26/07/2026
Hazrat Yunus Alaihissalam Aur Machhli Ka Waqia | Quran Ki Roshni Mein Mukammal Kahani

हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम और मछली का वाक़िआ | कुरआन की रौशनी में मुकम्मल कहानी| Hazrat Yunus Alaihissalam Aur Machhli Ka Waqia | Quran Ki Roshni Mein Mukammal Kahani

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Hazrat Yunus Alaihissalam Aur Machhli Ka Waqia | Quran Ki Roshni Mein Mukammal Kahani
Hazrat Yunus Alaihissalam Aur Machhli Ka Waqia

Hazrat Yunus Alaihissalam Aur Machhli Ka Waqia

हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम का वाक़िआ क़ुरआन करीम की सबसे इबरतनाक और ईमान बढ़ाने वाली कहानियों में से एक है। क्या आपने कभी सोचा है कि आख़िर हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम मछली के पेट में कैसे पहुँचे? उन्होंने वहाँ कौन-सी दुआ पढ़ी और अल्लाह तआला ने उन्हें किस तरह नजात अता फ़रमाई?

इस आर्टिकल में हम क़ुरआन और इस्लामी रिवायतों की रौशनी में हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम और मछली के वाक़िआ को आसान और दोस्ताना अंदाज़ में समझेंगे। साथ ही जानेंगे कि इस घटना से हमें सब्र, तौबा, अल्लाह पर भरोसा और मुश्किल वक्त में दुआ की अहमियत जैसी कौन-कौन सी बड़ी सीखें मिलती हैं। आइए, इस खूबसूरत और ईमान अफ़रोज़ वाक़िए को तफ़सील से जानते हैं।

अल्लाह ने अपने बन्दों की हिदायत के लिए जिन नबियों को दुनिया में भेजा उनमे से एक हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम भी हैं। जो मछली वाले नबी के नाम से मशहूर हैं। क्यूंकि आपने 40 दिन मछली के पेट में गुज़ारे थे। चलिए जानते हैं की आखिर क्यों हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम को मछली वाले नबी कहा जाता हैं?

अल्लाह ने आपको लोगो की हिदायत के लिए नबी बनाकर भेजा उस वक़्त आप इराक का एक शहर नैनवा में नबी बनकर आये। मतलब अल्लाह ने आपको नैनवा शहर के लिए नबी चुना।

आपका काम था लोगो को हिदायत देना उन्हें एक अल्लाह को मानने पर राज़ी करना और बुतपरस्ती से उनका ध्यान हटाना। आप ने आपके शहर की बस्ती के लोगों को एक अल्लाह की इबादत का पैगाम दिया और बुतपरस्ती के लिए मना किया

लेकिन वहाँ के लोगों ने आपकी एक बात नहीं मानी और उन्होंने आप को बहुत परेशान किया नतीजतन उन्होंने अपना शहर छोड़ने का फैसला कर लिया और लोगों को बोला की मैं यहाँ से जा रहा हूँ लेकिन अगर तुमने बुतपरस्ती को नहीं छोड़ा तो बहुत जल्द इस शहर पर अल्लाह का बहुत बड़ा अज़ाब आएगा।

ये कह कर आप यानि हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम अपनी बस्ती से निकल गए और दूसरे देश जाने के लिए कश्ती पर सवार हो गए। लेकिन कश्ती कुछ देर बाद बीच नदी में पहुंची तो डूबने लगी तो मल्लाह ने कश्ती में बैठे लोगों से फ़रमाया ! जब कोई गुलाम अपने मालिक से भागकर हमारी कश्ती में आ बैठता हैं तो कश्ती डूब जाती हैं चूँकि आप हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम भी अल्लाह को बताये बिना अपने शहर से भाग निकले थे।

मल्लाह के मुताबिक आज भी कुछ ऐसा ही मालूम हो रहा हैं मल्लाह ने लोगों से कहा जो भी अपने मालिक से भाग कर जा रहा हैं वह दरिया में कूद जाये ताकि दूसरे मुसाफिरों की जान बचायी जा सके।

