19/07/2026
Allah Ke 99 Naam (Asma-ul-Husna)

अल्लाह के 99 नाम (अस्माउल हुस्ना)।Allah Ke 99 Naam (Asma-ul-Husna) | Har Naam Ki Best Fazilat, Powerful Wazifa Aur Matlab

Share now

 

Allah Ke 99 Naam (Asma-ul-Husna)
Allah Ke 99 Naam (Asma-ul-Husna)

हदीस शरीफ में आया है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया “अल्लाह पाक के अस्माए-हुस्ना जिन के साथ दुआ माँगने का हमें हुक्म दिया गया है 99 हैं जो शख़्स उन का अहतियात कर लेगा यानी उन में दाखिल होगा। उनको याद कर के पढ़ता रहेगा वह जन्नत मे दाखिल होगा।

बहुत बढ़िया भाई। शुरू करते हैं।

Allah Ke 99 Naam (Asma-ul-Husna)

(1) अल्लाहु (الله)

मतलब:
वह ज़ात जो इबादत के लायक है और जिसके सिवा कोई माबूद नहीं।

फ़ज़ीलत

हदीस शरीफ में आया है कि जो शख्स अल्लाह तआला के अस्माए-हुस्ना याद करेगा और उन पर अमल करेगा, वह जन्नत में दाखिल होगा।

जो शख्स रोज़ाना 1000 मर्तबा “या अल्लाहु” पढ़े, अल्लाह तआला उसके दिल से शक व शुब्हात दूर फरमा देंगे, ईमान मज़बूत होगा और दिल को सुकून मिलेगा। अगर कोई ऐसा बीमार हो जिसका इलाज मुश्किल हो तो वह कसरत से “या अल्लाहु” पढ़कर शिफ़ा की दुआ करे।

वज़ीफ़ा

  • रोज़ाना 1000 मर्तबा “या अल्लाहु” पढ़ें।
  • आखिर में अपने लिए और तमाम मुसलमानों के लिए दुआ करें।Allah Ke 99 Naam (Asma-ul-Husna)

(2) अर्रहमान (الرحمن)

मतलब:
बहुत ज़्यादा रहम करने वाला।

फ़ज़ीलत

जो शख्स हर नमाज़ के बाद 100 मर्तबा “या रहमानु” पढ़े, अल्लाह तआला उसके दिल की सख्ती दूर फरमा देते हैं और उस पर अपनी खास रहमत नाज़िल करते हैं।

वज़ीफ़ा

  • हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद 100 बार “या रहमानु” पढ़ें।
  • अल्लाह से रहमत और आसानी की दुआ करें।

(3) अर्रहीम (الرحيم)

मतलब:
बहुत मेहरबान।

फ़ज़ीलत

जो शख्स हर नमाज़ के बाद 100 मर्तबा “या रहीमु” पढ़ता है, अल्लाह तआला उसे दुनिया की आफ़तों से महफूज़ रखते हैं और लोगों के दिलों में उसके लिए मुहब्बत पैदा कर देते हैं।

वज़ीफ़ा

  • हर नमाज़ के बाद 100 बार “या रहीमु” पढ़ें।
  • अपने लिए रहमत और मग़फिरत की दुआ करें।

(4) अल-मलिकु (الملك)

मतलब:
हकीकी बादशाह।

फ़ज़ीलत

जो शख्स फ़ज्र की नमाज़ के बाद कसरत से “या मलिकु” पढ़ता है, अल्लाह तआला उसे ग़नी और बेनियाज़ बना देते हैं।

वज़ीफ़ा

  • फ़ज्र के बाद ज़्यादा से ज़्यादा “या मलिकु” पढ़ें।
  • हलाल रोज़ी और बरकत की दुआ करें।

(5) अल-कुद्दूसु (القدوس)

मतलब:
हर ऐब और कमी से पाक।

फ़ज़ीलत

जो शख्स इस नाम का ज़िक्र करता है, अल्लाह तआला उसके दिल को रूहानी बीमारियों से पाक फरमा देते हैं।

वज़ीफ़ा

  • ज़वाल के बाद कसरत से “या कुद्दूसु” पढ़ें।
  • दिल की सफाई और तक़वा की दुआ करें।

(6) अस्सलामु (السلام)

मतलब:
हर तरह की सलामती देने वाला।

फ़ज़ीलत

जो शख्स कसरत से “या सलामु” पढ़ता है, अल्लाह तआला उसे आफ़तों से महफूज़ रखते हैं। अगर किसी बीमार पर 115 मर्तबा पढ़कर दम किया जाए तो अल्लाह के हुक्म से शिफ़ा नसीब हो सकती है।

वज़ीफ़ा

  • रोज़ाना “या सलामु” पढ़ें।
  • बीमार पर 115 बार पढ़कर दम करें और शिफ़ा की दुआ करें।

(7) अल-मोमिनु (المؤمن)

मतलब:
अम्न और ईमान देने वाला।

फ़ज़ीलत

डर या परेशानी के समय 360 मर्तबा “या मोमिनु” पढ़ने वाला अल्लाह के हुक्म से महफूज़ रहता है।

वज़ीफ़ा

  • डर के समय 360 बार “या मोमिनु” पढ़ें।
  • अल्लाह से हिफाज़त की दुआ करें।

(8) अल-मुहैमिनु (المهيمن)

मतलब:
हर चीज़ की निगरानी करने वाला।

फ़ज़ीलत

जो शख्स ग़ुस्ल के बाद दो रकअत नमाज़ पढ़कर 100 मर्तबा “या मुहैमिनु” पढ़े, अल्लाह तआला उसके जाहिर और बातिन को पाक फरमा देते हैं।

वज़ीफ़ा

  • दो रकअत नफ़्ल के बाद 100 बार “या मुहैमिनु” पढ़ें।
  • पाकीज़गी और ईमान की दुआ करें।

(9) अल-अज़ीज़ु (العزيز)

मतलब:
बहुत इज़्ज़त वाला और ग़ालिब।

फ़ज़ीलत

जो शख्स 40 दिन तक रोज़ 40 मर्तबा “या अज़ीज़ु” पढ़े, अल्लाह तआला उसे इज़्ज़त और बेनियाज़ी अता फरमाते हैं। फ़ज्र के बाद 41 मर्तबा पढ़ना भी मुबारक अमल बताया गया है।

ये भी पढ़ें: ईशा की नमाज पढ़ने का तरीक़ा।

वज़ीफ़ा

  • 40 दिन तक 40 बार “या अज़ीज़ु” पढ़ें।
  • या फ़ज्र के बाद 41 बार पढ़ें।

(10) अल-जब्बारू (الجبار)

मतलब:
सबसे ज़बरदस्त और ताक़तवर।

फ़ज़ीलत

जो शख्स सुबह-शाम 236 मर्तबा “या जब्बारू” पढ़ता है, अल्लाह तआला उसे जालिमों के ज़ुल्म और दुश्मनों की बुराइयों से महफूज़ रखते हैं।

वज़ीफ़ा

  • सुबह और शाम 236 बार “या जब्बारू” पढ़ें।
  • ज़ालिमों से हिफाज़त की दुआ करें।

(11) अल-मुतकब्बिरु (المتكبر)

मतलब:
सबसे बड़ा और बड़ाई वाला।

फ़ज़ीलत

जो शख्स कसरत से “या मुतकब्बिरु” पढ़े, अल्लाह तआला उसे इज़्ज़त और बुलंदी अता फरमाते हैं। किसी जायज़ काम की शुरुआत से पहले इसे पढ़ना बरकत और कामयाबी का सबब है।

वज़ीफ़ा

  • किसी नए काम की शुरुआत से पहले “या मुतकब्बिरु” पढ़ें।
  • अल्लाह से कामयाबी और इज़्ज़त की दुआ करें।

