09/08/2026
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बच्चे की पैदाइश के बाद अकीका कब और कैसे करें? जानिए अकीका, खतना और बच्चों से जुड़े जरूरी इस्लामी मसाइल| Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein? Janiye Aqeeqa, Khatna Aur Bachchon Se Jude Zaroori Islami Masail amazing story

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Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?
Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

बच्चे की पैदाइश घर में एक बड़ी खुशी और अल्लाह तआला की बहुत प्यारी नेमत होती है। इस खुशी के मौके पर इस्लाम ने हमें कुछ खूबसूरत सुन्नतें और जरूरी बातें बताई हैं, जिनमें अकीका भी शामिल है। लेकिन अक्सर नए माता-पिता के मन में सवाल रहता है कि अकीका कब करना चाहिए, लड़के और लड़की के लिए कितने जानवर किए जाएँ, गोश्त कैसे बाँटा जाए और इसके साथ बच्चों से जुड़े दूसरे इस्लामी मसाइल क्या हैं।

इस लेख में हम आसान और सामान्य भाषा में अकीका, उसके तरीके, जानवर की शर्तें, गोश्त की तकसीम, बच्चे के बाल, खतना और बच्चों से जुड़ी कुछ दूसरी जरूरी बातें समझेंगे। अगर आपके घर में हाल ही में बच्चा पैदा हुआ है या परिवार में किसी के यहाँ बच्चा हुआ है, तो यह जानकारी आपके लिए काफी काम की हो सकती है।

बच्चा पैदा होने के बाद अल्लाह के शुक्र में जो जानवर ज़बह किया जाता है उसे अकीका कहते हैं । अकीका करना सुन्नत है ।

सुन्नत तरीका यह है कि बच्चे की पैदाईश के सातवें (7)
रोज़ अकीका हो और अगर न हो सके तो पन्द्रवें (15) दिन या एक्कीसवें(21) रोज़ या जब भी हैसीयत हो करे, सुन्नत अदा हो जाएगी ।(कानूने शरीअत, जिल्द 1 सफा में 160 इस्लामी जिन्दगी 17 )

लड़के के लिए दो बकरे और लड़की के लिए एक बकरी ज़बह करे । लड़के के लिए बकरा और लड़की के लिए बकरी जबह करना बेहतर है । अगर लड़का लड़की दोनों के लिए बकरा या बकरी भी जबह करे तो हर्ज नहीं ।

लड़के के लिए दो बकरे न हो सके तो एक बकरे में
भी अकीका कर सकते है। इसी तरह अगर गाये, भैस ज़बह करे तो लड़के के लिए दो हिस्से और लड़की के लिए एक हिस्सा हो । अकीके के जानवर के लिए भी वही शर्ते है जो कुरबानी के जानवर के लिए जरूरी है ।(कानूने शरीअत, जिल्द 1, सफा नं. 160)

अकीके के जानवर के तीन हिस्से किये जाए । एक हिस्सा गरीबों को ख़ैरात कर दे दूसरा हिस्सा दोस्त व रिश्तेदारों में तकसीम करे और तीसरा हिस्सा खुद रखें ।
(इस्लामी जिन्दगी सफा नं 17 )

अकीके का गोश्त गरीबों फकीरों, दोस्त व रिश्तेदारों को कच्चा तकसीम करे या पका कर दे या फिर दावत कर के खिलायें सब सूरते जाइज़ है ।(कानूने शरीअत, जिल्द 1 सफा नं. 160)

अकीके का गोश्त माँ, बाप, दादा, दादी, नाना, नानी, वगैरा सब खा सकते हैं ।अकीके के जानवर की खाल अपने काम में लाए, गरीबों को दे या मदरसा या मस्जिद में दें। यानी इस खाल का भी वही हुक्म है जो क़ुरबानी की खाल का हुक्म है।(कानूने शरीअत, जिल्द 1, सफा नं. 160)

बेहतर है कि अकीके के जानवर की हड्डीयाँ तोड़ी न जाए बल्कि जोड़ों से अलग कर दी जाए और गोश्त वगैरा खा कर ज़मीन में दफन कर दी जाए ।(किम्या-ए-सआदत, सफा नं. 267, इस्लामी जिन्दगी, सफा नं. 17)

नेक फाल के लिए हड्डी न तोड़ना बेहतर है और तोड़ना
भी ना जाइज नहीं । अकीके में बच्चे के सर के बाल मुंड़वाए और उस के बालों के वजन के बराबर चांदी या (हसीयत हो तो) सोना सदका करे । (कीम्या-ए-सआदत, सफा नं 267)

हदीस :- इमाम मुहम्मद बाकर रजिअल्लाहो अन्हो से रिवायत है की – रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम की साहबजादी हज़रत फातिमा (र.अ)ने इमाम हसन, इमाम हुसैन, हज़रत ज़ैनब और हजरत उम्मे कुलसूम के बाल उतरवा कर उन के वजन के बराबर चांदी ख़ैरात फ़रमाई ।

