22/07/2026
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इस्लाम में बीवी के हक़ूक़ | हर शौहर के लिए जानना ज़रूरी फ़र्ज़ और ज़िम्मेदारियाँ| Islam Me Bibi Ke Huqooq | Har Shohar Ke Liye Janna Zaroori Farz Aur Zimmedariyan

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Islam Me Bibi Ke Huqooq | Har Shohar Ke Liye Janna Zaroori Farz Aur Zimmedariyan
Islam Me Bibi Ke Huqooq

Islam Me Bibi Ke Huqooq

निकाह सिर्फ़ दो लोगों का रिश्ता नहीं, बल्कि भरोसे, मोहब्बत, रहमत और ज़िम्मेदारियों का नाम है। इस्लाम ने जिस तरह बीवी पर कुछ फ़र्ज़ रखे हैं, उसी तरह शौहर पर भी बीवी के कई अहम हक़ूक़ और ज़िम्मेदारियाँ फ़र्ज़ की हैं। अगर शौहर इन हक़ूक़ को समझकर निभाए, तो घर में सुकून, मोहब्बत और बरकत कायम रहती है।

इस आर्टिकल में हम कुरआन और हदीस की रौशनी में जानेंगे कि इस्लाम में बीवी के क्या-क्या हक़ूक़ हैं, शौहर की क्या ज़िम्मेदारियाँ हैं और एक खुशहाल इस्लामी ज़िंदगी के लिए किन बातों का ख़ास ख़याल रखना चाहिए। अगर हर शौहर इन बातों पर अमल करे, तो उसका घर दुनिया में भी जन्नत जैसा बन सकता है।

आइये अब जायज़ा लें कि औरत के शौहर पर क्या हुकूक हैं। उनमें से पहला हक़ है औरत का ‘नान नफ़्का’ यानी औरत के ख़र्चों को पूरा करना।

एक बात ज़ेहन में रख लेना कि अल्लाह तआला ने औरत के ज़िम्मे अपना नान नफ्का कमाने का बोझ नहीं रखा। औरत को अपने ख़र्चों के लिए कमाने की कोई ज़िम्मेदारी नहीं।

अगर बेटी है तो बाप का फ़र्ज़ है कि वह अपनी बेटी का ख़र्चा पूरा करे। अगर बहन है तो भाई के ज़िम्मे है कि वह अपनी बहन का ख़र्चा पूरे करे। अगर बीवी है तो शौहर की ज़िम्मेदारी है कि वह बीवी का ख़र्चा पूरा करे ।

और अगर माँ है तो औलाद का फर्ज़ है कि वह अपनी माँ का ख़र्चा पूरा करे। बेटी से लेकर माँ बनने तक अल्लाह ने औरत पर अपनी रोज़ी कमाना कभी भी फर्ज़ नहीं किया ।

तो यह शौहर की ज़िम्मेदारी होती है कि वह अपनी बीवी का ख़र्चा पूरा करे। उसके ख़र्चे के मुताल्लिक उलेमा ने मसला लिखा है कि शौहर को चाहिए कि अपनी हैसियत के मुताबिक़ बीवी का जाती ख़र्चा मुकर्रर करे।

मुम्किन है कि कोई आदमी हजार रूपए दे सकता हो, कोई आदमी दस हजार दे सकता हो, और कोई आदमी सिर्फ पांच सौ दे सकता हो ।

मात्रा और तायदाद की बात नहीं। घर की सब्ज़ी वगैरह के लिए ख़र्चा देना और बात है, शरीअत कहती है कि वह तुम्हारी बीवी है, अपने घर को छोड़कर तुम्हारा घर बसाने यहाँ आयी है, अब तुम उसको अपनी जाती ज़रूरतों के लिए कुछ पैसे दे दो और देने के बाद तुम्हें पूछने की ज़रूरत नहीं कि वे पैसे कहाँ ख़र्च करती है।

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इसमें भी हिक्मत है, हो सकता है कि औरत महसूस करे कि मेरी बहन गरीब है मैं उसको दे दूँ। मैं अपने भाई की कुछ मदद करूँ। उसे तब खुशी हो जब वह किसी गरीब औरत का दुख बाँटे।