(12) अल-खालिकु (الخالق)

मतलब:
हर चीज़ को पैदा करने वाला।

फ़ज़ीलत

जो शख्स लगातार 7 दिन तक रोज़ 100 मर्तबा “या खालिकु” पढ़े, अल्लाह तआला उसे आफ़तों से महफूज़ रखते हैं। कसरत से पढ़ने वाले के लिए फ़रिश्ते उसकी तरफ़ से इबादत करते हैं।

वज़ीफ़ा

  • 7 दिन तक रोज़ 100 बार “या खालिकु” पढ़ें।
  • अल्लाह से हिफाज़त और बरकत की दुआ करें।

(13) अल-बारिउ (البارئ)

मतलब:
बिना मिसाल पैदा करने वाला।

फ़ज़ीलत

अगर कोई औलाद से महरूम हो तो सात रोज़े रखकर इफ़्तार के बाद 21 मर्तबा “या बारिउ” और “या मुसव्विरु” पढ़े। अल्लाह चाहे तो औलाद की नेमत अता फरमाए।

वज़ीफ़ा

  • सात रोज़े रखें।
  • इफ़्तार के बाद 21 बार “या बारिउ” पढ़ें।
  • नेक औलाद की दुआ करें।

(14) अल-मुसव्विरु (المصور)

मतलब:
सूरत और शक्ल देने वाला।

फ़ज़ीलत

इस नाम की फ़ज़ीलत अल-बारिउ के साथ बयान की गई है। औलाद की दुआ में इसे पढ़ना मुस्तहसन बताया गया है।

वज़ीफ़ा

  • 21 बार “या मुसव्विरु” पढ़ें।
  • नेक और सालेह औलाद की दुआ करें।

(15) अल-गफ्फारु (الغفار)

मतलब:
बार-बार माफ़ करने वाला।

फ़ज़ीलत

जो शख्स जुमे की नमाज़ के बाद 100 मर्तबा “या गफ्फारु” पढ़े, अल्लाह तआला उसकी मग़फिरत के असबाब पैदा फरमा देते हैं। अस्र के बाद “या गफ्फारु इग़फिर ली” पढ़ना भी बहुत फ़ायदेमंद है।

वज़ीफ़ा

  • जुमे के दिन 100 बार “या गफ्फारु” पढ़ें।
  • रोज़ाना “या गफ्फारु इग़फिर ली” पढ़कर मग़फिरत की दुआ करें।

(16) अल-कह्हारु (القهار)

मतलब:
हर चीज़ पर ग़ालिब रहने वाला।

फ़ज़ीलत

जो शख्स दुनिया की मुहब्बत में गिरफ़्तार हो, वह कसरत से “या कह्हारु” पढ़े। अल्लाह तआला उसके दिल से दुनिया की बेजा मुहब्बत निकालकर अपनी मुहब्बत पैदा फरमा देंगे।

वज़ीफ़ा

  • रोज़ाना ज़्यादा से ज़्यादा “या कह्हारु” पढ़ें।
  • दिल की इस्लाह और अल्लाह की मुहब्बत की दुआ करें।

(17) अल-वह्हाबु (الوهاب)

मतलब:
बहुत ज़्यादा देने वाला।

फ़ज़ीलत

जो शख्स तंगी और फाक़े में हो, वह “या वह्हाबु” का ज़िक्र करे। अगर कोई खास ज़रूरत हो तो सज्दे में 100 मर्तबा यह नाम पढ़कर दुआ करे।

वज़ीफ़ा

  • ज़रूरत के समय 100 बार “या वह्हाबु” पढ़ें।
  • अपनी जायज़ हाजत के लिए दुआ करें।

(18) अर-रज़्ज़ाक (الرزاق)

मतलब:
रोज़ी देने वाला।

फ़ज़ीलत

जो शख्स फ़ज्र से पहले घर के चारों कोनों में 10-10 मर्तबा “या रज़्ज़ाक” पढ़कर दम करे, अल्लाह तआला उसके लिए हलाल रोज़ी के दरवाज़े खोल देते हैं।

वज़ीफ़ा

  • फ़ज्र से पहले घर के चारों कोनों में 10-10 बार “या रज़्ज़ाक” पढ़ें।
  • हलाल रोज़ी और बरकत की दुआ करें।

(19) अल-फत्ताहु (الفتاح)

मतलब:
मुश्किलें और बंद दरवाज़े खोलने वाला।

फ़ज़ीलत

जो शख्स फ़ज्र की नमाज़ के बाद सीने पर हाथ रखकर 70 मर्तबा “या फत्ताहु” पढ़े, अल्लाह तआला उसके दिल को ईमान के नूर से रोशन फरमा देते हैं।

वज़ीफ़ा

  • फ़ज्र के बाद 70 बार “या फत्ताहु” पढ़ें।
  • हर मुश्किल की आसानी की दुआ करें।

(20) अल-अलीमु (العليم)

मतलब:
हर चीज़ का पूरा इल्म रखने वाला।

फ़ज़ीलत

जो शख्स कसरत से “या अलीमु” पढ़ता है, अल्लाह तआला उसके लिए इल्म, समझ और हिकमत के दरवाज़े खोल देते हैं।

वज़ीफ़ा

  • रोज़ाना ज़्यादा से ज़्यादा “या अलीमु” पढ़ें।
  • इल्म, हिकमत और दीन की समझ की दुआ करें।

(21) अल-क़ाबिज़ु (ٱلْقَابِضُ)

मतलब: रोज़ी तंग करने वाला।

वज़ीफ़ा: जो शख्स रोटी के चार टुकड़ों पर यह नाम लिखकर 40 दिन तक खाए, अल्लाह ने चाहा तो भूख, प्यास, घाव और हर प्रकार के दर्द से महफूज़ रहेगा।

ये भी पढ़ें: तौबा की ऐसी मिसाल, जिसे पढ़कर आँखें नम हो जाएँगी

(22) अल-बासितु (ٱلْبَاسِطُ)

मतलब: रोज़ी में कुशादगी (विस्तार) देने वाला।

वज़ीफ़ा: जो शख्स चाश्त की नमाज़ के बाद आसमान की तरफ हाथ उठाकर 10 मर्तबा “या बासितु” पढ़े और हाथ चेहरे पर फेर ले, अल्लाह तआला उसे रोज़ी में बरकत और कुशादगी अता फरमाएंगे।

(23) अल-ख़ाफ़िज़ु (ٱلْخَافِضُ)

मतलब: नीचा करने वाला।

वज़ीफ़ा: जो शख्स रोज़ाना 500 मर्तबा “या ख़ाफ़िज़ु” पढ़े, अल्लाह तआला उसकी ज़रूरतें पूरी फरमाएंगे और मुश्किलें दूर करेंगे। अगर कोई तीन रोज़े रखकर चौथे दिन 70 मर्तबा पढ़े, तो इंशाअल्लाह दुश्मन पर ग़लबा मिलेगा।

(24) अर-राफ़िउ (ٱلرَّافِعُ)

मतलब: ऊँचा दर्जा देने वाला।

वज़ीफ़ा: जो शख्स हर महीने की 14वीं रात आधी रात को 100 मर्तबा “या राफ़िउ” पढ़े, अल्लाह तआला उसे इज़्ज़त, बुलंदी और बेनियाज़ी अता फरमाएंगे।

(25) अल-मुइज़्ज़ु (ٱلْمُعِزُّ)

मतलब: इज़्ज़त देने वाला।

वज़ीफ़ा: जो शख्स सोमवार या जुमे के दिन मगरिब की नमाज़ के बाद 40 मर्तबा “या मुइज़्ज़ु” पढ़े, अल्लाह तआला उसे लोगों में इज़्ज़त और सम्मान अता फरमाएंगे।

(26) अल-मुज़िल्लु (ٱلْمُذِلُّ)

