Maut Ke Baad Ki Pehli Manzil
मौत एक ऐसी हक़ीक़त है जिससे दुनिया का हर इंसान गुज़रने वाला है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मौत के तुरंत बाद क्या होता है? कब्र में सबसे पहले क्या होगा? फ़रिश्ते कौन से सवाल पूछेंगे और एक मोमिन के साथ कैसा मामला होगा? इन सवालों के जवाब हमें क़ुरआन और हदीस में तफ़सील के साथ मिलते हैं।
इस लेख में हम हदीस की रौशनी में मौत के बाद की पहली मंज़िल, कब्र का हाल, मुन्किर-नकीर के सवाल, मोमिन की रूह का सफ़र और अल्लाह तआला की तरफ़ से मिलने वाली जन्नत की खुशखबरी के बारे में आसान और दोस्ताना अंदाज़ में जानेंगे। आइए, इस अहम इस्लामी मालूमात को समझें और अपनी आख़िरत की तैयारी करने की कोशिश करें।
हजरत बरा बिन आज़िब रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि एक दिन हम अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के साथ एक अंसारी के जनाज़े में कब्रिस्तान गये। जब कब्र तक पहुंचे तो देखा कि अभी क़ब्र नहीं बनायी जा सकी है,
इस वजह से नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम बैठ गये और हम भी आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के आस-पास अदब के साथ इस तरह बैठ गये कि जैसे हमारे सरों पर परिंदे बैठें हैं।’
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के मुबारक हाथ में एक लकड़ी थी जिससे ज़मीन कुरेद रहे थे जैसे कोई दुखी आदमी किया करता है आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने मुबारक सर उठाकर फ़रमाया कि कब्र के अज़ाब से पनाह मांगो। दो या तीन बार यही फ़रमाया।
फिर फ़रमाया कि बेशक जब मोमिन बंदा दुनिया से जाने और आखिरत का रुख करने को होता है तो उसकी तरफ आसमान से फ़रिशते आते हैं, जिनके सफेद चेहरे सूरज की तरह रौशन होते हैं। उनके साथ जन्नती कफ़न होता है और जन्नत की खुश्बू होती है।
यह फरिश्ते इतने होते हैं कि जहां तक उसकी नज़र पहुंचे, वहां तक बैठ जाते हैं। फिर हज़रत मलकुल मौत यानी मौत का फरिश्ता तशरीफ लाते हैं यहां तक कि उसके पास बैठ जाते हैं और फ़रमाते हैं कि ऐ पाक रूह!Maut Ke Baad Ki Pehli Manzil
अल्लाह की मगफिरत और उसकी रजामंदी की तरफ निकल कर चल। चुनांचे उसकी रूह इस तरह आसानी से निकल आती है जैसे मशकीज़ा (छोटी मशक) में से पानी का कतरा बहता हुआ बाहर आ जाता है।
तो उसे हज़रत मलकुल मौत ले लेते हैं। उनके हाथ में लेते ही दूसरे फरिश्ते जो दूर तक बैठे होते हैं पल भर भी उनके हाथ में नहीं छोड़ते, यहां तक कि उसे लेकर उसी कफ़न और खुश्बू में रख कर आसमान की तरफ़ चल देते हैं।
उस खुश्बू के बारे में ईशाद फ़रमाया कि ज़मीन पर जो अच्छी से अच्छी खुश्बू पायी गई है, उस-जैसी वह खुश्बू होती है। फिर फ़रमाया कि उस रूह को लेकर फरिश्ते आसमान की तरफ चढ़ने लगते हैं और फरिश्ते की जिस टोली पर भा इनका गुज़र होता है,
वह कहते हैं कि यह कौन पाक रूह है। वह उसका अच्छे से अच्छा नाम लेकर जवाब देते हैं। जिससे दुनिया में बुलाया जाता था कि फ़्लां का बेटा फ़्लां है। इसी तरह पहले आसमान तक पहुंचते हैं और आसमान का दरवाज़ा खोलने के लिए कहते हैं और आसमान का दरवाज़ा खोल दिया जाता है,Maut Ke Baad Ki Pehli Manzil
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और वह इस रूह को लेकर ऊपर चले जाते हैं; यहां तक कि सातवें आसमान पर पहुंच जाते हैं। हर आसमान के क़रीबी फरिश्ते दूसरे आसमान तक उसे विदा करते हैं। जव सातवें आसमान तक पहुंच जाते हैं तो अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि मेरे वन्दे को ‘इल्लीयीन की किताब’ यानी नेकों के दफ़्तर में लिख दो और उसे ज़मीन पर वापस ले जाओ।
क्योंकि मैंने इंसान को ज़मीन ही से पैदा किया है और उसी में लौटा दूंगा और उसी से उनको दोबारा निकाल लूंगा । चुनांचे उसकी रूह उसके जिस्म में वापस कर दी जाती है। इसके बाद दो फरिश्ते मुन्किर और नकीर उसके पास आते हैं,
