सोने से पहले का खास वजिफा। Sone Se pahle Ka khas wazifa.
नबी-ए-करीम सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम ने एक मरतबा हज़रत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से इरशाद फ़रमाया : ऐ अली ! रात को रोज़ाना पाँच …
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नबी-ए-करीम सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम ने एक मरतबा हज़रत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से इरशाद फ़रमाया : ऐ अली ! रात को रोज़ाना पाँच …
अज़ाब दो क़िस्म के होते हैं ज़मीनी और आसमानी । ज़मीनी आफ़तों के लिये तो अल्लाह तआला और उसके रसूल सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने उसूल …
जिमाअ यानी हमबिस्तरी से फारिग होकर मर्दो औरत दोनों अलग-अलग हो जाऐं, फिर किसी साफ कपड़े से दोनों अपने-अपने मकामे मख़्सूस को साफ कर लें। …
कुरान :- अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है: “तुम्हारी औरतें तुम्हारे लिये खेतियां हैं तो आओ अपनी खेतियों में जिस तरह चाहो।” जिमाअ के तरीक़े बहुत …
जिमाअ करना इन्सान की वह तबई और अहम ज़रूरत है जिसके बगैर इन्सान का सही तौर से ज़िन्दगी गुज़ारना मुश्किल बल्कि तकरीबन ना मुम्किन सा …
जिमाअ यानी हमबिस्तरी की ख़्वाहिश एक फितरी यानी कुदरती जज़्बा है जो हर ज़ीरूह में खिलकतन पाया जाता है। इसे बताने की ज़रूरत नहीं होती। …
जिमाअ से वह रद्दी फुज़्ला जो जिस्म में बेकार जमा हो जाता है वह ख़ारिज हुआ करता है जिससे जिस्म हल्का, तबीअत चाको चोबंद, मिज़ाज …
मुसलमान औरतों के लिए पर्दा बहुत ज़रूरी है और बेपर्दगी इन्तिहा दर्जें की बेहयाई व बेग़ैरती का सबब है। कुरान :- अल्लाह तआला इरशाद फरमाता …
मेहमान नवाज़ी हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की सुन्नत है। हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम बगैर मेहमान के खाना तनावुल न फरमाते थे। आप अलैहिस्सलाम के घर कोई मेहमान …
मर्द को चाहिये कि कम से कम चार माह में एक बार अपनी बीवी से सोहबत ज़रूर करे, बिला वजह औरत को छोड़ कर बहुत …