Huzoor Tak Hamara Salam Kaise Pahunchta Hai?
क्या वाकई हमारी तरफ़ से पढ़ा गया दुरूद व सलाम हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ तक पहुँचता है? क्या हुज़ूर ﷺ अपनी उम्मत के आमाल से वाक़िफ़ किए जाते हैं? और क्या फ़रिश्ते हमारी तरफ़ से भेजा गया सलाम बारगाह-ए-रसालत ﷺ तक पहुँचाते हैं? ये ऐसे अहम सवाल हैं जिनके जवाब क़ुरआन, हदीस और अहल-ए-सुन्नत वल-जमाअत के अक़ीदे की रौशनी में समझना हर मुसलमान के लिए ज़रूरी है।
इस आर्टिकल में हम सही अहादीस की रौशनी में जानेंगे कि हुज़ूर ﷺ पर उम्मत के आमाल कैसे पेश किए जाते हैं, दुरूद व सलाम किस तरह बारगाह-ए-रसालत ﷺ तक पहुँचता है, बरज़खी ज़िन्दगी की हक़ीक़त क्या है, और अहल-ए-सुन्नत का इस बारे में सही अक़ीदा क्या है। साथ ही उन गलतफ़हमियों का भी जवाब मिलेगा जो इस मौज़ूअ पर अक्सर फैलाई जाती हैं।
अगर आप दुरूद व सलाम की फ़ज़ीलत, हुज़ूर ﷺ से उम्मत के तअल्लुक़ और अहल-ए-सुन्नत का सही अक़ीदा आसान ज़बान में समझना चाहते हैं, तो इस पूरे आर्टिकल को आखिर तक ज़रूर पढ़ें। इंशाअल्लाह, यह इल्म आपके ईमान और इश्क़-ए-रसूल ﷺ में इज़ाफ़ा करने का ज़रिया बनेगा।
हुज़ूर ﷺ पर उम्मत के आमाल पेश होते हैं और फ़रिश्ते हमारा सलाम पहुँचाते हैं
हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूले अकरम ﷺ ने इरशाद फ़रमाया: मेरी ज़ाहिरी ज़िन्दगी भी तुम्हारे लिए बेहतर है और मेरी विसाल (वफ़ात) के बाद की ज़िन्दगी भी तुम्हारे लिए बेहतर है। तुम्हारे आमाल मुझ पर पेश किए जाते हैं। जब मैं तुम्हारे नेक आमाल देखता हूँ तो अल्लाह तआला का शुक्र अदा करता हूँ, और जब तुम्हारे बुरे आमाल देखता हूँ तो तुम्हारे लिए अल्लाह तआला से मग़फ़िरत की दुआ करता हूँ।”
इस मुबारक हदीस से मालूम हुआ कि अल्लाह तआला अपने हबीब ﷺ को उम्मत के आमाल पर मुत्तला फ़रमाता है और आप ﷺ अपनी उम्मत के लिए रहमत व शफ़क़त फ़रमाते हुए दुआ-ए-मग़फ़िरत करते हैं।
रौज़ा-ए-अक़दस के क़रीब पढ़ा गया सलाम
हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ ने इरशाद फ़रमाया: जो शख़्स मेरी क़ब्र-ए-अनवर के पास मुझ पर दुरूद व सलाम पढ़ता है, मैं उसे सुनता हूँ। और जो दूर से दुरूद व सलाम भेजता है, उसका सलाम मुझे पहुँचा दिया जाता है।”
फ़रिश्ते उम्मत का सलाम पहुँचाते हैं
हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया: बेशक अल्लाह तआला के कुछ फ़रिश्ते ज़मीन में घूमते रहते हैं और मेरी उम्मत का सलाम मुझे पहुँचाते हैं।”
दुनिया का दस्तूर है कि जो लोग पास हों, वह एक-दूसरे को सीधे सलाम करते हैं और जो दूर हों, वह किसी ज़रिये से अपना पैग़ाम पहुँचाते हैं। अल्लाह तआला ने अपनी ख़ास रहमत से अपनी उम्मत के लिए यह शरफ़ अता फ़रमाया कि जो मुसलमान जहाँ कहीं से भी अपने नबी ﷺ पर दुरूद व सलाम भेजते हैं, अल्लाह तआला के मुक़र्रर फ़रिश्ते उसे बारगाह-ए रिसालत ﷺ तक पहुँचा देते हैं।
ये भी पढ़ें: जब गुनाह के दरवाज़े से लौटा एक आबिद |
अहल-ए-सुन्नत का अक़ीदा
इन अहादीस से यह बात वाज़ेह होती है कि हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ अपनी बरज़खी ज़िन्दगी में भी अपनी उम्मत से तअल्लुक़ रखते हैं। अल्लाह तआला जिस क़द्र चाहे, अपने हबीब ﷺ को उम्मत के अहवाल और दुरूद व सलाम से मुत्तला फ़रमाता है।
साथ ही अहल-ए-सुन्नत वल-जमाअत का यह भी अक़ीदा है कि हुज़ूर ﷺ हर जगह ज़ाती तौर पर हाज़िर व नाज़िर नहीं हैं और न ही अल्लाह तआला की तरह ज़ाती इल्म और समाअ रखते हैं। बल्कि अल्लाह तआला जितना चाहे, अपने हबीब ﷺ को इल्म, समाअ और इत्तिला अता फ़रमाता है। यह सब अल्लाह की अता और इनायत से है, ज़ाती तौर पर नहीं।
इसी तरह औलिया-ए-किराम रहिमहुमुल्लाह के बारे में भी यही अक़ीदा है कि उन्हें जो भी इल्म, करामत या इत्तिला हासिल होती है, वह अल्लाह तआला की अता से होती है, उनकी अपनी ज़ाती क़ुदरत नहीं होती।
नसीहत
आइए! हम भी कसरत से अपने प्यारे आका हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ पर दुरूद व सलाम पढ़ें, क्योंकि यह दुनिया व आख़िरत की बेहतरीन नेमतों में से एक है।
अल्लाह तआला हमें सही अक़ीदे पर क़ायम रखे, अपने हबीब ﷺ की सच्ची मोहब्बत और सुन्नत पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
FAQ – सवाल और जवाब
1. क्या हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ पर उम्मत के आमाल पेश किए जाते हैं?
