Hazrat Ali Ki 50 Nasihatein
हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु इस्लामी इतिहास की एक महान और असरदार शख्सियत हैं। उनकी ज़िंदगी इल्म, बहादुरी, इंसाफ़, सादगी और दीनदारी की मिसाल मानी जाती है। उनसे मंसूब कई क़ौल और नसीहतें आज भी लोगों को अपनी ज़िंदगी सुधारने, अपने अख़लाक़ बेहतर करने और अल्लाह के करीब आने की प्रेरणा देती हैं।
आज की भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी में हम अक्सर छोटी-छोटी बातों में परेशान हो जाते हैं और यह भूल जाते हैं कि अच्छा किरदार, सब्र, सच्चाई, इल्म और अल्लाह पर भरोसा इंसान की असली दौलत हैं। ऐसी ही बातों की याद दिलाती हैं ये नसीहतें।
इस आर्टिकल में हम हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु से मंसूब 50 अनमोल नसीहतें पढ़ेंगे, जिनमें रिश्तों, दोस्ती, दौलत, इल्म, सब्र, नमाज़, अख़लाक़ और ज़िंदगी के कई अहम पहलुओं के बारे में बातें मिलती हैं।
एक जरूरी बात: इन 50 में से हर क़ौल का हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु से साबित होना जरूरी नहीं है। इसलिए जहां प्रमाणित हवाला उपलब्ध न हो, वहां इन्हें “हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु से मंसूब” समझकर पढ़ना चाहिए, न कि निश्चित रूप से उनका कहा हुआ।
आइए अब इन नसीहतों को पढ़ते हैं और देखते हैं कि इनमें से कौन-सी बात हमारे जीवन को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
1. अक़्लमंद अपने आप को नीचा रखकर बुलंदी हासिल करता है और नादान अपने आप को बड़ा समझकर ज़िल्लत उठाता है।
2. कम खाने में सेहत है, कम बोलने में समझदारी है और कम सोना इबादत है।
3. मुश्किलतरीन काम बेहतरीन लोगों के हिस्से में आते हैं. क्योंकि वो उसे हल करने की सलाहियत रखते हैं।
4. जहा तक हो सके लालच से बचो लालच में जिल्लत ही जिल्लत है
5. जो तुम्हारी खामोशी से तुम्हारी तकलीफ का अंदाज़ा न कर सके उसके सामने ज़ुबान से इज़हार करना सिर्फ़ लफ्ज़ों को बर्बाद करना है।
6. जिसकी अमीरी उसके लिबास में हो वो हमेशा फ़कीर रहेगा और जिसकी अमीरी उसके दिल में हो वो हमेशा सुखी रहेगा,
7. हमेशा उस इंसान के करीब रहो जो तुम्हे खुश रखे लेकिन उस इंसान के और भी करीब रहो जो तुम्हारे बगैर खुश ना रह पाए
8. खुबसुरत इंसान से मोहब्बत नहीं होती बल्कि जिस इंसान से मोहब्बत होती है वो खुबसुरत लगने लगता है,
9. दौलत को क़दमों की ख़ाक बनाकर रखो क्यूकि जब ख़ाक सर पर लगती है तो वो कब्र कहलाती है।
10. झूठ बोलकर जीतने से बेहतर है सच बोलकर हार जाओ।एक मां को गुनहगार बेटे की वसीयत।
11. जब तुम्हरी मुख़ालफ़त हद से बढ़ने लगे, तो समझ लो कि अल्लाह तुम्हें कोई मुक़ाम देने वाला है,
12. इल्म की वजह से दोस्तों में इज़ाफ़ा (बढ़ोतरी) होती है और दौलत की वजह से दुशमनों में इज़ाफ़ा होता है ।
13. अगर किसी के बारे मे जानना चाहते हो तो पता करो के वह शख्स किसके साथ उठता बैठता है
14. राज्य का खजाना और सुविधाएं मेरे और मेरे परिवार के उपयोग के लिए नहीं हैं, मै बस इनका रखवाला हूँ-
15. किसी का ऐब (बुराई) तलाश करने वाले की मिसाल उस मक्खी के जैसी है जो सारा खूबसूरत जिस्म छोड सिर्फ़ ज़ख्म पर बैठती हैं।
16. पूरे विश्वास के साथ सोना संदेह की स्थिति में नमाज़ पढ़ने से बेहतर है
17. जिसको तुमसे सच्ची मोहब्बत होगी, वह तुमको व्यर्थ और नाजायज़ कामों से रोकेगा”
18. जब मेरा जी चाहता है के मैं अपने रब से बात करूँ तो मैं नमाज़ पढ़ता हूँ.
