08/07/2026
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सहाबा में सबसे बढ़कर आशिक़-ए-रसूल |Sahaba mein Sabse badhkar Aashique rasul

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Sahaba mein Sabse badhkar Aashique rasul
Sahaba mein Sabse badhkar Aashique rasul

सहाबा किराम नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आशिक़ थे और उनमें पहला नम्बर हज़रत अबूबक्र सिद्दीके अकबर रज़ियल्लाहु अन्हु का था।

हाफिज़ इब्ने हजर रहमतुल्लाह अलैह नक्ल करते हैं कि एक महफिल में हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया, मुझे तीन चीजें बहुत महबूब हैं, खुशबू, नेक बीवी और मेरी आँखों की ठंडक नमाज़ में है।

हज़रत अबूबक्र सिद्दीक रज़ियल्लाहु अन्हु फौरन बोल उठे ऐ अल्लाह के महबूब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुझे भी तीन चीजें बहुत महबूब हैं, आपके चेहर-ए-अनवर को देखते रहना, दूसरा आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर अपना माल ख़र्च करना और तीसरा यह कि मेरी बेटी आपके निकाह में है।

अब ज़रा तीनों बातों का अंदाज़ा लगाइए कि इनका मर्कज़ और जड़ कौन बनता है? वह नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु ताआला अलैहि वसल्लम की ज़ाते अक़्दस। जब हिजरत का हुक्म हुआ तो नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हज़रत अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु के घर तशरीफ ले गए।

हज़रत अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु के दरवाज़े पर दस्तक दी तो फौरन हाज़िर हुए। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हैरान होकर पूछा, ऐ अबूबक्र ! क्या आप जाग रहे थे? अर्ज़ किया जी हाँ। कुछ अरसे से मेरा दिल महसूस कर रहा था कि जल्दी ही आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को हिजरत का हुक्म होगा तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ज़रूर मुझे अपने साथ ले जाने का शर्फ अता फरमाएंगे।

बस मैंने उस दिन से रात का सोना छोड़ दिया कि कहीं ऐसा न हो कि आप तशरीफ लाएं और मुझे जागने में देर हो जाए।

जंग तबूक के मौके पर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हुक्म फरमाया कि जिहाद के लिए अपना माल पेश करो। हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु अपने घर का आधा माल ले आए और सोचते रहे कि आज में हज़रत अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु से नेकी में बढ़ जाऊँगा।

लेकिन जब सिद्दीके अकबर आए तो नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूछा ऐ अबूबक्र! अपने पीछे अपने बीवी बच्चों के लिए क्या छोड़ आए? अर्ज़ किया अपनी बीवी बच्चों के लिए अल्लाह और उसके रसूल को छोड़ आया हूँ।

परवाने को चिराग़ है बुलबुल को फूल बस
सिद्दीक के लिए है खुदा का रसूल बस,

जब नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का विसाल मुबारक हुआ तो सिद्दीके अकबर रज़ियल्लाहु अन्हु ने अपना ग़म इन अल्फाज़ में. ज़ाहिर कियाः जब मैंने अपने नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को वफात की हालत में देखा तो मकानात अपनी वुसअत के बावजूद मुझ पर तंग हो गए। उस वक्त आपकी वफात पर मेरा दिल लरज़ उठा और ज़िंदगी भर मेरी कमर टूटी रहेगी। काश! मैं अपने आका के इन्तिकाल से पहले कब्र में दफ़न कर दिया गया होता और मुझ पर पत्थर होते।

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अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

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