Apahij Lomdi Ko Rozi Kaise Mili?
कभी-कभी ज़िंदगी में ऐसे हालात आ जाते हैं जब इंसान सोचने लगता है कि आखिर मेरी रोज़ी का इंतज़ाम कैसे होगा? परेशानियों और तंगी के बीच दिल में यह ख्याल भी आने लगता है कि शायद अब कोई रास्ता नहीं बचा। लेकिन एक मोमिन का यक़ीन यह होना चाहिए कि रिज़्क़ देने वाला असल में अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त है।
इस कहानी में एक शख्स जंगल में एक ऐसी अपाहिज लोमड़ी को देखता है जिसके चारों पैर नहीं थे, फिर भी वह तंदुरुस्त थी। उसके दिल में सवाल पैदा हुआ कि आखिर इसकी रोज़ी का इंतज़ाम कौन करता है? तभी उसकी नज़र एक शेर पर पड़ती है और उसे अल्लाह की कुदरत का एक ऐसा सबक मिलता है जिसे वह पूरी ज़िंदगी नहीं भूलता।
लेकिन इस वाक़िए का असल पैग़ाम सिर्फ़ यह नहीं कि अल्लाह पर भरोसा करो, बल्कि यह भी है कि अपने हाथ-पैर सलामत होने के बावजूद मेहनत छोड़ देना सही नहीं। तवक्कुल के साथ मेहनत, हलाल रोज़ी की तलाश और अल्लाह की इबादत—यही एक मुसलमान की खूबसूरत ज़िंदगी का रास्ता है।
आइए इस दिलचस्प वाक़िए को पढ़ते हैं और जानते हैं कि लोमड़ी और शेर से हमें हलाल रोज़ी, मेहनत और तवक्कुल का क्या बड़ा सबक मिलता है।
एक आदमी एक जंगल से गुज़र रहा था ! कि उसे एक लोमड़ी नज़र आइ एक एसी लोमड़ी जो चारो पैर से अपाहिज थी यानी उसके चारो पैर कटे हुए थे !
लेकिन तन्दुरुस्त और मोटी थी उसे देखकर वो आदमी सोचने लगा ! कि इसे रोज़ी किस तरह मिलती होगी, इतना सोचना था एक शेर आ गया! कही से शिकार करके मुह मे हिरन दबाए हुए घसीटते हुए आया उस शेर को देखकर वो शख़्स एक पेड़ के पिछे छुप गया !
और मन्ज़र देखने लगा क्या देखता है! कि वो शेर उस हिरन को खाने लगा और जब उस शेर का पेट भर गया ! तो वो बचे हुए हिरन को वही छोड़ कर चला गया !
इतने में वो लोमड़ी अपने बदन को घसीटते हुए उस हिरन के पास आइ ! और उस हिरन को खाने लगी तब उस आदमी को समझ आया कि इस अपाहिज लोमड़ी कि रोज़ी का इन्तेजाम अल्लाह ने इस तरह कर रखा है,
अब वो आदमी सोचने लगा ! जब अल्लाह इसे इतनी आसानी से रोज़ी दे सकता है। तो मै तो इन्सान हु अशरफुल मखलुक हूँ! मैं क्यों रोज़ी के लिये भटकु!
मुझे भी रोज़ी मिल जायेगी! इस तरह वो आदमी अपने घर जाकर सिर्फ इबादत में लग गया और मेहनत मशक्कत छोड़ दि ! काम धंधा छोड़ दिया ! सिर्फ इबादत करने लगा एक दिन दो दिन कुछ दिन गुज़र गये !
लेकिन रोज़ी का कोई इन्तेजाम नही दिखा एक दिन उसने अल्लाह कि बारगाह मे दुआ कि या अल्लाह तु एक मोहताज लोमड़ी को देता है मुझे रोज़ी क्यो नही अता फरमाता ?
अल्लाह कि तरफ से आवाज़ आई ऐ नादान तुने मोहताज लोमड़ी देखा लेकिन मुखतार शेर को नही देखा जो खुद भी खाता है और मोहताजो को भी खिलाता है तो तु शेर बन, लोमड़ी क्यो बन गया तेरे तो हाथ पैर सब सलामत है,
ये भी पढ़ें: जैसा बोओगे वैसा ही पाओगे | बुरी नज़र पर दिल छू लेने वाली इस्लामी कहानी
तु मेहनत कर हलाल रोज़ी कि तलाश कर हम तुझे अता करेगे और फिर हमारी इबादत भी कर ताकी तेरी रोज़ी मे बरकत भी अता हो फिर शेर कि तरह खुद भी खा और लोमड़ी कि तरह गरीबो मिस्किनो फकिरो को भी खिला ईन्सान को चाहिये कि हलाल रोज़ी के लिये मेहनत मशक्कत करे उसे तलाश करे यकीनन अल्लाह रोज़ी देने वाला है वो ज़रुर देगा।
और साथ हि साथ अल्लाह कि इबादत यानी फ़र्ज़ वाजिब सुन्नत भी अदा करे यही ज़िन्दगी जिने का तरीक़ा है और हलाल रोजी कमाना और बीवी बच्चो को हलाल रोज़ी खिलाना ये भी जिहाद है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल 1: इस वाक़िए से हमें क्या सबक मिलता है?