19. किसी की आँख तुम्हारी वजह से नम न हो क्योंकि तुम्हे उसके हर इक आंसू का क़र्ज़ चुकाना,
20. कभी तुम दुसरों के लिए दिल से दुवा मांग कर देखो तुम्हें अपने लिए मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी।Hazrat Ali Ki 50 Nasihatein
21. जो इनसान सजदे मे रोता है। उसे तक़दीर पर रोना नहीं पड़ता।
22. गरीब वो है जिसका कोई दोस्त न हो।
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23. रिज्क के पीछे अपना इमान कभी खराब मत करो क्योंकि नसीब का रीज़क इन्सान को ऐसे तलाश करता है जैसे मरने वाले को।
24. इन्सान का अपने दुश्मन से इन्तकाम का सबसे अच्छा तरीका ये है कि वो अपनी खूबियों में इज़ाफा कर दे
25. इंसान की ज़ुबान उसकी अक्ल का पता देती है और आदमी अपनी ज़ुबान के नीचे छुपा होता है !
26. दोस्तों के ग़म में शामिल हुवा करो हर हाल में लेकिन खुशियों में तब तक न जाना जब तक वो खुद ना बुलाये
27. इख़्तियार ,ताक़त और दौलत ऐसी चीजें हैं जिनके मिलने से लोग बदलते नहीं नक़ाब” होते हैं
28. अगर दोस्त बनाना तुम्हारी कमज़ोरी है तो तुम दुनिया के सबसे ताक़तवर इंसान हो…मैय्यत को सवाब पहुंचाना।
29. इंसान मायूस और परेशान इसलिए होता है, क्योंकि वो अपने रब को राज़ी करने के बजाये लोगों को राज़ी करने में लगा रहता है,
30. कभी भी अपनी जिस्मानी ताकत और दौलत पर भरोसा न करना क्युँकि बीमारी और ग़रीबी आने में देर नही लगती,Hazrat Ali Ki 50 Nasihatein
31. ज़िल्लत उठाने से बेहतर है तकलीफ उठाओ,
32. तुम्हारे नफ्स की कीमत जन्नत है, इसे जन्नत से कम कीमत पे ना बेचना,
33. हमेशा समझोता करना सीखो क्यूंकि थोडा सा झुक जाना किसी रिश्ते का हमेशा के लिए टूट जाने से बेहतर है,
34. जो लोग सिर्फ तुम्हे काम के वक़्त याद करते हे उन लोगो के काम ज़रूर आओ क्यों के वो अंधेरो में रौशनी ढूँढ़ते हे और वो रौशनी तुम हो”
35. दुनिया अमल की जगह है, मौत के बाद हम को और तुम्हे पता चलेगा,
36. हमेशा ज़लिमो का दुश्मन और मज़लूमो का मददगार बन कर रहना,
37. कोई गुनाह लज्जत के लिए मत करना क्यो की लज्जत खत्म गुनाह बाकी रहेगा और कोई नेकी तकलीफ की वजह से मत छोड ना क्यो की तखलीफ खत्म हो जायेगी पर नेकी बाकी रहेगी,
38. जब नेमतों पर शुक्र अदा किया जाए तो वह कभी ख़त्म नही होती
39. जाहिल के सामने अक़्ल की बात मत करो पहले वो बहस करेगा फिर अपनी हार देखकर दुश्मन हो जाएगा।Hazrat Ali Ki 50 Nasihatein
40. एक ज़माना ऐसा भी आएगा कि लोग अपने रब को भुल जाएंगे,लिबास बहुत क़ीमती पहन कर बज़ार में अकड़ कर चलेंगे और इस बात से बेखबर होंगे के उसी बाज़ार में उन का कफन मौजूद है
41. अगर कोई शख्स अपनी भूख मिटाने के लिए रोटी चोरी करे तो चोर के हाथ काटने के बजाए बादशाह के हाँथ काटे जाए।
