07/08/2026
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इमाम अबू हनीफ़ा (रहमतुल्लाहि अलैह) से हसद करने वालों का अंजाम | एक हैरतअंगेज़ वाक़िआ | Imam Abu Hanifa (Rah.) Se Hasad Karne Walon Ka Anjaam | Ek Hairatangez Waqia amazing story

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Imam Abu Hanifa (Rah.) Se Hasad Karne Walon Ka Anjaam
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Imam Abu Hanifa (Rah.) Se Hasad Karne Walon Ka Anjaam

इस्लाम की तारीख़ में इमाम-ए-आज़म हज़रत इमाम अबू हनीफ़ा (रहमतुल्लाहि अलैह) का नाम इल्म, तक़वा, सब्र और हिकमत की वजह से हमेशा याद किया जाता है। लेकिन जितनी बड़ी उनकी शोहरत थी, उतना ही कुछ लोग उनसे हसद भी करते थे। उन्होंने इमाम साहब को बदनाम करने और उनकी इज़्ज़त को नुकसान पहुँचाने की कई साज़िशें रचीं, मगर अल्लाह तआला ने हर बार उन्हें कामयाब होने से बचा लिया।

इस आर्टिकल में हम एक ऐसा हैरतअंगेज़ वाक़िआ जानेंगे, जिससे पता चलता है कि हसद और झूठी अफ़वाहों का अंजाम क्या होता है, और कैसे अल्लाह तआला अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त फ़रमाता है। साथ ही यह भी सीखेंगे कि किसी के बारे में सुनी-सुनाई बातों पर यक़ीन करने के बजाय हमेशा सच की तहक़ीक़ करना कितनी ज़रूरी है।

इमाम आज़म रहमतुल्लाह अलैह से हसद करने वाले दो तरह के थे। बाज़ लोग उनकी इल्मियत और क़ुबूलियत की वजह से जलते थे। ऐसे लोगों का कोई ईलाज नहीं हुआ करता। जैसे एक आदमी आया और कहने लगा, हज़रत! हमने सुना है कि आप मसाइल का जवाब देते हैं।

फ़रमाया, हाँ पूछो। कहने लगा कि आप बता सकते हैं कि पाख़ाने का ज़ाएका कैसा होता है? कोई शरीफ़ इंसान भला ऐसा सवाल कर सकता है? मगर हसद करने वाला था। इमाम साहब रह० को अल्लाह तआला ने बड़ी समझ दी थी। फ़रमाया, इसका ज़ाएका मीठा होता है। वह हैरान हुआ और दलील पूछी। फ़रमाया नमकीन चीज़ पर मक्खी नहीं बैठती।

इसी तरह एक बार हसद करने वालों ने इमाम अबू हनीफा रह० की ज़िल्लत व रुसवाई का प्रोग्राम बनाया क्योंकि आख़िरी वार यही होता है। यही काम मुनाफ़िकों ने किया था कि नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मोहतरम बीवी हज़त आएशा रज़ियल्लाहु अन्हा पर बोहतान बांधा था।

इसी तरह कारून ने भी हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के लिए इसी किस्म का बहाना किया था कि एक औरत को तैयार किया कि जब हज़रत मूसा अलैहिस्स्लाम बयान करने के लिए खड़े हों तो मजमे में कह देना कि उन्होंने मुझसे गुनाह करने को कहा था। बेइज़्ज़ती हो जाएगी तो मुझे ज़कात नहीं देनी पड़ेगी।

तारीख़ में इस तरह के वाकिआत बहुत हैं। लिहाज़ा जलने वालों ने सोचा कि इमाम अबू हनीफा रह० के दामन पर ऐसा धब्बा लगा दिया जाए कि लोग बदज़न हो जाएं। लिहाज़ा उन्होंने जवान उम्र बेवा औरत . से राब्ता किया कि किसी बहाने से इमाम साहब को अपने घर बुला, हम तुम्हें इसके बदले में एक भारी रकम अदा करेंगे।Imam Abu Hanifa (Rah.) Se Hasad Karne Walon Ka Anjaam

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औरत बेचारी फिसलती भी जल्दी है और फिसलाती भी जल्दी है। वह झांसे में आ गई। इमाम साहब जब रात को घर जाते हुए उस औरत के घर के सामने से गुज़रे तो औरत पर्दे में होकर निकली और कहने लगी, अबू हनीफा रह० ! मेरा ख़ाविंद मर रहा है और वह कोई वसीयत करना चाहता है और वह वसीयत मेरी समझ में नहीं आ रही है।

ख़ुदा के लिए आप वह सुन लें। आप घर में दाखिल हुए, औरत ने दरवाज़ा बंद कर दिया। कमरे में छिपे हुए हासिदीन बाहर आ गए और कहने लगे, अब हनीफा आप रात के वक़्त एक अलैहिदा मकान में अकेली नौजवान औरत के पास बुरे इरादे से आए हो।

