16/08/2026
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कौन से गुनाह पर कैसा अज़ाब? | झूठ, ज़िना और सूद की खौफ़नाक सज़ा | सहीह बुख़ारी की रिवायत |Kaun Se Gunah Par Kaisa Azaab? | Jhoot, Zina Aur Sood Ki Khaufnaak Saza | Sahih Bukhari Ki Riwayat

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Kaun Se Gunah Par Kaisa Azaab?
Kaun Se Gunah Par Kaisa Azaab?

Kaun Se Gunah Par Kaisa Azaab?

इस्लाम हमें सिर्फ़ नेकियों की फ़ज़ीलत नहीं बताता, बल्कि गुनाहों के बुरे अंजाम से भी आगाह करता है। सहीह बुख़ारी की एक मशहूर रिवायत में हुज़ूर ﷺ ने एक ख़्वाब का ज़िक्र फ़रमाया, जिसमें अलग-अलग लोगों को उनके आमाल के मुताबिक़ मुख़्तलिफ़ अज़ाब में मुब्तला देखा गया।

इस रिवायत में झूठ बोलने वाले, क़ुरआन का इल्म हासिल करके उस पर अमल न करने वाले, ज़िना करने वाले और सूद खाने वालों के बारे में बेहद इबरतनाक मंज़र बयान हुआ है। इसे पढ़कर इंसान को अपने आमाल का मुहासबा करने और गुनाहों से तौबा करने की ज़रूरत महसूस होती है।

आइए इस रिवायत को आसान अंदाज़ में समझते हैं और जानते हैं कि कौन से गुनाह पर कैसा अज़ाब बयान हुआ है, ताकि हम अपने आपको इन बुराइयों से बचा सकें और अल्लाह तआला की रज़ा हासिल करने की कोशिश करें।

कुछ खास कामों पर खास अज़ाब

बुख़ारी शरीफ में एक लंबी रिवायत है, जिसमें अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का एक ख़्वाब रिवायत किया गया है, जिसमें बर्ज़ख़ की दुनिया में खास-खास अजाबों का जिक्र है।

आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि मैंने आज रात ख़्वाब देखा है कि दो आदमी मेरे पास आए और मेरा हाथ पकड़ कर मुझको एक मुकद्दस (पाक) ज़मीन की तरफ ले चले। देखता क्या हूं कि एक आदमी बैठा हुआ है और दूसरा खड़ा है और उसके हाथ में लोहे का जंबूर है।

उस बैठे हुए शख़्स के कल्ले को उससे चीर रहा है, यहां तक कि गुद्दी तक जा पहुंचता है, फिर दूसरे कल्ले के साथ भी यही मामला करता है और पहला कल्ला उसका ठीक हो जाता है, वह फिर उस पहले कल्ले के साथ ऐसा करता है। मैंने पूछा, यह क्या बात है? वे दोनों आदमी बोले, आगे चलो। हम आगे चले, यहां तक कि एक ऐसे शख़्स पर गुज़र हुआ जो लेटा हुआ है और उसके पत्थर से उस लेटे हुए आदमी का सर बहुत ज़ोर से फोड़ता है जब वह पत्थर उसके सिर पर दे मारता है, तो पत्थर लुढ़क कर दूर जा गिरता है।

जब वह उसको उठाने के लिए जाता है, जो अभी तब लौटकर उसके पास आने भी नहीं पाता कि उसका सिर जैसा था, वैसा ही हो जाता है और फिर उसको उसी तरह फोड़ता है। मैंने पूछा, यह क्या है? वे दोनों बोले, आगे चलो। यहां तक कि हम एक गार पर पहुंचे जो तन्दूर की तरह था और ऊपर बहुत तंग था, नीचे से चौड़ा था। उसमें आग जल रही थी और उसमें बहुत से नंगे मर्द और औरतें भरे हुए थे, जिस वक़्त वह आग ऊपर को उठती, तो उसके साथ वे सब ऊपर को उठ आते थे, यहां तक कि करीब निकलने को हो जाते।