मतलब: ज़िल्लत देने वाला।

वज़ीफ़ा: जो शख्स 75 मर्तबा “या मुज़िल्लु” पढ़कर सज्दे में दुआ करे, अल्लाह तआला उसे दुश्मनों, ज़ालिमों और हसद करने वालों की बुराइयों से महफूज़ रखेंगे।

(27) अस-समीऊ (ٱلسَّمِيعُ)

मतलब: सब कुछ सुनने वाला।

वज़ीफ़ा: जो शख्स जुमेरात के दिन चाश्त की नमाज़ के बाद 50, 100 या 500 मर्तबा “या समीऊ” पढ़े, इंशाअल्लाह उसकी दुआएँ कबूल होंगी। फ़ज्र की सुन्नत और फ़र्ज़ के बीच 100 मर्तबा पढ़ने से अल्लाह की रहमत नसीब होती है।

(28) अल-बसीरु (ٱلْبَصِيرُ)

मतलब: सब कुछ देखने वाला।

वज़ीफ़ा: जो शख्स जुमे की नमाज़ के बाद 100 मर्तबा “या बसीरु” पढ़े, अल्लाह तआला उसकी नज़र में रोशनी और दिल में नूर पैदा फरमाएंगे।

(29) अल-हकमु (ٱلْحَكَمُ)

मतलब: हाकिम और फैसला करने वाला।

वज़ीफ़ा: जो शख्स रात के आख़िरी पहर वुज़ू के साथ 99 मर्तबा “या हकमु” पढ़े, अल्लाह तआला उसके दिल को नूर और हिकमत से भर देंगे और सही फैसले की तौफ़ीक़ अता फरमाएंगे।Allah Ke 99 Naam (Asma-ul-Husna)

(30) अल-अद्ल (العدل)

मतलब: पूरा इंसाफ करने वाला।

वज़ीफ़ा: जो शख्स जुमे के दिन या जुमेरात की रात रोटी के 20 टुकड़ों पर “या अद्लु” लिखकर रखे, अल्लाह तआला उसे लोगों में इज़्ज़त और इंसाफ के साथ कामयाबी अता फरमाएंगे। इंशाअल्लाह।

(31) अल-लतीफ़ (اللطيف)

मतलब: बहुत मेहरबानी और करम करने वाला।

वज़ीफ़ा: जो शख्स 133 मर्तबा “या लतीफ़ु” पढ़े, अल्लाह तआला उसकी रोज़ी में बरकत अता फरमाएंगे और उसके काम आसान कर देंगे। अगर कोई मुसीबत हो तो दो रकअत नमाज़ पढ़कर 100 मर्तबा पढ़े, इंशाअल्लाह मकसद पूरा होगा।

(32) अल-ख़बीर (الخبير)

मतलब: हर चीज़ की पूरी खबर रखने वाला।

वज़ीफ़ा: जो शख्स 7 दिन तक इस नाम को कसरत से पढ़े, अल्लाह तआला उसे सही समझ और हक़ की पहचान अता फरमाएंगे। नफ़्स की बुरी ख्वाहिशों से बचने के लिए भी इसे पढ़ना मुफ़ीद है।Allah Ke 99 Naam (Asma-ul-Husna)

ये भी पढ़ें: मस्जिदे अक्सा की फ़ज़ीलत, तारीख़ और इस्लाम में अहमियत 

(33) अल-हलीम (الحليم)

मतलब: बहुत बर्दाश्त करने वाला।

वज़ीफ़ा: जो शख्स इस नाम को लिखकर पानी से धोए और उस पानी को किसी चीज़ पर छिड़के, अल्लाह तआला उसमें बरकत अता फरमाएंगे और आफ़तों से हिफ़ाज़त करेंगे।

(34) अल-अज़ीम (العظيم)

मतलब: बहुत महान और बुज़ुर्गी वाला।

वज़ीफ़ा: जो शख्स इस नाम को ज्यादा से ज्यादा पढ़े, अल्लाह तआला उसे इज़्ज़त, बुलंदी और लोगों में अच्छा मकाम अता फरमाएंगे।

(35) अल-ग़फूर (الغفور)

मतलब: बहुत ज्यादा माफ़ करने वाला।

वज़ीफ़ा: जो शख्स इस नाम को कसरत से पढ़े, अल्लाह तआला उसकी परेशानियाँ दूर फरमाएंगे और माल व औलाद में बरकत अता करेंगे। सज्दे में “रब्बिग़फिर ली” तीन मर्तबा पढ़ना भी मग़फिरत का सबब है।

(36) अश-शकूर (الشكور)

मतलब: बंदे के थोड़े अमल की भी कद्र करने वाला।

वज़ीफ़ा: जो शख्स रोज़ाना 41 मर्तबा “या शकूरु” पढ़े, अल्लाह तआला उसे तंगी, ग़म और परेशानियों से निजात अता फरमाएंगे।

(37) अल-अलिय्य (العلي)

मतलब: सबसे बुलंद और ऊँचा।

वज़ीफ़ा: जो शख्स इस नाम को हमेशा पढ़े और लिखकर अपने पास रखे, अल्लाह तआला उसका मकाम बुलंद करेंगे और उसे कामयाबी व खुशहाली अता फरमाएंगे।

(38) अल-कबीर (الكبير)

मतलब: बहुत बड़ा और महान।

वज़ीफ़ा: जो शख्स 7 रोज़े रखकर रोज़ाना 1000 मर्तबा “या कबीरु” पढ़े, अल्लाह तआला उसे इज़्ज़त और बुलंदी अता फरमाएंगे। अगर किसी पद से हट गया हो तो इंशाअल्लाह दोबारा कामयाबी मिलेगी।

(39) अल-हफ़ीज़ (الحفيظ)

मतलब: हिफ़ाज़त करने वाला।

वज़ीफ़ा: जो शख्स “या हफ़ीज़ु” को ज्यादा से ज्यादा पढ़े और लिखकर अपने पास रखे, अल्लाह तआला उसे हर तरह के डर, नुकसान और आफ़त से महफूज़ रखेंगे।

(40) अल-मुक़ीत (المقيت)

मतलब: सबको रोज़ी और ताक़त देने वाला।

वज़ीफ़ा: जो शख्स खाली प्याले में 7 मर्तबा “या मुक़ीतु” पढ़कर दम करे, फिर उस पानी को पिए या किसी और को पिलाए, अल्लाह तआला उसे अपने जायज़ मकसद में कामयाबी अता फरमाएंगे। इंशाअल्लाह।

(41) अल हसीबु (ٱلْحَسِيبُ)

मतलब: सबके लिए काफ़ी होने वाला।

वज़ीफ़ा:

जिसे किसी चीज़ या किसी व्यक्ति का डर हो, वह जुमेरात से शुरू करके 8 दिन तक सुबह-शाम 70 मर्तबा “हस्बियल्लाहुल हसीबु” पढ़े। इंशाअल्लाह हर तरह की बुराई और आफ़त से महफ़ूज़ रहेगा।

(42) अल जलीलु (ٱلْجَلِيلُ)

मतलब: बड़ी शान और बुलंद मर्तबे वाला।

वज़ीफ़ा:

जो शख्स “या जलीलु” का अधिक से अधिक विर्द करेगा, अल्लाह तआला उसे इज़्ज़त, शान और बुलंद मर्तबा अता फरमाएंगे।

(43) अल करीमु (ٱلْكَرِيمُ)

मतलब: बहुत करम करने वाला।

वज़ीफ़ा:

जो शख्स सोते समय “या करीमु” पढ़ते-पढ़ते सो जाए, अल्लाह तआला उसे नेक लोगों में इज़्ज़त अता फरमाएंगे।

(44) अर्रकीबु (ٱلرَّقِيبُ)

मतलब: निगहबानी करने वाला।

वज़ीफ़ा:

