Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
अस्सलामु अलैकुम दोस्तों,
आज हम ज़ोहर की नमाज़ के बारे में आसान और तफ्सील से जानेंगे। ज़ोहर की नमाज़ पाँच वक़्त की फ़र्ज़ नमाज़ों में से दूसरी नमाज़ है, जिसे हर मुसलमान को पाबंदी के साथ अदा करने की कोशिश करनी चाहिए।
इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि ज़ोहर की नमाज़ का वक़्त कब से शुरू होता है और कब तक रहता है, इसमें कुल कितनी रकअत होती हैं और 4 रकअत सुन्नत, 4 रकअत फ़र्ज़, 2 रकअत सुन्नत और 2 रकअत नफ़िल किस तरह अदा की जाती हैं।
अगर आपको ज़ोहर की नमाज़ पढ़ने का सही तरीका मालूम नहीं है या आप इसे आसान अंदाज़ में सीखना चाहते हैं, तो इस वीडियो को आखिर तक ज़रूर देखिए। इंशाअल्लाह आपको नियत से लेकर सलाम फेरने तक का पूरा तरीका समझ आ जाएगा।
तो चलिए बिस्मिल्लाह करते हैं और जानते हैं ज़ोहर की नमाज़ का सही तरीका। 🤲
इस नमाज़ में कितनी रकात होती हैं? इस नमाज़ को पढ़ने का क्या तरीका है? मेरे भाइयों और बहनों जैसा की हम सब जानते हैं की इस्लाम में हमें जो पांच नमाज़े पढ़ने का हुक्म हैं। वो सभी नमाज़े हमें पाबन्दी से पढ़ना हैं। उसे बेवजह छोड़ना नहीं हैं।
अगर हम बेवजह नमाज़ छोड़ देते है हम पर अल्लाह का अज़ाब नाज़िल होगा। जो बहुत भयानक होगा। बेनमाज़ी लोगों पर जो अल्लाह का जो अज़ाब नाज़िल होता है।
खैर हम बात करते हैं ज़ोहर की नमाज़ की, सबसे पहले बात करते हैं आखिर ज़ोहर की नमाज़ क्या होती हैं? इस्लाम में जो पांच नमाज़े मुसलमानों पर फ़र्ज़ हैं उन पांच नमाज़ों में से जो दूसरी नमाज़ होती हैं वो ज़ोहर की नमाज़ कहलाती है।
ज़ोहर की नमाज़ से पहले फज्र की नमाज़ होती हैं। एक हदीस में आया हैं की जो शख्स पाबन्दी से ज़ोहर की नमाज़ अदा करता है उसके माल और दौलत में इज़ाफ़ा होता हैं और वह कभी परेशान नहीं रहता हैं। सुब्हानअल्लाह
ज़ोहर की नमाज़ का वक़्त कब से कब तक रहता है?
वैसे तो हम सभी ज़ोहर की नमाज़ का वक़्त जानते हैं लेकिन कुछ बच्चे जो की शुरू में नमाज़ पढ़ना सीखते हैं उन्हें नमाज़ और उसके वक़्त का पता नहीं रहता।
इसलिए हम आपको बता दें की ज़ोहर की नमाज़ का वक़्त जवाल के वक़्त के बाद शुरू होता हैं याद रहे है की जवाल का वक़्त गुज़र जाने के बाद ही ज़ोहर की नमाज़ अदा की जा सकती हैं।
जवाल के वक़्त कोई भी नमाज़ पढ़ना मकरूह हैं। जवाल का वक़्त यानि जब सूरज बिलकुल सर के ऊपर रहता हैं। ये वक़्त दिन में करीब 11:30 से लेकर 12:30 बजे तक रहता हैं।
ज़ोहर की नमाज़ वक़्त 1 बजे से लेकर असर की नमाज़ के अज़ान से पहले तक रहता है वैसे तो अलग अलग शहरों की मस्जिदों में ज़ोहर की नमाज़ का वक़्त थोड़ा अलग रहता है।
कहीं 1 बजे तक अज़ान हो जाती हैं तो कहीं 2 बजे। अज़ान होने के 15 मिनट बाद इमाम ज़ोहर की नमाज़ पढ़ाते हैं।
अगर आप कहीं सफर कर रहे हो जहाँ न मस्जिद हैं न कहीं से अज़ान की आवाज़ आ रही हैं तो आप पहले तो मोबाइल या घड़ी में वक़्त देख ले अगर 1 बजे से लेकर 4 बजे के बीच वक़्त हैं तो आप नमाज़ पढ़ सकते हैं क्यूंकि 4 बजे के बाद असर का वक़्त शुरू हो जाता हैं।Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
ज़ोहर की नमाज़ में कितनी रकात होती हैं