फिर जिस वक़्त आग बैठती तो वे सब भी नीचे चले जाते। मैंने पूछा यह क्या है? वे दोनों बोले, आगे चलो। हम दोनों आगे चले, यहां तक कि एक खून की नहर पर पहुंचे। उसके बीच में एक शख़्स खड़ा था और नहर के किनारे पर एक शख़्स है, जिसके सामने बहुत-से पत्थर पड़े हैं। वह नहर के अंदर वाला शख़्स नहर के किनारे की तरफ आता है। जिस वक़्त वह निकलना चाहता है. यह किनारे वाला शख्स उसके मुंह पर पत्थर मारकर हटा देता है।

मैंने पूछा यह क्या है? वे दोनों बोले, आगे चलो। हम आगे चले, यहां तक कि एक हरे-भरे बाग़ में आ पहुंचे। उसमें एक बड़ा पेड़ है और उसके नीचे एक बूढ़ा आदमी है और उसके बच्चे हैं। उस पेड़ के करीब एक और आदमी बैठा हुआ है और उसके सामने आग जल रही है, जिसे वह धौंक रहा है। फिर वह दोनों मुझको चढ़ाकर पेड़ के ऊपर ले गये। वहां एक घर पेड़ के बीच में बहुत उम्दा था, उसमें मुझे दाखिल कर दिया। मैंने उस घर से अच्छा घर कभी नहीं देखा।

उसमें बहुत से मर्द, बूढ़े, जवान, औरतें और बच्चे थे, फिर उससे बाहर लाकर और ऊपर ले गये, वहां एक जवान थे। मैंने उन आदमियों से कहा कि तुमने मुझको तमाम रात फिराया। अब बताओ कि ये सब क्या राज़ की बातें थीं। उन्होंने कहा, वह जो आपने देखा था जिसके कल्ले चीरे जाते थे वह आदमी झूठा है, जो झूठी बातें ब्यान करता था और वे बातें दुनिया में मशहूर हो जाती थीं।

उसके साथ कियामत तक यों ही करते रहेंगे और जिसका सर फोड़ते हुए देखा, वह आदमी है कि अल्लाह तआला ने उसको कुरआन का इल्म दिया। रात को उससे गाफिल होकर सो रहा था और दिन को उस पर अमल न किया। क़ियामत तक उसके साथ यही मामला रहेगा;Kaun Se Gunah Par Kaisa Azaab?

और जिनको आपने आग के गार में देखा वे ज़िना करने वाले लोग हैं; और जिनको खून की नहर में देखा, वे सूद खाने वाले थे और पेड़ के नीचे जो बढ़े शख़्स थे, वह इब्राहीम अलैहिस्सलाम थे और आग धौंक रहा था; वह दारोगा दोज़ख़ का मालिक है। पहला घर जिसमें आप दाखिल हुए, वह आम मुसलमानों का है और दूसरा घर शहीदों का है।

और मैं जिब्रील हूं और यह मीकाईल हैं। फिर बोले सर ऊपर उठाइये। मैं ने सर उठाया तो मेरे ऊपर एक सफ़ैद बादल नज़र आया बोले कि यह आपका घर है। मैंने कहा कि मुझे छोड़ दो, मैं अपने घर में दाख़िल हो जाऊं। बोले, अभी आपकी उम्र बाकी है, पूरी नहीं हुई। अगर पूरी हो चुकी होती तो अभी चले जाते ।

जानना चाहिए कि नबियों का ख़्वाब वह्य होता है। ये तमाम वाकिए सच्चे हैं। इस हदीस से कई दूसरी चीज़ों का हाल मालूम हुआ। एक झूठ का कि कैसी सख़्त सज़ा है, दूसरे आलिम बेअमल का, तीसरे ज़िना, चौथे सूद का। खुदा सब मुसलमानों को इन कामों से बचाये रखे। (आमीन)Kaun Se Gunah Par Kaisa Azaab?

FAQ – गुनाहों पर अज़ाब और सहीह बुख़ारी की रिवायत

सवाल 1: इस रिवायत में किन गुनाहों पर अज़ाब का ज़िक्र है?
जवाब: इस रिवायत में झूठ बोलने, क़ुरआन का इल्म हासिल करके उस पर अमल न करने, ज़िना करने और सूद खाने वालों के लिए इबरतनाक अज़ाब का ज़िक्र आया है।Kaun Se Gunah Par Kaisa Azaab?

