Kaun-Kaun Se Rishton Mein Nikah Haram Hai?
निकाह इस्लाम में सिर्फ़ दो लोगों का रिश्ता नहीं, बल्कि एक पाकीज़ा और ज़िम्मेदारी वाला अहद है। इसी वजह से शरीअत ने निकाह के मामले में भी हलाल और हराम की साफ़ तफ़सीलात बयान फ़रमाई हैं। हर रिश्ते के साथ निकाह जायज़ नहीं होता, बल्कि कुछ रिश्ते ऐसे हैं जिनसे निकाह हमेशा के लिए हराम है, जबकि कुछ रिश्तों में खास हालात की वजह से निकाह की मनाही होती है।
कई बार आम लोगों को यह मालूम नहीं होता कि महरम कौन है, नामहरम कौन है, दूध के रिश्ते से कौन हराम हो जाता है और ससुराली रिश्तों में किनसे निकाह नहीं किया जा सकता। इसी तरह कुछ रिश्तों में एक औरत को एक साथ निकाह में रखना भी जायज़ नहीं होता।
इसलिए इन अहकाम को जानना हर मुसलमान के लिए बहुत अहम है, ताकि शादी-ब्याह के मामले में कोई नाजायज़ काम न हो और हम कुरआन व सुन्नत के बताए हुए उसूलों के मुताबिक़ अपनी ज़िन्दगी गुज़ार सकें।
इस लेख में हम आसान ज़बान में जानेंगे कि कौन-कौन से रिश्तों में निकाह हराम है, नसब और रज़ाअत के रिश्तों का क्या हुक्म है और महरम व नामहरम रिश्तों को कैसे समझा जाए।
कौन-कौनसे रिश्ते हराम हैं
हदीस
हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि उन्होंने हुजूरे पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से अर्ज़ किया कि या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम! क्या आपको अपने चचा हमज़ा रज़ियल्लाहु अन्हु की लड़की से निकाह करने की रगबत है? रग़बत हो तो बात चलायी जाये क्योंकि कुरैश की औरतों में वह सबसे ज़्यादा हसीन लड़की है।
आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि मेरा निकाह उससे कैसे हो सकता है? वह मेरे दूध-शरीक भाई की लड़की है। क्या तुम्हें मालूम नहीं है कि हमज़ा मेरे दूध-शरीक भाई हैं। और अल्लाह तआला ने नसब की वजह से जो रिश्ते हराम करार दिये हैं वे ‘रज़ाअत’ यानी दूध-शरीक होने की वजह से भी हराम करार दिये हैं। हमज़ा रज़ियल्लाहु अन्हु अगरचे चचा हैं और चचा की लड़की से निकाह दुरुस्त है लेकिन चचा होते हुए चूँकि वह दूध-शरीक भाई हैं इसलिए उनकी लड़की से निकाह नहीं हो सकता। (मिश्कात शरीफ पेज 273)
हदीस
हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा ने अपनी वाकिआ बयान फरमाया कि मेरे रज़ाई यानी दूध-शरीक चचा (अफ़्लह नामी) ने पर्दे के अहकाम नाज़िल होने के बाद मेरे पास अन्दर आने की इजाज़त चाही हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा ने अबुल कईस की बीवी का दूध पिया था जिसकी वजह से अबुल कईस उनके दूध के रिश्ते से वालिद हो गये, और उनके भाई अफ़्लह उसी रिश्ते से चचा हो गये।
जब उन्होंने इजाज़त चाही तो मैंने अन्दर आने की इजाज़त न दी और कहा कि हुजूरे अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से दरियाफ़्त किये बगैर इजाज़त न दूँगी। जब हुजूरे अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ज़नान-ख़ाने में तशरीफ लाये तो मैंने दरियाफ्त किया। आपने फ़रमाया हाँ! वह तुम्हारा दूध के रिश्ते का चचा है उसे अन्दर आने की इजाज़त दे दो।