जो शख्स अपने घर वालों पर 7 मर्तबा “या रकीबु” पढ़कर दम करे, अल्लाह तआला उन्हें हर आफ़त से महफ़ूज़ रखेंगे।

(45) अल मुजीबु (ٱلْمُجِيبُ)

मतलब: दुआ क़बूल करने वाला।

वज़ीफ़ा:

जो शख्स “या मुजीबु” का अधिक से अधिक विर्द करेगा, इंशाअल्लाह उसकी दुआएँ क़बूल होने लगेंगी।

(46) अल वासिऊ (ٱلْوَاسِعُ)

मतलब: बहुत कुशादगी वाला।

वज़ीफ़ा:

जो शख्स “या वासिऊ” का अधिक से अधिक विर्द करेगा, अल्लाह तआला उसे ज़ाहिरी और बातिनी बरकतें अता फरमाएंगे।

(47) अल हकीमु (ٱلْحَكِيمُ)

मतलब: बड़ी हिकमत वाला।

वज़ीफ़ा:

जो शख्स “या हकीमु” का लगातार विर्द करेगा, अल्लाह तआला उसके लिए इल्म और हिकमत के दरवाज़े खोल देंगे। अगर कोई काम पूरा न हो रहा हो तो इसकी पाबंदी करे।

(48) अल वदूदु (ٱلْوَدُودُ)

मतलब: बहुत मुहब्बत करने वाला।

वज़ीफ़ा:

जो शख्स 1000 मर्तबा “या वदूदु” पढ़कर खाने पर दम करे और शौहर-बीवी मिलकर वह खाना खाएँ, इंशाअल्लाह आपसी मुहब्बत बढ़ेगी और झगड़े खत्म होंगे।

(49) अल मजीदु (ٱلْمَجِيدُ)

मतलब: बड़ी शान वाला।

वज़ीफ़ा:

जो शख्स 13, 14 और 15 तारीख़ के रोज़े रखकर इफ़्तार के बाद “या मजीदु” का अधिक से अधिक विर्द करे और पानी पर दम करके पिए, अल्लाह तआला शिफ़ा अता फरमाएंगे।

ये भी पढ़ें: बेटियों के लिए ज़रूरी हिदायात।

(50) अल बाइसु (ٱلْبَاعِثُ)

मतलब: दोबारा ज़िन्दा करने वाला।

वज़ीफ़ा:

जो शख्स सोते समय सीने पर हाथ रखकर 101 मर्तबा “या बाइसु” पढ़े, इंशाअल्लाह उसका दिल इल्म और हिकमत से रोशन होगा।

(51) अश्शहीदु (ٱلشَّهِيدُ)

मतलब: हर चीज़ पर गवाह और हाज़िर-ओ-नाज़िर।

वज़ीफ़ा:

जिस शख्स की औलाद या अहल-ए-ख़ाना नाफ़रमानी करते हों, वह सुबह के वक़्त उनके माथे पर हाथ रखकर 21 मर्तबा “या शहीदु” पढ़कर दम करे। अल्लाह ने चाहा तो फ़रमाबरदारी नसीब होगी।

(52) अल् हक्कु (ٱلْحَقُّ)

मतलब: सच्चा और बरहक।

वज़ीफ़ा:

जो शख्स किसी गुमशुदा चीज़ की तलाश में हो, वह सेहरी के वक़्त “या हक्कु” पढ़कर अल्लाह से दुआ करे। अल्लाह ने चाहा तो गुम हुई चीज़ मिल जाएगी और नुकसान से हिफाज़त होगी।Allah Ke 99 Naam (Asma-ul-Husna)

(53) अल् वकीलु (ٱلْوَكِيلُ)

मतलब: सबसे अच्छा काम बनाने वाला और भरोसे के लायक।

वज़ीफ़ा:

जो शख्स किसी आफ़त, डर या परेशानी के समय ज़्यादा से ज़्यादा “या वकीलु” पढ़े और अपने तमाम मामले अल्लाह के सुपुर्द कर दे, अल्लाह ने चाहा तो हर मुसीबत से नजात मिलेगी।

(54) अल् कविय्यु (ٱلْقَوِيُّ)

मतलब: बहुत ताक़तवर।

वज़ीफ़ा:

जो शख्स मज़लूम हो और किसी ज़ालिम से परेशान हो, वह ज़्यादा से ज़्यादा “या कविय्यु” पढ़े। अल्लाह ने चाहा तो उसे ज़ालिम से हिफाज़त मिलेगी। यह अमल नाहक किसी पर ग़लबा पाने के लिए न करे।

(55) अल् मतीनु (ٱلْمَتِينُ)

मतलब: बहुत मज़बूत और क़ुव्वत वाला।

वज़ीफ़ा:

जिस औरत का दूध कम आता हो, उसके लिए “या मतीनु” कागज़ पर लिखकर धोया हुआ पानी पिलाने का अमल किताबों में ज़िक्र किया गया है। अल्लाह ने चाहा तो दूध में बरकत होगी।Allah Ke 99 Naam (Asma-ul-Husna)

(56) अल् वलिय्यु (ٱلْوَلِيُّ)

मतलब: मददगार, सहायक और अपने नेक बंदों का दोस्त।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला अपने नेक बंदों का वली (मददगार) है। जो शख्स इस मुबारक नाम का कसरत से ज़िक्र करता है, अल्लाह तआला उसकी मदद फरमाते हैं और उसके हालात में आसानी पैदा करते हैं।

वज़ीफ़ा

जो शख्स अपनी पत्नी की आदतों और हरकतों से परेशान हो, वह उसके सामने जाते समय “या वलिय्यु” पढ़ा करे। अल्लाह ने चाहा तो उसकी आदतों में सुधार होगा और घर में सुकून पैदा होगा।

(57) अल् हमीदु (ٱلْحَمِيدُ)

मतलब: हर तरह की तारीफ़ के लायक।

फ़ज़ीलत

जो शख्स इस नाम का विर्द करता है, अल्लाह तआला उसे अच्छी आदतें और नेक अख़लाक़ अता फरमाते हैं।

वज़ीफ़ा

जो शख्स 45 दिन तक लगातार 93 मर्तबा “या हमीदु” एकांत में पढ़े, अल्लाह ने चाहा तो उसकी बुरी आदतें और बुरे अख़लाक़ दूर हो जाएंगे।

(58) अल् मुह्सी (ٱلْمُحْصِي)

मतलब: हर चीज़ का पूरा हिसाब और गिनती रखने वाला।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला हर चीज़ का पूरा हिसाब रखने वाला है। जो शख्स इस नाम का ज़िक्र करता है, अल्लाह तआला उसके कामों में बरकत अता फरमाते हैं।

वज़ीफ़ा

जो शख्स रोटी के 20 टुकड़ों पर रोज़ाना 20 मर्तबा “या मुह्सी” पढ़कर दम करे और उन्हें खाए, अल्लाह ने चाहा तो मख़्लूक उसके साथ नरमी का व्यवहार करेगी।

(59) अल् मुब्दिउ (ٱلْمُبْدِئُ)

मतलब: पहली बार पैदा करने वाला।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला ही हर चीज़ की पहली बार पैदाइश करने वाला है और उसी के हुक्म से हर काम होता है।

वज़ीफ़ा

सेहरी के वक़्त गर्भवती महिला के पेट पर हाथ रखकर 99 मर्तबा “या मुब्दिउ” पढ़ा जाए तो अल्लाह ने चाहा न गर्भपात होगा और न समय से पहले बच्चा पैदा होगा।Allah Ke 99 Naam (Asma-ul-Husna)

(60) अल् मुईदु (ٱلْمُعِيدُ)

मतलब: दोबारा लौटाने वाला।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला गुम हुई चीज़ और बिछड़े हुए लोगों को अपनी कुदरत से वापस मिलाने पर पूरा क़ादिर है।

