Kya Murde Zinda Hote Hain?
मौत हर इंसान को आनी है, लेकिन बहुत से लोगों के दिल में यह सवाल होता है कि क्या मरने के बाद इंसान बिल्कुल खत्म हो जाता है, या उसकी कोई ज़िंदगी बाकी रहती है? इस्लाम हमें बताता है कि मौत के बाद इंसान एक नई दुनिया में दाखिल होता है जिसे बरज़ख कहा जाता है। यह ज़िंदगी हमारी दुनियावी ज़िंदगी से बिल्कुल अलग होती है।
इस आर्टिकल में हम कुरआन की आयतों और सही हदीसों की रोशनी में जानेंगे कि बरज़ख क्या है, क्या मुर्दे किसी तरह ज़िंदा होते हैं, कब्र की ज़िंदगी की हक़ीक़त क्या है, और मौत के बाद इंसान पर क्या-क्या गुज़रता है। अगर आप आखिरत की तैयारी करना चाहते हैं और इस अहम इस्लामी मसले को सही तरीके से समझना चाहते हैं, तो इस आर्टिकल को आखिर तक ज़रूर पढ़ें।
हदीसों को पढ़ने से साफ़ मालूम होता है कि मरने वाले को देखने में हम भले ही मुर्दा समझते हैं लेकिन सच तो यह है कि वह ज़िंदा होता है। यह दूसरी बात है कि उसकी जिंदगी हमारी इस ज़िंदगी से बिल्कुल अलग होती है।
नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया है कि मुर्दे की हड्डी तोड़ना ऐसा ही है जैसे ज़िंदगी में उसकी हड्डी तोड़ी जाए। एक बार प्यारे नबी सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम हज़रत उम्रू बिन हज़म रज़ियल्लाहु अन्हु को एक क़ब्र से तकिया लगाये हुए बैठे देखा तो फ़रमाया कि इस क़ब्र वाले को तकलीफ़ न दो।’
जब इंसान मर जाता है तो इस दुनिया से निकल कर बर्ज़ख की दुनिया में चला जाता है चाहे अभी उसे कब्र में भी न रखा जाए उसमें समझ होती है। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि जब मुर्दा चारपाई वगैरह पर रख दिया जाता है।
और उसके बाद कब्रिस्तान ले जाने के लिए लोग उसे उठाते हैं तो अगर वह नेक था तो कहता है कि मुझे जल्द ले चलो और अगर वह नेक नहीं था तो घर वालों से कहता है कि हाय मेरी बर्बादी! मुझे कहां ले जाते हो? फिर फ़रमाया कि इंसान के सिवा हर चीज़ उसकी आवाज़ सुनती है। अगर इंसान उसकी आवाज़ सुन ले तो ज़रुर बेहोश हो जाये।’
मौत के बाद से कियामत कायम होने तक हर आदमी पर जो ज़माना गुज़रता है उसको बर्जख कहा जाता है। बर्जुख का मतलब है पर्दा और आड़। चूंकि यह ज़माना दुनिया और आख़िरत के दर्मियान एक आड़ होता है इसलिए उसे बर्जख कहते हैं।
चूंकि इंसान खुद अपने मुर्दों को दफन किया करते हैं इसलिए हदीसों में बर्ज़ख के आराम या अज़ाब के बारे में कब्र ही के लफ़्ज़ आते हैं। इसका यह मतलब नहीं कि जिन इंसानों को आग में जला दिया जाता है या पानी में बहा दिया जाता है, वह बर्ज़ख में जिंदा नहीं रहते।
सच तो यह है कि अज़ाब व सवाब का तअल्लुक रूह से है और यह बात भी याद रहे कि अल्लाह तआला जले हुए ज़रों को भी जमा करके अज़ाब व सवाब देने की ताकत रखता है। हदीस शरीफ में आया है कि पहले ज़माने में एक आदमी ने बहुत ज़्यादा गुनाह किये।
जब वह मरने लगा तो उसने अपने बेटों को वसीयत की कि जब मैं मर जाऊं तो मुझे जला देना और मेरी राख को आधी धरती में बिखेर देना और आधी समुद्र में बहा देना। यह वसीयत करके उसने कहा कि अगर खुदा मुझ पर कादिर हो गया और उसने इसके बावजूद भी मुझे ज़िंदा कर लिया तो मुझे ज़रूर ही ज़बरदस्त अज़ाब देगा जो मेरे अलावा सारी दुनिया में और किसी को न देगा।
जब वह मर गया तो उसके बेटों ने ऐसा ही किया जैसा कि उसने वसीयत की थी। फिर अल्लाह तआला ने समुद्र को हुक्म दिया कि इस आदमी के जिस्म के ज़र्रो को जमा कर दो। समुद्र ने अपने अंदर के सारे ज़रों को जमा कर दिया और इसी तरह धरती को भी हुक्म दिया।
उसने भी उस आदमी के जिस्म के सारे ज़र्रो को जमा कर दिया। सारे ज़र्रे जमा फरमाकर अल्लाह तआला ने उसे जिंदा फ़रमा दिया। फिर उस से फ़रमाया कि तूने ऐसी वसीयत क्यों की? उसने अर्ज़ किया, ऐ मेरे पालनहार! तेरे डर से मैंने ऐसा किया और आप खूब जानते हैं। इस पर अल्लाह तआला ने उसे बख़्श दिया।’Kya Murde Zinda Hote Hain?
