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अल्लाह के ज़िक्र के 12 अहम आदाब: हर मुसलमान को ज़रूर जानने चाहिए | कुरआन और हदीस की रोशनी में|Allah Ke Zikr Ke 12 Aham Adab: Har Musalman Ko Zarur Janna Chahiye | Quran Aur Hadith Ki Roshni Mein amazing story

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Allah Ke Zikr Ke 12 Aham Adab
Allah Ke Zikr Ke 12 Aham Adab

Allah Ke Zikr Ke 12 Aham Adab

अल्लाह तआला का ज़िक्र हर मोमिन की ज़िंदगी की सबसे बड़ी इबादतों में से एक है। लेकिन क्या सिर्फ़ ज़िक्र करना ही काफ़ी है, या उसका भी एक सही तरीका और अदब है? कुरआन-ए-करीम और सहीह हदीस हमें बताते हैं कि अल्लाह का ज़िक्र पूरे इख़लास, अदब, तवज्जोह और सुन्नत के मुताबिक़ करना चाहिए, ताकि उसका पूरा सवाब हासिल हो सके।

इस आर्टिकल में हम अल्लाह के ज़िक्र के 12 अहम आदाब, ज़िक्र करने का सही तरीका, ज़िक्र करते समय किन बातों का ख़याल रखना चाहिए, और कुरआन व हदीस की रोशनी में ज़िक्र के बेहतरीन उसूल जानेंगे। अगर आप चाहते हैं कि आपका ज़िक्र अल्लाह तआला की बारगाह में ज़्यादा पसंदीदा और क़ुबूल हो, तो इस आर्टिकल को आखिर तक ज़रूर पढ़ें।

अल्लाह के ज़िक्र के आदाब का बयान

कुरआन और हदीस के आलिमों ने फ़रमाया है कि –

ज़िक्र करने वाला जिस जगह पर ज़िक्र करे, वह जगह उन तमाम चीज़ों से जिन से ख़्याल बटे और तवज्जुह हटे ख़ाली और पाक-साफ होना चाहिये।Allah Ke Zikr Ke 12 Aham Adab

ज़िक्र करने वाले के अन्दर दुआ के आदाब में जो बातें बताई गयी हैं जैसे इख़्लास, ख़ुशू-ख़ुजू, ज़ाहिरी – बातिनी पाकी, सफाई-सुथराई वगैरह इन सब का पाया जाना चाहिये क्योंकि अल्लाह का ज़िक्र सब से अफ़ज़ल इबादत है, इसलिये इस में दुआ से कहीं ज़्यादा अदब-एहतराम और एहतियात की ज़रूरत है।

ज़िक्र करने वाले का मुँह और ज़बान बिल्कुल पाक-साफ होनी चाहिये। अगर किसी चीज़ की बू मुँह में हो तो दातुन वगैरह करके उस को ज़रूर ही दूर कर लेना चाहिये।

अगर किसी जगह पर बैठ कर ज़िक्र कर रहा है तो मुँह किब्ले की तरफ होना चाहिये।

आजिज़ी, इन्किसारी, सुकून-इतमिनान और दिल की पूरी तवज्जुह के साथ ज़िक्र के लिये बैठे।

जो कुछ भी ज़िक्र करे उस के माना और मफहूम को अच्छी तरह समझने और उन में गौर व फिक्र करे।

अगर किसी ज़िक्र का मतलब न जानता हो तो किसी आलिम से पूछले और समझ ले।

नम्बर बढ़ाने के चक्कर में जल्द बाज़ी न करे। इसलिये उलमा ने कलिमए-तय्यिबा के ज़िक्र में “लाइला-ह इल्लल्लाहु” में शब्द “ला” के मद को खूब अच्छी तरह खींचने और “इल्लल्लाहु” पर जोर देने को मुस्तहब फरमाया है।

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जो भी ज़िक्र नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से साबित है वह चाहे वाजिब हो या मुस्तहब, जब तक उस को ज़बान से इस तरह अदा न करे कि खुद सुन ले, उस वक़्त तक उस का कुछ एत्तबार नहीं यानी दिल ही दिल में सोचना जिक्र नहीं कहलाता।Allah Ke Zikr Ke 12 Aham Adab

सब से ज़्यादा फजीलत वाला ज़िक्र कुरआन मजीद है, उन ज़िक्रों को छोड़ कर जो नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से खास तौर से साबित हैं क्योंकि उस जगह पर वही ज़िक्र करना चाहिये जो आप सल्ललाहु ताआला अलैहि वसल्लम ने बतलाया है। जैसे, रुकूअ में आप ने “सुब्हा-न रब्बि-यल् अज़ीम” बतलाया है और सज्दा में “सुब्हा-न रब्बि-यल आला”, इसलिये रुकूज़ और सिज्दा में यही पढ़ना चाहिये। इसीलिये कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने रुकूअ और सिज्दा में कुरआन पढ़ने से मना फ़रमाया है।

अल्लाह के ज़िक्र की फ़ज़ीलत सिर्फ तहलील (लाइला-ह इल्लल्लाह तस्बीह (सुब्हा नल्लाह) तक्बीर (अल्लाहु अक्बर) ही में नही हैं, बल्कि किसी भी अमल में अल्लाह तआला की इताअत करने वाला, अल्लाह का ज़िक्र करने वाला है और वह अमल जिक्र कहलाएगा।