आपको बता दें की ज़ोहर की नमाज़ में 12 रक़ातें होती हैं। जो इस तरह है,
4 रकात नमाज़ सुन्नत, 4 रकात नमाज़ फ़र्ज़, 2 रकात नमाज़ सुन्नत ,2 रकात नमाज़ नफिल ,मतलब पहले 4 सुन्नत पढ़ी जाएगी फिर 4 फ़र्ज़ उसके बाद 2 सुन्नत और आखिर में 2 नफिल नमाज़ आपको पढ़नी हैं।
ज़ोहर की नमाज़ पढ़ने का तरीका
दिन की पांचो नमाज़ के पढ़ने का तरीका लगभग एक ही जैसा हैं। सब में बस नियत और रकात का फर्क होता है बाकि सब कुछ तरीका बिलकुल एक ही जैसा हैं।
आपने हमारे पिछले विडियो में फज्र, की नमाज़ को पढ़ने का जो तरीका सुना होगा। जो तरीका उसमे दिया गया है वही तरीका ज़ोहर की नमाज़ में भी अपनाना हैं।Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
हम आपको ज़ोहर की 4 सुन्नत नमाज़ पढ़ने का पूरा तरीका बताते है। वो अगर आपने सीख लिया तो बाकि की नमाज़ भी आप आसानी से सीख लेंगे।
4 रकात नमाज़ सुन्नत का तरीका
सबसे पहले नमाज़ की नियत करे जो इस तरह है नियत की मैंने 4 रकात नमाज़ सुन्नत, वास्ते अल्लाह तआला के, वक़्त ज़ोहर का, मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ और फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए अपने दोनों हाथ उठा कर अपने कानों तक ले जाये फिर दोनों हाथों को नाफ़ के नीचे बांध ले।
उसके बाद आपको सूरह सना पढ़ना हैं जो हैं “सुबहानका अल्लाहुम्मा व बिहम्दीका व तबा रकस्मुका व तआला जद्दुका वाला इलाहा गैरुका”
इसके बाद आप अउजू बिल्लाहि मिनश शैतान निर्रजिम बिस्मिल्लाहीर्रहमानिररहीम पढ़े। उसके बाद सूरह फातेहा पढ़े। सूरह फातेहा पढ़ने के बाद कोई एक सूरह पढ़े जैसे कुल्हुवल्लाह, या कुल अऊजु बिरब्बिल फलक या कोई और सूरह जो आपको याद हो
वो पढ़े। सूरह पढ़ने के बाद आप अल्लाहो अकबर कहते हुए रुकू में जाये रुकू में जाने के बाद 3 मर्तबा “सुबहान रब्बी अल अज़ीम” पढ़े।
इस वक़्त आपको अपनी नज़र अपने पैर के अंगूठे पर रखनी हैं। इसके बाद आप “समीअल्लाहु लिमन हमीदह” कहते हुए रुकू से खड़े हो जाये और रब्बना व लकल हम्द कहते हुए
उसके बाद अल्लाहो अकबर बोलते हुए सजदे में जाये। सजदे में इस तरह जाये की आपका सीधा घुटना पहले ज़मीन पर लगे।
फिर सजदे में 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े। 3 बार सुबहाना रब्बी अल आला पढ़ने के बाद फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए उठे और वापिस सजदे में जाये।
वापिस 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े।
आप फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए खड़े हो जाये और हाथ बांध ले और फिर से सूरह फातेहा (अल्हम्दु शरीफ) पढ़े और उसके बाद कोई दूसरी सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े।Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
उसके बाद फिर से अल्लाहु अकबर कहते हुए रुकू में जाये। रुकू में जाने के बाद वापिस 3 मर्तबा “सुबहाना रब्बी अल अज़ीम” पढ़े।
इसके बाद वापिस आप “समीअल्लाहु लिमन हमीदह” कहते हुए रुकू से खड़े हो जाये और दोबारा रब्बना व लकल हम्द कहते हुए उसके बाद अल्लाहो अकबर कहते हुए सजदे में जाये।
सजदे में वापिस 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े फिर वापिस अल्लाहु अकबर कहते हुए दोबारा सजदे में सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े। फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए सीधे पैर के पंजो के बल पर बैठ जाये।
