28/07/2026
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सैय्यदज़ादी की मदद करने वाले को क्या मिला? | पारसी का ईमान लाने वाला हैरान कर देने वाला वाक़िआ|Saiyyadzadi Ki Madad Karne Wale Ko Kya Mila? | Parsi Ke Imaan Lane Wala Hairan Kar Dene Wala Waqia

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Saiyyadzadi Ki Madad Karne Wale Ko Kya Mila?
Saiyyadzadi Ki Madad Karne Wale Ko Kya Mila?

Saiyyadzadi Ki Madad Karne Wale Ko Kya Mila?

क्या आपने कभी सोचा है कि अल्लाह के नबी ﷺ की औलाद (सैय्यद) की मदद करने का क्या अज्र और इनाम हो सकता है? क्या एक गैर-मुस्लिम की नेकदिली उसकी हिदायत का ज़रिया बन सकती है?

इस आर्टिकल में हम एक बेहद दिल को छू लेने वाला इस्लामी वाक़िआ पढ़ेंगे, जिसमें एक ग़रीब और बेवा सैय्यदज़ादी, एक दौलतमंद मुसलमान और एक पारसी शख्स का ज़िक्र है। यह वाक़िआ हमें इंसानियत, रहमदिली, मेहमाननवाज़ी और अहले-बैत से मोहब्बत की अहमियत सिखाता है। साथ ही यह भी बताता है कि नेक अमल कभी ज़ाया नहीं जाता और अल्लाह तआला जिसे चाहे हिदायत और बड़ी नेमत अता फ़रमा देता है।

आइए, इस ईमान अफ़रोज़ और नसीहतों से भरपूर वाक़िआ को पढ़ते हैं और इससे अपनी ज़िंदगी के लिए अहम सबक हासिल करते हैं।

हेरात में एक सैय्यद फैमली रहती थी उनके शौहर का इंतेक़ाल हो गया तो वो बेवा सैय्यदज़ादी ग़रीबी और फाकों से मजबूर हो कर समरकंद की तरफ चल पड़ीं वो बेवा खातुन समरकंद पहुंची तो उनके साथ में उनकी बच्चियां थी कोई बेटा न था,

खातून ने लोगों से पूछा तो पता चला के समरकंद में दो लोग बहुत रईस हैं पहला रईस मुसलमान था और दुसरा रईस एक पारसी था खातून ने सोंचा के पहले मुसलमान के पास चलती हुं, जब वो रईस मुसलमान के पास पहुंची तो खातुन ने अपनी परेशानी उन्हें बताई, और कहा के मैं सैय्यदज़ादी हुं मेरे शौहर का इंतेक़ाल हो चुका है मैं बहुत मजबुर हो कर आपके पास आई हुं।

रईस मुसलमान शख़्स कहने लगा कोई शिजरा है तो दिखाओ या कोई सबुत दो के तुम सैय्यदज़ादी हो, वो खातुन कहने लगी मैं बहुत मुसीबत में आपके पास बड़ी उम्मीद ले कर आई हु, इस मुसीबत के घड़ी में अपने साथ शिजरा ले कर कहां फिरती रहूं मैं,

मगर उस रईस मुसलमान के दिल पर कोई असर न हुआ और उसने अपना दरवाज़ा बंद कर लिया बेवा खातुन ने मजबूरन रईस पारसी की तरफ जाने का इरादा किया की शायद वहां से कोई मदद मिल जाए, खातुन सैय्यदज़ादी ने उस पारसी के दरवाज़े पर पहुंच कर अपनी मजबुरी बयान करने लगी,

खातून ने कहा मैं मुसलमानों के रसुल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की औलाद में से हुं मेरे शौहर का इंतेक़ाल हो चुका है अब मुझे यहां रहने के लिये कोई ठिकाना चाहिये। पारसी ने ये सुना तो फौरन रहने के लिये एक घर दे दिया और अपनी बीवी से बोला चलो इनकी बेटियों को सराय से ले कर आतें हैं, मुसलमान रईस जब रात को सोया तो ख़्वाब में देखा के वो जन्नत में एक महल के दरवाज़े पर खड़ा है और सामने हुजुर अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम खड़े हैं।

मुसलमान रईस पूछता है या अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ये महल किसका है..?, हुजुर अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया ये एक ईमान वाले के लिये है या अल्लाह के रसुल में भी एक ईमान वाला हुं ये महल आप मुझे इनायत किजिये, हुजुर अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया अगर तु ईमान वाला है तो गवाह पेश कर,

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कोई सबुत पेश कर की तु ईमान वाला है, मेरी बेटी तेरे दरवाज़े पर गई थी तो तुने सय्यदज़ादी होने का सबुत मांगा था न अब तेरे पास ईमान वाला होने का कोई सबुत है तो पेश कर उसकी आंख खुली तो बहुत परीशान हुआ नौकरों से पुछा के वो खातुन सैय्यदज़ादी किधर गई, तो नौकरों ने बताया के वो पारसी के पास गई है

