हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु की शुजाअत व इल्म व फज़्ल। Hazrat Ali Raziallahu anhu ki sujaat ilm va fazl.
शुजाअत व दिलेरी में सारे अरब में कोई भी हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु का मुकाबला नहीं कर सकता था। आपकी गैर मामूली जुर्रात ही की …
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शुजाअत व दिलेरी में सारे अरब में कोई भी हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु का मुकाबला नहीं कर सकता था। आपकी गैर मामूली जुर्रात ही की …
आपका शजरए नसब यह है अली इब्न अबी तालिब बिन अब्दुल मुत्तलिब बिन हाशिम बिन अब्द मोनाफ् बिन कसा बिन कलाब बिन मर्रा बिन कअब …
शरीअत ने जिमाअ के लिये कोई खास वक़्त मुकर्रर नहीं किया है। हाँ, बअज़ शरई अवारिज़ की मौजूदगी में जिमाअ करना मना है। जैसेः रोज़ा, …
नमाज़े जनाज़ा की नियत :- नियत की मैंने नमाज़े जनाज़ा पढ़ने की मय चार तकबीरों के, सना वास्ते अल्लाह तआला के, दुरूद शरीफ़ वास्ते रसूलुल्लाह …
(1) मुहर्रम (2) सफर (3) रबीउल अव्वल (4) रबीउल आखिर (5) जुमादल उला (6) जुमादल उखरा (7) रजब (8) शाबान (9) रमज़ान (10) शव्वाल (11) …
ज़मानए क़ह़त़ में रहमते आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भूक महसूस की तो बिन्ते रसूल हज़रते सय्यिदतुना फातिमा बतूल रजियल्लाहु अन्हा ने सीनी में एक …
फ़ज़ाइले नमाज़ :- कुरआनो हदीस में नमाज़ की बहुत ज़्यादा फ़ज़ीलत बयान की गई है, चुनाँचे खुदाए तआला इरशाद फ़रमाता है, बेशक नमाज़ बे हयाई …
बीमार की नमाज़ का बयान: अगर बीमारी के सबब खड़े होकर नमाज़ नहीं पढ़ सकता कि मर्ज़ बढ़ जाएगा या देर में अच्छा होगा या …
बिला उज़्रे शरई नमाज़ क़ज़ा करना सख़्त गुनाह है जल्द से जल्द अदा करना और तौबह करना फ़र्ज़ है। मकरूह वक़्त के अलावा किसी वक़्त …
फ़िक़ही मसाइल :- मसअला :- हर मुकल्लफ़ यानी आक़िल बालिग पर नमाज़ फ़र्ज़ ऐन है इसकी फ़ज़ियत का मुन्किर काफ़िर है और जो क़स्दन छोड़े …