Haiz Ke Dino Mein Namaz Kab Maaf Hoti Hai?
क्या हैज़ (माहवारी) के दिनों में हर नमाज़ माफ़ हो जाती है? अगर नमाज़ पढ़ते-पढ़ते हैज़ शुरू हो जाए तो क्या हुक्म है? और अगर खून बीच में रुक जाए तो नमाज़ कब से शुरू करनी चाहिए? ऐसे कई सवाल हैं जिनका सही जवाब हर मुस्लिम बहन को मालूम होना चाहिए।
इस आर्टिकल में हम हैज़ के दौरान नमाज़, पाकी, खून रुकने की सूरत, गुस्ल, क़ज़ा नमाज़ और शरीअत के अहम मसाइल को आसान भाषा में समझेंगे। ये मसाइल क़ुरआन, हदीस और फ़िक़्ह की रौशनी में बयान किए गए हैं ताकि हर मुस्लिम बहन सही तरीके से अपनी इबादत अदा कर सके और किसी गलतफ़हमी का शिकार न हो।
अगर आप हैज़ से जुड़े इस्लामी अहकाम को सही और आसान तरीके से समझना चाहती हैं, तो इस पूरे आर्टिकल को आखिर तक ज़रूर पढ़ें। इंशाअल्लाह, यह जानकारी आपके लिए और दूसरों तक इल्म पहुँचाने का ज़रिया भी बनेगी।
मसला
हैज़ (माहवारी) के दिनों में यह ज़रूरी नहीं है कि बराबर खून आता ही रहे, कायदे में जब हैज़ का खून आये तो आ़दत के दिनों के अन्दर या दस दिन दस रात के अन्दर-अन्दर बीच में जो ऐसा वक़्त गुज़रेगा जिसमें खून न आया कभी दो घण्टे, कभी एक घण्टा, कभी रात, कभी दिन साफ रही, फिर खून आ गया। तो यह एक दिन जो साफ रहने का था हैज़ में शुमार होगा।
मसला
किसी औरत को पिछले हैज़ के बाद पन्द्रह दिन गुज़र जाने पर खून आया, उसने समझा कि यह हैज़ है और नमाज़ें न पढ़ीं। फिर वह तीन दिन तीन रात पूरा होने से पहले रुक गया, और फिर पन्द्रह-बीस दिन कुछ न आया, तो हैज़ समझकर जो नमाज़ें छोड़ी थीं उनकी कज़ा पढ़ना फर्ज़ है।
मसला
दो हैज़ के दरमियान पाक रहने की मुद्दत कम-से-कम पन्द्रह दिन है और ज़्यादा की कोई हद नहीं। अगर हैज़ आना बन्द हो जाये और महीनों न आये तो जितने दिन भी खून न आये पाक समझी जायेगी।
मसला
अगर किसी ने नमाज़ का वक़्त हो जाने पर फर्ज़ नमाज़ पढ़नी शुरू कर दी और नमाज़ के दरमियान हैज़ आ गया तो नमाज़ फासिद हो गयी, और माहवारी के दिन गुज़र जाने पर नमाज़ पढ़ने में देर लगायी यहाँ तक कि वक़्त ख़त्म होने के करीब हो गया और उस वक़्त हैज़ आ गया तो उस वक़्त की नमाज़ भी माफ हो गयी। अब उसकी कज़ा लाज़िम न होगी। ये भी पढ़ें: निफास क्या है? | बच्चे की पैदाइश के बाद खून, गुस्ल, नमाज़ और पाकी के सभी इस्लामी मसाइल|Nifas Kya Hai? |
मसला
अगर सुन्नत या नफिल नमाज़ पढ़ते हुए हैज़ आ गया तो नमाज़ फ़ासिद हो गयी और उसकी कज़ा लाज़िम होगी।
मसला
अगर दस दिन से कम हैज़ आया और ऐसे वक़्त खून बन्द हुआ कि नमाज़ का वक़्त बिल्कुल तंग है, कि जल्दी और फुर्ती से गुस्ल अदा कर सकती है। और उसके बाद बिल्कुल ज़रा-सा वक़्त बचेगा जिस में सिर्फ एक बार अल्लाहु अकबर कह सकती है, इससे ज़्यादा कुछ नहीं पढ़ सकती, तब भी उस वक़्त की नमाज़ वाजिब हो जायेगी।
गुस्ल करके अल्लाहु अकबर कहकर फर्ज़ नमाज़ शुरू कर दे और पूरी पढ़ ले, अलबत्ता अगर फज्र की नमाज़ पढ़ते हुए सूरज निकल आया तो नमाज़ फ़ासिद हो जायेगी, उसको सूरज ऊँचा हो जाने के बाद पढ़ना लाज़िम होगा और कज़ा पढ़नी पड़ेगी। और अगर इससे भी कम वक़्त मिला जिसमें गुस्ल और तकबीरे तहरीमा यानी अल्लाहु अकबर दोनों की गुंजाइश न थी तो उस वक़्त की कज़ा लाज़िम नहीं।
मसला
अगर पूरे दस दिन दस रात हैज़ आया, और ऐसे वक़्त खून बन्द हुआ कि बिल्कुल ज़रा-सा वक़्त है कि एक दफा अल्लाहु अकबर कह सकती है, इससे ज़्यादा नहीं पढ़ सकती और नमाज़ की गुंजाइश नहीं तो इस सूरत में नमाज़ वाजिब हो जाती है, उसकी कज़ा पढ़ना लाज़िम है। ये भी पढ़ें: कब्रों पर औरतों का जाना, चिराग़ जलाना और सज्दा करना | हदीस की रौशनी में इस्लाम का सही हुक्म |
FAQ – सवाल और जवाब
1. हैज़ (माहवारी) के दिनों में क्या नमाज़ माफ़ हो जाती है?