जब बन्दा नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बयान मुख्तलिफ ज़िक्रों को, मुख्तलिफ हालात और समय में रात-दिन, सुबह-शाम पाबन्दी के साथ पढ़ता रहेगा तो अल्लाह तआला के यहाँ उस का नाम “बहुत अधिक अल्लाह को याद करने वाली औरतों और मर्दों में” शामिल हो जायेगा जिसका ज़िक्र कुरआन पाक में आया है।

जिस शख़्स का कोई वज़ीफ़ा रात या दिन के किसी हिस्सा में, या किसी नमाज़ के बाद या इन के अलावा और किसी समय और हालात में मुकर्र हो और पाबन्दी के साथ उस को पढ़ा करता हो अगर किसी दिन वह छूट जाये तो उस का कज़ा कर लेना ज़रूरी है।Allah Ke Zikr Ke 12 Aham Adab

और जिस समय भी मुमकिन हो उस को पढ़ लेना और पूरा कर लेना चाहिये, और उसे उस दिन बिल्कुल ही न छोड़ देना चाहिये, ताकि वह पाबन्दी की आदत बाकी रहे। इस की क्ज़ा में सुस्ती हर्गिज न करनी चाहिये क्योंकि सुस्ती करने में सख़्त नुक्सान है।

नोट – गोया अल्लाह तआला की हर इबादत और इताअत अल्लाह का जिक्र है, चाहे वह अल्लाह-अल्लाह का लफ्ज़ हो, चाहे कुरआन पाक की तिलावत, चाहे कुरआन व हदीस का इल्म हासिल करना हो, चाहे वअज़ और नसीहत करना हो, चाहे और कोई इबादत और इताअत, रोज़ा नमाज़ वगैरह हो।

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FAQ (सवाल व जवाब)

1. अल्लाह का ज़िक्र क्या है?

जवाब: अल्लाह तआला को याद करना, उसकी तस्बीह (सुब्हानल्लाह), तहलील (ला इलाहा इल्लल्लाह), तकबीर (अल्लाहु अकबर), तहमीद (अल्हम्दुलिल्लाह), कुरआन की तिलावत, दुरूद शरीफ़ और हर वह नेक अमल जो अल्लाह की रज़ा के लिए किया जाए, सब अल्लाह के ज़िक्र में शामिल हैं।Allah Ke Zikr Ke 12 Aham Adab

2. अल्लाह का ज़िक्र करने का सबसे बेहतर तरीका क्या है?

जवाब: इख़लास, तवज्जोह, अदब, पाकीज़गी और सुन्नत के मुताबिक़ ज़िक्र करना सबसे बेहतर तरीका है।Allah Ke Zikr Ke 12 Aham Adab

3. क्या बिना वुज़ू के ज़िक्र किया जा सकता है?

जवाब: जी हाँ, आम ज़िक्र बिना वुज़ू के भी किया जा सकता है। लेकिन वुज़ू के साथ ज़िक्र करना ज़्यादा अफ़ज़ल और अदब के क़रीब है।Allah Ke Zikr Ke 12 Aham Adab

4. क्या अल्लाह का ज़िक्र सिर्फ़ तस्बीह से ही होता है?

जवाब: नहीं। कुरआन की तिलावत, दुरूद शरीफ़, दुआ, इस्तिग़फ़ार और हर वह नेक अमल जो अल्लाह की इताअत में हो, वह भी ज़िक्र है।Allah Ke Zikr Ke 12 Aham Adab

5. अल्लाह का ज़िक्र कब करना चाहिए?

जवाब: सुबह-शाम, नमाज़ के बाद, सफ़र में, काम करते हुए, सोने से पहले और हर वक़्त अल्लाह का ज़िक्र करना मुस्तहब और सवाब का काम है।Allah Ke Zikr Ke 12 Aham Adab

6. क्या ज़िक्र करते समय क़िबला रुख होना ज़रूरी है?

जवाब: ज़रूरी नहीं, लेकिन अगर मुमकिन हो तो क़िबला रुख होकर ज़िक्र करना बेहतर और अदब के मुताबिक़ है।

7. ज़िक्र करते समय किन बातों का ख़याल रखना चाहिए?

जवाब: इख़लास, दिल की हाज़िरी, पाकीज़गी, सही लफ़्ज़ों के साथ ज़िक्र करना, जल्दबाज़ी से बचना और उसके मायने पर ग़ौर करना चाहिए।Allah Ke Zikr Ke 12 Aham Adab

8. क्या अल्लाह का ज़िक्र गुनाहों की माफ़ी का ज़रिया है?

जवाब: जी हाँ। कुरआन और हदीस के मुताबिक़, सच्चे दिल से किया गया ज़िक्र, तौबा और इस्तिग़फ़ार गुनाहों की माफ़ी और दिल की सुकून का बड़ा ज़रिया है।Allah Ke Zikr Ke 12 Aham Adab

9. सबसे अफ़ज़ल ज़िक्र कौन सा है?

जवाब: “ला इलाहा इल्लल्लाह” सबसे अफ़ज़ल अज़कार में से है। इसके अलावा सुब्हानल्लाह, अल्हम्दुलिल्लाह, अल्लाहु अकबर और कुरआन की तिलावत भी बहुत फ़ज़ीलत वाले अज़कार हैं।Allah Ke Zikr Ke 12 Aham Adab

10. अल्लाह का ज़िक्र करने से क्या फ़ायदे होते हैं?

जवाब: ज़िक्र से दिल को सुकून मिलता है, ईमान मज़बूत होता है, गुनाह माफ़ होते हैं, शैतान दूर रहता है, अल्लाह की रहमत नाज़िल होती है और आख़िरत में बड़ा अज्र मिलता है।Allah Ke Zikr Ke 12 Aham Adab

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

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