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मल्लाह की बात सुनकर आपने फ़रमाया अपने मालिक से भगा हुआ गुलाम में ही हूँ इसलिए मुझे पानी में डाल दिया जाये।आपने कश्ती पर सवार सभी लोगों से वापिस कहा की मैं अल्लाह के हुक्म के बगैर ही कौम वालों के सितम से तंग आकर अपना वतन छोड़ कर कहीं और जाने के लिए निकला हूँ।Hazrat Yunus Alaihissalam Aur Machhli Ka Waqia

इतना कहते ही आप पानी में डाल दिए गए पानी में जाते ही अल्लाह ने आपकी हिफाज़त के लिए एक बड़ी मछली को भेजा जो काफी देर तक कश्ती के किनारे चक्कर लगा रही थी। जैसे ही आप यानि हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम पानी में पहुंचे उस मछली ने आपको निगल लिया।

अल्लाह ने मछली से फ़रमाया जिसको तूने निगला है वह तेरी रोज़ी नहीं हैं बल्कि मैंने अपने नबी को तेरे पेट में उनकी हिफाज़त के लिए पहुँचाया हैं।

उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। चुनाँचे आप 40 दिनों तक उस मछली के पेट में रहे। अल्लाह मछली का पेट इस तरह कांच की तरह साफ कर दिया था की आप आप मछली के पेट में रहते हुए भी समंदर के अंदर की हर चीज़ देखते और अल्लाह की तस्बीह बयां फरमाते रहे।

आप मछली के पेट में रहते हुए ला इलाहा इल्ला अन्ता सुबहानका इन्नी कुन्तु मिन अज़ ज़ालिमिन पढ़ते रहे। इस तस्बीह की बरकत से अल्लाह करीम ने आप की सारी मुश्किल आसान फ़रमा दी और इसकी बदौलत आपको 40 दिनों तक हर वक़्त सुकून मिलता रहा।

फिर मछली को अल्लाह की तरह से हुक्म आया की जहाँ से तूने हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम को निगला था उन्हें वही जाकर अपने मुँह से उन्हें निकाल दे। अल्लाह ने फ़रमाया ! अब मैं उनसे खुश हूँ। वह यानि हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम अल्लाह के दिए इम्तेहान में पास हो गए थे।

अल्लाह का हुक्म पाते ही मछली ने आपको किनारे पर उगल दिया उस किनारे पर अल्लाह ने आप के रहने के लिए एक पेड़ पैदा फ़रमा दिया और आप की खुराक के लिए एक हिरनी को आपको दूध पाने के लिए कह दिया।

कुछ दिनों बाद आप अपनी बस्ती की तरफ फिर लौटे। तब वहाँ पर आपको एक ग्वाला मिला आपने उस ग्वाले से से फ़रमाया की यहाँ पर कोई अज़ाब आया था क्या?

उस ग्वाले ने आपसे फ़रमाया की यूनुस नाम के एक शख्स ने काफी दिनों पहले एक बात कही थी की अगर बुतपरस्ती यहाँ के लोगो ने नहीं छोड़ी तो इस शहर पर अल्लाह का बहुत बड़ा अज़ाब नाज़िल होगा।Hazrat Yunus Alaihissalam Aur Machhli Ka Waqia

आपने उस ग्वाले से फ़रमाया की क्या ऐसा हुआ था? ग्वाले ने कहा की जब वह शख्स यानि हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम जब बस्ती से रात को निकले तो अगले दिन पुरे शहर में बदल छा गए थे और चारों तरफ धुआँ ही धुआँ हो गया था।

ऐसा लग रहा था जैसे अज़ाब आने वाला हैं। उस वक़्त हमे लगा की यूनुस की बात बिलकुल सही थी। तब सारे शहर के काफी लोग अपना सारा सामान और अपने परिवार को लेकर शहर छोड़ रहे थे

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और अल्लाह से दुआ कर रहे थे की अल्लाह उन्हें माफ़ कर दे। उस वक़्त वहाँ के लोगों ने अल्लाह से दुआ की के अब शहर का कोई भी आदमी बुतपरस्ती नहीं करेगा और कुछ ही देर में सारे बदल छंट गए और धुआँ एकदम से गायब हो गया।

मतलब अल्लाह ने वहाँ के लोगों को माफ़ कर दिया था। यह सुनकर आप हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम ने ग्वाले से फ़रमाया की जिस यूनुस की तुम बात कर रहे हो वह मैं ही हूँ।

यह सुनकर ग्वाला आप के कदमो में झुक गया और आपसे माफ़ी मांगने लगा। इस तरह आप वापिस अपने शहर की तरफ लौटे उसके बाद आपने वहाँ पर इस्लाम का परचम लहराया और वहाँ के सभी लोगों को एक अल्लाह की इबादत के लिए बताया।Hazrat Yunus Alaihissalam Aur Machhli Ka Waqia

FAQ – हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम और मछली का वाक़िआ (सवाल व जवाब)

1. हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम कौन थे?