जी हाँ। अहादीस में बयान हुआ है कि अल्लाह तआला के हुक्म से हुज़ूर ﷺ पर उम्मत के आमाल पेश किए जाते हैं। नेक आमाल देखकर आप ﷺ अल्लाह की हम्द फ़रमाते हैं और बुरे आमाल पर उम्मत के लिए मग़फ़िरत की दुआ करते हैं।Huzoor Tak Hamara Salam Kaise Pahunchta Hai?
2. क्या हमारा पढ़ा हुआ दुरूद व सलाम हुज़ूर ﷺ तक पहुँचता है?
जी हाँ। जो शख़्स दूर से दुरूद व सलाम भेजता है, अल्लाह तआला के मुक़र्रर फ़रिश्ते उसे बारगाह-ए-रसालत ﷺ तक पहुँचाते हैं।Huzoor Tak Hamara Salam Kaise Pahunchta Hai?
3. क्या रौज़ा-ए-अक़दस के पास पढ़ा गया सलाम हुज़ूर ﷺ खुद सुनते हैं?
अहल-ए-सुन्नत के उलमा ने अहादीस की रौशनी में बयान किया है कि रौज़ा-ए-अक़दस के पास पढ़ा गया सलाम हुज़ूर ﷺ तक पहुँचता है और आप ﷺ उसे सुनते हैं।Huzoor Tak Hamara Salam Kaise Pahunchta Hai?
4. क्या हुज़ूर ﷺ हर जगह हाज़िर व नाज़िर हैं?
अहल-ए-सुन्नत वल-जमाअत का अक़ीदा यह है कि हुज़ूर ﷺ हर जगह ज़ाती तौर पर मौजूद नहीं हैं। अल्लाह तआला जितना चाहे, अपने हबीब ﷺ को इल्म, समाअ और इत्तिला अता फ़रमाता है।Huzoor Tak Hamara Salam Kaise Pahunchta Hai?
5. क्या हुज़ूर ﷺ ग़ैब का ज़ाती इल्म रखते हैं?
नहीं। ग़ैब का ज़ाती इल्म सिर्फ़ अल्लाह तआला के लिए ख़ास है। हुज़ूर ﷺ को जो इल्म हासिल है, वह अल्लाह तआला की अता और इनायत से है।Huzoor Tak Hamara Salam Kaise Pahunchta Hai?
6. दुरूद शरीफ़ पढ़ने की क्या फ़ज़ीलत है?
दुरूद शरीफ़ पढ़ने से अल्लाह तआला की रहमत नाज़िल होती है, गुनाह माफ़ होते हैं, दर्जे बुलंद होते हैं और क़ियामत के दिन हुज़ूर ﷺ की शफ़ाअत नसीब होने की उम्मीद होती है।Huzoor Tak Hamara Salam Kaise Pahunchta Hai?
7. क्या फ़रिश्ते हर मुसलमान का सलाम हुज़ूर ﷺ तक पहुँचाते हैं?
जी हाँ। सही अहादीस के मुताबिक़ अल्लाह तआला ने ऐसे फ़रिश्ते मुक़र्रर फ़रमाए हैं जो उम्मत का दुरूद व सलाम बारगाह-ए-रसालत ﷺ तक पहुँचाते हैं।Huzoor Tak Hamara Salam Kaise Pahunchta Hai?
8. इस बयान से हमें क्या सबक मिलता है?
हमें चाहिए कि हम कसरत से दुरूद व सलाम पढ़ें, अपने आमाल की इस्लाह करें, गुनाहों से बचें और हर हाल में सुन्नत-ए-रसूल ﷺ पर अमल करने की कोशिश करें, क्योंकि यही दुनिया और आख़िरत की कामयाबी का रास्ता है।Huzoor Tak Hamara Salam Kaise Pahunchta Hai?
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Huzoor Tak Hamara Salam Kaise Pahunchta Hai?
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Huzoor Tak Hamara Salam Kaise Pahunchta Hai?
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Huzoor Tak Hamara Salam Kaise Pahunchta Hai?
जज़ाकल्लाह खैर….