लिहाजा उस औरत को और इमामे आज़म रह० को लोगों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। हाकिमे वक़्त तक बात पहुँची तो तो उसने कहा उन्हें फिलहाल में बंद कर दिया जाए। मैं सुबह के वक़्त कार्यवाही पूरी करूंगा। इमाम साहब और उस औरत को एक अंधेरी कोठरी में बंद कर दिया गया।Imam Abu Hanifa (Rah.) Se Hasad Karne Walon Ka Anjaam

इमाम साहब वुज़ू से थे लिहाज़ा नफ़्लें पढ़ने में मशगूल हो गए। जब काफी देर गुज़र गई तो उस औरत को अपनी गलती का एहसास हुआ कि मैंने इतने पाकदामन आदमी पर इल्ज़ाम लगाया है। जब इमाम आज़म रह० ने नमाज़ का सलाम फेरा तो वह औरत कहने लगी आप मुझे माफ़ कर दें। फिर उसने सारी कहानी सुना दी।

इमाम आज़म रहमतुल्लाह अलैह ने फ़रमाया अच्छा जो होना था वह तो हो चुका है। अब मैं तुम्हें एक तरीका बताता हूँ ताकि हम इस मुसीबत से छुटकारा हासिल कर सकें। उसने पूछा वह कैसे? आपने फ़रमाया कि तुम इस पहरेदार की मिन्नत समाजत करो कि लोग मुझे अचानक पकड़कर ले आए हैं,

मुझे ज़रूरी काम समेटने के लिए घर जाना है तुम मेरे साथ चलो ताकि मैं वह काम कर सकूं। फिर जब पहरेदार मान जाए तो तुम मेरे घर चली जाना और मेरी बीवी को हालात बता देना ताकि वह तुम्हारे इसी बुर्के में लिपट कर यहाँ मेरे पास आ जाए। औरत ने रो-धो कर पुलिस वाले का दिल मोम कर लिया और यूँ इमाम साहब की बीवी हवालात में उनके पास पहुँच गई।Imam Abu Hanifa (Rah.) Se Hasad Karne Walon Ka Anjaam

जब सुबह हुई तो वक़्त के. हाकिम ने तलब किया कि इमाम आज़म और उस औरत को मेरे सामने पेश किया जाए। हासिदों की भीड़ मौजूद थी। जब पेशी हुई तो हाकिम ने कहा कि अबू हनीफा! तुम इतने बड़े आलिम होकर भी गुनाहे कबीरा करते हो? इमाम साहब ने कहा आप क्या कहना चाहते हैं?Imam Abu Hanifa (Rah.) Se Hasad Karne Walon Ka Anjaam

हाकिम ने कहा कि आप एक गैर औरत के साथ रात के वक़्त एक मकान में अकेले देखे गए हैं। इमाम साहब ने फरमाया कि वह गैर औरत नहीं है। हाकिम ने पूछा वह कौन है? आपने अपने ससुर की तरफ इशारा करते हुए फरमाया, इनको बुलाओ ताकि पहचान लें।

वह आए तो उन्होंने देखा तो फ़रमाने लगे यह तो मेरी बेटी है। मैंने फलां मजमे में इनका निकाह अबू हनीफा से कर दिया था। इस तरह इमाम आज़म की खुदा दाद फहम की वजह से हसद करने वालों की चाल कामयाब साबित न हुई और उनकी साज़िश ख़ाक में मिल गई।Imam Abu Hanifa (Rah.) Se Hasad Karne Walon Ka Anjaam

इमाम आज़म रहमतुल्लाह अलैह के कुछ मुखालिफ ऐसे थे जो मुख़िलस थे मगर उड़ती अफवाहों और सुनी सुनाई बातों की वजह से बदज़न हो गए थे। हदीस शरीफ़ में है कि आदमी के झूठा होने के लिए यही काफी है कि वह सुनी सुनाई बातें नकल करता फिरे।Imam Abu Hanifa (Rah.) Se Hasad Karne Walon Ka Anjaam

मशाइख़ ने यहाँ तक फ़रमाया है कि अगर तुम्हारे सामने कोई आदमी कहे कि फ्ला आदमी ने मेरी आँख फोड़ दी है और उसकी आँख वाकई फूट चुकी हो तो भी उस वक़्त फैसला न करना जब तक दूसरे को देख न लेना। हो सकता है कि उस बंदे ने उसकी दो आँखें फोड़ दी हों। आइए इमाम आज़म रह० के मुखालिफों का दूसरा रुख़ देखें।

इमाम औज़ाई रह० मुल्के शाम में रहते थे। उन्होंने इमाम आज़म रह० के बारे में ऐसी वैसी बहुत सी बातें सुन रखी थीं। एक बार इमाम अबू हनीफ़ा रह० के शार्गिद अब्दुल्लाह बिन मुबारक रह० इमाम औज़ाई रह० की ख़िदमत में हाज़िर हुए तो उन्होंने पूछा ऐ खुरासानी ! (अब्दुल्लाह बिन मुबारक रह० की निस्बत है) अबू हनीफ़ा कौन आदमी है,Imam Abu Hanifa (Rah.) Se Hasad Karne Walon Ka Anjaam