42. तुम जो एक गाली मज़ाक और गुस्से में देते हो उससे तुम्हारी कब्र में एक बिच्छू बनता है,
43. जब गुनाह के बावजूद अल्लाह की नेअमते मुसलसल तुम्हें मिलती रहे तो तुम होशियार हो जाना के तुम्हारा हिसाब करिब और सख्त तरिन है।Hazrat Ali Ki 50 Nasihatein
44. किसी ने हजरत अली रज़ी. से पूछा के जिनकी माँ नही होती उनके बच्चों को दुआ कौन देता है? आप ने फरमाया के कोई झील अगर सुख भी जाए तो मिट्टी से नमी नही जाती इसी तरह माँ के इन्तेकाल के बाद भी अपनी औलाद को दुआ देती रहती है.Hazrat Ali Ki 50 Nasihatein
45. अपने जिस्म को ज़रूरत से ज़्यादा न सवारों,क्योंकि इसे तो मिट्टी में मिल जाना है,सवॉरना है तो अपनी रूह को सवॉरों क्योंकि इसे तुम्हारे रब के पास जाना है”
46. नेक लोगों की सोहबत से हमेशा भलाई ही मिलती हे क्यों के..हवा जब फूलो से गुज़रती हे तो वो भी खुश्बुदार हो जाती है।
47. नमाज़ की फ़िक्र अपने ऊपर फ़र्ज़ करलो खुदा की कसम दुनिया की फ़िक्र से आज़ाद हो जाओगे,और क़ामयाबी तुम्हारे क़दम चूमेंगी
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48. किसी ने हजरत अली से पुछा. दोस्त और भाई में क्या फर्क है.? हजरत अली ने फरमाया “भाई सोना है और दोस्त हीरा है” उस आदमी ने कहा
आप ने भाई को कम कीमत और दोस्त को ज्यादा कीमती चीज़ से क्यू तशबीह दी ? तो हजरत अली ने फरमाया “सोने में दरार आ जाये तो उस को पिघला कर बिलकुल पहले जैसा बनाया जा सकता है. जब की हीरे में एक दरार भी आ जाये तो वो कभी भी पहले जैसा नही बन सकता।Hazrat Ali Ki 50 Nasihatein
49. अख्लाक़ एक दुकान है और ज़बान उसका ताला है , ताला खुलता है तो मालुम होता हे के दुकान सोने की है या कौयले की
50. जिस इंसान मे वफादारी नही उससे दोस्ती का मतलब है खुद को ज़लील करना।
FAQ – हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु की नसीहतें
सवाल 1: हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु कौन थे?
जवाब: हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु नबी-ए-करीम ﷺ के करीबी सहाबी, दामाद और इस्लाम के चौथे ख़लीफ़ा थे। वे अपने इल्म, बहादुरी, इंसाफ़ और सादगी के लिए मशहूर हैं।Hazrat Ali Ki 50 Nasihatein
सवाल 2: हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु की नसीहतों से हमें क्या सीख मिलती है?
जवाब: इन नसीहतों में सच्चाई, सब्र, अच्छे अख़लाक़, इल्म, नमाज़, दोस्ती, रिश्तों की क़द्र और दुनिया के बजाय आख़िरत की फ़िक्र जैसी अहम बातें शामिल हैं।Hazrat Ali Ki 50 Nasihatein
सवाल 3: क्या इस लेख में लिखी सभी 50 नसीहतें हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु से साबित हैं?
