05/08/2026
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क्या हैज़ (माहवारी) वाली औरत की गोद में कुरआन पढ़ सकते हैं? | सही हदीस से जानिए हक़ीक़त |Kya Haiz (Mahawari) Wali Aurat Ki God Mein Quran Padh Sakte Hain? | Sahih Hadees Se Janiye Haqeeqat amazing story

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Kya Haiz (Mahawari) Wali Aurat Ki God Mein Quran Padh Sakte Hain?
Kya Haiz (Mahawari) Wali Aurat Ki God Mein Quran Padh Sakte Hain?

Kya Haiz (Mahawari) Wali Aurat Ki God Mein Quran Padh Sakte Hain?

हैज़ (माहवारी) को लेकर लोगों के बीच कई तरह की गलतफहमियाँ फैली हुई हैं। कुछ लोग समझते हैं कि माहवारी वाली औरत पूरी तरह नापाक हो जाती है, उसका छुआ हुआ खाना, कपड़ा या बिस्तर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जबकि इस्लाम की तालीम इससे बिल्कुल अलग है।

इस आर्टिकल में हम सही हदीस की रोशनी में जानेंगे कि क्या माहवारी वाली औरत की गोद में बैठकर या लेटकर कुरआन की तिलावत की जा सकती है? क्या उसका छुआ हुआ खाना या पानी इस्तेमाल करना जायज़ है? और हैज़ के दौरान उसके साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए?

अगर आपके मन में भी हैज़ से जुड़े ऐसे सवाल हैं, तो यह लेख आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा। आइए, कुरआन और सही हदीस की रोशनी में इस मसले की सही हक़ीक़त जानते हैं।

हदीस

हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा ने यह भी बयान फ़रमाया कि रसूले पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मेरे माहवारी के ज़माने में मेरी गोद में तकिया लगाकर लेट-बैठ जाते थे, और उसी हालत में कुरआन मजीद पढ़ते थे। (मिश्कात शरीफ पेज 56)

हदीस

उम्मुल मोमिनीन हज़रत मैमूना रज़ियल्लाहु अन्हा का बयान है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मेरी माहवारी के ज़माने में इस हाल में नमाज़ पढ़ते रहते थे कि चादर का एक हिस्सा आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के ऊपर और एक हिस्सा मेरे ऊपर होता था। (मिश्कात शरीफ पेज 56)

तशरीह

इन हदीसों से मालूम हुआ कि माहवारी के ज़माने में औरत के हाथ-पाँव, मुँह और लुआब मुँह का पानी, राल, थूक और पहने हुए कपड़े नापाक नहीं हो जाते हैं, अलबत्ता किसी जगह, बदन या कपड़े में खून लग जायेगा तो वह जगह नापाक हो जाती है।

माहवारी वाली औरत के साथ दूसरी औरतों का या उसकी औलाद का, उसके शौहर या दूसरे मेहरमों का उठना-बैठना मना नहीं हो जाता। हैज़ वाली औरत का जूठा पाक है। उसकी गोद में लेटकर उसका शौहर कुरआन शरीफ पढ़ ले तो कुछ हर्ज नहीं। जब हैज़ के ज़माने में यह बात है तो इस्तिहाज़ा में और भी ज़्यादा उसके ज़ाहिरी जिस्म और लुआब को पाक माना जायेगा। और जो हुक्म हैज़ के ज़माने का है वही निफास (यानी उस खून के आने के दौरान का है जो बच्चे की पैदाईश के बाद औरत को आता है) के ज़माने का भी है।

ये भी पढ़ें: हैज़ के दिनों में नमाज़ कब माफ़ होती है? | माहवारी के ज़रूरी इस्लामी मसाइल|

यहूदियों और हिन्दुओं में दस्तूर है कि हैज़ वाली औरत को अछूत बनाकर छोड़ देते हैं। न वह बर्तन को हाथ लगाये, न किसी का कपड़ा छुए, इस्लामी शरीअत में ऐसा नहीं है।

हैज़ वाली औरत का खाना पकाना, उसके छुए हुए आटे और पानी वगैरह को इस्तेमाल करना मुक्रूह नहीं है। उसके बिस्तर को अलग न किया जाये क्योंकि यह यहूदियों की हरकत जैसा है। हैज़ वाली औरत को अलग कर देना कि वहाँ कोई न जाये, ऐसा करना दुरुस्त नहीं है। (शामी पेज 194 जिल्द 1)

इस्लाम से पहले लोगों ने औरत को बहुत गिरा रखा था और उसकी कोई हैसियत नहीं समझी जाती थी। इस्लाम ने औरत को बुलन्द किया और उसके अदब व सम्मान का सबक दिया, मगर अफ़सोस है कि आज औरतें इस्लाम ही को मुसीबत समझने लगी हैं और इसके अहकाम से जी चुरातीं हैं।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

1. क्या माहवारी (हैज़) वाली औरत की गोद में बैठकर कुरआन पढ़ सकते हैं?

