Tahajjud Ki Namaz Padhne Ki Fazilat
तहज्जुद की नमाज़ रात की उन मुबारक इबादतों में से है, जिसमें बंदा अपनी नींद और आराम छोड़कर अपने रब की बारगाह में हाज़िर होता है। जब दुनिया सो रही होती है, उस वक़्त उठकर अल्लाह तआला के सामने सज्दा करना और उससे दुआ माँगना यक़ीनन बहुत बड़ी सआदत है।
हम दिनभर दुनियावी कामों में मसरूफ़ रहते हैं, लेकिन रात का यह वक़्त हमें अपने रब से तन्हाई में बात करने और अपने दिल की कैफ़ियत उसके सामने रखने का मौक़ा देता है। परेशानियाँ हों, कोई हाजत हो या मग़फिरत की तलब—तहज्जुद के वक़्त दुआ और इबादत का अपना ही सुकून है।
इस लेख में हम जानेंगे कि तहज्जुद की नमाज़ क्या है, इसका वक़्त कब शुरू होता है, कितनी रकअत पढ़ी जाती हैं और इस मुबारक इबादत की क्या फ़ज़ीलत बयान की गई है।
हमें मालूम होना चाहिए कि फ़र्ज़ नमाज़ों के बाद सुन्नत और नफ़िल नमाज़ों के पढ़ने का भी बहुत बड़ा सवाब है। जैसे तहज्जुद, इशराक़ चाश्त, सलात उल तस्बीह वग़ैरा पिछली रात को सुबह होने से पहले नमाज़ पढ़ने को तहज्जुद की नमाज़ कहते हैं।
यह नमाज़ अल्लाह तआला को बहुत प्यारी हैं। हमारे रसूल हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम पर फ़र्ज़ थी और आपकी उम्मत के लोगों पर सुन्नत है। जो मर्द या औरत इस नमाज को पढ़ेगा, दुनिया में किसी का मोहताज न होगा। क़ब्र के अज़ाब से बचेगा। क़ब्र में रोशनी होगी।
यह नमाज़ क़ब्र का चाँद है और क़यामत के दिन तहज्जुद की नमाज़ पढ़ने वाला सत्तर आदमियों को बख्शवायेगा और जब क़ब्र से उठेगा तो उसका चेहरा नूर की रोशनी से चमकता होगा। नबियों ने और वलियों ने और नेकबन्दों ने इस नमाज़ को हमेशा पढ़ा है।
इस नमाज़ का इतना बड़ा सवाब इसलिए है कि आराम और नींद छोड़कर पढ़ी जाती है जो बड़ी हिम्मत का काम है। बस जैसी मेहनत वैसी उजरत ।
सरवर-ए-दो आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फ़रमाते है कि जब कोई मर्द या औरत तहज्जुद की नमाज़ पढ़ने को उठता है, तो अल्लाह तआला फ़रमाता है, ऐ फ़रिश्तो ! देखो मेरे बन्दे की तरफ़ कैसी मीठी नींद छोड़कर मेरी इबादत के लिए उठा है।
तुम गवाह रहो कि हमने इसको बख्श दिया और हम इससे हिसाब नहीं लेंगे और जन्नत में इसको नबियों के साथ रखेंगे और दोज़ख़ इस पर हराम है।
और इरशाद फ़रमाया हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने कि- जब आधी रात हो जाती है और एक हिस्सा बाक़ी रहती है तो अल्लाह तआला बड़ी रहमतों और बरकतों वाला उतरता है पहले आसमान तक, फिर फ़रमाता है कि है कोई बन्दा माँगने वाला जो वह माँगे उसको दिया जाये।
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कोई है दुआ करने वाला कि उसकी दुआ क़बूल की जाये। कोई है गुनाह बख्शवाने वाला कि उसके गुनाह बख्श दिये जायें। इसी तरह हमेशा सुबह तक ऐलान फ़रमाता है। ( मुस्लिम शरीफ़)
फ़ायदा- अल्लाह तआला जिस्म से पाक है। उतरना चढ़ना उसकी शान-ए-अज़ीम के खिलाफ है। मतलब यह है कि आधी रात के जाने के बाद सुबह तक अल्लाह- तआला की ख़ास रहमतें तहज्जुद की नमाज़ पढ़ने वाले बन्दों पर बरसती हैं। अब मालूम हो गया होगा कि तहज्जुद का वक़्त बहुत ही आलीशान और बड़ी बरकतों वाला है।
फ़ायदा- ऐ इन्सान ! कितनी बड़ी नेमत अल्लाह तआला की हर एक रात में है और तू इससे ग़ाफ़िल है। उठ और हिम्मत कर और इस नमाज़ की बरकतें हासिल कर दुनिया में भी इस नमाज़ के पढ़ने वाले का चेहरा नूरानी हो जाता है ।
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क़ैलूला- तहज्जुद की नमाज़ पढ़ने वाला अगर दोपहर में ज़रा आराम कर ले और सो जाया करे तो इसको कैलूला कहते हैं। इसमें सुन्नत के सवाब के अलावा यह भी फ़ायदा है कि दिमाग़ में और अक्ल में ताक़त पैदा होती है।
रात को नमाज़ के लिए उठने में सहूलियत होती है। इस नमाज़ की कम से कम दो रकअत या चार रकअत या ज्यादा से ज़्यादा बारह रकअत है। जितनी ताक़त और फ़ुर्सत हो, उतनी पढ़ें।
तहज्जुद की नमाज़ – FAQ
सवाल 1: तहज्जुद की नमाज़ क्या है?
