Qabr Mein Kaun Saath Dega?
हम सब जानते हैं कि एक दिन इस दुनिया से जाना है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मौत के बाद हमारी कब्र में हमारे साथ कौन जाएगा? क्या हमारा माल, हमारी औलाद या हमारे रिश्तेदार हमेशा साथ रहेंगे? या फिर कोई और चीज़ है जो आख़िर तक हमारा साथ नहीं छोड़ती?
इस्लाम हमें बताता है कि इंसान के साथ उसकी नेकी और बुरे आमाल ही कब्र तक जाते हैं और आखिरत में वही उसके काम आते हैं। इस लेख में हम हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु की नसीहत और सही हदीसों की रोशनी में जानेंगे कि मौत के बाद इंसान का असली साथी कौन होता है, कब्र की ज़िंदगी कैसी होती है और हमें आज से किस चीज़ की तैयारी करनी चाहिए। इसलिए इस लेख को आखिर तक ज़रूर पढ़ें, क्योंकि यह हम सभी की ज़िंदगी और आखिरत से जुड़ा एक बेहद अहम विषय है।
हजरत कुमैल रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं कि मैं हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु के साथ एक मर्तबा जा रहा था। वह जंगल में पहुंचे, फिर एक मकबरे की तरफ मुतवज्जह हुए और फ़रमाया, ऐ मक्बरे वालो ।
ऐ बोसीदगी वालों! ऐ वहश्त और तन्हाई वालों ! क्या ख़बर है, क्या हाल है ? फिर इरशाद फ़रमाया हमारी खबर तो यह है कि तुम्हारे बाद अम्वाल तक्सीम हो गये। औलादें यतीम हो गयीं, बीवियों ने दूसरे खाविन्द कर लिए। यह तो हमारी ख़बर है, कुछ अपनी तो कहो।
इसके बाद मेरी तरफ मुतवज्जह हो कर फ़रमाया, कुमैल ! अगर इन लोगों को बोलने की इजाजत होती और यह बोल सकते तो यह लोग जवाब में यह कहते हैं कि बेहतरीन तोशा तक्वा है। यह फ़रमाया और फिर रोने लगे और फर्माया, ऐ कुमैल ! कब्र अमल का संदूक है और मौत के वक़्त बात मालूम हो जाती है।
यानी आदमी जो कुछ अच्छा या बुरा काम करता है, वह उसकी कब्र में महफूज रहता है, जैसा कि सन्दूक में, मुतअद्दद अहादीस में यह मजमून वारिद हुआ है कि नेक आमाल अच्छे आदमी की सूरत में होते हैं जो मैय्यत के जी बहलाने और उन्स पैदा करने के लिए रहता है
और उस की दिलदारी करता है और बुरे आमाल बुरी सूरत में बदबूदार बन कर आते हैं, जो और भी अजीयत का सबब होता है।
एक हदीस में वारिद है कि आदमी के साथ तीन चीजें कब्र तक जाती हैं, उसका माल जैसा कि अरब में दस्तूर था, उसके रिश्तेदार और उसके आमाल । दो चीजें माल और रिश्तेदार दफ़न करके वापस आ जाते हैं, अमल उसके साथ रह जाता है।
हुजूरे अक्दस सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक मर्तबा सहाबा रजि० से इर्शाद फ़र्माया कि तुम्हें मालूम है कि तुम्हारी मिसाल और तुम्हारे अहल व अयाल और माल व आमाल की मिसाल क्या है। सहाबा रजि० के दर्याप्त फरमाने पर हुज़ूर सल्ल. ने इर्शाद फर्माया कि उसकी मिसाल ऐसी हैं,
जैसे एक शख़्स के तीन भाई हो और वह मरने लगे। उस वक्त एक भाई को वह बुलाये और पूछे कि भाई तुझे मेरा हाल मालूम है कि मुझ पर क्या गुजर रही है, इस वक़्त तू मेरी क्या मदद करेगा ।
वह जवाब देता है कि तेरी तीमारदारी करूंगा, इलाज करूंगा, हर किस्म की ख़िदमत करूंगा और जो तू मर जाएगा, तो नहलाऊंगा, कफ़न पहनाउंगा और कांधे पर उठाकर ले जाऊंगा। दफन के बाद तेरा जिक्रे खैर करूंगा।
हुजूर सल्ल. ने फ़र्माया, यह भाई तो अहल व अयाल है। फिर वह दूसरे भाई से यही सवाल करता है ! वह कहता है कि मेरा तेरा वास्ता जिन्दगी का है। जब तू मर जाएगा तो मैं दूसरी जगह चला जाऊंगा। यह भाई माल है।
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फिर वह तीसरे भाई को बुलाकर पूछता है वह कहता है कि मैं कुछ में तेरा साथी हूं, वहश्त की जगह तेरा दिल बहलाने वाला हूं। जब तेरा हिसाब-किताब होने लगे, तो नेकियों के पलड़े में बैठ कर उसको झुकाऊंगा, यह भाई अमल है ।
हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया, अब बताओ कौन सा भाई कारआमद हुआ। सहाबा रज़ि. ने अर्ज किया या रसूलल्लाह ! यही भाई कार आमद है, पहले दो तो बे-फायदा ही रहे।Qabr Mein Kaun Saath Dega?