जवाब: हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम अल्लाह तआला के मुकर्रर किए हुए अज़ीम नबियों में से एक थे। उन्हें अपनी क़ौम को एक अल्लाह की इबादत की दावत देने के लिए भेजा गया था।Hazrat Yunus Alaihissalam Aur Machhli Ka Waqia

2. हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम को मछली वाले नबी क्यों कहा जाता है?

जवाब: क्योंकि अल्लाह तआला के हुक्म से एक बड़ी मछली ने उन्हें निगल लिया था और वह कुछ समय तक मछली के पेट में महफूज़ रहे।Hazrat Yunus Alaihissalam Aur Machhli Ka Waqia

3. हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम किस शहर की तरफ़ नबी बनाकर भेजे गए थे?

जवाब: उन्हें इराक के मशहूर शहर नैनवा (Nineveh) की क़ौम की हिदायत के लिए भेजा गया था।Hazrat Yunus Alaihissalam Aur Machhli Ka Waqia

4. मछली के पेट में हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम कौन-सी दुआ पढ़ते थे?

जवाब: उन्होंने यह मशहूर दुआ पढ़ी: “ला इलाहा इल्ला अंता सुभानका इन्नी कुंतु मिनज़-ज़ालिमीन।”
यह दुआ आज भी मुश्किल वक्त में पढ़ना बहुत फ़ज़ीलत वाला माना जाता है।Hazrat Yunus Alaihissalam Aur Machhli Ka Waqia

5. हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम मछली के पेट में कितने दिन रहे?

जवाब: आम इस्लामी रिवायतों में 40 दिन का ज़िक्र मिलता है। हालांकि क़ुरआन करीम में दिनों की तादाद बयान नहीं की गई।Hazrat Yunus Alaihissalam Aur Machhli Ka Waqia

6. अल्लाह तआला ने हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम को कैसे नजात दी?

जवाब: जब उन्होंने सच्चे दिल से तौबा और दुआ की, तो अल्लाह तआला ने मछली को हुक्म दिया और उसने उन्हें सही-सलामत किनारे पर उगल दिया।Hazrat Yunus Alaihissalam Aur Machhli Ka Waqia

7. हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम की क़ौम का क्या हुआ?

जवाब: उनकी क़ौम ने अल्लाह से तौबा की, शिर्क छोड़ दिया और ईमान ले आई। अल्लाह तआला ने उन पर आने वाला अज़ाब टाल दिया।Hazrat Yunus Alaihissalam Aur Machhli Ka Waqia

8. इस वाक़िए से हमें क्या सीख मिलती है?

जवाब: यह वाक़िआ हमें सब्र, तौबा, अल्लाह पर भरोसा, दुआ की ताक़त और हर हाल में अल्लाह की तरफ़ रुजू करने की अहमियत सिखाता है।Hazrat Yunus Alaihissalam Aur Machhli Ka Waqia

9. क्या मुश्किल वक्त में हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम की दुआ पढ़ सकते हैं?

जवाब: जी हाँ। हदीसों में इस दुआ की बड़ी फ़ज़ीलत बयान हुई है। सच्चे दिल से यह दुआ पढ़ने और अल्लाह से मदद माँगने की तरगीब दी गई है।Hazrat Yunus Alaihissalam Aur Machhli Ka Waqia

10. हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम का वाक़िआ कहाँ बयान हुआ है?

जवाब: यह वाक़िआ क़ुरआन करीम की कई सूरतों में बयान हुआ है, जिनमें सूरह युनुस, सूरह अस-साफ़्फ़ात, सूरह अल-अंबिया और सूरह अल-क़लम शामिल हैं।Hazrat Yunus Alaihissalam Aur Machhli Ka Waqia

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Hazrat Yunus Alaihissalam Aur Machhli Ka Waqia

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Hazrat Yunus Alaihissalam Aur Machhli Ka Waqia

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

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