वज़ीफ़ा

अगर कोई शख्स गुम हो जाए तो जब घर के सभी लोग सो जाएँ, घर के चारों कोनों में 70-70 मर्तबा “या मुईदु” पढ़ें। अल्लाह ने चाहा तो 7 दिन के अंदर गुमशुदा शख्स का पता चल जाएगा या वह वापस आ जाएगा।

(61) अल् मुहयी (ٱلْمُحْيِي)

मतलब: ज़िन्दगी देने वाला।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला ही हर मख़लूक़ को ज़िन्दगी देने वाला है। जो शख्स इस मुबारक नाम का विर्द करता है, अल्लाह तआला उसके दिल को ईमान और रूहानियत से ज़िन्दा फरमा देते हैं।

वज़ीफ़ा

जो शख्स बीमार हो, वह कसरत से “या मुहयी” पढ़े या किसी बीमार पर दम करे। अल्लाह ने चाहा तो शिफ़ा नसीब होगी। और जो 89 मर्तबा “या मुहयी” पढ़कर अपने ऊपर दम करे, वह हर तरह की बन्दिश से महफूज़ रहेगा।

(62) अल् मुमीतु (ٱلْمُمِيتُ)

मतलब: मौत देने वाला।

फ़ज़ीलत

ज़िन्दगी और मौत केवल अल्लाह तआला के इख़्तियार में है। जो शख्स अपने नफ़्स की बुरी ख्वाहिशों से परेशान हो, उसके लिए इस नाम का विर्द मुफ़ीद बताया गया है।

वज़ीफ़ा

जिसका नफ़्स उसके क़ाबू में न हो, वह सोते समय सीने पर हाथ रखकर 80 मर्तबा “या मुमीतु” पढ़ते हुए सो जाए। अल्लाह ने चाहा तो उसका नफ़्स क़ाबू में आ जाएगा।

(63) अल् हय्यु (ٱلْحَيُّ)

मतलब: हमेशा ज़िन्दा रहने वाला।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला हमेशा से ज़िन्दा है और हमेशा ज़िन्दा रहेगा। जो शख्स इस नाम का विर्द करता है, अल्लाह तआला उसे अपनी रहमत से नवाज़ते हैं।

वज़ीफ़ा

जो शख्स रोज़ाना 3000 मर्तबा “या हय्यु” पढ़े, अल्लाह ने चाहा तो बीमारियों से हिफ़ाज़त नसीब होगी। और इस नाम को लिखकर धोकर पानी पीने का अमल भी शिफ़ा के लिए बयान किया गया है।

(64) अल् कय्यूमु (ٱلْقَيُّومُ)

मतलब: खुद कायम रहने वाला और सारी कायनात को संभालने वाला।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला पूरी कायनात को संभालने वाला है। जो शख्स इस नाम का विर्द करता है, उसे इज़्ज़त, सुकून और बरकत नसीब होती है।

वज़ीफ़ा

जो शख्स सुबह फ़ज्र की नमाज़ के बाद सूरज निकलने तक “या हय्यु या कय्यूमु” पढ़ता रहे, अल्लाह ने चाहा तो उसकी सुस्ती और काहिली दूर हो जाएगी और दिल में ताज़गी पैदा होगी।

(65) अल् वाजिदु (ٱلْوَاجِدُ)

मतलब: हर चीज़ को पाने वाला।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला हर चीज़ पर क़ुदरत रखने वाला है। जो शख्स इस नाम का ज़िक्र करता है, अल्लाह तआला उसके दिल को नूर और सुकून अता फरमाते हैं।

वज़ीफ़ा

जो शख्स खाना खाते समय “या वाजिदु” पढ़े, तो वह खाना उसके दिल की ताक़त, रूहानियत और नूर का सबब बनेगा, इंशाअल्लाह।

(66) अल् माजिदु (ٱلْمَاجِدُ)

मतलब: बड़ी बुज़ुर्गी, शान और महानता वाला।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला ही असली बुज़ुर्गी और अज़मत वाला है। जो शख्स इस मुबारक नाम का कसरत से ज़िक्र करता है, अल्लाह तआला उसके दिल को अपने नूर से रोशन फरमा देते हैं।Allah Ke 99 Naam (Asma-ul-Husna)

वज़ीफ़ा

जो शख्स एकान्त में बैठकर “या माजिदु” का ज़्यादा से ज़्यादा विर्द करे, यहाँ तक कि उसका दिल अल्लाह की याद में मग्न हो जाए, अल्लाह ने चाहा तो उसके दिल पर अपना नूर ज़ाहिर फरमा देंगे।

(67) अल् वाहिदु, अल् अहदु (ٱلْوَاحِدُ، ٱلْأَحَدُ)

मतलब: एक और अकेला, जिसका कोई साझी नहीं।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला एक है, उसका कोई शरीक नहीं। जो शख्स इन नामों का विर्द करता है, उसके दिल से गैरुल्लाह का डर और बेजा मुहब्बत दूर हो जाती है।

वज़ीफ़ा

जो शख्स रोज़ाना 1000 मर्तबा “या वाहिदु, या अहदु” पढ़े, अल्लाह ने चाहा तो उसके दिल से मख़लूक का डर दूर हो जाएगा। और जिसके औलाद न हो, वह इन नामों को लिखकर अपने पास रखे, अल्लाह ने चाहा तो नेक औलाद नसीब होगी।

(68) अस्समदु (ٱلصَّمَدُ)

मतलब: सबसे बेनियाज़, जिससे सब ज़रूरतें पूरी होती हैं।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला सब से बेनियाज़ है और सारी मख़लूक उसी की मोहताज है। जो शख्स इस नाम का विर्द करता है, उसे सच्चाई और अल्लाह पर भरोसा नसीब होता है।

वज़ीफ़ा

जो शख्स सहर के वक़्त सज्दे में 115 या 125 मर्तबा “या समदु” पढ़े, अल्लाह ने चाहा तो उसे जाहिरी और बातिनी सच्चाई नसीब होगी। और जो वुज़ू के साथ इसे पढ़ेगा, वह मख़लूक से बेनियाज़ हो जाएगा।Allah Ke 99 Naam (Asma-ul-Husna)

(69) अल् कादिरु (ٱلْقَادِرُ)

मतलब: हर चीज़ पर पूरी कुदरत रखने वाला।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला हर चीज़ पर क़ादिर है। जो शख्स इस नाम का विर्द करता है, अल्लाह तआला उसकी मुश्किलों को आसान फरमा देते हैं।

वज़ीफ़ा

जो शख्स दो रकअत नमाज़ पढ़कर 100 मर्तबा “या कादिरु” पढ़े, अल्लाह ने चाहा तो अगर वह हक़ पर होगा तो दुश्मनों पर ग़ालिब होगा। और किसी भी मुश्किल काम के लिए 41 मर्तबा “या कादिरु” पढ़े, इंशाअल्लाह आसानी होगी।Allah Ke 99 Naam (Asma-ul-Husna)

(70) अल् मुक्तदिरु (ٱلْمُقْتَدِرُ)

मतलब: पूरी कुदरत और इख़्तियार रखने वाला।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला हर काम पर मुकम्मल इख़्तियार रखता है। जो शख्स इस नाम का विर्द करता है, अल्लाह तआला उसके कामों में आसानी और कामयाबी अता फरमाते हैं।Allah Ke 99 Naam (Asma-ul-Husna)

वज़ीफ़ा

जो शख्स सुबह नींद से उठने के बाद ज़्यादा से ज़्यादा “या मुक्तदिरु” पढ़े, या कम से कम 20 मर्तबा पढ़े, अल्लाह ने चाहा तो उसके तमाम काम सही और दुरुस्त हो जाएंगे।