FAQ (सवाल व जवाब)
1. मौत के बाद इंसान के साथ कब्र में कौन जाता है?
जवाब: हदीस के मुताबिक इंसान के साथ उसकी नेकी और बुरे आमाल ही कब्र में रहते हैं। माल और रिश्तेदार कब्र तक छोड़कर वापस लौट जाते हैं।Qabr Mein Kaun Saath Dega?
2. क्या माल और दौलत आखिरत में काम आएगी?
जवाब: नहीं। माल सिर्फ दुनिया तक साथ देता है। आखिरत में इंसान के लिए उसका ईमान और नेक आमाल ही सबसे बड़ा सहारा होंगे।Qabr Mein Kaun Saath Dega?
3. कब्र में इंसान का सबसे अच्छा साथी कौन है?
जवाब: तक़वा, ईमान और नेक आमाल। यही इंसान की कब्र को रोशन करते हैं और आखिरत में उसके काम आते हैं।Qabr Mein Kaun Saath Dega?
4. क्या रिश्तेदार और औलाद कब्र में साथ रहते हैं?
जवाब: नहीं। वे इंसान को दफनाकर वापस आ जाते हैं। कब्र में इंसान के साथ केवल उसके आमाल रहते हैं।Qabr Mein Kaun Saath Dega?
5. हज़रत अली (रज़ि.) ने कब्र वालों से क्या फ़रमाया?
जवाब: रिवायत में आता है कि आपने कब्र वालों को मुख़ातिब होकर दुनिया की खबर सुनाई और फिर फ़रमाया कि अगर उन्हें बोलने की इजाज़त होती तो वे कहते: “बेहतरीन तोशा तक़वा है।”Qabr Mein Kaun Saath Dega?
6. कब्र की ज़िंदगी के लिए सबसे अच्छी तैयारी क्या है?
जवाब: पाँच वक्त की नमाज़, कुरआन की तिलावत, नेक अख़लाक़, तौबा, ज़िक्र, सदक़ा और हराम से बचना—यही कब्र और आखिरत की सबसे अच्छी तैयारी है।Qabr Mein Kaun Saath Dega?
7. क्या हर मुसलमान को मौत और आखिरत की तैयारी करते रहना चाहिए?
जवाब: जी हाँ। इस्लाम हमें हमेशा मौत को याद रखने, नेक आमाल बढ़ाने और अल्लाह की इताअत में ज़िंदगी गुज़ारने की तालीम देता है।Qabr Mein Kaun Saath Dega?
8. इस लेख का सबसे बड़ा सबक क्या है?
जवाब: इंसान का असली साथी उसका नेक अमल है। इसलिए हमें दुनिया की दौलत से ज़्यादा अपनी आखिरत की तैयारी और अच्छे आमाल की फिक्र करनी चाहिए।Qabr Mein Kaun Saath Dega?
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Qabr Mein Kaun Saath Dega?
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह खैर….