मैंने अर्ज़ किया या रसूलल्लाह ! मुझे तो औरत ने दूध पिलाया है उसकी बहन ख़ाला बन जाये तो समझ में आता है मुझे मर्द ने दूध नहीं पिलाया उस औरत के शौहर ने मुझे दूध पिलाया होता तो उसका भाई मेरा चचा बन जाता। आपने फ़रमाया बेशक वह तुम्हारा चचा है, वह तुम्हारे पास अन्दर घर में आ सकता है। क्योंकि जिस मर्द की वजह से दूध उतरा वह बाप हो गया और उसका भाई दूध पीने वाले बच्चे का चचा हो गया)। (मिश्कात शरीफ पेज 273)
हदीस
हज़रत अबू हुरैरह रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि किसी औरत का निकाह ऐसे मर्द से न किया जाये जिसके निकाह में पहले से उस औरत की फूफी हो। और इससे भी मना फरमाया कि किसी औरत का निकाह ऐसे मर्द से किया जाये जिसके निकाह में पहले से उस औरत के भाई की लड़की हो।
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इसी तरह इससे भी मना फ़रमाया कि किसी औरत का निकाह ऐसे मर्द से किया जाये जिसके निकाह में पहले से उस औरत की ख़ाला हो। और इससे भी मना फरमाया कि ऐसे मर्द से किसी औरत का निकाह किया जाये जिसके निकाह में पहले से उस औरत की बहन की लड़की हो।
किसी मर्द के निकाह में बड़ी यानी फूफी या ख़ाला के होते हुए छोटी यानी भतीजी और भानजी का निकाह उस मर्द से न किया जाये। किसी मर्द के निकाह मे छोटी यानी भतीजी या भानजी के होते हुए बड़ी यानी फूफी और ख़ाला का निकाह उस मर्द से न किया जाये। (मिश्कात पेज 274)
तशरीहः शरीअते पाक ने निकाह के बारे में बहुत-से अहकाम बताये हैं। उन अहकाम में ये तफसीलात भी हैं कि कौनसी औरत किस मर्द के लिए हलाल है और कौनसा मर्द किस औरत के लिए हलाल है। हर मुसलमान को इन तफ्सीलात का जानना ज़रूरी है।
कुरआन मजीद में सूरः निसा के चौथे रुकूअ में ये अहकाम ज़िक्र किए गये हैं और हुजूरे अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने भी इन अहकामात की तशरीह की है और तफसीलात बतायी हैं।
शरीअत ने इनसान को हलाल व हराम का पाबन्द बनाया है। जैसे खाने-पीने में हर चीज़ की इजाज़त नहीं दी जाती ऐसे ही शादी करने में आज़ादी नहीं बल्कि इसके बारे में हलाल व हराम की तफसीलात से आगाह फ़रमाया और कवानीन का पाबन्द बनाया। बाज़ लोगों को ये क़वानीन नागवार मालूम होते हैं।
लेकिन वे यह नहीं समझते कि रोक-टोक शराफत की दलील है। जानवर गैर-मुकल्लफ हैं, बेअक़्ल हैं, जहाँ चाहते हैं मुँह मारते हैं, जैसे चाहा ख़्वाहिश पूरी कर लेते हैं। अगर इनसान को भी खुली छूट मिल जाये तो वह इनसान कहाँ रहेगा? वह तो जानवर बल्कि जानवर से भी बदतर हो जायेगा।
कौनसी औरत किसके लिए हराम है इसके तफसीली क्वानीन की बुनियाद छह चीज़ों पर हैः
(1) नसबी रिश्ता।
(2) दूध का रिश्ता।
(3) ससुराली रिश्ता। (इस रिश्ते की वजह से जो हुर्मत (हराम होना) होती है उसे ‘हुर्मते मुसाहरत’ कहते हैं)।
(4) किसी औरत का दूसरे मर्द के निकाह या उसकी इद्दत में मशगूल होना।
(5) किसी मर्द के निकाह में पहले से किसी औरत का होना।
(6) मुर्कारा तायदाद से ज़्यादा निकाह करना।
इन बातों की तफ्सीलात किसी कद्र ज़िक्र की जाती हैं।
FAQ — कौन-कौन से रिश्तों में निकाह हराम है?
1. इस्लाम में किन रिश्तों में निकाह हराम है?
जवाब: शरीअत में कुछ रिश्ते ऐसे हैं जिनसे निकाह हमेशा के लिए हराम है। इनमें नसबी रिश्ते, दूध के रिश्ते और कुछ ससुराली रिश्ते शामिल हैं। इसके अलावा कुछ ऐसी सूरतें भी हैं जिनमें एक वक़्त में दो औरतों को एक साथ निकाह में रखना जायज़ नहीं है।
2. क्या नसब की वजह से भी कुछ रिश्तों में निकाह हराम होता है?
