Dilon Mein Mohabbat Kaun Daalta Hai?
अल्लाह तआला ने इंसान को सिर्फ पैदा ही नहीं किया, बल्कि उसके दिल में रिश्तों की मोहब्बत भी रखी है। यही मोहब्बत भाई-बहन को एक-दूसरे का सहारा बनाती है, माँ-बाप को अपनी औलाद के लिए हर तकलीफ़ सहने की ताक़त देती है और मियाँ-बीवी के रिश्ते को सुकून और रहमत का ज़रिया बनाती है।
इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि इस्लाम रिश्तों की इस मोहब्बत के बारे में क्या सिखाता है और कैसे अल्लाह तआला इंसानों के दिलों में एक-दूसरे के लिए प्यार, रहम और अपनापन पैदा करता है। आइए, इस दिल को छू लेने वाले इस्लामी बयान को पढ़ें और समझें कि मोहब्बत की सबसे बड़ी नेमत आखिर किसकी तरफ़ से है।
भाई और बहन के दिल में अल्लाह रब्बुल्-इज़्ज़त ने मुहब्बत डाली। परदेस में बहन है। अपने बच्चों के साथ शौहर के साथ खुशियों भरी ज़िन्दगी गुज़ार रही है।
जब उसको फोन पर ख़बर मिलेगी कि भाई बीमार है और अस्पताल में दाख़िल है, उसे चैन नहीं आयेगा, उसे खाना अच्छा नहीं लगेगा। नफ़्लें पढ़कर दुआयें मागेंगी। रातों को जाग-जागकर दुआयें माँगेगी। खैर की ख़बर सुनने के लिए हर वक़्त उसके कान मुन्तज़िर होंगे।
ऐसी मुहब्बत होती है बहन के दिल में कि वह अपने बच्चों को भी भाई की बात समझाती है तो उसको चन्दा-मामू कहती है। उसकी नज़र में भाई जैसा भी है मगर चाँद से भी ज़्यादा खूबसूरत है। ये मुहब्बतें इस ज़िन्दगी के गुज़ारने के लिए बुनियादी ज़रूरत थीं।
मियाँ-बीवी की मुहब्बत :-मियाँ-बीवी की मुहब्बत की कई मिसालें आपके सामने हैं। तकलीफ एक को होती है महसूस दूसरा कर रहा होता है। बस नहीं चलता कि किस तरह दूसरे को ऐसी दवा दी जाये कि वह सेहतमन्द हो जाये।
शौहर समझता है कि बीवी का गम मेरा ग़म है और बीवी की खुशी मेरी खुशी है। बीवी को देखा कि शौहर के कारोबार पर कोई बुरा वक़्त आ जाये तो अपने घर में शहज़ादी की तरह यह पली थी, मगर शौहर के घर में गुर्बत को बरदाश्त करेगी। दूसरे पूछें भी सही तू कैसी है?
तो अपने भाई और बाप को भी बताना पसन्द नहीं करेगी। समझेगी कि यह अल्लाह रब्बुल्-इज़्ज़त की तरफ से है। जब शौहर मुझसे मुहब्बत करता है तो अब मेरे लिए हर तकलीफ़ को बरदाश्त करना आसान है।
औलाद और माँ-बाप की मुहब्बत :- इसी तरह औलाद और माँ-बाप के दरमियान मुहब्बत होती है। हर बाप को अपनी औलाद के ऊपर शफ़क़त हासिल है। वह औलाद की हिफ़ाज़त करता है। घर में बच्चे अगर भूखे हों तो वह पसीना बहाता है।
रातों को जाग-जागकर पहरा देता है। एक वक़्त में दो-दो जगह नौकरियाँ करता है। हालाँकि वह इतना कमा चुका कि वह अच्छी रोटी खा सकता है, लेकिन उसके सामने तो बच्चों की ज़रूरतें होती हैं, बाप अपने मुँह में कुछ नहीं डालेगा, अपने बच्चों के मुँह में ज़रूर डालेगा। यह मुहब्बत है जो अल्लाह रब्बुल्-इज़्ज़त ने औलाद के लिये बाप के दिल में रख दी।
माँ की मुहब्बत:- रह गयी बात माँ की मुहब्बत की तो माँ की ममता की तो मिसाल दी जाती है। माँ की मुहब्बत वह गहरा समन्दर है कि जिसकी गहराईयों को आज तक कोई नहीं नाप सका। माँ की मुहब्बत वह हिमालये पहाड़ है कि जिसकी बुलन्दियों को आज तक कोई नहीं छू सका।
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माँ की मुहब्बत वह सदाबहार फूल है जिस पर कभी ख़िज़ाँ नहीं आती। माँ तो औलाद पर कुरबान हुई जाती है। और यह सिर्फ इनसानों में नहीं बल्कि परिन्दों में देख लीजिये, चिड़िया एक नन्ही सी जान है। गर्मी के मौसम में उड़कर जाती है और पसीना-पसीना होती है मगर चोंच में पानी लाकर अपने बच्चों को पिलाती है।
उसकी अपनी चोंच में पानी था, प्यास लगी हुई थी, यह खुद पी सकती थी, मगर पीती नहीं कि उसके बच्चे प्यासे हैं। छोटी सी जान में देखो अपने बच्चों से कैसी मुहब्बत है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब)
1. रिश्तों में मोहब्बत कौन पैदा करता है?