लिहाज़ा जब जाती ख़र्चा दे दिया तो अब पूछने की ज़रूरत नहीं, वह जहाँ चाहे ख़र्च कर सकती है। बीवी के हुकूक से मुताल्लिक दूसरी बात सुनें। दीन के आलिमों ने मसला लिखा है कि जब मर्द किसी औरत से निकाह करे तो उसकी ज़िम्मेदारी है कि उस औरत को सर छुपाने के लिए अपनी हैसियत के मुताबिक जगह बना दे।

कहावत मशहूर है कि अपना घौंसला अपना, कच्चा हो या पक्का औरत को कोई ऐसी जगह मुहैया कराना जहाँ वह सर छुपायें, यह शौहर की ज़िम्मेदारी है। अगर मजबूरी हो, घर के सब अफराद इकट्ठे रहते हों तो उसे कोई एक कमरा ही दे दिया जाये,

जहाँ वह अपनी ज़रूरतों का सामान रख सके। यह न हो कि बीवी का भी कमरा वही है और उसी में माँ-बाप का सामान भी पड़ा हुआ है। किसी और का सामान भी पड़ा हुआ है। यह बात ठीक है कि हर आदमी मकान नहीं बना सकता, लेकिन जो बना सकते हैं वे बनाकर दें।

यह शौहर के फ़राईज़ में से एक फर्ज़ है। वह अच्छे दोस्त का तसव्वुर है। कुरआन पाक में जहाँ जहाँ मियाँ- बीवी के हुकूक का तज़किरा है वहाँ जगह-जगह फरमायाः और तुम अल्लाह से डरते रहना’। यह इसलिए कि ‘और तुम जान लेना कि तुमको अल्लाह से मुलाकात करनी है।

इसलिए कि बाज़ मामलात ऐसे होते हैं कि न बीवी शर्म से किसी को बता सकती है और न शौहर शर्म से किसी को बता सकता है। मगर अन्दर अन्दर दोनों एक दूसरे का दिल दुखा रहे होते हैं।

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फ़रमाया कि तुम इस तरह एक दूसरे का दिल जलाया करोगे तो याद रखना कि तुमको अल्लाह तआला से मुलाकात करनी है। अगर एक दूसरे को सुकून नहीं पहुँचाओगे तो कियामत के दिन उसको कैसे जवाब दे सकोगे।Islam Me Bibi Ke Huqooq

एक बेहतरीन उसूल यह है कि अगर कोई ग़लती या कोताही बीवी से हो जाये तो वह माफ़ी माँग ले, और अगर शौहर से हो जाये तो वह माज़िरत कर ले। अपनी गलती पर माज़िरत कर लेने से इनसान की इज्ज़त बढ़ती है।

मुझे इस मौके पर अपने पीर व मुर्शिद की एक बात याद आई ये हज़रात कितने मुख़िलस होते हैं अपनी ज़िन्दगी के वाक़िआत नमूने बनाकर पेश करते हैं।

फ़रमाने लगे कि एक दिन मैं वुजू कर रहा था (उम्र काफी ज़्यादा थी) बीवी साहिबा वुजू कराते वक्त पानी ठीक से नहीं डाल रही थी जिस पर मैंने उन्हें ज़रा सख़्ती से बात कह दी कि तुम क्यों ठीक तरह से वुजू नहीं करवा रही हो मगर मेरे इस तरह गुस्सा करने पर वह ख़ामोश रहीं और जिस तरह मैं चाहता था वैसे कर दिया।

खैर मैं वजू करके घर से चला, रास्ते में ख़्याल आया कि अभी तो मैं अल्लाह की मख़्लूक के साथ यह बर्ताव कर रहा था, अभी मुसल्ले पर जाकर नमाज़ पढ़ाऊँगा। मेरी नमाज़ कैसे कबूल होगी।

कहने लगे कि मैं आधे रास्ते से वापस आया और बीवी से माज़िरत की,अपने रवैये पर शर्मिन्दगी का इज़हार किया उसने मुझे माफ कर दिया। फिर मैंने जाकर मस्जिद में नमाज़ पढ़ायी ।Islam Me Bibi Ke Huqooq

तीसरी बात यह है कि चूँकि शौहर अपने घर के लिए अमीर और सरदार है लिहाज़ा उसे चाहिए कि अपनी रिआया यानी अपने घर वालों के साथ नर्मी करे, अल्लाह तआला कियामत के दिन उससे नरमीं फ़रमायेंगे।

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जो दूसरों को जल्दी माफ करने वाला होगा अल्लाह तआला क़ियामत के दिन उसको जल्दी माफ फरमायेंगे। जो दूसरों के ऐबों को छुपाने वाला होगा अल्लाह तआला कियामत के दिन उसके ऐबों को छुपायेंगे।

इस्लाम में बीवी का तसव्वुर जीवन-साथी का तसव्वुर है, हमदम व हमराज़ का तसव्वुर है, वह कोई बाँदी का तसव्वुर नहीं है।Islam Me Bibi Ke Huqooq

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

1. इस्लाम में बीवी का सबसे पहला हक़ क्या है?

