Hazrat Musa Alaihissalam Ka Mukammal Waqia
हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम इस्लाम के अज़ीम नबियों में से एक हैं, जिनका ज़िक्र क़ुरआन मजीद में सबसे ज़्यादा बार आया है। उनकी ज़िंदगी सब्र, ईमान, अल्लाह पर भरोसा और ज़ालिम के सामने डटकर हक़ की बात कहने की बेहतरीन मिसाल है। फिरऔन जैसा ताकतवर और घमंडी बादशाह भी अल्लाह की कुदरत के सामने टिक न सका।
इस आर्टिकल में हम हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का मुकम्मल वाक़िआ आसान और दोस्ताना हिंदी में जानेंगे। उनकी पैदाइश, नील दरिया का वाक़िआ, फिरऔन के ज़ुल्म, बनी इस्राईल की निजात और दरिया के शक्क होने जैसे अहम मोजिज़ात को क़ुरआन और इस्लामी रिवायतों की रौशनी में समझेंगे। आइए, इस इबरत और ईमान से भरपूर वाक़िए को तफ़सील से पढ़ते हैं।
हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम अल्लाह के सबसे प्यारे नबियों में से एक नबी थे। उन्हें कलीमुल्लाह के नाम से उस वक़्त जाना जाता था। जिसका मतलब होता हैं अल्लाह से सीधे बात करने वाला।
यानि की हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम में ऐसी करिश्माई ताक़त थी की वो सीधे अल्लाह से बात कर सकते थे। हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की कहानी का ज़िक्र कई हदीसों में आया है। आज हम कोशिश करेंगे की आप को ज़्यादा से ज़्यादा हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के बारे में बता सके,
हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की पैदाइश :-
हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की पैदाइश एक इजराइली परिवार में हुई थी। यानि वह एक इजराइली परिवार से ताल्लुक रखते थे। कुरान शरीफ में हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का नाम करीब 136 मरतबा आया है।
अल्लाह ने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को इज़राइली लोगों को हिदायत देने के लिए नबी बना कर भेजा था। उस वक़्त वहां के लोग फिरऔन की इबादत करते थे। फिरौन मिस्र का एक ताकतवर बादशाह था। लोग अल्लाह को न मानकर फिरऔन को ही खुदा मानते थे।
तब अल्लाह ने लोगो को हिदायत देने के लिए हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को वहां के लोगों के लिए नबी मुक़र्रर किया।Hazrat Musa Alaihissalam Ka Mukammal Waqia
हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम लोगों को हिदायत देते की अल्लाह ही सबसे बड़ा हैं उसी की इबादत करना हैं उसी से दुआ करनी हैं।
हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के खानदान से थे जैसा के हमने पहले ही बताया की हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम इज़राइली परिवार में पैदा हुए थे इज़राइली लोग जो की यहूदी थे जिनके 12 कबीले थे या कहे यहूदियों का समूह जिन्हे बनी इसराइल कहा जाता था ।Hazrat Musa Alaihissalam Ka Mukammal Waqia
बनी इसराइल के लोग हज़रत याकूब जिन्हे हज़रत इसराइल भी कहा जाता हैं जिनका अंग्रेजी नाम जैकब था उनसे ताल्लुक रखते थे। उस वक़्त बनी इसराइल के लोग ज़मीन पर सबसे अच्छे लोग थे लेकिन मिस्र के लोग इनसे नफ़रत करने लगे थे। उस वक़्त मिस्र के ताकतवर राजा फिरऔन ने सारे बनी इसराइल के लोगों को अपना गुलाम बना दिया था।
उनसे बहुत काम करवाया जाता था। उन पर ज़ुल्म किया जाता। उनकी औरतों से हर वो काम करवाया जाता था जो फिरऔन चाहता था। फिरऔन एक बहुत बड़ा घमंडी राजा था। वह अपने आप को खुदा मानता था और इज़राइली लोगो पर बहुत ज़ुल्म करता था। जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम पैदा हुए उस वक़्त भी फिरऔन मिस्र का राजा था।Hazrat Musa Alaihissalam Ka Mukammal Waqia
हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के दुनिया में आने से पहले फिरऔन को किसी ने खबर दी थी की बनी इसराइल में एक लड़का जल्द ही पैदा होगा उसके पैदा होते ही फिरऔन का सारा साम्राज्य ख़त्म हो जायेगा। ये बात सुनकर फिरऔन घबरा गया और उसने अपनी सेना को हुक्म दिया की हर बनी इसराइल के घरों की तलाशी करो और जहाँ बच्चा दिखे उसे मार दो।
फिरऔन सिर्फ बेटों को मारना चाहता था बेटियां होने पर वह उन्हें छोड़ देता था। फिरऔन का हुक्म मिलते ही सिपाही बनी इसराइल के घरों की तलाशी में निकल गए। और एक एक करके उनके बच्चों का क़त्ल करना शुरू कर दिया। जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की माँ को इस बात की खबर लगी तब वह डर गयी।