अकीका फर्ज़ या वाजिब नहीं है सिर्फ सुन्नते मुस्तहेबा है गरीब आदमी को हरगिज़ जाइज नहीं कि सूद पर कर्ज़ ले कर अकीका करे कर्ज ले कर तो ज़कात भी देना जाइज़ नहीं अकीका जकात से बड़ कर नहीं । (इस्लामी जिन्दगी, सफा नं. 18)

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अकीके के जानवर को ज़बह करते वक्त की दुआएँ बहुत से मसाईल की किताबों में आई है लिहाजा वोह दुआएँ वही देखे ।

ख़तना :- लड़कों का ख़तना करना सुन्नत हैं और येह इस्लाम की अलामत हैं मुस्लिम व गैर मुस्लिम में इससे फर्क होता हैं। रसूले खुदा सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम ने फरमाया- – “हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी खतना किया तो उस वक्त उन की उम्र शरीफ अस्सी (80) बरस की थी”।

ख़तना का सुन्नत तरीका यह है कि बच्चा जब सात (7) साल का हो जाए उस वक़्त खतना करा दिया जाए ख़तना कराने की उम्र सात (7) साल से ले कर बारह (12) बरस तक है। यानी बारह (12) बरस से ज्यादा देर लगाना मना है और अगर सात साल से पहले ख़तना कर दिया तब भी हर्ज नहीं । ख़तना कराना बाप का काम है, वोह न हो तो फिर दादा, मामू, चचा, कराए ।

ख़तना करने से पहले नाई की उजरत तय होना जरूरी है जो कि उसको ख़तना के बाद दी जाए इलाज में ख़ास निगरानी रखी जाए तजरूबेकार नाई से ख़तना कराया जाए ।

ख़तना सिर्फ इस काम का ही नाम है बाकी येह धूमधाम से बारात निकालना, रिश्तेदारों को फ़ुज़ूल में कपड़ों के जोड़ें देना, गाने बाजे और लाईटींग वगैरा सब फ़ुज़ूल काम हैं और फ़ुज़ूल ख़र्ची इस्लाम में हराम है

येह सब मुसलमानों की कमज़ोर नाक ने पैदा कर दिये है जिसे बचाने के लिए कर्ज तक लेते है और कर्ज दार बन कर बाद को परेशानी मोल लेते हैं। लिहाज़ा इन सब चीजों को बंद किया जाए ।

आयत :अल्लाह व इरशाद फरमाता है- तर्जमा :- और फुज़ूल ना उड़ा,बेशक उड़ाने वाले शैतानों के भाई है(तर्जुमा :- कन्जुल इमाम, पारा 15, सूरए इस्राईल, आयत 26 )

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कान नाक छेदना :- लड़कियों के कान नाक छीदवाने में कोई हर्ज नहीं इसलिए की हुजूर सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम के ज़माने जाहिरी में भी औरतें कान छीदवाती थी और हुज़ूर (स.व)ने इससे मना नहीं फरमाया ।(फतावा-ए-रजवीया, जिल्द 9, निस्फ अव्वल, सफा 57, कानूनेशरीअत, जिल्द 1, सफा 213 )Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

एक रिवायत में है कि “सब से पहले नाक कान हज़रत सारा रजिअल्लाहो तआला अन्हा ने हज़रत हाजरा रजिअल्लाहो तआला अन्हा के छेदे थे हज़रत सारा व हज़रत हाज़रा हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की बीवीयाँ थीं। जब से ही औरतों में कान नाक छीदवाने का रिवाज चला आ रहा है ।

कुछ लोग किसी मन्नत के लिए या फिर फिरंगी फैशन के लिए लड़कों के कान छेद देते हैं । येह सख्त ना जाइज़ व हराम व सख़्त गुनाह है और ऐसी मन्नत की शरीअत में कोई हैसियत नहीं, यकीनन अल्लाह व रसूल इस से नाराज़ होते हैं । इसलिए मुसलमानों को इस से बचना चाहिये ।

काला टीका लगाना :- हमारा और आप का येह मुशाहेदा है कि घर की औरतें अपने छोटे बच्चों को किसी कालक, काजल, या सुरमें वग़ैरा से उनके गाल पर काला टीका (छोटा सा नुक्ता) लगाती हैं ताकि किसी की बुरी नज़र न लगे । येह बेअस्ल बात नहीं है, नज़र का लगना हदीस से साबित है यानी बुरी नज़र लगती है । चुनानचे हदीसे पाक में है-

हदीस :- रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम इरशाद फरमाते हैं- “नज़र का लगना ठीक है अगर कोई चीज़ तकदीर पर गालिब होती है तो नज़र ग़ालिब होती है”। (मोता शरीफ, जिल्द 1 बाब किताबुल एैन, हदीस 3, सफा 782, कौलुलजमील, सफा 150)