जवाब: तहज्जुद रात में सोने के बाद उठकर पढ़ी जाने वाली नफ़िल नमाज़ है। यह अल्लाह तआला की क़ुर्बत हासिल करने वाली बहुत मुबारक इबादत है।Tahajjud Ki Namaz Padhne Ki Fazilat
सवाल 2: तहज्जुद की नमाज़ का वक़्त कब होता है?
जवाब: इसका वक़्त इशा की नमाज़ के बाद से फ़ज्र का वक़्त शुरू होने तक रहता है। रात का आख़िरी हिस्सा तहज्जुद के लिए बहुत अफ़ज़ल माना जाता है।Tahajjud Ki Namaz Padhne Ki Fazilat
सवाल 3: तहज्जुद की कम से कम कितनी रकअत हैं?
जवाब: आम तौर पर कम से कम 2 रकअत पढ़ी जाती हैं। अपनी ताक़त और फ़ुर्सत के मुताबिक़ ज़्यादा भी पढ़ सकते हैं।Tahajjud Ki Namaz Padhne Ki Fazilat
सवाल 4: क्या तहज्जुद पढ़ने के लिए सोना ज़रूरी है?
जवाब: तहज्जुद का बेहतर और मशहूर तरीका यह है कि इशा के बाद कुछ देर सोकर रात में उठकर नमाज़ पढ़ी जाए।Tahajjud Ki Namaz Padhne Ki Fazilat
सवाल 5: क्या औरतें भी तहज्जुद की नमाज़ पढ़ सकती हैं?
जवाब: जी हाँ, तहज्जुद की नमाज़ मर्द और औरत दोनों के लिए नफ़िल इबादत है।Tahajjud Ki Namaz Padhne Ki Fazilat
सवाल 6: तहज्जुद में कौन-सी सूरह पढ़ें?
जवाब: तहज्जुद में क़ुरआन शरीफ़ की जो सूरह याद हो, वह पढ़ सकते हैं। कोई खास सूरह पढ़ना ज़रूरी नहीं।Tahajjud Ki Namaz Padhne Ki Fazilat
सवाल 7: क्या तहज्जुद के बाद दुआ माँग सकते हैं?
जवाब: जी हाँ। तहज्जुद के बाद अल्लाह तआला से अपनी हाजत, मग़फिरत, परेशानी और दुनियावी व आख़िरत की भलाई के लिए दुआ करना बहुत अच्छा अमल है।Tahajjud Ki Namaz Padhne Ki Fazilat
सवाल 8: अगर तहज्जुद के लिए आँख न खुले तो क्या गुनाह होगा?
जवाब: नहीं, क्योंकि तहज्जुद फ़र्ज़ नहीं बल्कि नफ़िल नमाज़ है। लेकिन अगर कोई इसे पढ़ने की नियत और कोशिश करे तो यह नेक नियत है।Tahajjud Ki Namaz Padhne Ki Fazilat
सवाल 9: क्या तहज्जुद के लिए अलार्म लगाना सही है?
जवाब: जी हाँ, तहज्जुद के लिए अलार्म लगाकर उठना बिल्कुल अच्छा तरीका है। इससे रात की इबादत के लिए जागने में मदद मिलती है।Tahajjud Ki Namaz Padhne Ki Fazilat
सवाल 10: तहज्जुद की सबसे बड़ी ख़ूबी क्या है?
जवाब: इसकी ख़ास खूबी यह है कि इंसान रात के सुकून और आराम को छोड़कर अपने रब की इबादत के लिए उठता है। यह बंदे के अंदर इख़लास, आजिज़ी और अल्लाह से क़ुर्बत की कैफ़ियत पैदा करती है।Tahajjud Ki Namaz Padhne Ki Fazilat
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Tahajjud Ki Namaz Padhne Ki Fazilat
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Tahajjud Ki Namaz Padhne Ki Fazilat
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Tahajjud Ki Namaz Padhne Ki Fazilat
खुदा हाफिज़…..