जवाब: जी हाँ। माँ, बेटी, बहन, फूफी, ख़ाला, भतीजी और भानजी जैसे रिश्तों में निकाह हराम है। कुरआन मजीद की सूरह अन-निसा में इन रिश्तों के अहकाम बयान किये गये हैं।
3. क्या दूध का रिश्ता भी असली रिश्ते की तरह माना जाता है?
जवाब: जी हाँ। शरीअत में रज़ाअत यानी दूध का रिश्ता भी निकाह के मामले में बहुत अहम है। जिस रिश्ते की वजह से नसब के कारण निकाह हराम होता है, उसी तरह दूध के रिश्ते की वजह से भी निकाह हराम हो सकता है।
4. हज़रत हमज़ा रज़ियल्लाहु अन्हु की बेटी से हुज़ूर ﷺ का निकाह क्यों नहीं हो सकता था?
जवाब: हज़रत हमज़ा रज़ियल्लाहु अन्हु हुज़ूर ﷺ के चचा होने के साथ-साथ दूध-शरीक भाई भी थे। इसलिए उनकी बेटी हुज़ूर ﷺ की दूध के रिश्ते से भतीजी हुईं और उनसे निकाह जायज़ नहीं था।
5. क्या दूध पिलाने वाले मर्द का भी दूध के रिश्ते में कोई दर्जा होता है?
जवाब: जी हाँ। हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा के वाक़िए से मालूम होता है कि जिस मर्द की वजह से औरत के अंदर दूध पैदा हुआ, वह भी दूध के रिश्ते से बाप माना जाता है और उसके भाई दूध के रिश्ते से चचा होते हैं।
6. क्या दूध के रिश्ते से पर्दे के अहकाम भी लागू होते हैं?
जवाब: जी हाँ। जब रज़ाअत का रिश्ता शरीअत के मुताबिक़ साबित हो जाए तो उससे महरमियत के अहकाम पैदा होते हैं। इसी वजह से हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा ने अपने रज़ाई चचा अफ़्लह रज़ियल्लाहु अन्हु के बारे में हुज़ूर ﷺ से दरियाफ़्त किया था।
7. क्या एक मर्द एक साथ किसी औरत और उसकी फूफी से निकाह कर सकता है?
जवाब: नहीं। शरीअत ने एक ही वक़्त में किसी औरत और उसकी फूफी को एक मर्द के निकाह में जमा करने से मना फरमाया है।
8. क्या किसी औरत और उसकी ख़ाला से एक साथ निकाह किया जा सकता है?
जवाब: नहीं। किसी औरत और उसकी ख़ाला को एक ही वक़्त में एक मर्द के निकाह में रखना जायज़ नहीं है। इसी तरह भतीजी और फूफी या भानजी और ख़ाला को एक साथ निकाह में जमा करना भी मना है।
9. क्या फूफी की बेटी से निकाह हराम है?
जवाब: नहीं, सिर्फ़ फूफी की बेटी होने की वजह से निकाह हराम नहीं होता। इसी तरह ख़ाला की बेटी, चचा की बेटी और मामू की बेटी से भी निकाह मूल रूप से जायज़ है। लेकिन अगर कोई दूसरा शरई रिश्ता निकाह को हराम बनाता हो, जैसे रज़ाअत का रिश्ता, तो फिर निकाह जायज़ नहीं होगा।
10. क्या चचा की बेटी से निकाह किया जा सकता है?
जवाब: जी हाँ, चचा की बेटी से निकाह जायज़ है। लेकिन अगर वह दूध के रिश्ते से बहन या भतीजी बनती हो, या कोई दूसरी शरई वजह मौजूद हो, तो निकाह जायज़ नहीं होगा।
11. ससुराली रिश्ते की वजह से निकाह कब हराम होता है?
जवाब: ससुराली रिश्ते की वजह से जो निकाह हराम होता है उसे हुर्मते मुसाहरत कहा जाता है। इसमें कुछ रिश्ते ऐसे हैं जिनसे निकाह हमेशा के लिए हराम हो जाता है। इसलिए निकाह से पहले रिश्ते की पूरी शरई हक़ीक़त मालूम करना ज़रूरी है।
12. क्या किसी दूसरे मर्द की निकाहशुदा बीवी से निकाह किया जा सकता है?