तब अल्लाह से एक पैगाम उनको आया की तू इसे एक टोकरी में रख कर नील नदी में छोड़ दे इस बच्चे को कुछ नहीं होगा। अल्लाह के हुक्म के मुताबिक उन्होंने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को एक टोकरी में घर के पीछे नील नदी में रख दिया। नदी में रखते ही टोकरी भी बहने लगी।
टोकरी नदी में बह कर फिरऔन के महल तक जा पहुंची। टोकरी को देखते ही फिरऔन के सिपाहियों ने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को टोकरी से निकाला और फिरऔन के पास ले गए। महल पहुँचते ही फिरऔन की बीवी ने आप को यानि हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को पहचान लिया और कहा की ये बनी इसराइल के घर का ही बेटा है।
जिससे हमें खतरा है। फिरऔन आप को उसी वक़्त मारना चाहता था लेकिन फिरऔन की बीवी ने कहा की इसे मारों मत इसके ज़िंदा रहने से हमारी आँखों को ठंडक मिलती रहेगी की हमारा दुश्मन हमारे सामने ही है और हमारी कैद में है। हो सकता हैं ये हमारे लिए खुशनसीब बच्चा हो ।
फिरौन ने अपनी बीवी की बात मान ली और आप को अपने महल में रख लिया।जब आप को भूख लगी तब फिरऔन ने अपने यहाँ काम करने वाली औरतों को बुलाया और कहा की इस बच्चे को दूध पिलाओ ये भूखा हैं और रो रहा हैं।
लेकिन अल्लाह की कुदरत देखो कोई भी औरत आप को दूध नहीं पीला सकीं सारी औरतें दूध पिलाने में नाकाम रही। फिरऔन समझ गया था की ये कोई मामूली बच्चा नहीं। फिर दूध पिलाने के लिए आपकी माँ को तलाशा गया और तलाश करके आपको दूध पिलाया गया।
एक हदीस के मुताबिक आप यानि हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम फिरऔन के महल में ही बड़े हुए। यहाँ तक की 18 साल के जवान भी उसी महल में हुए आपने ने हज़रत शोएब अलैहिस्सलाम की बेटी सफूरा से शादी भी की।Hazrat Musa Alaihissalam Ka Mukammal Waqia
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हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने बड़े होकर लोगों को समझाया की फिरऔन की इबादत करना बंद करो और एक अल्लाह की इबादत में यकीन करो । एक हद तक लोग उनकी बात मान भी गए थे। उसी दौरान मिस्र में भयंकर अकाल पड़ा था। लोग कई बीमारियों मे मुब्तला हो गए थे।
सारे लोग हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के पास पहुंचे और कहा की हम आपके कहने पर चलेंगे और वादा किया की वह एक अल्लाह की ही इबादत करेंगे। जब लोग बीमारी से ठीक होना शुरू हुए और हालत पहले जैसे होने लगे तब लोग फिरऔन के डर से वापिस उसकी इबादत में लग गए।
उसी दौरान फिरऔन के जुल्म से लोगों को निजात दिलवाने के लिए हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने फिरऔन को चेतावनी दी और कहा की वह लोगों पर जुल्म करना छोड़ दे और लोगो को गुलामी से आज़ाद कर दे। लेकिन घमंडी फिरऔन को इस बात का कोई असर नहीं हुआ।
हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने बनी इसराइल के लोगों को इकठ्ठा किया और फिलिस्तीन के लिए रवाना हो गए। क्यूंकि वो सभी इज़राइली लोगो को फिरौन के ज़ुल्म से निजात दिलवाना चाहते थे। जब फिरऔन को आपके फिलिस्तीन जाने का पता चला तब वह एक बहुत बड़ा सेना के साथ आपका पीछा करने लगा।
जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम बनी इसराइल के लोगों के साथ दरियाये नील तक पहुंचे तब उनके पीछे फिरऔन की बड़ी सेना थी जो सबको मारने को तैयार थी और आपके आगे गहरा समन्दर था। बनी इसराइल के लोगों ने मान लिया था की अब फिरौन उन्हें मार देगा।
इतने में हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने अपनी लाठी से समन्दर के पानी पर मारा तभी आपके सामने समंदर में एक सूखा रास्ता बन गया और समंदर का पानी अलग अलग हो गया और बीच में सूखा रास्ता बन गया। हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम और बनी इसराइल के लोगों ने रास्ता पार कर लिया।
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फिरऔन भी उसी रास्ते पर अपनी सेना को लेकर आगे बढ़ने लगा तभी अचानक से रास्ता बंद हो गया फिरऔन और उसकी सेना समंदर में डूब कर मर गयी।Hazrat Musa Alaihissalam Ka Mukammal Waqia
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम कौन थे?