ध्यान रहे आप जब बैठे तो सीधे पैर के अंघूठे के बल पर पांचो अँगुलियों समेत बैठे। उल्टा पैर आप ज़मीन पर टिका सकते हैं। अगर कोई परेशानी आ रही हैं इस तरह बैठने में या अंगूठा हिल जाता है तो कोई मसला नहीं लेकिन जानबूझकर अंगूठा हिलाना या दोनों पैर ज़मीन पर टिका कर बैठना गलत हैं।
ये भी पढ़ें: फ़ज़्र की नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा।2 सुन्नत + 2 फ़र्ज़ | फ़ज़्र की नमाज़ की पूरी जानकारी
फिर आप अत्तहिय्यात पढ़े अत्तहिय्यात पढ़ने के दौरान आपको अशहदु अल्लाह अल्फ़ाज़ आते ही शहादत की ऊँगली को उठाना हैं। फिर आप अल्लाहो अकबर बोलते हुए तीसरी रकात के लिए फिर से खड़े हो जाये।Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
जैसे आपने ये 2 रकात पढ़ी उसी तरह आपको 4 सुन्नत की आखरी 2 और रकात पढ़नी हैं। बस आखिर की 2 रकात में अत्तहिय्यात के बाद दरूदे इब्राहिम एक बार और दुआ ए मसुरा एक एक बार पढ़ना हैं। उसके बाद सलाम फेरना हैं। इस तरह आपकी 4 रकात नमाज़ सुन्नत हो जाएगी।
4 रकात फ़र्ज़ नमाज़ का तरीका
जैसे आपने सुन्नत नमाज़ पढ़ी। बस वैसे ही आपको फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ना हैं क्यूंकि दोनों में 4 रकात ही हैं। बस 4 फ़र्ज़ नमाज़ में थोड़े से बदलाव हैं जो इस तरह हैं।
पहला की इसमें आपको नियत में 4 सुन्नत की जगह 4 फ़र्ज़ बोलना हैं। दूसरा अगर आप मस्जिद में यह नमाज़ पढ़ रहे हैं तो नियत में पीछे इस इमाम के बोल सकते हैं क्यूंकि मस्जिद में फ़र्ज़ नमाज़ इमाम के पीछे होती हैं। इमाम ही फ़र्ज़ नमाज़ को पढ़ाते हैं।
तीसरा जब आप पहली 2 रकात फ़र्ज़ पढ़कर तीसरी रकात के लिए खड़े होंगे, उसमे आपको सूरह फातेहा पढ़ने के बाद सीधे रकू में चले जाना हैं। सूरह फातेहा के बाद कोई सूरह जैसे कुल्हुवल्लाह, या कुल अऊजु बिरब्बिल फलक नहीं पढ़ना हैं। आपको सीधे रकू में जाना हैं और जो बाकि का तरीका हैं वहीं इस नमाज़ में भी करना हैं। बस ऐसे आपकी 4 फ़र्ज़ नमाज़ भी हो जाएगी।Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
2 रकात नमाज़ सुन्नत का तरीका
जैसे आपने सबसे पहले 4 रकात नमाज़ सुन्नत पढ़ी उसी तरह अब 2 रकात नमाज़ सुन्नत पढ़नी हैं बस इसमें ये फर्क हैं की पहले आपने 4 सुन्नत पढ़ी अब सिर्फ 2 सुन्नत पढ़नी हैं।
इसके लिए आपको नियत में 2 रकात नमाज़ सुन्नत बोलना हैं और 4 की जगह 2 रकात ही पढ़नी हैं यानि दूसरी रकात में अत्तहिय्यात, दरूदे इब्राहिम और दुआ ए मसुरा पढ़ कर सलाम फेरना हैं।
2 रकात नमाज़ नफ़िल का तरीका
जैसे आपने 2 रकात नमाज़ सुन्नत पढ़ी बस ऐसे ही 2 रकात नमाज़ नफ़िल पढ़नी हैं। बस नियत में आपको 2 रकात नमाज़ नफ़िल बोलना हैं। इस तरह आपकी नफ़िल नमाज़ भी हो जाएगी। उम्मीद करते है आपको ज़ोहर की नमाज़ को पढ़ने का पूरा तरीका मालूम चल गया होगा।
अल्लाह हम सबको पंजवक्ता नमाज़ पढ़ने की तौफीक अता फरमाए आमीन।Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
ये भी पढ़ें: ईशा की नमाज पढ़ने का तरीक़ा।
ज़ोहर की नमाज़ — FAQ सवाल-जवाब
सवाल 1: ज़ोहर की नमाज़ में कुल कितनी रकअत होती हैं?
