Musalman Bhaiyon Ke Huqooq
इस्लाम हमें सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करना ही नहीं सिखाता, बल्कि एक-दूसरे के साथ अच्छे अख़लाक़ और मोहब्बत से पेश आने की भी सीख देता है। एक मुसलमान का दूसरे मुसलमान पर कुछ हक़ होते हैं, जिन्हें पूरा करना हमारी ज़िम्मेदारी है।
किसी की मदद करना, उसकी परेशानी में साथ देना, बीमार होने पर उसकी ख़बर लेना, सलाम करना, उसकी इज़्ज़त करना, उसके ऐब छिपाना और आपस की नाराज़गी को दूर करके सुलह कराना—ये सब इस्लामी भाईचारे का हिस्सा हैं।
आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हम अक्सर अपने रिश्तों और आसपास के लोगों के हक़ भूल जाते हैं। इसलिए इस लेख में हम मुसलमान भाइयों के हुक़ूक़ को आसान भाषा में समझेंगे और जानेंगे कि कुरआन और हदीस की रोशनी में एक मुसलमान को दूसरे मुसलमान के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए।
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फ़रमाते हैं कि- एक मुसलमान दूसरे मुसलमान का भाई है। न उस भाई पर ज़ुल्म करे और न किसी मुसीबत में उस का साथ छोड़े।
जो शख्स अपने मुसलमान भाई की हाजत पूरी करता है अल्लाह तआला उसकी हाजत पूरी करता है। और जो शख्स अपने मुसलमान भाई की मुसीबत दूर करेगा, अल्लाह तआला उसको क़यामत की मुसीबतों से बचायेगा। और जो मुसलमान अपने मुसलमान भाई का ऐब छुपायेगा अल्लाह तआला दुनिया और आख़िरत में उसका ऐब छुपायेगा। ( बुख़ारी शरीफ़)
और तुम में पूरा मुसलमान वह है कि जिसकी ज़बान और हाथ से किसी मुसलमान को तकलीफ न पहुँचे।
कुरूआन व हदीस से मुसलमान भाई के यह हुक़ूक़ साबित होते हैं-
जो बात अपने लिए पसन्द न हो वह किसी मुसलमान के लिए पसन्द न करे। किसी मुसलमान को हक़ीर न जाने। उसकी चुग़ली न खाये। उस की ग़ीबत न करे। उस पर बोहतान न लगाये। उस का ऐब तलाश न करे। हाकिम को तलाश करना जायज़ है।
उस के ऐब को छुपाये , तीन रोज़ से ज़्यादा उससे बोलना न छोड़े, अगर किसी शरह की बात पर नाराज़गी हो तो जब वह तौबा कर ले फिर बोलने लगे। उसको नफा पहुँचाये नुक़सान न पहुँचाये। बूढ़े मुसलमान को ताज़ीम करे और छोटे के साथ प्यार से पेश आये।
मुसलमान से खुश होकर मिले। बिला सख्त उज्र उससे वादा खिलाफी न करे। उसके रुतबे के मुताबिक़ उससे बर्ताव करे। अगर दो मुसलमान भाइयों में रंजिश हो जाये तो उनमें सुलह करा दे। सुलह करा देने वाले को दस हजार नफ़िल नमाज़ों का सवाब मिलता है।
अगर खुदा ने दुनिया की कोई इज़्ज़त दी है तो अपने मुसलमान भाई मज़लूम ग़रीब की हाकिमों से सिफारिश कर दे और उसको नाहक़ की तकलीफ से बचाने पर सत्तर हज नफली का सवाब मिलेगा।
अगर किसी मुसलमान को कोई उसके आगे या पीछे तकलीफ़ पहुँचाना चाहे तो उस तकलीफ़ से उसको बचाये और तकलीफ़ देने वाले को रोक दे। अगर कोई मुसलमान बुरी सोहबत में फँस जाये तो प्यार व मुहब्बत से या जिस तरह की कुदरत हो उसको बुरी सोहबत से बचाये।
ग़रीब मुसलमान से मिलने जुलने में ज़िल्लत न समझे। मुसलमान भाई जब मिले तो उसको इस तरह सलाम करे “अस्सलामु अलैकुम” वह जवाब दे “वाअलैकुम अस्सलाम।” जब मुसलमान आपस में सलाम करते हैं तो अल्लाह तआला सौ रहमतें नाज़िल करता है।
सलाम करने वाले पर नब्बे और जवाब देने वाले पर दस और मुसाफ़ा करने पर सत्तर रहमतें ज्यादा नाजिल होती हैं और दोनों के सग़ीरा गुनाह माफ़ होते हैं। जब मुसलमान छींक कर अलहम्दो लिल्लाह कहे तो सुनने वाला या रहमकुल्ला कहे। जब मुसलमान बीमार हो या किसी और बला में मुबतला हो, उसकी मदद करें।
अगर वह तंगदस्त हो या क़र्ज़दार हो अपने अन्दर कुदरत हो तो माल से उसकी मदद करे। रहमते आलम हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फ़रमाते हैं कि जब मुसलमान बीमार होता है तो उसके गुनाह दरख्तों के पत्तों की तरह झड़ कर उससे दूर हो जाते हैं।
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और जब कोई मुसलमान अपने मुसलमान भाई की बीमारी या किसी और तकलीफ़ में उसकी ख़बर लेने जाता है तो वह जन्नत ख़रीद लेता है और जब ख़बर लेकर लौटता है तो सत्तर हजार फ़रिश्ते उसकी मग़फिरत की दुआ करते हैं।
जब किसी मुसलमान भाई का इन्तिकाल हो जाये तो उसके जनाज़े पर नमाज़ पढ़े और उसको क़ब्रिस्तान में पहुँचाये और दफ़न करके उसकी मग़फ़िरत की दुआ करके वापस हो तो गुनाहों से पाक साफ़ हो जाता है।
मुसलमान भाइयों की क़ब्रों पर जाया करे और उनकी मग़फ़िरत की दुआ किया करे। ख़ैरात या फातेहा का सवाब पहुँचाया करे और सोचा करे कि जिस तरह यह ख़ाक में मिल कर ख़ाक हो गये इसी तरह एक दिन मैं भी ख़ाक में मिल जाऊँगा ।
अलहासिल, मुसलमान भाइयों के नफा पहुँचाने में कोई कमी न करे, इस कारे ख़ैर में बड़े-बड़े सवाब मिलते हैं और मुसलमान भाइयों को नुक़सान पहुँचाने में बड़े-बड़े अज़ाब होते हैं।
FAQ – मुसलमान भाइयों के हुक़ूक़
1. सवाल: एक मुसलमान का दूसरे मुसलमान पर सबसे बड़ा हक़ क्या है?
