए सभी सहाबा-ए-किराम और अहले-बैत से मोहब्बत रखना ईमान का हिस्सा है। साथ ही किसी भी सहाबी के बारे में ग़ुलू (हद से बढ़ना) या दुश्मनी से बचना चाहिए।Hazrat Ali (R.A.) Ki Shaan Aur Fazilat

7. हज़रत अली (रज़ि.) की ज़िंदगी से हमें क्या सीख मिलती है?

हज़रत अली (रज़ि.) की ज़िंदगी हमें ईमान, इल्म, बहादुरी, सब्र, इंसाफ़, तक़वा और अल्लाह व उसके रसूल ﷺ की इताअत का सबक देती है।Hazrat Ali (R.A.) Ki Shaan Aur Fazilat

8. इस लेख का मुख्य संदेश क्या है?

इस लेख का मुख्य संदेश यह है कि हज़रत अली (रज़ियल्लाहु अन्हु) की शान और फ़ज़ीलत को कुरआन और सही हदीस की रौशनी में समझें, उनसे मोहब्बत रखें और उनकी नेक सीरत से अपनी ज़िंदगी को संवारने की कोशिश करें।Hazrat Ali (R.A.) Ki Shaan Aur Fazilat

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Hazrat Ali (R.A.) Ki Shaan Aur Fazilat

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Hazrat Ali (R.A.) Ki Shaan Aur Fazilat

जज़ाकल्लाह खैर….

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