20/07/2026
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अल्लाह पाक का ज़िक्र करने की फ़ज़ीलत: 30+ सहीह हदीसें जो हर मुसलमान को ज़रूर जाननी चाहिए|Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat: 30+ Sahih Hadith Jo Har Musalman Ko Zarur Janni Chahiye amazing story

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Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat: 30+ Sahih Hadith
Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat: 30+ Sahih Hadith

अल्लाह पाक का ज़िक्र (ज़िक्रुल्लाह) मोमिन के दिल की ज़िंदगी, रूह की ग़िज़ा और दुनिया व आख़िरत की कामयाबी का सबसे बड़ा ज़रिया है। क़ुरआन मजीद और सहीह हदीसों में बार-बार अल्लाह का ज़िक्र करने की ताकीद की गई है। ज़िक्र से दिलों को सुकून मिलता है, गुनाह माफ़ होते हैं, दर्जे बुलंद होते हैं और अल्लाह तआला की रहमत व बरकत नाज़िल होती है।

इस पोस्ट में हम अल्लाह पाक का ज़िक्र करने की फ़ज़ीलत पर 30+ सहीह हदीसें पेश करेंगे। इन हदीसों से आपको मालूम होगा कि अल्लाह का ज़िक्र क्यों सबसे अफ़ज़ल इबादतों में से है, इसके क्या फ़ायदे हैं और एक मुसलमान अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ज़िक्र को कैसे शामिल कर सकता है।

अगर आप भी अल्लाह की क़ुर्बत, दिल का सुकून, गुनाहों की माफ़ी और आख़िरत की कामयाबी चाहते हैं, तो इस पोस्ट को आखिर तक ज़रूर पढ़ें। इसमें दी गई हदीसें आपके ईमान को मज़बूत करने और अल्लाह की याद से अपना रिश्ता गहरा करने में मदद करेंगी। इंशाअल्लाह

अल्लाह पाक को याद करने की फ़ज़ीलत का बयान

हदीस शरीफ़ में आया है कि अल्लाह तआला फरमाते
हैं: “मैं अपने बन्दे के गुमान के साथ हूँ जैसा वह मेरे बारे में गुमान रखता है मैं वैसा होता हूँ और मैं उस के साथ होता हूँ जब वह मेरा जिक्र करता है।

चुनान्चे अगर वह अपने दिल में यानी एकान्त मे मेरा जिक्र करता है तो मैं भी अपनी तन्हाई में उत्ते याद करता हूँ। और अगर वह किसी मजलिस में मेरा जिक्र करता है तो मैं भी उस की मजलिस से बेहतर मजलिस में यानी फरिश्तों की मजलिस में उस का जिक्र करता हूँ।”

एक हदीस में आया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमायाः

“क्या मैं तुम्हें ऐसा काम न बताऊँ जो तुम्हारे कामों में सब से बेहत्तर है और तुम्हारे मालिक यानी अल्लाह पाक के नज़दीक सब से पाकीज़ा है, और तुम्हारे दर्जों को सब से ज़्यादा बुलन्द करने वाला है और सोने-चाँदी के (अल्लाह की राह में) खर्च करने से भी बेहतर है, और इस से भी बेहतर है कि तुम अपने दुश्मन से (जिहाद के मैदान में) मुकाबला करो और फिर तुम उन की गर्दनें काटो और वह तुम्हारी गर्दनें काटें।

यह सुन कर सहाबा ने कहा क्यों नहीं, ऐ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! ज़रूर बतलाइये। आप सल्ललाहु ताआला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमायाः

“वह काम अल्लाह का जिक्र है।”

एक और हदीस में आया है कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया:

“कोई सदका यानी नेक काम अल्लाह के ज़िक्र से अफ़ज़ल नही है।”

एक हदीस में आया है कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया:

“अल्लाह तआला के कुछ फरिश्ते इस काम पर लगे हैं कि राह में घूम फिर कर अल्लाह का ज़िक्र करने वालों को तलाश करते रहते हैं फिर जब वह किसी जमाअत को अल्लाह का ज़िक्र करते हुये पाते हैं तो आपस में एक दूसरे को आवाज़ देते हैं कि आओ अपने मक्सद यानी अल्लाह के ज़िक्र की तरफ आ जाओ, तो वह सब फ़रिश्ते मिल कर पहले आसमान तक इन ज़िक्र करने वालों को अपने परों के छाँव में ले लेते हैं।” पूरी हदीस ।Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat

एक हदीस में आया है कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया:

“उस शख़्स की मिसाल जो अपने पर्वरदिगार का ज़िक्र करता है और उस शख़्स की जो अपने पर्वरदिगार का जिक्र नहीं करता “ज़िन्दा” और “मुर्दा” की तरह है।

एक और हदीस में आया है कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया:

“जब भी कोई जमाअत अल्लाह का ज़िक्र करने के लिये बैठती है तो फौरन रहमत के फरिश्ते उन को चारों ओर से घेर लेते हैं और अल्लाह की रहमत उन को ढाँप लेती है, सुकून और इतमिनान की उन पर बारिश होने लगती है और अल्लाह तआला उन फरिश्तों से इन ज़िक्र करने वालों का ज़िक्र करते हैं जो उस के पास मौजूद रहते हैं।”

एक और हदीस में आया है कि एक सहाबी ने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! इस्लाम के अहकाम जिस पर अजर और सवाब मिलता है बहुत हो गये, आप तो मुझे कोई ऐसी बात बता दीजिये जिसको मैं मज़बूती के साथ पकड़ सकूँ और बराबर करता रहूँ आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः “तुम्हारी ज़बान बराबर अल्लाह के ज़िक्र से ताज़ा रहनी चाहिये।

और एक हदीस में आया है कि एक सहाबी मआज़ बिन जबल रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं:

अखिरी बात जिस पर मैं नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से जुदा हुआ हूँ वह यह है कि मैं ने आप सल्ललाहु ताआला अलैहि वसल्लम से पूछा : कौन सा काम अल्लाह पाक को सब से ज़्यादा पसन्द है? आप सल्ललाहु ताआला अलैहि वसल्लम ने फरमायाः वह काम यह है कि तुम्हें इस हालत में मौत आये कि तुम्हारी जबान अल्लाह के जिक्र से तर हो।”Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat: 30+ Sahih Hadith

एक और हदीस में आया है कि इन्ही सहाबी हज़रत मआज रज़ियल्लाहु अन्हु ने पूछा :

“ऐ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! आप मुझे कुछ वसिय्यत फरमा दीजिये। आप सल्ललाहु ताआला अलैहि वसल्लम ने फरमायाः हर दम अल्लाह से डरते रहो और हर पत्थर और पेड़-पौधों के पास यानी हर जगह पर अल्लाह का जिक्र किया करो। और जो भी कोई बुरा काम कर बैठो तो फौरन अल्लाह के सामने उस से तौबा करो। चोरी-छुप्पे किये गुनाह की छुपे तौर पर तौबा, और खुले आम किये गुनाह की खुले आम तौबा करें ।Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat: 30+ Sahih Hadith

एक हदीस में आया है कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमायाः

“किसी भी आदमी ने कोई काम ऐसा नहीं किया जो अल्लाह की याद से ज़्यादा उस को अल्लाह की सज़ा से नजात दिलाने वाला हो।”

इसी रिवायत में आया है कि सहाबा ने पूछाः

“ऐ अल्लाह के रसूल सल्ललाहु ताआला अलैहि वसल्लम! क्या अल्लाह की राह में जिहाद भी नहीं? आप सल्ललाहु ताआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया: हाँ, अल्लाह की राह में जिहाद भी नहीं, लेकिन वह शख़्स जो अपनी तल्वार से दुश्मन की गर्दनों को इतनी ज्यादा काटे कि वह टूट जाये तो उस का अमल, अल्लाह के ज़िक्र से ज़्यादा अल्लाह की सज़ा से नजात दिलाने वाला हो सकता है।Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat: 30+ Sahih Hadith

यह आख़िरी जुम्ला आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तीन मर्तबा फरमाया।

एक और हदीस में आया है कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः

“अगर एक आदमी की गोद दिर्हम से भरी हो और वह उन को बाँट रहा हो और दूसरा आदमी अल्लाह का जिक्र कर रहा हो, तो अल्लाह का ज़िक्र करने वाला उस दिर्हम के बाँटने वाले से अफ़ज़ल होगा।”

एक और हदीस में आया है कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमायाः

“जब तुम जन्नत की क्यारियों में से गुज़रो तो खूब पेट भर कर चर लिया करो यानी अल्लाह का ज़िक्र खूब कर लिया करो सहाबा ने पूछा : जन्नत के बाग क्या हैं? आप सल्ललाहु ताआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः ज़िक्र की मजलिसें।”Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat: 30+ Sahih Hadith

एक और हदीस में आया है कि अल्लाह तआला फ़रमायेगाः

“आज तमाम महशर वालों को मालूम हो जाएगा कि इज़्ज़त और मर्तबों के काबिल कौन लोग हैं? यह सुन कर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा गयाः ऐ अल्लाह के रसूल सल्ललाहु ताआला अलैहि वसल्लम! यह कौन लोग हैं? आप सल्ललाहु ताआला अलैहि वसल्लम ने फरमायाः यह लोग मस्जिदों में अल्लाह के ज़िक्र की मजलिसें एहतेमाम करने वाले लोग हैं।”

एक और हदीस में आया है किः

“हर आदमी के दिल की दो कोठरियाँ होती हैं। एक में फरिश्ता रहता है और दूसरी में शैतान। तो जब वह शख़्स अल्लाह की याद में लग जाता है तो शैतान पीछे हट जाता है और जब अल्लाह की याद नहीं करता तो शैतान अपनी चोंच उस के दिल में रख देता है यानी उस के दिल पर सवार हो जाता है और अलग-अलग तरह के शक व शुब्हे डालता रहता है।”Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat: 30+ Sahih Hadith

एक और हदीस में आया है कि :

“जिस शख्स ने फजर की नमाज़ जमाअत के साथ पढ़ी और फिर सूरज निकलने तक वहीं बैठा हुआ अल्लाह का ज़िक्र करता रहा, फिर दो रक्अतें इश्राक की पढ़ीं फिर मस्जिद से वापस आया तो उस को एक हज्ज और उम्रा के सवाब जितना सवाब मिलेगा।”

इसी रिवायत के दूसरे अल्फाज़ यह हैं कि “वह एक हज्ज और एक उम्रा का सवाब ले कर वापस होगा।”

एक और हदीस में आया है कि

“अल्लाह की याद से गाफिल लोगों के दरमियान में अल्लाह को याद करने वाला उस मुजाहिद के समान है जो जंग के मैदान से भागने वालों की जमाअत में डटा रहा।”

एक और हदीस में आया है किः

“जो कोई जमाअत किसी भी मज्लिस में जमा हुयी और अल्लाह को याद किये बिना वहाँ से उठ गयी तो यूँ समझो कि वह एक मरे हुये गधे के लाश पर जमा हुये थे और उसको वो खा कर उठ गये। और उन की याद की मज्लिस क़यामत के दिन उन के लिये अफसोस और निराशा का सबब होगी।”

एक और हदीस में आया है किः

“जो शख्स भी किसी रास्ता पर किसी काम के लिये चला और उस बीच अल्लाह का ज़िक्र नहीं किया तो उस की यह ग़फ़्लत उस के लिये अफ़सोस और निराशा का सबब होगी। और जो शख़्स भी अपने बिस्तर पर लेटा और उसने अल्लाह का जिक्र नही किया, तो उसकी यह गफ़्लत उसके लिये अफसोस और निराशा का सबब होगी।”Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat: 30+ Sahih Hadith

एक और हदीस में आया है कि :

“एक पहाड़ दूसरे पहाड़ को उस का नाम ले कर आवाज़ देता है कि ऐ फलाँ पहाड़ क्या तेरे पास से कोई ऐसा आदमी गुज़रा है जिस ने गुज़रते समय अल्लाह का जिक्र किया हो? तो जब वह जवाब में कहता है कि हाँ, तो वह खुश होता है और उस को मुबारक बाद देता है पूरी हदीस तक।”Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat: 30+ Sahih Hadith

एक और हदीस में आया है कि :

“अल्लाह के नेक बन्दे वह हैं जो अल्लाह के ज़िक्र के लिये सूरज, चाँद, हलाल, पहली का चाँद, सितारों और छावँ की देख भाल रखते हैं और हर समय और मौका के मुताबिक अच्छे ढंग से अल्लाह का जिक्र करते हैं

एक और हदीस में आया है कि :

“क़यामत के दिन जन्नती लोग किसी चीज़ पर अफसोस न करेंगे सिवाए उस घड़ी के जो उन पर बीत गयी और उस में उन्होंने अल्लाह का जिक्र नही किया कि काश उस घड़ी में भी इम अल्लाह का जिक्र करते और उस का भी सवाब पाते।