जी हाँ। हैज़ के दौरान औरत पर नमाज़ माफ़ होती है और इन नमाज़ों की क़ज़ा भी नहीं होती।Haiz Ke Dino Mein Namaz Kab Maaf Hoti Hai?
2. अगर नमाज़ पढ़ते-पढ़ते हैज़ शुरू हो जाए तो क्या करें?
अगर फ़र्ज़ नमाज़ के दौरान हैज़ शुरू हो जाए तो नमाज़ टूट जाती है। हैज़ खत्म होने के बाद उस नमाज़ की क़ज़ा का हुक्म उसकी सूरत के मुताबिक होगा।Haiz Ke Dino Mein Namaz Kab Maaf Hoti Hai?
3. अगर खून तीन दिन पूरे होने से पहले बंद हो जाए तो क्या वह हैज़ माना जाएगा?
नहीं। अगर खून तीन दिन (72 घंटे) पूरे होने से पहले बंद हो जाए, तो वह हैज़ नहीं माना जाएगा। ऐसी सूरत में छोड़ी गई नमाज़ों की क़ज़ा पढ़नी होगी।Haiz Ke Dino Mein Namaz Kab Maaf Hoti Hai?
4. दो हैज़ के बीच कम-से-कम कितने दिन का पाक होना ज़रूरी है?
दो हैज़ के बीच कम-से-कम 15 दिन पाक रहना ज़रूरी है। इससे कम अवधि में आने वाला खून हैज़ नहीं माना जाता।
5. अगर हैज़ के दौरान बीच-बीच में खून रुक जाए तो क्या वह पाकी है?
अगर यह रुकावट हैज़ की मुद्दत (अधिकतम 10 दिन) के अंदर है, तो बीच का साफ़ समय भी हैज़ का हिस्सा माना जाएगा।Haiz Ke Dino Mein Namaz Kab Maaf Hoti Hai?
6. अगर हैज़ खत्म होने के बाद नमाज़ का बहुत कम वक़्त बचे तो क्या करें?
अगर गुस्ल करके कम-से-कम तकबीर-ए-तहरीमा (अल्लाहु अकबर) कहने का वक़्त मिल जाए, तो उस वक़्त की नमाज़ वाजिब हो जाती है।Haiz Ke Dino Mein Namaz Kab Maaf Hoti Hai?
7. क्या हैज़ के दौरान नफ़्ल और सुन्नत नमाज़ पढ़ी जा सकती है?
नहीं। हैज़ की हालत में कोई भी नमाज़ नहीं पढ़ी जाती। अगर नफ़्ल या सुन्नत नमाज़ के दौरान हैज़ शुरू हो जाए तो वह नमाज़ टूट जाती है।Haiz Ke Dino Mein Namaz Kab Maaf Hoti Hai?
8. हैज़ से जुड़े मसाइल सही तरह से सीखना क्यों ज़रूरी है?
क्योंकि हैज़ के अहकाम का सीधा संबंध नमाज़, रोज़ा, गुस्ल और दूसरी इबादतों से है। सही जानकारी होने से इबादतें शरीअत के मुताबिक़ अदा होती हैं और गलतियों से बचा जा सकता है।Haiz Ke Dino Mein Namaz Kab Maaf Hoti Hai?
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Haiz Ke Dino Mein Namaz Kab Maaf Hoti Hai?
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Haiz Ke Dino Mein Namaz Kab Maaf Hoti Hai?
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Haiz Ke Dino Mein Namaz Kab Maaf Hoti Hai?
जज़ाकल्लाह खैर….
