Teer Par Teer Lagte Rahe, Magar Namaz Nahi Chhodi!
नमाज़ सिर्फ़ एक फ़र्ज़ ही नहीं, बल्कि अल्लाह तआला से जुड़ने का एक बहुत बड़ा ज़रिया है। सहाबा-ए-किराम रज़ियल्लाहु अन्हुम नमाज़ की कितनी क़द्र करते थे, इसका अंदाज़ा इस वाक़िये से लगाया जा सकता है।
एक ग़ज़वे से वापसी के दौरान रात में नबी-ए-करीम ﷺ ने हिफ़ाज़त के लिए दो सहाबा को ज़िम्मेदारी दी। उनमें से एक सहाबी रात में पहरेदारी करते हुए नमाज़ में खड़े हो गए। इसी दौरान दुश्मन की तरफ़ से उन पर तीर चलाए गए, लेकिन उन्होंने अपनी नमाज़ जारी रखी।
जब यह वाक़िया सामने आया तो उनकी नमाज़ के प्रति मोहब्बत, सब्र और ज़िम्मेदारी का एहसास देखकर इंसान को अपने बारे में सोचने पर मजबूर होना पड़ता है।
आइए इस वाक़िये को पढ़ते हैं और देखते हैं कि सहाबा-ए-किराम नमाज़ को कितनी अहमियत देते थे और हमारे लिए इसमें क्या सबक छिपा है।
नबी-ए-करीम अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक ग़ज्वे से वापस तशरीफ़ ला रहे थे, शब को एक जगह क्याम फ़रमाया और इरशाद फ़रमाया कि आज शब को हिफाजत – चौकीदारी कौन करेगा।
एक मुहाजिरी और एक अंसारी हज़रत अम्मार बिन यासिर रज़ियल्लाहु अन्हु और हज़रत उबाद बिन बिशर रज़ियल्लाहु अन्हु ने अर्ज़ किया कि हम दोनों करेंगे। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक पहाड़ी, जहां से दुश्मन के आने का रास्ता हो सकता था, बता दी कि इस पर दोनों क़याम करो।
दोनों हज़रात वहां पर तशरीफ़ ले गए। वहां जाकर अंसारी ने मुहाजिर से कहा कि रात को दो हिस्सों तकसीम करके एक हिस्से में आप सो जायें, मैं जागता रहूं। दूसरे हिस्से में आप जागें मैं सोता रहूं कि दोनों के तमाम रात जागने में यह भी एहतमाल है कि किसी वक़्त नींद का गलबा हो जाये और दोनों की आंख लग जाये।
अगर कोई ख़तरा जागने वाले को महसूस हो तो अपने साथी को जगा ले। रात का पहला आधा हिस्सा अंसारी के जागने का करार पाया और मुहाजिर सो गये। अंसारी ने नमाज़ की नीयत बांध ली। दुश्मन की जानिब से एक शख़्स आया और दूर से खड़े हुए शख़्स को देखकर तीर मारा और जब कोई हरकत न हुई तो दूसरा,
और फिर इसी तरह तीसरा तीर मारा और हर तीर उनके बदन में घुसता रहा और यह हाथ से उसको बदन से निकाल कर फेंकते रहे । इसके बाद इत्मीनान से रुकूअ किया, सज्दा किया, नमाज पूरी करके अपने साथी को जगाया, वह तो एक की जगह दो को देखकर भाग गया कि न मालूम कितने हों,
मगर साथी ने जब उठकर देखा तो अंसारी के बदन से तीन जगह से ख़ून ही बह रहा था। मुहाजिर ने फ़र्माया, सुब्हानल्लाह ! तुमने मुझे शुरू ही में क्यों नही जगा लिया। अंसारी ने फ़र्माया कि मैंने एक सूर: (सूरह कहफ) शुरू कर रखी थी ! मेरा दिल न चाहा कि उसको ख़त्म करने से पहले रुकूअ करूं ।
अब भी मुझे इसका अंदेशा हुआ कि ऐसा न हो, मैं बार-बार तीर लगने से मर जाऊं और हुज़ूर सल्ल. ने जो हिफाज़त की खिदमत सुपुर्द कर रखी है, वह फ़ौत हो जाये। अगर मुझे यह अंदेशा न होता, तो मैं मर जाता, मगर सूरः ख़त्म करने से पहले रुकूअ न करता ।
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यह थी उन हज़रात की नमाज़ और इसका शौक कि तीर पर तीर खाये जायें और खून ही खून हो जाये, मगर नमाज़ के लुत्फ़ में फर्क न पड़े। एक हमारी नमाज़ है कि अगर मच्छर भी काट ले तो नमाज का ख्याल जाता रहे । भिड़ का तो पूछना ही क्या।
यहां एक फिक्ही मस्अला भी इख़्तिलाफी है कि खून निकलने से हमारे इमाम यानी इमाम आज़म रह० के नजदीक वुजू टूट जाता है, इमाम शाफिई के नजदीक नहीं टूटता। मुम्किन है कि इन सहाबी का मजहब भी यही हो उस वक्त इस मस्अले की तहकीक़ न हुई हो कि हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम उस मज्लिस में तशरीफ़ फ़र्मा न थे, या उस वक्त तक यह हुक्म ही न हुआ हो।
FAQ – सहाबी की नमाज़ और सब्र का वाक़िया
सवाल 1: इस वाक़िये में कौन से सहाबी थे?