(71) अल् मुकद्दिमु (ٱلْمُقَدِّمُ)

मतलब: आगे करने वाला, पहले रखने वाला।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला जिसे चाहे आगे बढ़ा दे और जिसे चाहे बुलंदी अता फरमा दे। जो शख्स इस नाम का विर्द करता है, अल्लाह तआला उसे नेक कामों में आगे बढ़ने की तौफ़ीक़ अता फरमाते हैं।

वज़ीफ़ा

जो शख्स लड़ाई या किसी कठिन परिस्थिति में “या मुकद्दिमु” पढ़े, अल्लाह तआला उसे हिम्मत और कामयाबी अता फरमाएंगे। और जो हमेशा इसका विर्द करेगा, अल्लाह ने चाहा तो वह अल्लाह का फ़रमाबरदार बंदा बन जाएगा।

(72) अल् मुअख्खिरु (ٱلْمُؤَخِّرُ)

मतलब: पीछे करने वाला।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला अपनी हिकमत के मुताबिक हर चीज़ को आगे या पीछे करता है। जो शख्स इस नाम का विर्द करता है, उसे सच्ची तौबा और अल्लाह की क़ुर्बत नसीब होती है।

वज़ीफ़ा

जो शख्स रोज़ाना 100 मर्तबा “या मुअख्खिरु” पढ़े, अल्लाह ने चाहा तो उसे सच्ची तौबा और अपनी क़ुर्बत नसीब होगी।

(73) अल् अव्वलु (ٱلْأَوَّلُ)

मतलब: सबसे पहला।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला हर चीज़ से पहले था और उसी की ज़ात सबसे पहली है। जो शख्स इस नाम का विर्द करता है, उसकी जायज़ मुरादें पूरी होती हैं।

वज़ीफ़ा

जिसके औलाद न हो, वह 40 दिन तक रोज़ाना 40 मर्तबा “या अव्वलु” पढ़े। अल्लाह ने चाहा तो उसकी जायज़ मुराद पूरी होगी। और मुसाफ़िर जुमे के दिन 1000 मर्तबा यह नाम पढ़े तो इंशाअल्लाह जल्द खैरियत से घर लौटेगा।Allah Ke 99 Naam (Asma-ul-Husna)

(74) अल् आखिरु (ٱلْآخِرُ)

मतलब: सबसे आख़िर।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला हमेशा बाकी रहने वाला है। जो शख्स इस नाम का विर्द करता है, उसके दिल से दुनिया की बेजा मुहब्बत कम होती है और आख़िरत की फ़िक्र पैदा होती है।

वज़ीफ़ा

जो शख्स रोज़ाना “या आखिरु” पढ़े, अल्लाह ने चाहा तो उसके दिल से अल्लाह के सिवा हर मुहब्बत दूर हो जाएगी और उसका ख़ातिमा बेहतर होगा।

(75) अज़्-ज़ाहिरु (ٱلظَّاهِرُ)

मतलब: ज़ाहिर और खुला हुआ।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला अपनी निशानियों और कुदरत के साथ ज़ाहिर है। जो शख्स इस नाम का विर्द करता है, अल्लाह तआला उसके दिल को नूर से रोशन फरमा देते हैं।

वज़ीफ़ा

जो शख्स इशा की नमाज़ के बाद 500 मर्तबा “या ज़ाहिरु” पढ़े, अल्लाह ने चाहा तो उसकी आँखों में रोशनी और दिल में नूर अता फरमाएंगे।

(76) अल् बातिनु (ٱلْبَاطِنُ)

मतलब: छुपा हुआ और हर चीज़ की हक़ीक़त को जानने वाला।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला हर ज़ाहिर और पोशीदा चीज़ को जानता है। जो शख्स इस मुबारक नाम का कसरत से ज़िक्र करता है, अल्लाह तआला उसके दिल में अपनी मुहब्बत और इबादत का ज़ौक़ पैदा फरमा देते हैं।

वज़ीफ़ा

जो शख्स रोज़ाना 33 मर्तबा “या बातिनु” पढ़े, अल्लाह ने चाहा तो उसके लिए पोशीदा राज़ खुलने लगेंगे और उसके दिल में नमाज़ और इबादत की मुहब्बत पैदा होगी। और जो दो रकअत नमाज़ के बाद “हुवल अव्वलु वल आखिरु वज़्ज़ाहिरु वल बातिनु वहुवा बि-कुल्लि शैइन अलीम” पढ़े, अल्लाह ने चाहा तो उसकी जायज़ हाजत पूरी होगी।

(77) अल् वालियु (ٱلْوَالِي)

मतलब: मालिक, निगरानी करने वाला और इंतिज़ाम चलाने वाला।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला पूरी कायनात का मालिक और इंतिज़ाम करने वाला है। जो शख्स इस नाम का विर्द करता है, अल्लाह तआला उसे अचानक आने वाली आफ़तों से महफ़ूज़ रखते हैं।

वज़ीफ़ा

जो शख्स ज़्यादा से ज़्यादा “या वालियु” पढ़े, वह इंशाअल्लाह अचानक आने वाली आफ़तों से महफ़ूज़ रहेगा। और जो किसी नए प्याले पर यह नाम लिखकर उसमें पानी भरकर घर में छिड़के, अल्लाह ने चाहा तो घर आफ़तों से महफ़ूज़ रहेगा।Allah Ke 99 Naam

(78) अल् मुतआलियु (ٱلْمُتَعَالِي)

मतलब: सबसे बुलंद और ऊँचा।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला हर ऐब और कमी से पाक, सबसे ऊँचा और बुलंद है। जो शख्स इस नाम का विर्द करता है, उसकी मुश्किलें आसान होती हैं।

वज़ीफ़ा

जो शख्स ज़्यादा से ज़्यादा “या मुतआलियु” पढ़े, अल्लाह ने चाहा तो उसकी तमाम परेशानियाँ दूर होंगी। माहवारी के दिनों में तकलीफ़ वाली औरत भी इसका विर्द करे तो इंशाअल्लाह आराम मिलेगा।Allah Ke 99 Naam (Asma-ul-Husna)

(79) अल् बर्रु (ٱلْبَرُّ)

मतलब: बहुत एहसान करने वाला और भलाई करने वाला।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत एहसान करने वाला है। जो शख्स इस नाम का विर्द करता है, उसे गुनाहों से बचने और नेकियाँ करने की तौफ़ीक़ मिलती है।Allah Ke 99 Naam

वज़ीफ़ा

जो शख्स शराब, ज़िना या दूसरी बुराइयों में मुब्तला हो, वह रोज़ाना 7 मर्तबा “या बर्रु” पढ़े। अल्लाह ने चाहा तो गुनाहों की तरफ़ झुकाव खत्म हो जाएगा। और नवजात बच्चे पर 7 मर्तबा पढ़कर दम कर दिया जाए तो इंशाअल्लाह वह बालिग़ होने तक आफ़तों से महफ़ूज़ रहेगा।

(80) अत् तव्वाबु (ٱلتَّوَّابُ)

मतलब: बहुत ज़्यादा तौबा क़ुबूल करने वाला।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला अपने बंदों की तौबा बार-बार क़ुबूल फ़रमाता है। जो शख्स इस नाम का विर्द करता है, उसे सच्ची तौबा की तौफ़ीक़ नसीब होती है।

वज़ीफ़ा

जो शख्स चाश्त की नमाज़ के बाद 360 मर्तबा “या तव्वाबु” पढ़े, इंशाअल्लाह उसे सच्ची तौबा नसीब होगी। और जो ज़्यादा से ज़्यादा इसका विर्द करेगा, अल्लाह तआला उसके काम आसान फ़रमा देंगे। अगर किसी ज़ालिम पर 10 मर्तबा पढ़कर दम करे, तो अल्लाह ने चाहा उससे छुटकारा मिलेगा।