जो आकर उसे बिठाते हैं और उससे सवाल करते हैं कि तेरा रब कौन है। वह जवाब देता है मेरा रब अल्लाह है। फिर उससे पूछते हैं कि तेरा दीन क्या है? वह जवाब देता है मेरा दीन इस्लाम है। फिर उससे पूछते हैं कि यह कौन साहब हैं जो तुम्हारे अंदर भेजे गये? वह कहता है कि वह अल्लाह के रसूल हैं।Maut Ke Baad Ki Pehli Manzil
फिर उससे पूछते हैं कि तेरा अमल क्या है? वह कहता है कि मैंने अल्लाह की किताब पढ़ी सो उस पर ईमान लाया और उसकी तस्दीक की। इसके बाद एक मुनादी (आवाज़ देने वाला) आसमान से आवाज़ देता है (जो अल्लाह का मुनादी है कि मेरे बन्दे ने सच कहा सो उसके लिए जन्नत के बिछौने बिछा दो और उसको जन्नत के कपड़े पहना दो और उसके लिए जन्नत की तरफ़ दरवाज़ा खोल दो ।
चुनांचे जन्नत का दरवाज़ा खोल दिया जाता है जिसके ज़रिये जन्नत का आराम और खुश्बू भीतर आती रहती है और उसकी कब्र इतनी फैला दी जाती है की जहां तक उसकी नज़र पहुंचे। इसके बाद बहुत ही खूबसूरत चेहरे वाला, बेहतरीन कपड़ों वाला, और पाक खुश्बू वाला एक आदमी उसके पास आकर कहता है कि खुशी की चीज़ों की खुशखबरी सुन ले।
यह तेरा वह दिन है जिसका तुमसे वादा किया जाता था। वह कहता है तुम कौन हो? तुम्हारा चेहरा सच में चेहरा कहने के कबिल है और इस कबिल है कि अच्छी ख़बर लाए। वह कहता है मैं तेरा अच्छा अमल हूं।Maut Ke Baad Ki Pehli Manzil
इसके बाद वह खुशी में कहता है कि ऐ रब! कियामत कायम फरमा । ऐ रब ! क़ियामत कायम फरमा ताकि मैं’ अपने बाल-बच्चों और माल में पहुंच जाऊं।
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FAQ – (सवाल व जवाब)
1. मौत के बाद इंसान के साथ सबसे पहले क्या होता है?
जवाब: हदीस के मुताबिक, मोमिन की रूह को फ़रिश्ते बड़ी इज़्ज़त और रहमत के साथ क़ब्ज़ करते हैं और उसे अल्लाह तआला की तरफ़ ले जाया जाता है।Maut Ke Baad Ki Pehli Manzil
2. क्या मौत के बाद रूह ज़िंदा रहती है?
जवाब: जी हाँ। इस्लामी अक़ीदे के मुताबिक, इंसान की रूह बरज़ख़ की ज़िंदगी में रहती है और उसका मामला उसके आमाल के मुताबिक होता है।Maut Ke Baad Ki Pehli Manzil
3. कब्र में मुन्किर और नकीर कौन हैं?
जवाब: मुन्किर और नकीर अल्लाह तआला के दो फ़रिश्ते हैं, जो कब्र में आकर इंसान से उसके ईमान और दीन के बारे में सवाल करते हैं।Maut Ke Baad Ki Pehli Manzil
4. कब्र में कौन-कौन से सवाल पूछे जाते हैं?
जवाब: हदीस में आता है कि तीन अहम सवाल पूछे जाते हैं: तुम्हारा रब कौन है? तुम्हारा दीन क्या है? और तुम्हारे नबी कौन हैं?Maut Ke Baad Ki Pehli Manzil
5. मोमिन इन सवालों का क्या जवाब देगा?
जवाब: मोमिन कहेगा: मेरा रब अल्लाह है, मेरा दीन इस्लाम है और मेरे नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ हैं।Maut Ke Baad Ki Pehli Manzil
6. मोमिन की कब्र में क्या इनाम मिलता है?
जवाब: हदीस के मुताबिक, उसकी कब्र को विशाल कर दिया जाता है, जन्नत का दरवाज़ा खोल दिया जाता है और जन्नत की खुशबू और आराम उसे मिलता रहता है।Maut Ke Baad Ki Pehli Manzil
7. क्या अच्छे आमाल कब्र में इंसान के साथ होंगे?
जवाब: जी हाँ। हदीस में आता है कि नेक आमाल एक खूबसूरत शख़्स की शक्ल में आकर मोमिन को खुशखबरी देते हैं और उसका साथ निभाते हैं।Maut Ke Baad Ki Pehli Manzil
8. क्या हर इंसान से कब्र में सवाल होंगे?
जवाब: इस्लामी रिवायतों के मुताबिक, कब्र के सवाल हर मुकल्लफ़ इंसान से उसके ईमान और आमाल के बारे में किए जाएंगे।Maut Ke Baad Ki Pehli Manzil
9. कब्र के अज़ाब से बचने का तरीका क्या है?
जवाब: सही ईमान, नेक आमाल, नमाज़ की पाबंदी, तौबा, क़ुरआन और सुन्नत पर अमल तथा अल्लाह से कब्र के अज़ाब से पनाह की दुआ करना बचाव के अहम ज़रिए हैं।Maut Ke Baad Ki Pehli Manzil
10. मौत और आख़िरत की तैयारी कैसे करें?
जवाब: हर दिन नमाज़ की पाबंदी करें, गुनाहों से तौबा करें, नेक आमाल बढ़ाएँ, लोगों के हक़ अदा करें और हर हाल में अल्लाह तआला की फ़रमाँबरदारी की कोशिश करें। यही आख़िरत की सबसे बेहतर तैयारी है।Maut Ke Baad Ki Pehli Manzil
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह खैर….