जवाब: इस वाक़िये में हज़रत अब्बाद बिन बिश्र रज़ियल्लाहु अन्हु और हज़रत अम्मार बिन यासिर रज़ियल्लाहु अन्हु का ज़िक्र मिलता है।Teer Par Teer Lagte Rahe,
सवाल 2: हज़रत अब्बाद बिन बिश्र रज़ियल्लाहु अन्हु पर कितने तीर लगे?
जवाब: मशहूर रिवायत में तीन तीर लगने का ज़िक्र मिलता है, लेकिन उन्होंने नमाज़ जारी रखी।Teer Par Teer Lagte Rahe,
सवाल 3: तीर लगने के बावजूद उन्होंने नमाज़ क्यों जारी रखी?
जवाब: रिवायत में आता है कि वह सूरह अल-कहफ़ की तिलावत कर रहे थे और नमाज़ को पूरा करना चाहते थे। साथ ही उन्हें पहरे की ज़िम्मेदारी का भी ध्यान था।Teer Par Teer Lagte Rahe,
सवाल 4: क्या तीर लगने पर उन्होंने अपने साथी को तुरंत जगा दिया था?
जवाब: नहीं। उन्होंने नमाज़ जारी रखी और बाद में अपने साथी को जगाया। जब साथी ने उनके शरीर से खून बहते देखा तो उन्हें हैरत हुई।Teer Par Teer Lagte Rahe,
सवाल 5: इस वाक़िये से हमें क्या सीख मिलती है?
जवाब: इससे नमाज़ की अहमियत, अल्लाह की इबादत में एकाग्रता, सब्र और अपनी जिम्मेदारी को पूरा करने की सीख मिलती है।Teer Par Teer Lagte Rahe,
सवाल 6: क्या नमाज़ में चोट लगने पर नमाज़ जारी रखना हर व्यक्ति के लिए जरूरी है?
जवाब: हर परिस्थिति एक जैसी नहीं होती। अगर किसी व्यक्ति को गंभीर चोट या जान का खतरा हो तो उसे अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। ऐसे फ़िक़्ही मामलों में अपने मस्लक के भरोसेमंद आलिम से पूछना बेहतर है।Teer Par Teer Lagte Rahe,
सवाल 7: क्या खून निकलने से वुज़ू टूट जाता है?
जवाब: इस मसले में फ़ुक़हा के बीच इख़्तिलाफ़ है। हनफ़ी फ़िक़्ह में बहने वाला खून वुज़ू तोड़ता है, जबकि शाफ़ई फ़िक़्ह में सामान्य रूप से खून निकलने से वुज़ू नहीं टूटता। इसलिए इस मसले को अपने मज़हबी फ़िक़्ह के अनुसार समझना चाहिए।Teer Par Teer Lagte Rahe,
सवाल 8: आज हमारे लिए इस वाक़िये का सबसे बड़ा सबक क्या है?
जवाब: हमें अपनी नमाज़ को हल्के में नहीं लेना चाहिए। सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम नमाज़ को कितनी अहमियत देते थे, इस वाक़िये से हमें अपनी नमाज़ की हालत पर गौर करने की प्रेरणा मिलती है।Teer Par Teer Lagte Rahe,
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Teer Par Teer Lagte Rahe,
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Teer Par Teer Lagte Rahe,
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Teer Par Teer Lagte Rahe,
जज़ाकल्लाह खैर….