जवाब: आम तौर पर ज़ोहर की नमाज़ में 12 रकअत पढ़ी जाती हैं — 4 रकअत सुन्नत, 4 रकअत फ़र्ज़, 2 रकअत सुन्नत और 2 रकअत नफ़िल।Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
सवाल 2: ज़ोहर की नमाज़ का वक़्त कब शुरू होता है?
जवाब: ज़ोहर का वक़्त ज़वाल के बाद शुरू होता है और असर का वक़्त शुरू होने तक रहता है। सही वक़्त शहर और तारीख़ के हिसाब से बदलता रहता है।Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
सवाल 3: ज़ोहर की नमाज़ पहले कौन-सी पढ़नी चाहिए?
जवाब: पहले 4 रकअत सुन्नत, फिर 4 रकअत फ़र्ज़, उसके बाद 2 रकअत सुन्नत और आखिर में 2 रकअत नफ़िल पढ़ी जाती हैं।Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
सवाल 4: ज़ोहर की 4 रकअत फ़र्ज़ की नियत कैसे करें?
जवाब: दिल में ज़ोहर की 4 रकअत फ़र्ज़ नमाज़ अदा करने का इरादा करें। नियत के अल्फ़ाज़ बोलना ज़रूरी नहीं, असल चीज़ दिल का इरादा है।Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
सवाल 5: ज़ोहर की फ़र्ज़ नमाज़ में तीसरी और चौथी रकअत में सूरह पढ़नी होती है?
जवाब: इस बारे में अलग-अलग फ़िक़्ही मसालिक में तफ्सील मिलती है। जिस मस्लक के मुताबिक़ आप नमाज़ अदा करते हैं, उसी के मुताबिक़ किसी भरोसेमंद आलिम से तरीका सीखना बेहतर है।Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
सवाल 6: क्या ज़ोहर की नमाज़ घर पर पढ़ सकते हैं?
जवाब: जी हाँ, ज़रूरत होने पर ज़ोहर की नमाज़ घर पर भी अदा की जा सकती है। मर्दों के लिए मस्जिद की जमाअत की अहमियत अपनी जगह है।Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
सवाल 7: अगर ज़ोहर की नमाज़ छूट जाए तो क्या करें?
जवाब: नमाज़ जान-बूझकर छोड़ना नहीं चाहिए। अगर नमाज़ छूट जाए तो क़ज़ा के मसले के बारे में अपने भरोसेमंद आलिम से सही तरीका मालूम करके नमाज़ अदा करें।Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
सवाल 8: ज़ोहर की नमाज़ में कौन-सी सूरह पढ़ सकते हैं?
जवाब: सूरह फ़ातिहा के बाद क़ुरआन मजीद की कोई भी सूरह पढ़ सकते हैं जो आपको याद हो।Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
सवाल 9: क्या ज़ोहर की नमाज़ सफ़र में भी पढ़नी होती है?
जवाब: सफ़र की हालत में नमाज़ के बारे में कुछ खास अहकाम होते हैं, जैसे क़स्र का मसला। अपनी सफ़र की दूरी और हालात के मुताबिक़ किसी भरोसेमंद आलिम से मसला पूछना बेहतर है।Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
सवाल 10: ज़ोहर की 2 रकअत नफ़िल पढ़ना ज़रूरी है?
जवाब: नफ़िल नमाज़ फ़र्ज़ नहीं होती। इसे पढ़ने में सवाब है, लेकिन इसे फ़र्ज़ की तरह लाज़िम नहीं समझना चाहिए।Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
सवाल 11: ज़ोहर की नमाज़ का सही वक़्त कैसे मालूम करें?
जवाब: अपने इलाक़े की मस्जिद की अज़ान या भरोसेमंद नमाज़ टाइमिंग देखकर वक़्त मालूम कर सकते हैं। शहर और तारीख़ के हिसाब से नमाज़ के औक़ात बदलते रहते हैं।Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
सवाल 12: क्या ज़ोहर की नमाज़ पढ़ने से पहले वुज़ू ज़रूरी है?
जवाब: जी हाँ, नमाज़ के लिए पाकीज़गी ज़रूरी है। अगर वुज़ू नहीं है तो पहले वुज़ू करें और फिर नमाज़ अदा करें।Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Zohar ki Namaz Padhne ka tariqa
खुदा हाफिज़…..