उस रईस मुसलमान ने सरदियों में न जुते पहने न कपड़े बस दौड लगा दी और पारसी के दरवाज़े पर पहुंच कर दरवाज़ा खटखटाने लगा, पारसी बाहर निकला तो मुसलमान ने कहा मेरी मेहमान वापिस करो परसी कहने लगा हुजुर वो तो अब मेरी मेहमान है,

तो रईस कहने लगा मेरा सारा सरमाया ले लो मेरी सारी दौलत ले लो बस मेरा मेहमान मुझे वापस करदो पारसी ने रोते हुए कहा हुजुर बिना देखे सौदा किया था अब जब देख चुका हूं तो हरगिज़ वापस नही कर सकता, जिस ख़्वाब में तुझको धक्के मिले हैं उसी ख़्वाब को मैंने भी देखा है अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने तुझको दूर किया और मेरी तरफ देख कर बोले तुने मेरी बेटी को ठिकाना दिया है तुझे और तेरी नस्ल को जन्नत मुबारक हो, पारसी कहने लगा मैं तो कलमा पढ कर ईमान ला चुका हूं और अलहमदोलिल्लाह अब मैं मुसलमान हूं,

हुजुर अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया है की जिसने मेरी औलाद पर एहसान किया, और मेरी औलाद ग़रीबी की वजह से उस एहसान का बदला न चुका सकी तो क़यामत के रोज़ मै उसके एहसान का बदला चुकाउंगा।

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FAQ – सवाल और जवाब

1. इस वाक़िए से हमें क्या सबक मिलता है?
यह वाक़िआ हमें सिखाता है कि मुसीबत में पड़े लोगों की मदद करना, मेहमाननवाज़ी करना और अहले-बैत से मोहब्बत रखना बहुत बड़ी नेकी है।Saiyyadzadi Ki Madad Karne Wale Ko Kya Mila?

2. सैय्यद किसे कहा जाता है?
सैय्यद उन लोगों को कहा जाता है जो हज़रत मुहम्मद ﷺ की औलाद में से हों, हज़रत फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा और हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु की नस्ल से हों।Saiyyadzadi Ki Madad Karne Wale Ko Kya Mila?

3. क्या मुसीबतज़दा इंसान की मदद करना इस्लाम में सवाब का काम है?
जी हाँ। इस्लाम में गरीब, यतीम, मुसाफ़िर, बेवा और ज़रूरतमंद की मदद करना बहुत बड़ा सवाब और नेक अमल माना गया है।Saiyyadzadi Ki Madad Karne Wale Ko Kya Mila?

4. क्या सिर्फ़ मुसलमानों के साथ ही अच्छा बर्ताव करना चाहिए?
इस्लाम इंसाफ़, रहमत और अच्छे अख़लाक़ की तालीम देता है। हर इंसान के साथ भलाई और इंसानियत का व्यवहार करना चाहिए, जैसा शरीअत ने सिखाया है।Saiyyadzadi Ki Madad Karne Wale Ko Kya Mila?

5. क्या ख़्वाब हमेशा शरई दलील होते हैं?
नहीं। ख़्वाब किसी हुक्म या अक़ीदे की बुनियाद नहीं होते। उन्हें क़ुरआन और सही हदीस के मुक़ाबले में दलील नहीं बनाया जाता, लेकिन नेक लोगों के सच्चे ख़्वाब नसीहत और इबरत का ज़रिया हो सकते हैं।Saiyyadzadi Ki Madad Karne Wale Ko Kya Mila?

6. अहले-बैत से मोहब्बत का क्या महत्व है?
अहले-बैत से मोहब्बत रखना हर मुसलमान के लिए फ़ज़ीलत की बात है। उनके साथ अदब, एहतराम और मोहब्बत का व्यवहार करना चाहिए।Saiyyadzadi Ki Madad Karne Wale Ko Kya Mila?

7. इस वाक़िए से सबसे बड़ा पैग़ाम क्या मिलता है?
सबसे बड़ा पैग़ाम यह है कि अल्लाह तआला नेक नीयत, रहमदिली और इंसानों की मदद को बहुत पसंद फ़रमाता है, और नेक अमल का बदला कभी ज़ाया नहीं करता।

8. इस वाक़िए को पढ़ने के बाद हमें क्या करना चाहिए?
हमें ज़रूरतमंदों की मदद करनी चाहिए, अहले-बैत का एहतराम करना चाहिए, अच्छे अख़लाक़ अपनाने चाहिए और हर काम सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए करने की कोशिश करनी चाहिए।Saiyyadzadi Ki Madad Karne Wale Ko Kya Mila?

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Saiyyadzadi Ki Madad Karne Wale Ko Kya Mila?

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

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