जवाब: बीवी का सबसे पहला हक़ यह है कि शौहर उसकी ज़रूरी ज़रूरतें, जैसे खाना, कपड़ा, रहने की जगह और नान-नफ़्का अपनी हैसियत के मुताबिक पूरा करे।Islam Me Bibi Ke Huqooq

2. क्या बीवी का खर्च उठाना शौहर पर फ़र्ज़ है?

जवाब: जी हाँ, इस्लाम के मुताबिक बीवी का नान-नफ़्का और उसकी ज़रूरतों का खर्च उठाना शौहर की ज़िम्मेदारी और फ़र्ज़ है।Islam Me Bibi Ke Huqooq

3. क्या शौहर को बीवी के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए?

जवाब: बिल्कुल। नबी-ए-करीम ﷺ ने फ़रमाया कि तुममें सबसे बेहतर वह है जो अपनी बीवी के साथ सबसे अच्छा व्यवहार करे।Islam Me Bibi Ke Huqooq

4. क्या बीवी को अलग रहने की जगह देना शौहर की ज़िम्मेदारी है?

जवाब: अगर शौहर की हैसियत हो, तो उसे बीवी के लिए रहने की ऐसी जगह का इंतज़ाम करना चाहिए जहाँ वह सुकून और पर्दे के साथ रह सके।Islam Me Bibi Ke Huqooq

5. क्या शौहर बीवी की हर छोटी-बड़ी गलती पर गुस्सा कर सकता है?

जवाब: नहीं। इस्लाम शौहर को सब्र, नरमी और माफ़ करने की तालीम देता है। गुस्से के बजाय प्यार और समझदारी से बात करनी चाहिए।Islam Me Bibi Ke Huqooq

6. क्या बीवी के साथ मोहब्बत और इज़्ज़त से पेश आना भी इबादत है?

जवाब: जी हाँ। बीवी के साथ अच्छा सुलूक करना, उसकी इज़्ज़त करना और उसे खुश रखना नेक अमल और सवाब का काम है।Islam Me Bibi Ke Huqooq

7. अगर शौहर से कोई गलती हो जाए तो उसे क्या करना चाहिए?

जवाब: अगर शौहर से गलती हो जाए, तो उसे अपनी गलती मानकर माफ़ी माँग लेनी चाहिए। इससे रिश्ते मज़बूत होते हैं और अल्लाह भी ऐसे लोगों को पसंद फ़रमाता है।Islam Me Bibi Ke Huqooq

8. क्या इस्लाम में बीवी को नौकरानी की तरह माना गया है?

जवाब: नहीं। इस्लाम में बीवी को जीवनसाथी, हमदर्द और सम्मानित साथी का दर्जा दिया गया है, न कि नौकरानी का।Islam Me Bibi Ke Huqooq

9. एक अच्छा शौहर बनने के लिए क्या करना चाहिए?

जवाब: एक अच्छे शौहर को अपनी बीवी के हक़ अदा करने चाहिए, उससे मोहब्बत और इज़्ज़त से पेश आना चाहिए, उसकी ज़रूरतों का ख़याल रखना चाहिए और हर मामले में इंसाफ़ करना चाहिए।Islam Me Bibi Ke Huqooq

10. इस आर्टिकल से हमें सबसे बड़ी सीख क्या मिलती है?

जवाब: सबसे बड़ी सीख यह है कि इस्लाम शौहर-बीबी के रिश्ते को मोहब्बत, रहमत, इज़्ज़त और ज़िम्मेदारी पर क़ायम देखना चाहता है। जब शौहर बीवी के हक़ अदा करता है, तो घर में सुकून, बरकत और खुशहाली आती है।Islam Me Bibi Ke Huqooq

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Islam Me Bibi Ke Huqooq

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Islam Me Bibi Ke Huqooq

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

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