जवाब: इस वाक़िए से यह सबक मिलता है कि अल्लाह तआला अपने बंदों के रिज़्क़ का इंतज़ाम फरमाता है, लेकिन इंसान को अपनी सलाहियत के मुताबिक़ मेहनत भी करनी चाहिए।Apahij Lomdi Ko Rozi Kaise Mili?
सवाल 2: क्या सिर्फ़ इबादत करके रोज़गार छोड़ देना सही है?
जवाब: नहीं। अगर इंसान काम करने की कुदरत रखता है तो हलाल रोज़ी के लिए मेहनत करना चाहिए। इबादत के साथ हलाल रोज़गार की तलाश भी ज़रूरी है।Apahij Lomdi Ko Rozi Kaise Mili?
सवाल 3: क्या रिज़्क़ अल्लाह तआला देता है?
जवाब: जी हाँ, रिज़्क़ का असल मालिक अल्लाह तआला है। इंसान मेहनत करता है, मगर रिज़्क़ में बरकत और उसके मिलने का इंतज़ाम अल्लाह की तरफ़ से होता है।
सवाल 4: तवक्कुल का सही मतलब क्या है?
जवाब: तवक्कुल का मतलब यह नहीं कि इंसान कोशिश ही छोड़ दे। बल्कि अपनी पूरी कोशिश करने के बाद नतीजा अल्लाह तआला के सुपुर्द कर देना तवक्कुल है।
सवाल 5: हलाल रोज़ी कमाना कैसा अमल है?
जवाब: हलाल तरीक़े से रोज़ी कमाना बहुत उम्दा अमल है। मुसलमान को हराम कमाई से बचकर पाकीज़ा और हलाल रोज़गार तलाश करना चाहिए।Apahij Lomdi Ko Rozi Kaise Mili?
सवाल 6: क्या अपनी मेहनत की कमाई से दूसरों की मदद करनी चाहिए?
जवाब: जी हाँ। अल्लाह ने अगर किसी को वुसअत दी है तो उसे गरीबों, मिस्कीनों और जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए। इससे माल में बरकत और दिल में सुकून पैदा होता है।Apahij Lomdi Ko Rozi Kaise Mili?
सवाल 7: इस कहानी में शेर से क्या सबक मिलता है?
जवाब: शेर अपनी ताक़त इस्तेमाल करके खुद भी खाता है और उसके छोड़े हुए खाने से मोहताज लोमड़ी भी अपना पेट भरती है। इससे यह सबक लिया जा सकता है कि इंसान मेहनत करके खुद भी हलाल रोज़ी खाए और जरूरतमंदों का भी सहारा बने।Apahij Lomdi Ko Rozi Kaise Mili?
सवाल 8: मुश्किल वक्त में मुसलमान को क्या करना चाहिए?
जवाब: मुश्किल वक्त में सब्र, दुआ और तवक्कुल के साथ हलाल कोशिश जारी रखनी चाहिए और अल्लाह तआला से मदद मांगनी चाहिए।Apahij Lomdi Ko Rozi Kaise Mili?
सवाल 9: क्या रोज़ी की फिक्र करना गलत है?
जवाब: रोज़ी की जरूरत इंसानी फितरत है, लेकिन इसकी वजह से मायूस या बेयक़ीन नहीं होना चाहिए। अपनी कोशिश करें और दिल से यक़ीन रखें कि अल्लाह तआला बेहतर इंतज़ाम फरमाने वाला है।Apahij Lomdi Ko Rozi Kaise Mili?
सवाल 10: इस वाक़िए का सबसे बड़ा पैग़ाम क्या है?
जवाब: सबसे बड़ा पैग़ाम यही है कि अल्लाह पर तवक्कुल रखो, हलाल रोज़ी के लिए मेहनत करो, इबादत को कायम रखो और अपनी खुशहाली में जरूरतमंदों को भी याद रखो।Apahij Lomdi Ko Rozi Kaise Mili?
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Apahij Lomdi Ko Rozi Kaise Mili?
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Apahij Lomdi Ko Rozi Kaise Mili?
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Apahij Lomdi Ko Rozi Kaise Mili?
जज़ाकल्लाह खैर….