हदीस शरीफ की रिवायत से यह भी मालूम होता है कि मोमिन बंदे बर्ज़ख में एक दूसरे से मुलाकात भी करते हैं और इस दुनिया से जाने वाले से यह भी पूछते हैं कि फ़्लां का क्या हाल है और किस हालत में है।
हज़रत सईद बिन जुबैर रज़ियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं कि जब मरने वाला मर जाता है तो बर्ज़ख़ में उसकी औलाद उसका इस तरह स्वागत करती है जैसे दुनिया में किसी बाहर से आने वाले का स्वागत किया जाता है। और हज़रत साबित बिनानी (रह०) फ़रमाते थे कि जब मरने वाला मर जाता है तो बर्ज़ख की दुनिया में उसके रिश्तेदार-नातेदार जो पहले मर चुके हैं,
उसे घेर लेते हैं और वे आपस में मिलकर उस खुशी से भी ज़्यादा खुश होते हैं जो दुनिया में किसी बाहर से आने वाले से मिलकर होती है।”
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हज़रत कैस बिन बीसा रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि जो आदमी ईमान वाला नहीं होता, उसे मुर्दों से बात-चीत करने की इजाज़त नहीं दी जाती। किसी ने अर्ज़ किया, ऐ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम! क्या मुर्दे बात-चीत भी करते हैं? फ़रमाया, हां। और एक दूसरे से मुलाकात भी करते हैं।’
हज़त आइशा रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाती हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि जो आदमी अपने मुसलमान भाई की कब्र की ज़ियारत करता है और उससे परिचित होता है, यहां तक कि ज़ियारत करने वाला उठकर चला जाता है।’Kya Murde Zinda Hote Hain?
FAQ (सवाल व जवाब)
1. क्या मुर्दे मौत के बाद ज़िंदा रहते हैं?
जवाब: जी हाँ। इस्लाम के मुताबिक इंसान मौत के बाद बरज़ख की ज़िंदगी में दाखिल होता है। यह ज़िंदगी हमारी दुनियावी ज़िंदगी से अलग होती है और इसकी हक़ीक़त अल्लाह तआला ही बेहतर जानता है।Kya Murde Zinda Hote Hain?
2. बरज़ख क्या है?
जवाब: बरज़ख वह दौर है जो मौत और क़यामत के बीच होता है। इसी दौरान इंसान अपनी कब्र या बरज़ख की ज़िंदगी में रहता है और अपने आमाल के मुताबिक नेमत या अज़ाब पाता है।Kya Murde Zinda Hote Hain?
3. क्या मुर्दों को कब्र में एहसास होता है?
जवाब: सही हदीसों से मालूम होता है कि बरज़ख में मुर्दों को एहसास होता है और उनकी ज़िंदगी दुनियावी ज़िंदगी से अलग अंदाज़ की होती है।Kya Murde Zinda Hote Hain?
4. क्या मोमिन बरज़ख में एक-दूसरे से मिलते हैं?
जवाब: कुछ रिवायतों में ज़िक्र मिलता है कि मोमिन बरज़ख में एक-दूसरे से मुलाक़ात करते हैं और नए आने वालों का हाल पूछते हैं।Kya Murde Zinda Hote Hain?
5. क्या कब्र की ज़ियारत करने पर मुर्दा पहचानता है?
जवाब: हदीसों में आता है कि जब कोई मुसलमान अपने पहचान वाले की कब्र की ज़ियारत करता है और सलाम करता है, तो अल्लाह तआला उसे उस सलाम का जवाब देने की तौफ़ीक़ देता है।Kya Murde Zinda Hote Hain?
6. क्या जला दिए गए या समुद्र में बहा दिए गए लोगों को भी बरज़ख की ज़िंदगी मिलती है?
जवाब: जी हाँ। बरज़ख की ज़िंदगी का ताल्लुक़ रूह से है। अल्लाह तआला हर चीज़ पर क़ादिर है और हर इंसान को दोबारा ज़िंदा करने की पूरी क़ुदरत रखता है।Kya Murde Zinda Hote Hain?
7. क्या मौत के बाद तौबा का मौका मिलता है?
जवाब: नहीं। मौत के बाद अमल का दरवाज़ा बंद हो जाता है। इसलिए इंसान को अपनी ज़िंदगी में ही तौबा करके नेक आमाल करने चाहिए।Kya Murde Zinda Hote Hain?
8. हमें इस लेख से क्या सबक मिलता है?
जवाब: यह कि दुनिया की ज़िंदगी अस्थायी है। हर इंसान को मौत का सामना करना है, इसलिए हमें अल्लाह की फ़रमांबरदारी, नेक अमल और आख़िरत की तैयारी में लगे रहना चाहिए।Kya Murde Zinda Hote Hain?
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Kya Murde Zinda Hote Hain?
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Kya Murde Zinda Hote Hain?
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Kya Murde Zinda Hote Hain?
जज़ाकल्लाह खैर….