जवाब: जरूरी नहीं। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर बहुत-से क़ौल हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु की तरफ़ मंसूब किए जाते हैं, लेकिन हर क़ौल का प्रमाणित स्रोत नहीं मिलता। इसलिए जिनका भरोसेमंद हवाला न मिले, उन्हें “हज़रत अली से मंसूब” कहना ज्यादा सही है।Hazrat Ali Ki 50 Nasihatein
सवाल 4: हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु की सबसे बड़ी सीख क्या थी?
जवाब: इंसान को इल्म हासिल करना, इंसाफ़ करना, अच्छे अख़लाक़ अपनाना, ज़ुल्म से बचना और अल्लाह तआला से अपना रिश्ता मजबूत रखना चाहिए।Hazrat Ali Ki 50 Nasihatein
सवाल 5: क्या हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु के क़ौल क़ुरआन और हदीस के बराबर हैं?
जवाब: नहीं। क़ुरआन अल्लाह तआला का कलाम है और सहीह हदीस नबी-ए-करीम ﷺ की प्रमाणित सुन्नत है। किसी सहाबी से मंसूब क़ौल को क़ुरआन या सहीह हदीस के बराबर नहीं रखा जा सकता।Hazrat Ali Ki 50 Nasihatein
सवाल 6: “अक्लमंद अपने आप को नीचा रखकर बुलंदी हासिल करता है” जैसी नसीहतों का क्या फायदा है?
जवाब: ऐसी बातें इंसान को तकब्बुर से बचने, विनम्रता अपनाने और अपने व्यवहार पर विचार करने की प्रेरणा देती हैं। हालांकि किसी क़ौल को हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु का निश्चित कथन बताने से पहले उसका स्रोत देखना चाहिए।Hazrat Ali Ki 50 Nasihatein
सवाल 7: क्या इन नसीहतों को दूसरों के साथ शेयर कर सकते हैं?
जवाब: जी हाँ, अच्छी और सही बात शेयर करना अच्छी बात है। लेकिन अगर किसी क़ौल का स्रोत प्रमाणित न हो तो उसे निश्चित रूप से हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु का कथन बताने के बजाय “मंसूब क़ौल” लिखना बेहतर है।Hazrat Ali Ki 50 Nasihatein
सवाल 8: हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु से जुड़े क़ौल पढ़ते समय हमें क्या सावधानी रखनी चाहिए?
जवाब: खासकर धार्मिक विषयों में बिना जांचे किसी बात को नबी ﷺ, सहाबा या बुज़ुर्गों की तरफ़ मंसूब नहीं करना चाहिए। भरोसेमंद किताब और हवाले से तस्दीक करना बेहतर है।Hazrat Ali Ki 50 Nasihatein
सवाल 9: क्या हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु की नसीहतें आज भी हमारे लिए उपयोगी हैं?
जवाब: जी हाँ, अगर कोई बात सही और इस्लामी शिक्षाओं के मुताबिक़ हो तो वह आज भी इंसान को अपने अख़लाक़ और जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा दे सकती है।Hazrat Ali Ki 50 Nasihatein
सवाल 10: इस पोस्ट का सबसे अहम संदेश क्या है?
जवाब: सिर्फ़ नसीहतें पढ़ना काफी नहीं है। असल फायदा तब है जब हम सच्चाई, सब्र, अच्छे अख़लाक़, नमाज़, इंसाफ़ और अल्लाह की फ़रमाबरदारी को अपनी ज़िंदगी में अपनाने की कोशिश करें।Hazrat Ali Ki 50 Nasihatein
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Hazrat Ali Ki 50 Nasihatein
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Hazrat Ali Ki 50 Nasihatein
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Hazrat Ali Ki 50 Nasihatein
जज़ाकल्लाह खैर….