(81) अल् मुन्तकिमु (ٱلْمُنْتَقِمُ)

मतलब: बदला लेने वाला।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला ही ज़ालिमों से इंसाफ़ के साथ बदला लेने वाला है। जो शख्स हक़ पर हो और सब्र करे, अल्लाह तआला उसके लिए बेहतर फ़ैसला फ़रमाते हैं।Allah Ke 99 Naam

वज़ीफ़ा

जो शख्स हक़ पर हो और दुश्मन से बदला लेने की ताक़त न रखता हो, वह तीन जुमे तक ज़्यादा से ज़्यादा “या मुन्तकिमु” पढ़े। अल्लाह तआला ने चाहा तो उसी की तरफ़ से इंसाफ़ फ़रमाएंगे।

(82) अल् अफुव्वु (ٱلْعَفُوُّ)

मतलब: बहुत ज़्यादा माफ़ करने वाला।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला अपने बंदों के गुनाह माफ़ करना पसंद फ़रमाता है। जो शख्स इस मुबारक नाम का विर्द करता है, उसके लिए मग़फ़िरत के दरवाज़े खुलते हैं।Allah Ke 99 Naam (Asma-ul-Husna)

वज़ीफ़ा

जो शख्स ज़्यादा से ज़्यादा “या अफुव्वु” पढ़ेगा, अल्लाह तआला इंशाअल्लाह उसके गुनाहों को माफ़ फ़रमा देंगे।

(83) अर्रऊफु (ٱلرَّءُوفُ)

मतलब: बहुत मेहरबान और नर्मी करने वाला।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला अपने बंदों पर बेहद मेहरबान है। जो शख्स इस नाम का विर्द करता है, उसके दिल में नर्मी और रहमत पैदा होती है।

वज़ीफ़ा

जो शख्स 10 मर्तबा दुरूद शरीफ़ और फिर 10 मर्तबा “या रऊफु” पढ़े, अल्लाह ने चाहा तो उसका ग़ुस्सा खत्म हो जाएगा। अगर किसी नाराज़ शख्स पर दम करे, तो उसका ग़ुस्सा भी कम हो जाएगा।Complete Fazilat, Powerful Wazifa Aur Matlab

(84) मालिकुल मुल्कि (مَالِكُ الْمُلْكِ)

मतलब: सारे जहानों और बादशाहत का मालिक।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला ही पूरी कायनात और हर बादशाहत का मालिक है। जो शख्स इस नाम का विर्द करता है, अल्लाह तआला उसे ग़िना और बेनियाज़ी अता फ़रमाते हैं।Allah Ke 99 Naam

वज़ीफ़ा

जो शख्स “या मालिकुल मुल्कि” का ज़्यादा से ज़्यादा विर्द करेगा, अल्लाह तआला उसे ग़नी कर देंगे और लोगों का मोहताज नहीं रहने देंगे, इंशाअल्लाह।

(85) ज़ुल जलालि वल इकराम (ذُو الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ)

मतलब: जलाल, अज़मत और इकराम वाला।

फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला ही सबसे बड़ी अज़मत और इकराम वाला है। जो शख्स इस मुबारक नाम का विर्द करता है, अल्लाह तआला उसे इज़्ज़त और बुलंदी अता फ़रमाते हैं।

वज़ीफ़ा

जो शख्स ज़्यादा से ज़्यादा “या ज़ुल जलालि वल इकराम” पढ़ेगा, अल्लाह तआला उसे इज़्ज़त, बुलंदी और मख़लूक से बेनियाज़ी अता फ़रमाएंगे, इंशाअल्लाह।

(86) अल मुक्सितु (ٱلْمُقْسِطُ)

मतलब: न्याय और इंसाफ़ करने वाला।

वज़ीफ़ा

जो शख्स रोज़ाना “या मुक्सितु” पढ़ा करे, अल्लाह ने चाहा तो वह शैतान के वसवसों से महफूज़ रहेगा। और अगर किसी जायज़ मकसद के लिए 700 मर्तबा पढ़े, तो अल्लाह ने चाहा वह मकसद पूरा होगा।Allah Ke 99 Naam

(87) अल जामिउ (ٱلْجَامِعُ)

मतलब: सबको इकट्ठा करने वाला।

वज़ीफ़ा

जिस शख्स के रिश्तेदार बिछड़ गए हों, वह चाश्त के समय आसमान की तरफ़ मुँह करके हर 10 मर्तबा “या जामिउ” पढ़े और एक-एक उंगली बंद करता जाए। आखिर में दोनों हाथ चेहरे पर फेर ले। अल्लाह ने चाहा तो बिछड़े हुए लोग मिल जाएंगे।

अगर कोई सामान गुम हो जाए तो यह दुआ पढ़े:

“अल्लाहुम्म या जामिउन्नासि लियौमिल्ला रैब फ़ीहि इज्मअ बयनी व बैन दाल्लती।”

अल्लाह ने चाहा तो गुमशुदा चीज़ मिल जाएगी।

(88) अल ग़निय्यु (ٱلْغَنِيُّ)

मतलब: सबसे बेनियाज़, किसी का मोहताज न होने वाला।

वज़ीफ़ा

जो शख्स रोज़ाना 70 मर्तबा “या ग़निय्यु” पढ़े, अल्लाह तआला उसके माल में बरकत अता फ़रमाएंगे और उसे लोगों का मोहताज नहीं रहने देंगे।

अगर कोई जाहिरी या बातिनी बीमारी हो, तो पूरे जिस्म पर “या ग़निय्यु” पढ़कर दम करे। अल्लाह ने चाहा तो शिफ़ा नसीब होगी।

(89) अल मुग़नी (ٱلْمُغْنِي)

मतलब: ग़नी और बेनियाज़ बना देने वाला।

वज़ीफ़ा

शुरू और आखिर में 11-11 मर्तबा दुरूद शरीफ़ पढ़कर बीच में 1100 मर्तबा “या मुग़नी” पढ़े।

फ़ज्र या इशा की नमाज़ के बाद यह अमल करे और साथ में सूरह मुज़्जम्मिल की तिलावत भी करे।

अल्लाह ने चाहा तो जाहिरी और बातिनी बेनियाज़ी और रिज़्क़ में बरकत नसीब होगी।

(90) अल मानिउ (ٱلْمَانِعُ)

मतलब: रोकने वाला, हिफाज़त करने वाला।

वज़ीफ़ा

अगर शौहर-बीवी में झगड़ा रहता हो, तो सोते समय 20 मर्तबा “या मानिउ” पढ़े। अल्लाह ने चाहा तो आपसी मोहब्बत पैदा होगी और झगड़े खत्म हो जाएंगे।

जो शख्स इस नाम को कसरत से पढ़ेगा, अल्लाह ने चाहा तो हर तरह की बुराइयों से महफूज़ रहेगा। अगर किसी जायज़ मकसद के लिए पढ़े तो इंशाअल्लाह वह मकसद पूरा होगा।Allah Ke 99 Naam

(91) अज़्ज़ार्रु (ٱلضَّارُّ)

मतलब: नुकसान पहुँचाने पर कुदरत रखने वाला।

वज़ीफ़ा

जो शख्स जुमा की रात 100 मर्तबा “या ज़ार्रु” पढ़े, इंशाअल्लाह वह तमाम ज़ाहिरी और बातिनी आफ़तों से महफूज़ रहेगा और अल्लाह की क़ुर्बत (नज़दीकी) हासिल होगी।

(92) अन्नाफिउ (ٱلنَّافِعُ)