Ans: हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम अल्लाह के अज़ीम नबियों में से एक थे। उन्हें बनी इस्राईल की हिदायत के लिए भेजा गया था और उन्हें कलीमुल्लाह कहा जाता है, क्योंकि अल्लाह तआला ने उनसे सीधे कलाम फ़रमाया।
Q2. हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का ज़िक्र क़ुरआन में कितनी बार आया है?
Ans: क़ुरआन मजीद में हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का नाम लगभग 136 बार आया है, जो किसी भी नबी का सबसे ज़्यादा ज़िक्र है।Hazrat Musa Alaihissalam Ka Mukammal Waqia
Q3. फिरऔन कौन था?
Ans: फिरऔन मिस्र का एक घमंडी और ज़ालिम बादशाह था। वह खुद को ख़ुदा कहता था और बनी इस्राईल पर बहुत ज़ुल्म करता था।Hazrat Musa Alaihissalam Ka Mukammal Waqia
Q4. हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को बचपन में नील दरिया में क्यों रखा गया था?
Ans: जब फिरऔन बनी इस्राईल के नवजात लड़कों को क़त्ल करवा रहा था, तब अल्लाह के हुक्म से हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की वालिदा ने उन्हें एक संदूक (टोकरी) में रखकर नील दरिया में छोड़ दिया, जहाँ अल्लाह ने उनकी हिफाज़त फ़रमाई।Hazrat Musa Alaihissalam Ka Mukammal Waqia
Q5. हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का सबसे बड़ा मोजिज़ा क्या था?
Ans: अल्लाह के हुक्म से हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने अपनी लाठी से दरिया पर मारा, जिससे दरिया शक्क (दो हिस्सों) में हो गया और बनी इस्राईल सुरक्षित पार हो गए।
Q6. फिरऔन का अंजाम क्या हुआ था?
Ans: जब फिरऔन अपनी फ़ौज के साथ दरिया में दाखिल हुआ, तो अल्लाह के हुक्म से दरिया फिर से मिल गया और फिरऔन अपनी पूरी फ़ौज के साथ ग़र्क (डूब) हो गया।Hazrat Musa Alaihissalam Ka Mukammal Waqia
Q7. हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम से हमें क्या सीख मिलती है?
Ans: उनकी ज़िंदगी से सब्र, अल्लाह पर भरोसा, हक़ की बात कहना, ज़ुल्म का डटकर मुकाबला करना और हर हाल में अल्लाह की फ़रमांबरदारी करना सीखने को मिलता है।Hazrat Musa Alaihissalam Ka Mukammal Waqia
Q8. हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का वाक़िआ कहाँ मिलता है?
Ans: हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का वाक़िआ क़ुरआन मजीद की कई सूरहों, जैसे सूरह अल-क़सस, सूरह ताहा, सूरह अल-आराफ़ और सूरह अश-शुअरा में तफ़सील के साथ बयान किया गया है।Hazrat Musa Alaihissalam Ka Mukammal Waqia
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह खैर….