मैंने सुना वह बहुत गुमराह है। अब्दुल्लाह बिन मुबारक रह० फ़रमाते हैं कि मैं ख़ामोश हो गया। घर आया और इमाम अबू हनीफ़ा रह० के बयान किए हुए मसाइल जिस किताब में थे वह उठाई और इमाम औज़ाई रह० की ख़िदमत में पेश कर दी। उन्होंने पढ़ा तो फ़रमाने लगे, ऐ खुरासानी यह नौमान कौन शख़्स है?

उसका इल्मी पाया तो बहुत बुलंद है। उससे तुम्हें फायदा उठाना चाहिए। मैंने कहा यह वही इमाम अबू हनीफ़ा है जिनके बारे में आप बातें सुनते रहते हैं। उनका चेहरा फ़क़ हो गया और कहने लगे, हमने क्या सुना था, हक़ीक़्त क्या थी। फ़रमाया ऐ खुरासानी! उसकी सोहबत इख़्तियार कर और फायदा उठा।

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FAQ (सवाल और जवाब)

1. इमाम अबू हनीफ़ा (रहमतुल्लाहि अलैह) कौन थे?

जवाब: इमाम अबू हनीफ़ा (रहमतुल्लाहि अलैह) इस्लाम के महान फ़क़ीह और इमाम-ए-आज़म थे। उन्होंने क़ुरआन और सुन्नत की रोशनी में फ़िक़्ह को व्यवस्थित किया और लाखों मुसलमानों के लिए इल्मी रहनुमाई छोड़ी।Imam Abu Hanifa (Rah.) Se Hasad Karne Walon Ka Anjaam

2. कुछ लोग इमाम अबू हनीफ़ा (रह.) से हसद क्यों करते थे?

जवाब: उनकी इल्मियत, तक़वा, लोकप्रियता और लोगों में बढ़ती क़ुबूलियत की वजह से कुछ लोग उनसे हसद करते थे और उन्हें बदनाम करने की कोशिश करते थे।Imam Abu Hanifa (Rah.) Se Hasad Karne Walon Ka Anjaam

3. क्या इमाम अबू हनीफ़ा (रह.) को बदनाम करने की साज़िश की गई थी?

जवाब: जी हाँ, कई रिवायतों में ऐसे वाक़िआत मिलते हैं कि कुछ लोगों ने उन्हें बदनाम करने की कोशिश की, लेकिन अल्लाह तआला ने हर बार उनकी हिफ़ाज़त फ़रमाई और साज़िशें नाकाम हुईं।Imam Abu Hanifa (Rah.) Se Hasad Karne Walon Ka Anjaam

4. इस वाक़िए से हमें क्या सबक मिलता है?

जवाब: यह वाक़िआ हमें सिखाता है कि हसद, झूठी अफ़वाह और किसी पर बेबुनियाद इल्ज़ाम लगाना बहुत बड़ा गुनाह है। हमेशा सच की तहक़ीक़ करनी चाहिए और बिना सबूत किसी की बात पर यक़ीन नहीं करना चाहिए।Imam Abu Hanifa (Rah.) Se Hasad Karne Walon Ka Anjaam

5. क्या सुनी-सुनाई बातों पर यक़ीन करना सही है?

जवाब: नहीं। इस्लाम हमें सिखाता है कि किसी भी खबर पर यक़ीन करने से पहले उसकी तहक़ीक़ करें। बिना जांच के बात फैलाना गुनाह का कारण बन सकता है।Imam Abu Hanifa (Rah.) Se Hasad Karne Walon Ka Anjaam

6. मुसलमान को हसद से कैसे बचना चाहिए?

जवाब: अल्लाह की दी हुई नेमतों पर शुक्र अदा करें, दूसरों के लिए भलाई की दुआ करें और अपने दिल को हसद, कीना और बुग़्ज़ से पाक रखने की कोशिश करें।Imam Abu Hanifa (Rah.) Se Hasad Karne Walon Ka Anjaam

7. क्या अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त करता है?

जवाब: जी हाँ। अल्लाह तआला अपने नेक और सच्चे बंदों की मदद फ़रमाता है। चाहे लोग कितनी भी साज़िश करें, आख़िरकार सच सामने आकर रहता है और झूठ नाकाम हो जाता है।Imam Abu Hanifa (Rah.) Se Hasad Karne Walon Ka Anjaam

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Imam Abu Hanifa (Rah.) Se Hasad Karne Walon Ka Anjaam

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Imam Abu Hanifa (Rah.) Se Hasad Karne Walon Ka Anjaam

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Imam Abu Hanifa (Rah.) Se Hasad Karne Walon Ka Anjaam

जज़ाकल्लाह खैर….

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