13/07/2026
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जब गुनाह के दरवाज़े से लौटा एक आबिद | Jab Gunah ke darvaje se lauta ek aabid.

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Jab Gunah ke darvaje se lauta ek aabid.
Jab Gunah ke darvaje se lauta ek aabid.

ज़ानिया औरत तौबा करके वलियों की माँ बनी

फ़क़ीह अबुल्लैस समरकंदी रहमतुल्लाह अलैह अपने वालिद से रिवायत करते हैं कि बनी इस्राईल में एक फ़ाहिशा औरत थी। लोग उसके हुस्न व ज़माल पर लट्टू हो जाते थे। उसका दरवाज़ा हर वक़्त खुला रहता था।

हाल यह था कि जो शख़्स एक नज़र देख लेता उससे मुलाक़ात के लिए बेताब हो जाता। वह और दस दीनार वसूल करतीं फिर अपने पास आने देती।

एक दिन एक नवजवान आबिद का उधर गुज़र हुआ। उसने परी चेहरा औरत को तख्त पर बैठे हुए देखो तो आशिक़ हो गया। दिल क़ाबू में न रहा। हज़ार जतन के बाद उस औरत का ख्याल दिल से निकल जाए मगर कामयाबी न हुई। दिन-रात और सुबह व शाम उसी औरत का ख्याल उसके दिल में छाया रहता।

मजबूर होकर उसने अपना माल व असबाब बेचा और दस दीनार इकट्ठे किए। फिर औरत के वकील के ज़रिए उस तक पहुँच गया। औरत ज़ेब व ज़ीनत किए हुए पलंग पर बैठी थी। वह आबिद भी उस के साथ पलंग पर बैठ गया। और हाथ बढ़ाकर बोस व किनार करने लगा।

अल्लाह तआला ने उसकी हिफ़ाज़त फ़रमाई। पिछली इबादतों की बरकतें ज़ाहिर हुईं तो उसके दिल में ख्याल आया कि मेरा परवरदिगार मुझे इस हालत में देख रहा है। ऐसा न हो कि इस हराम अमल से मेरी की हुई सब इबादतें जाए हो जाएँ। अल्लाह तआला का ऐसा खौफ़ दिल पर तारी हुआ कि उसने कांपना शुरू कर दिया। चेहरे का रंग फ़क़ हो गया।

औरत ने पूछा तुझे क्या हुआ? आबिद ने कहा मुझे अपने परवरदिगार से शर्म आ रही है, मैं वापस जाना चाहता हूँ। औरत कहने लगी कि लोग तो इस मौक़े के लिए मुद्दतों तड़पते हैं, तुझे हासिल है, अपनी मुराद पूरी कर ले। आबिद कहने लगा, मैंने जो तुझे माल दिया था वह तेरे लिए हलाल है, बस मुझे जाने दे।

औरत कहने लगी कि लगता है तूने यह काम पहले कभी नहीं किया। आबिद कहने लगा हाँ कभी नहीं किया। औरत ने उस आबिद का नाम पता पूछा तो उस आबिद ने सब कुछ बता दिया। जब वहाँ से निकला तो ज़ार व क़तार रोने लगा कि मैं अल्लाह के दर को छोड़कर एक जानिया के दर पर आ पहुँचा।

इधर जानिया औरत के दिल में भी आबिद की बरकत से खौफे ख़ुदा तारी हुआ। अपने जी में कहने लगी कि इस शख़्स का पहला गुनाह था और यह इस क़द्र डरा। मैं बरसों से गुनाह कर रही हूँ, मैं नहीं डरती हालाँकि मेरा ख़ुदा भी तो वही है और वह मुझे सब कुछ करते हुए देखता है।

उस औरत ने घर का दरवाज़ा बंद कर लिया। मामूली कपड़े पहन लिए और इबादत में मशगूल हो गई। एक दिन उसके दिल में ख्याल आया कि क्यों न मैं उस आबिद के पास चली जाऊँ। मुमकिन है कि वह मेरे साथ निकाह कर ले। मैं उससे दीन सीखूंगी। वह इबादत में मेरा मददगार बनेगा।

यह कहकर उसने सामान बाँधा और उस आबिद की बस्ती में पहुँची। आबिद को बुलाया, जब वह सामने आया तो उस औरत ने चेहरा खोल दिया ताकि वह उसे पहचान ले। आबिद ने उस औरत को देखा तो उसकी निगाहों में सारा मंज़र फिर गया। उसने एक चीख मारी और उसकी रूह परवाज़ कर गई।

औरत को इसका बहुत सदमा हुआ। उसने आबिद के भाई से निकाह करके नेकी की ज़िन्दगी शुरू कर दी। उसके सात बच्चे हुए जो बनी इस्राईल के औलिया बने। वल्लाहु सुब्हानहु अ-लम बिस्सवाब ।

खूबसूरत वाक़िआ:तौबा की ऐसी मिसाल, जिसे पढ़कर आँखें नम हो जाएँगी|Tauba ki aisi misal jise padhakar Aankhen Nam Ho jaayengi

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

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