जवाब: नहीं। जब तक वह औरत पहले निकाह में है, किसी दूसरे मर्द के लिए उससे निकाह करना जायज़ नहीं। इसी तरह तलाक़ या शौहर की वफ़ात के बाद उसकी इद्दत पूरी होने से पहले भी निकाह नहीं किया जा सकता।
13. क्या एक मर्द दो बहनों से निकाह कर सकता है?
जवाब: एक ही वक़्त में दो सगी बहनों को एक मर्द के निकाह में रखना जायज़ नहीं। अगर पहले निकाह वाली बहन का निकाह शरई तौर पर खत्म हो जाए और इद्दत के अहकाम भी पूरे हो जाएँ, तो उसके बाद दूसरी बहन से निकाह के मसले की अलग तफसील होगी।
14. निकाह के हराम रिश्तों का इल्म हासिल करना क्यों ज़रूरी है?
जवाब: क्योंकि निकाह ज़िंदगी का बहुत अहम मामला है। जिस तरह खाने-पीने में हलाल और हराम का लिहाज़ करना ज़रूरी है, उसी तरह निकाह में भी शरीअत के अहकाम की पाबंदी ज़रूरी है। गलत जानकारी की वजह से इंसान नाजायज़ रिश्ते में पड़ सकता है।
15. निकाह के हराम होने के मुख्य कारण कौन-कौन से हैं?
जवाब: आपके दिए हुए मज़मून के मुताबिक़ इसकी बुनियाद मुख्य तौर पर इन चीज़ों पर है:
1. नसबी रिश्ता।
2. दूध यानी रज़ाअत का रिश्ता।
3. ससुराली रिश्ता यानी हुर्मते मुसाहरत।
4. किसी औरत का दूसरे मर्द के निकाह या इद्दत में होना।
5. किसी मर्द के निकाह में ऐसी औरत का पहले से होना जिसके साथ दूसरी औरत को एक साथ निकाह में रखना मना है।
6. शरीअत की मुकर्ररा हद से ज़्यादा निकाह का मामला।
16. क्या सिर्फ़ रिश्तेदारी देखकर निकाह का फैसला किया जा सकता है?
जवाब: नहीं। निकाह के मामले में सिर्फ़ यह देखना काफ़ी नहीं कि सामने वाला रिश्तेदार है या नहीं। नसब, रज़ाअत, ससुराली रिश्ते और दूसरी शरई पाबंदियों को भी देखना ज़रूरी है।
17. अगर किसी रिश्ते के बारे में शक हो तो क्या करना चाहिए?
जवाब: ऐसी सूरत में अपनी तरफ़ से अंदाज़ा लगाकर निकाह का फैसला नहीं करना चाहिए। किसी भरोसेमंद और आलिम-ए-दीन या मुफ़्ती साहब से पूरा रिश्ता और हालात बताकर शरई मसला मालूम करना चाहिए।
18. क्या निकाह के इन अहकाम को जानना हर मुसलमान के लिए ज़रूरी है?
जवाब: जी हाँ। निकाह इंसान की ज़िंदगी का अहम हिस्सा है, इसलिए हलाल और हराम रिश्तों का बुनियादी इल्म होना बहुत ज़रूरी है। इससे इंसान ग़लत रिश्ते से बचता है और शरीअत के मुताबिक़ अपनी ज़िंदगी गुज़ारने में आसानी होती है।
19. क्या रज़ाअत के रिश्ते में हर रिश्ते का हुक्म बिल्कुल नसब जैसा होता है?
जवाब: रज़ाअत के कुछ रिश्तों में वही हुर्मत पैदा होती है जो नसब की वजह से पैदा होती है। हदीस में हुज़ूर ﷺ ने इसकी वज़ाहत फरमाई है। अलबत्ता रज़ाअत के मसले में उम्र, दूध पिलाने की तादाद और दूसरे फिक़्ही शराइत की भी तफसील होती है, इसलिए किसी खास मामले में मुफ़्ती साहब से दरियाफ़्त करना बेहतर है।
20. इस पूरे मसले से हमें क्या सबक मिलता है?
जवाब: सबसे अहम सबक यह है कि निकाह सिर्फ़ पसंद और रिश्तेदारी का मामला नहीं, बल्कि शरीअत का अहम हुक्म है। इसलिए निकाह से पहले रिश्तों की पूरी तफसील मालूम करना, हलाल-हराम का लिहाज़ रखना और ज़रूरत पड़ने पर उलमा से मसला पूछना चाहिए।
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
खुदा हाफिज़…..