जवाब: जी हाँ। सही हदीस से साबित है कि रसूलुल्लाह ﷺ हैज़ के दौरान उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा की गोद में टेक लगाकर कुरआन की तिलावत फरमाते थे।Kya Haiz (Mahawari) Wali Aurat Ki God Mein Quran Padh Sakte Hain?

2. क्या हैज़ वाली औरत पूरी तरह नापाक हो जाती है?

जवाब: नहीं। हैज़ की वजह से औरत का पूरा जिस्म नापाक नहीं होता। सिर्फ़ जहाँ खून लगा हो, वही हिस्सा नापाक माना जाता है।Kya Haiz (Mahawari) Wali Aurat Ki God Mein Quran Padh Sakte Hain?

3. क्या माहवारी वाली औरत का छुआ हुआ खाना या पानी इस्तेमाल किया जा सकता है?

जवाब: जी हाँ। हैज़ वाली औरत का छुआ हुआ खाना, पानी और बर्तन इस्तेमाल करना बिल्कुल जायज़ है।Kya Haiz (Mahawari) Wali Aurat Ki God Mein Quran Padh Sakte Hain?

4. क्या हैज़ वाली औरत के साथ उठना-बैठना या बात करना मना है?

जवाब: बिल्कुल नहीं। इस्लाम में हैज़ वाली औरत को अलग-थलग करने या उससे दूरी बनाने का हुक्म नहीं दिया गया है।Kya Haiz (Mahawari) Wali Aurat Ki God Mein Quran Padh Sakte Hain?

5. क्या हैज़ वाली औरत खाना बना सकती है?

जवाब: जी हाँ। माहवारी के दौरान खाना बनाना और घर के दूसरे काम करना जायज़ है। उसके बनाए हुए खाने को खाना भी बिल्कुल सही है।Kya Haiz (Mahawari) Wali Aurat Ki God Mein Quran Padh Sakte Hain?

6. क्या हैज़ वाली औरत का बिस्तर अलग कर देना चाहिए?

जवाब: नहीं। बिना किसी शरीअती वजह के उसका बिस्तर अलग करना या उसे अछूत समझना इस्लामी तरीका नहीं है।Kya Haiz (Mahawari) Wali Aurat Ki God Mein Quran Padh Sakte Hain?

7. क्या निफ़ास (बच्चे की पैदाइश के बाद आने वाला खून) का भी यही हुक्म है?

जवाब: जी हाँ। ज़्यादातर मामलों में निफ़ास के दौरान भी वही अहकाम लागू होते हैं जो हैज़ के दौरान होते हैं।Kya Haiz (Mahawari) Wali Aurat Ki God Mein Quran Padh Sakte Hain?

8. क्या इस्लाम में हैज़ वाली औरत को अछूत माना गया है?

जवाब: हरगिज़ नहीं। इस्लाम ने औरत की इज़्ज़त और सम्मान सिखाया है। हैज़ की वजह से उसे अछूत समझना या उससे नफ़रत करना इस्लामी तालीम नहीं है।Kya Haiz (Mahawari) Wali Aurat Ki God Mein Quran Padh Sakte Hain?

9. हैज़ के दौरान शौहर अपनी बीवी के साथ कैसा व्यवहार करे?

जवाब: शौहर को अपनी बीवी के साथ मोहब्बत, इज़्ज़त और अच्छे अख़लाक से पेश आना चाहिए। उसे अकेला छोड़ देना या उससे नफ़रत करना सही तरीका नहीं है।Kya Haiz (Mahawari) Wali Aurat Ki God Mein Quran Padh Sakte Hain?

10. हैज़ से जुड़े सही इस्लामी अहकाम कहाँ से सीखने चाहिए?

जवाब: हैज़ और दूसरे दीनी मसाइल हमेशा कुरआन, सही हदीस और भरोसेमंद उलेमा की रहनुमाई से सीखने चाहिए, ताकि गलतफहमियों से बचा जा सके।Kya Haiz (Mahawari) Wali Aurat Ki God Mein Quran Padh Sakte Hain?

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

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