जवाब: इस्लाम के मुताबिक इंसानों के दिलों में मोहब्बत, रहमत और अपनापन अल्लाह तआला ही पैदा करता है। यह उसकी बहुत बड़ी नेमत है।Dilon Mein Mohabbat Kaun Daalta Hai?
2. इस्लाम में भाई-बहन के रिश्ते की क्या अहमियत है?
जवाब: भाई-बहन का रिश्ता प्यार, हमदर्दी और एक-दूसरे की मदद पर आधारित है। इस्लाम रिश्तेदारी निभाने और एक-दूसरे का ख़्याल रखने की तालीम देता है।Dilon Mein Mohabbat Kaun Daalta Hai?
3. माँ-बाप की औलाद से मोहब्बत के बारे में इस्लाम क्या कहता है?
जवाब: माँ-बाप का अपनी औलाद से प्यार अल्लाह की दी हुई फितरी नेमत है। इस्लाम औलाद की अच्छी परवरिश और उन पर रहम करने की ताकीद करता है।Dilon Mein Mohabbat Kaun Daalta Hai?
4. मियाँ-बीवी के रिश्ते की बुनियाद क्या है?
जवाब: मियाँ-बीवी का रिश्ता मोहब्बत, रहमत, भरोसे और अच्छे अख़लाक पर कायम होता है। दोनों को एक-दूसरे के हुकूक अदा करने का हुक्म दिया गया है।Dilon Mein Mohabbat Kaun Daalta Hai?
5. क्या रिश्तों में आने वाली परेशानियाँ मोहब्बत को खत्म कर देती हैं?
जवाब: नहीं। अगर सब्र, दुआ, माफ़ी और अल्लाह पर भरोसा रखा जाए, तो रिश्ते पहले से भी मज़बूत हो सकते हैं।Dilon Mein Mohabbat Kaun Daalta Hai?
6. इस्लाम रिश्तेदारों के साथ कैसा बर्ताव करने की तालीम देता है?
जवाब: इस्लाम सिलए-रहमी (रिश्तेदारी निभाने), अच्छे अख़लाक, मदद, माफ़ी और मोहब्बत के साथ पेश आने की तालीम देता है।Dilon Mein Mohabbat Kaun Daalta Hai?
7. क्या माँ की मोहब्बत का कोई मुकाबला है?
जवाब: माँ की मोहब्बत दुनिया की सबसे बड़ी नेमतों में से एक है। इस्लाम ने माँ का बहुत ऊँचा दर्जा बताया है और उसकी ख़िदमत को जन्नत का रास्ता बताया है।Dilon Mein Mohabbat Kaun Daalta Hai?
8. रिश्तों में मोहब्बत बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
जवाब: अल्लाह का ज़िक्र करना, दुआ करना, एक-दूसरे की इज़्ज़त करना, माफ़ करना, खुशअख़लाकी से पेश आना और सुन्नत के मुताबिक ज़िंदगी गुज़ारना रिश्तों में मोहब्बत बढ़ाने का बेहतरीन तरीका है।Dilon Mein Mohabbat Kaun Daalta Hai?
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Dilon Mein Mohabbat Kaun Daalta Hai?
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Dilon Mein Mohabbat Kaun Daalta Hai?
जज़ाकल्लाह खैर….