हदीस :- एक रिवायत में है कि हज़रत ऊसमाने गनी रजिअल्लाहो तआला अन्हो ने एक खूबसूरत बच्चे को देखा तो फ़रमाया- “इस की थुड्डी में काला टीका लगा दो कि इसको नज़र न लगे” । (कौलुल जमील, सफा नं. 153)

“तिर्मिज़ी शरीफ” की एक रिवायत से साबित है कि काला टीका लगाना बच्चों को बुरी नज़र से बचाता है । (वल्लाहो आलम)Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

एक जरुरी अपील 

FAQ – अकीका और बच्चों से जुड़े इस्लामी मसाइल

1. अकीका क्या है?
अकीका बच्चे की पैदाइश पर अल्लाह तआला का शुक्र अदा करने के लिए जानवर ज़बह करने को कहा जाता है। यह सुन्नत-ए-मुस्तहबा है।Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

2. अकीका कब करना चाहिए?
बेहतर है कि बच्चे की पैदाइश के सातवें दिन अकीका किया जाए। अगर सातवें दिन न हो सके तो बाद में भी किया जा सकता है।Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

3. लड़के के अकीके में कितने जानवर किए जाते हैं?
लड़के के लिए दो बकरे करना बेहतर बताया गया है। अगर किसी के पास इतनी हैसियत न हो तो एक जानवर से भी अकीका किया जा सकता है।Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

4. लड़की के अकीके में कितने जानवर किए जाते हैं?
लड़की के लिए एक बकरी या बकरा किया जाता है।Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

5. क्या अकीके का गोश्त खुद खा सकते हैं?
जी हाँ, अकीके का गोश्त खुद भी खा सकते हैं और रिश्तेदारों, दोस्तों तथा गरीबों में भी बाँट सकते हैं।Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

6. क्या अकीके का गोश्त पकाकर खिलाया जा सकता है?
जी हाँ, गोश्त कच्चा बाँटना, पकाकर देना या दावत करके खिलाना—इनमें गुंजाइश है।Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

7. क्या बच्चे के माता-पिता अकीके का गोश्त खा सकते हैं?
जी हाँ, माता-पिता और परिवार के दूसरे लोग भी अकीके का गोश्त खा सकते हैं।Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

8. क्या अकीके के लिए कर्ज लेना चाहिए?
अगर किसी व्यक्ति के पास अकीका करने की आर्थिक क्षमता नहीं है तो उस पर अकीका अनिवार्य नहीं है। केवल अकीका करने के लिए कर्ज लेकर परेशानी बढ़ाना उचित नहीं।Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

9. अकीके में बच्चे के बालों का क्या करना चाहिए?
बच्चे के बाल मुंडवाना और बालों के वजन के बराबर चाँदी या उसकी कीमत सदका करना इस विषय में वर्णित अमल है।Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

10. क्या अकीके के जानवर की हड्डियाँ तोड़ना जरूरी है?
हड्डियों को जोड़ों से अलग करना बेहतर बताया गया है, लेकिन हड्डियाँ तोड़ना अपने आप में हराम नहीं है।Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

11. लड़के का खतना कब करना चाहिए?
खतना इस्लाम की महत्वपूर्ण सुन्नतों में से है। इसकी उम्र और तरीके के बारे में अपने स्थानीय विश्वसनीय आलिम/मुफ्ती से मसले की पुष्टि करना बेहतर है।Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

12. क्या अकीका फर्ज़ या वाजिब है?
अकीका फर्ज़ या वाजिब नहीं, बल्कि सुन्नत-ए-मुस्तहबा बताया जाता है। इसलिए आर्थिक परेशानी होने पर व्यक्ति पर इसका गुनाह नहीं।Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

13. क्या लड़की के कान छिदवाना जायज़ है?
इस्लामी फिक़्ह में लड़कियों के कान छिदवाने की गुंजाइश बताई गई है। हालांकि किसी भी काम में नुकसान से बचना जरूरी है।Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

14. क्या बच्चों को बुरी नज़र से बचाने के लिए काला टीका लगाना जरूरी है?
बुरी नज़र का ज़िक्र हदीसों में मिलता है, लेकिन बच्चे की हिफाज़त के लिए किसी खास रस्म को अनिवार्य समझना सही नहीं। हिफाज़त के लिए मस्नून दुआएँ और कुरआन की आयतें पढ़ना बेहतर है।Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

15. अकीका करने से पहले क्या करना चाहिए?
अकीके के जानवर की शरई शर्तों का ध्यान रखें और ज़बह के सही तरीके तथा संबंधित दुआ के लिए किसी भरोसेमंद आलिम से पुष्टि कर लें।Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Bachche Ki Paidaish Ke Baad Aqeeqa Kab Aur Kaise Karein?

जज़ाकल्लाह खैर….

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