सवाल 2: झूठ बोलने वाले के साथ क्या अज़ाब बयान हुआ है?
जवाब: रिवायत में ऐसे शख़्स का ज़िक्र है जिसके चेहरे के दोनों तरफ़ लोहे के औज़ार से चीरा जाता है और फिर वह ठीक हो जाता है। यह अज़ाब क़ियामत तक जारी रहने का बयान आया है।Kaun Se Gunah Par Kaisa Azaab?

सवाल 3: क़ुरआन का इल्म हासिल करके अमल न करने वाले के बारे में क्या बताया गया है?
जवाब: ऐसे शख़्स का सिर पत्थर से कुचले जाने का मंज़र दिखाया गया। यह इस बात की सख़्त चेतावनी है कि दीन का इल्म हासिल करने के बाद उस पर अमल करना भी बेहद ज़रूरी है।Kaun Se Gunah Par Kaisa Azaab?

सवाल 4: ज़िना करने वालों के लिए क्या अज़ाब बताया गया है?
जवाब: रिवायत में ज़िना करने वालों को एक तंग और आग से भरे हुए गड्ढे में अज़ाब में मुब्तला दिखाया गया है। इससे ज़िना की संगीन हरामियत का अंदाज़ा होता है।Kaun Se Gunah Par Kaisa Azaab?

ये भी पढ़ें: माहवारी के दिनों में मियाँ-बीवी के रिश्ते की क्या हद है? | कुरआन और सही हदीस की रोशनी में

सवाल 5: सूद खाने वालों का अज़ाब क्या बताया गया है?
जवाब: रिवायत में सूद खाने वालों को खून की नहर में अज़ाब में मुब्तला दिखाया गया है, जहाँ किनारे पर मौजूद शख़्स उनके मुँह पर पत्थर मारकर उन्हें वापस कर देता है।Kaun Se Gunah Par Kaisa Azaab?

सवाल 6: क्या यह वाक़िया सहीह हदीस में मौजूद है?
जवाब: जी हाँ, यह वाक़िया सहीह बुख़ारी में मौजूद एक लंबी रिवायत में आया है। इसमें हुज़ूर ﷺ के ख़्वाब के ज़रिए बरज़ख़ के कुछ अज़ाबों का मंज़र बयान हुआ है।Kaun Se Gunah Par Kaisa Azaab?

सवाल 7: इस रिवायत से हमें सबसे बड़ा सबक क्या मिलता है?
जवाब: सबसे बड़ा सबक यह है कि इंसान को गुनाहों को मामूली नहीं समझना चाहिए। झूठ, ज़िना, सूद और इल्म पर अमल न करना बेहद गंभीर मामले हैं। हमें अपने आमाल का मुहासबा करते हुए सच्ची तौबा और नेक अमल की तरफ़ बढ़ना चाहिए।Kaun Se Gunah Par Kaisa Azaab?

सवाल 8: क्या सिर्फ़ इल्म हासिल करना काफी है?
जवाब: नहीं। दीन का इल्म हासिल करने के साथ उस पर अमल करना भी ज़रूरी है। इल्म इंसान को सही और गलत पहचानने में मदद देता है, जबकि अमल उस इल्म को ज़िंदगी में उतारता है।Kaun Se Gunah Par Kaisa Azaab?

सवाल 9: अगर कोई इन गुनाहों में मुब्तला रहा हो तो क्या करे?
जवाब: मायूस नहीं होना चाहिए। सच्चे दिल से अल्लाह तआला की बारगाह में तौबा करे, गुनाह छोड़ने का पक्का इरादा करे और जहाँ किसी बंदे का हक़ मारा हो वहाँ उसका हक़ अदा करने की कोशिश करे। अल्लाह तआला बहुत रहम फरमाने वाला है।Kaun Se Gunah Par Kaisa Azaab?

सवाल 10: इस बयान को दूसरों तक पहुंचाना कैसा है?
जवाब: अगर बयान में सही और भरोसेमंद इल्म हो तो नेक नीयत से दूसरों तक पहुंचाना अच्छी बात है। किसी को गुनाह से बचने की नसीहत करना भी खैर का काम है।Kaun Se Gunah Par Kaisa Azaab?

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Kaun Se Gunah Par Kaisa Azaab?

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Kaun Se Gunah Par Kaisa Azaab?

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Kaun Se Gunah Par Kaisa Azaab?
खुदा हाफिज़…..

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