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एक और हदीस में आया है कि :

“तुम ज़्यादा से ज़्यादा अल्लाह का जिक्र किया करो कि लोग तुम को पागल कहने लगें।”

एक और हदीस में आया है कि :

“नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सहाबा को हुक्म दिया करते थे कि वह तक्बीर यानी अल्लाहु अक्बर पाकी (सुब्हा-नल मलिकिल् कुहूस) और तहलील (यानी लाइला-ह इल्लल्लाह) की गिन्ती का ख्याल रखा करें और उन्हें उग्लियों पर गिना करें।

फरमायाः इसलिये कि क़यामत के दिन उन उग्लियों से सवाल किया जायेगा और उन्हें बोलने की ताक़त देकर बुलवाया जायेगा और वह बतलायेंगी कि कितनी संख्या में बन्दे ने तक्बीर, पाकी और तहलील बयान की थी।

एक और हदीस में आया है कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने औरतों को मुखातब करके फरमाया :

“तुम तस्बीह (सुब्हान अल्लाह) तक्दीस (सुब्हान-नल् मलिकिल कुद्दूस) और तहलील (लाइला-ह इल्लल्लाह) को अपने ऊपर लाज़िम कर लो और कभी उन से लापरवाही न करो, कि तुम अल्लाह की रहमत से महरूम कर दी जाओ।”Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat: 30+ Sahih Hadith

एक और हदीस में आया है कि हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि :

“मैंने नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को सीधे हाथ की उग्लियों पर तस्बीह पढ़ते देखा है।”

एक और हदीस में आया है कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया :

“मुझे सुबह की नमाज़ के बाद से सूरज निकलने तक अल्लाह का जिक्र करने वाले लोगों के साथ बैठना इसलिये अधिक पसन्द है कि मैं हजरत इस्माईल अलैहिस्सलाम की नस्ल के चार गुलामों को आज़ाद कर दूँ और इसी तरह मैं उन लोगों के साथ बैठूं जो असर की नमाज़ के बाद से सूरज के छुपने (गुरुव) तक अल्लाह का जिक्र करते रहते हैं, यह मुझे उस से ज़्यादा पसन्दीदा है कि मैं चार गुलाम इस्माईल अलैहिस्सलाम की नस्ल के आज़ाद करूँ।”Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat: 30+ Sahih Hadith

एक और हदीस में आया है कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया :

अकेले सफर करने वाले आगे निकल गये। सहाबा ने पूछा “अकेले सफर करने वाले कौन लोग हैं? आप सल्ललाहु ताआला अलैहि वसल्लम ने फरमायाः “ज़्यादा से ज़्यादा अल्लाह का जिक्र करने वाले मर्द और औरतें”

इसी रिवायत के दूसरे अल्फाज़ में है कि

“अल्लाह के जिक्र के दीवाने” यह अल्लाह का जिक्र उन के पापों के बोझ को हल्का करता रहता है, चुनान्चे यह क़यामत के दिन अल्लाह के दरबार में हल्के-फुल्के हो कर आएंगे।”Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat: 30+ Sahih Hadith

एक और हदीस में आया है कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया :

“अल्लाह तआला ने हज़रत यहया बिन जकरिया अलैहिस्सलाम को पाँच बातों का हुक्म दिया था कि वह खुद भी उन पर अमल करे और बनी इसराईल को भी हुक्म दें कि वह भी उन पर अमल करें।

(रावी ने) पूरी हदीस बयान की, यहाँ तक कि हज़रत यहया अलैहिस्सलाम ने कहा मैं तुम को हुक्म देता हूँ कि तुम ज़्यादा से ज्यादा अल्लाह का जिक्र किया करो, इसलिये कि उस का जिक्र करने वाले की मिसाल उस आदमी की सी है जिस का पीछा करते हुये दुश्मन भी तेजी के साथ निकला हो और वह शख्स भागले भागते। एक सुरक्षित किले तक पहुंच गया हो और उस में पनाह ले कर दुश्मन से अपनी जान बचा ली हो।

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बिल्कुल इसी तरह अल्लाह का बन्दा (अपने दुश्मन) शैतान से अल्लाह तआला के जिक्र के और किसी चीज़ अलावा अपने को नही बचा सकता।”

एक और हदीस में आया है कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया :

“अल्लाह की कसम ! दुनिया में कुछ लोग नर्म और गद्देदार बिछौनों पर लेट कर भी सोने के बजाए अल्लाह तआला का ज़िक्र किया करते हैं, उन्हें क़यामत के दिन अल्लाह तआला जन्नत के ऊँचे दर्जे में दाखिल फरमायेगा।”Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat: 30+ Sahih Hadith

एक और हदीस में आया है कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया :

“बेशक वह लोग जिन की ज़बानें हमेशा अल्लाह तआला के ज़िक्र से तर व ताज़ा रहती हैं वह हँसते हुये जन्नत में जायेंगे।Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat

FAQ (सवाल व जवाब)

1. अल्लाह का ज़िक्र क्या है?

जवाब: अल्लाह तआला को उसकी तस्बीह, तहलील, तकबीर, तहमीद, इस्तिग़फ़ार और दुआ के ज़रिए याद करना ज़िक्र कहलाता है। जैसे सुब्हानल्लाह, अल्हम्दुलिल्लाह, अल्लाहु अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाह आदि पढ़ना।

2. अल्लाह का ज़िक्र करने की सबसे बड़ी फ़ज़ीलत क्या है?

जवाब: अल्लाह का ज़िक्र करने से दिल को सुकून मिलता है, गुनाह माफ़ होते हैं, दर्जे बुलंद होते हैं और अल्लाह की रहमत नाज़िल होती है।Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat: 30+ Sahih Hadith

3. क्या हर समय अल्लाह का ज़िक्र किया जा सकता है?

जवाब: जी हाँ, एक मुसलमान चलते-फिरते, उठते-बैठते, सफ़र में और रोज़मर्रा के कामों के दौरान भी अल्लाह का ज़िक्र कर सकता है।Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat: 30+ Sahih Hadith

4. सबसे आसान और अफ़ज़ल ज़िक्र कौन-सा है?

जवाब: सुब्हानल्लाह, अल्हम्दुलिल्लाह, अल्लाहु अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाह और अस्तग़फ़िरुल्लाह पढ़ना सबसे आसान और बहुत फ़ज़ीलत वाला ज़िक्र है।Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat: 30+ Sahih Hadith

5. क्या ज़िक्र करने से गुनाह माफ़ हो जाते हैं?

जवाब: जी हाँ, क़ुरआन और हदीस में ज़िक्र और इस्तिग़फ़ार करने वालों के लिए अल्लाह तआला की मग़फ़िरत और रहमत की खुशखबरी दी गई है।

6. अल्लाह का ज़िक्र कब करना चाहिए?

जवाब: हर समय ज़िक्र करना बेहतर है। ख़ास तौर पर फ़ज्र और मग़रिब के बाद, नमाज़ के बाद, सुबह-शाम और खाली वक़्त में ज़िक्र करने की बड़ी फ़ज़ीलत है।

7. क्या तस्बीह (माला) से ज़िक्र करना जायज़ है?

जवाब: तस्बीह या उँगलियों पर गिनकर ज़िक्र करना दोनों जायज़ हैं। हदीस में उँगलियों पर तस्बीह गिनने का भी ज़िक्र मिलता है।Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat: 30+ Sahih Hadith

8. क्या अल्लाह का ज़िक्र सिर्फ़ मस्जिद में ही करना चाहिए?

जवाब: नहीं, अल्लाह का ज़िक्र मस्जिद के साथ-साथ घर, सफ़र, काम की जगह और हर जायज़ स्थान पर किया जा सकता है।Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat: 30+ Sahih Hadith

9. क्या ज़िक्र करने से दिल का सुकून मिलता है?

जवाब: जी हाँ। क़ुरआन मजीद में है: “सुन लो! अल्लाह के ज़िक्र ही से दिलों को सुकून मिलता है।” (सूरह अर-रअद: 28)Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat: 30+ Sahih Hadith

10. एक मुसलमान को रोज़ कितना ज़िक्र करना चाहिए?

जवाब: ज़िक्र की कोई तय सीमा नहीं है। जितना अधिक अल्लाह को याद किया जाए, उतना ही बेहतर है। मुसलमान को कोशिश करनी चाहिए कि उसकी ज़बान हर समय अल्लाह के ज़िक्र से तर रहे।Allah Pak Ka Zikr Karne Ki Fazilat: 30+ Sahih Hadith

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

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