जवाब: उसके साथ अच्छा व्यवहार करना, उसे तकलीफ़ न देना, उसकी मदद करना और उसकी इज़्ज़त का ख़याल रखना मुसलमान के अहम हुक़ूक़ में शामिल है।Musalman Bhaiyon Ke Huqooq
2. सवाल: क्या मुसलमान भाई की मुसीबत में उसकी मदद करनी चाहिए?
जवाब: जी हाँ। इस्लाम में जरूरतमंद और परेशान मुसलमान की मदद करने की बहुत ताकीद की गई है।Musalman Bhaiyon Ke Huqooq
3. सवाल: क्या किसी मुसलमान की ग़ीबत करना जायज़ है?
जवाब: नहीं। किसी की गैर-मौजूदगी में उसकी ऐसी बात कहना जो उसे नापसंद हो, ग़ीबत है और इससे बचना चाहिए।Musalman Bhaiyon Ke Huqooq
4. सवाल: क्या मुसलमान भाई के ऐब छिपाने चाहिए?
जवाब: जी हाँ, किसी की बुराई को फैलाने के बजाय उसके ऐब पर पर्दा डालना और उसे अच्छे तरीके से सुधारने की कोशिश करना बेहतर है।Musalman Bhaiyon Ke Huqooq
5. सवाल: अगर दो मुसलमानों में झगड़ा हो जाए तो क्या करना चाहिए?
जवाब: दोनों के बीच सुलह कराने और रिश्ते को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए।Musalman Bhaiyon Ke Huqooq
6. सवाल: मुसलमान से मुलाकात होने पर क्या करना चाहिए?
जवाब: मुसलमान को सलाम करना और अच्छे अख़लाक़ के साथ मिलना चाहिए।Musalman Bhaiyon Ke Huqooq
7. सवाल: क्या गरीब मुसलमान के साथ बैठना या उससे मिलना कमतर समझना सही है?
जवाब: बिल्कुल नहीं। इस्लाम इंसान की दौलत नहीं बल्कि उसके ईमान और अच्छे अख़लाक़ को महत्व देता है।Musalman Bhaiyon Ke Huqooq
8. सवाल: बीमार मुसलमान भाई के साथ क्या करना चाहिए?
जवाब: उसकी ख़बर-गीरी करनी चाहिए, उसकी हिम्मत बढ़ानी चाहिए और उसके लिए दुआ करनी चाहिए।Musalman Bhaiyon Ke Huqooq
9. सवाल: अगर कोई मुसलमान आर्थिक परेशानी में हो तो क्या मदद करनी चाहिए?
जवाब: अगर अपनी क्षमता हो तो उसकी आर्थिक मदद करना या किसी दूसरे तरीके से उसकी परेशानी कम करना नेक काम है।Musalman Bhaiyon Ke Huqooq
10. सवाल: मुसलमान भाई के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए?
जवाब: मोहब्बत, नरमी, सम्मान, माफी और अच्छे अख़लाक़ के साथ व्यवहार करना चाहिए और जान-बूझकर उसे नुकसान पहुँचाने से बचना चाहिए।Musalman Bhaiyon Ke Huqooq
11. सवाल: क्या मुसलमान भाई की इज़्ज़त की हिफाज़त करना भी उसका हक़ है?
जवाब: जी हाँ। उसकी इज़्ज़त को नुकसान पहुँचाने वाली बातों, बदनाम करने और झूठे इल्ज़ाम से बचना चाहिए।Musalman Bhaiyon Ke Huqooq
12. सवाल: मुसलमान भाइयों के हुक़ूक़ जानना क्यों जरूरी है?
जवाब: क्योंकि इस्लाम हमें अल्लाह के हक़ के साथ-साथ बंदों के हक़ अदा करने की भी शिक्षा देता है। इसलिए हर मुसलमान को अपने भाई के हुक़ूक़ जानने और उन्हें निभाने की कोशिश करनी चाहिए।Musalman Bhaiyon Ke Huqooq
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Musalman Bhaiyon Ke Huqooq
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Musalman Bhaiyon Ke Huqooq
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Musalman Bhaiyon Ke Huqooq
जज़ाकल्लाह खैर….