मतलब: फायदा पहुँचाने वाला।

वज़ीफ़ा

जो शख्स किसी सवारी पर बैठते समय “या नाफिउ” पढ़े, इंशाअल्लाह हर आफ़त से महफूज़ रहेगा। किसी भी काम की शुरुआत में 41 मर्तबा पढ़ने से अल्लाह ने चाहा तो काम में कामयाबी मिलेगी। हमबिस्तरी के समय यह नाम पढ़े, तो इंशाअल्लाह नेक औलाद नसीब होगी।

(93) अन्नूरु (ٱلنُّورُ)

मतलब: नूर देने वाला।

वज़ीफ़ा

जो शख्स जुमा की रात 7 मर्तबा सूरह नूर और 1001 मर्तबा “या नूरु” पढ़े, इंशाअल्लाह उसका दिल नूर से रोशन हो जाएगा।

(94) अल हादियु (ٱلْهَادِي)

मतलब: सीधा रास्ता दिखाने वाला।

वज़ीफ़ा

जो शख्स हाथ उठाकर आसमान की तरफ़ मुँह करके ज़्यादा से ज़्यादा “या हादियु” पढ़े और आखिर में हाथ चेहरे पर फेर ले, अल्लाह ने चाहा तो उसे मुकम्मल हिदायत नसीब होगी और वह दीनदार लोगों में शामिल होगा।Allah Ke 99 Naam

(95) अल बदीउ (ٱلْبَدِيعُ)

मतलब: बेमिसाल पैदा करने वाला।

वज़ीफ़ा

जिसे कोई ग़म, मुसीबत या परेशानी हो, वह 1000 मर्तबा “या बदीउस्समावाति वल अर्ज़” पढ़े, इंशाअल्लाह आसानी नसीब होगी। जो वुज़ू करके यह नाम पढ़ते हुए सो जाए, उसे अपने मकसद से संबंधित राह दिखाई जा सकती है। जो शख्स इशा के बाद 1200 मर्तबा “या बदीअल अजाइबि बिल खैरि या बदीउ” 21 दिन तक पढ़े, अल्लाह ने चाहा तो उसका जायज़ मकसद पूरा होगा।

(96) अल बाक़ियु (ٱلْبَاقِي)

मतलब: हमेशा रहने वाला।

वज़ीफ़ा

जो शख्स जुमा की रात 1000 मर्तबा “या बाक़ियु” पढ़े, अल्लाह तआला उसे हर तरह के नुकसान से महफूज़ रखेंगे और उसके नेक आमाल क़ुबूल फ़रमाएंगे।

(97) अल वारिसु (ٱلْوَارِثُ)

मतलब: सबके बाद रहने वाला।

वज़ीफ़ा

जो शख्स सूरज निकलते समय 100 मर्तबा “या वारिसु” पढ़े, इंशाअल्लाह वह रंज, ग़म और मुसीबतों से महफूज़ रहेगा और उसकी आख़िरत बेहतर होगी। जो मग़रिब और इशा के बीच 1000 मर्तबा पढ़े, इंशाअल्लाह हर तरह की परेशानी दूर होगी।Allah Ke 99 Naam

(98) अर्रशीदु (ٱلرَّشِيدُ)

मतलब: सही राह दिखाने वाला।

वज़ीफ़ा

जिस शख्स को अपने किसी काम का सही तरीका समझ में न आता हो, वह मग़रिब और इशा के बीच 1000 मर्तबा “या रशीदु” पढ़े। इंशाअल्लाह उसे सपने में या दिल में सही रास्ता समझा दिया जाएगा। जो रोज़ाना इस नाम को पढ़ेगा, अल्लाह ने चाहा तो उसकी कठिनाइयाँ दूर होंगी और कारोबार में बरकत होगी।

(99) अस्सबूरु (ٱلصَّبُورُ)

मतलब: बहुत सब्र करने वाला।

वज़ीफ़ा

जो शख्स सूरज निकलने से पहले 100 मर्तबा “या सबूरु” पढ़े, इंशाअल्लाह उस दिन हर मुसीबत से महफूज़ रहेगा और दुश्मनों व हसद करने वालों की ज़बानें बंद रहेंगी। जो किसी बड़ी परेशानी में हो, वह 1020 मर्तबा “या सबूरु” पढ़े, इंशाअल्लाह उसे राहत मिलेगी और दिल को सुकून नसीब होगा।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1. अल्लाह के 99 नाम (अस्माउल हुस्ना) क्या हैं?

अल्लाह तआला के 99 खूबसूरत नामों को अस्माउल हुस्ना कहा जाता है। हर नाम अल्लाह की किसी न किसी सिफ़त (गुण) को बयान करता है, जैसे रहमत, रिज़्क, माफ़ी, हिकमत, ताक़त और रहनुमाई।

Q2. क्या अल्लाह के 99 नाम पढ़ने की फ़ज़ीलत हदीस से साबित है?

जी हाँ। सहीह बुखारी और सहीह मुस्लिम की हदीस में आता है कि अल्लाह के 99 नाम हैं, जो उन्हें याद करेगा (अह्सा करेगा) वह जन्नत में दाखिल होगा। “अह्सा” का मतलब केवल याद करना नहीं बल्कि उन्हें समझना, उन पर ईमान लाना और उनके मुताबिक अमल करना भी है।

Q3. क्या हर नाम का अलग-अलग वज़ीफ़ा है?

कई उलमा और बुजुर्गों ने तजुर्बे की बुनियाद पर अलग-अलग वज़ाइफ़ बयान किए हैं। लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि हर वज़ीफ़े की फ़ज़ीलत सही हदीस से साबित हो, यह ज़रूरी नहीं। इसलिए इन वज़ाइफ़ को दुआ और नेक अमल की नीयत से पढ़ें, इन्हें शरई हुक्म न समझें।

Q4. क्या किसी भी समय अल्लाह के नाम पढ़ सकते हैं?

जी हाँ। अल्लाह का ज़िक्र हर समय करना जायज़ और सवाब का काम है। अलबत्ता अगर किसी खास समय या गिनती का दावा किया जाए तो उसके लिए सही दलील होना ज़रूरी है।

Q5. क्या अस्माउल हुस्ना याद करना ज़रूरी है?

हर मुसलमान के लिए अल्लाह की पहचान और उसके नामों का इल्म हासिल करना बहुत फ़ायदेमंद है। 99 नाम याद करना बड़ी फ़ज़ीलत की बात है, लेकिन अगर कोई पूरे याद न कर सके तो जितने याद हों उन्हें पढ़े और समझे।

Q6. क्या सिर्फ़ नाम पढ़ने से दुआ कबूल हो जाती है?

दुआ की कबूलियत अल्लाह तआला के हाथ में है। अल्लाह के नामों के साथ दुआ करना कुरआन से साबित है, लेकिन साथ में हलाल रोज़ी, सच्ची नीयत, गुनाहों से तौबा और सब्र भी ज़रूरी हैं।

Q7. क्या महिलाएँ भी अस्माउल हुस्ना पढ़ सकती हैं?

जी हाँ। महिलाएँ भी हर समय अल्लाह का ज़िक्र कर सकती हैं और अस्माउल हुस्ना पढ़ सकती हैं।

Q8. अस्माउल हुस्ना याद करने का सबसे आसान तरीका क्या है?

रोज़ 2–3 नाम उनका मतलब और फ़ज़ीलत के साथ याद करें। कुछ ही हफ़्तों में पूरे 99 नाम आसानी से याद हो जाएंगे।

Conclusion

अल्लाह तआला के 99 खूबसूरत नाम (अस्माउल हुस्ना) मोमिन के ईमान, यक़ीन और अल्लाह से मोहब्बत को मज़बूत करते हैं। इन नामों को समझना, याद करना, पढ़ना और अपनी दुआओं में शामिल करना बहुत बड़ी नेमत है। अल्लाह तआला हमें अपने प्यारे नामों के साथ उसे पुकारने, उन पर अमल करने और उनकी बरकत हासिल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *