27/08/2026
IMG 20260827 175303

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम और चार परिंदों का वाक़िआ | दिल को मुतमइन करने वाला ईमान का सबक| Hazrat Ibrahim Alaihissalam Aur Chaar Parindon Ka Waqia | Dil Ko Mutmain Karne Wala Imaan Ka Sabak amazing story

Share now
Hazrat Ibrahim Alaihissalam Aur Chaar Parindon Ka Waqia.
Hazrat Ibrahim Alaihissalam Aur Chaar Parindon Ka Waqia

Hazrat Ibrahim Alaihissalam Aur Chaar Parindon Ka Waqia

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम का यह वाक़िआ अल्लाह तआला की कुदरत और ईमान की गहराई को समझने का बेहद खूबसूरत सबक देता है। हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम का ईमान तो पहले ही मुकम्मल था, लेकिन उन्होंने अल्लाह तआला से अर्ज़ किया कि ऐ मेरे रब! मैं अपनी आँखों से देखना चाहता हूँ कि तू मुर्दों को किस तरह ज़िंदा फ़रमाता है।

फिर अल्लाह तआला ने उन्हें चार परिंदों के ज़रिए अपनी कुदरत का ऐसा मंज़र दिखाया जो इंसान को हैरत में डाल देता है। इस वाक़िआ में सिर्फ़ मुर्दों के दोबारा ज़िंदा होने का सबक ही नहीं, बल्कि इंसान के नफ़्स, लालच, घमंड और शहवत की इस्लाह के लिए भी बड़ी नसीहतें बयान की जाती हैं।

आइए, इस दिलचस्प और ईमान को ताज़ा कर देने वाले वाक़िआ को आसान अंदाज़ में समझते हैं और देखते हैं कि इन चार परिंदों से हमें अपनी ज़िंदगी के लिए क्या सबक मिलता है।

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने एक बार अल्लाह तआला से अर्ज़ किया : ऐ अल्लाह ! तू मुझे दिखला दे कि तू मुर्दों को किस तरह ज़िन्दा फ़रमायेगा ?

तो अल्लाह तआला ने फ़रमाया : ऐ इब्राहीम अलैहिस्सलाम, क्या इस पर तुम्हारा ईमान नहीं है |

इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया: मैं इस पर मुकम्मल ईमान रखता हूँ लेकिन मेरी तमन्ना ये है कि मैं इस मंज़र को अपनी आँखों से देख लूं ताकि मेरे दिल को क़रार आए ।

अल्लाह तआला ने फ़रमाया : ठीक है, तुम चार परिंदों को पालो, और उन को खूब खिला पिला कर अच्छी तरह अपना आदी बना लो ,

फिर तुम उन्हें ज़बह करके उनका कीमा बना कर अपने आस पास के कुछ पहाड़ों पर थोड़ा थोड़ा उन का गोश्त रख दो, फिर तुम उन परिंदों को पुकारो तो वो परिंदे जिंदा होकर दौड़ते हुए तुम्हारे पास चले आयेंगे, और तुम मुर्दों के जिंदा होने का मन्ज़र अपनी आँखों से देख लोगे।

चुनांचे हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने एक मुर्गा, एक कबूतर, एक गिद्ध और एक मोर इन चार परिंदों को खिला पिला कर इतना मानूस कर लिया कि जब आप उन्हें बुलाते तो वो दौड़ कर उनके पास आ जाते |

फिर एक दिन उनको ज़बह करके उनके सिरों को अपने पास रख लिया, और उनका कीमा बना कर अपने आस पास के कुछ पहाड़ों पर थोड़ा थोड़ा गोश्त रख दिया,

और दूर खड़े होकर उन परिंदों का जो नाम रखा था उस नाम से बुलाया, इस पुकार पर एक दम पहाड़ों से गोश्त का कीमा उड़ना शुरू हुआ और हर परिंदे का गोश्त पोस्त हड्डी, पर अलग होकर चार परिंदे तैयार हो गए

और चारों परिंदे बिना सिरों के उड़ते हुए हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के पास आ गए, और अपने सिरों से जुड़ कर दाना चुगने लगे, और अपनी अपनी बोलियाँ बोलने लगे तो हज़रत इब्राहीम अ.स. ने अपनी आँखों से मुर्दों के जिंदा होने का मंज़र देख लिया |

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने जिन चार परिंदों को ज़बह किया, उन में से हर एक परिंदा बुरी आदत में मशहूर है जैसे मोर को अपनी शक्ल व सूरत की ख़ूबसूरती पर बड़ा घमंड होता है, और मुर्ग में ज्यादा शहवत की बुरी आदत है,

और गिद्ध में लालच की बुरी आदत है और कबूतर को अपनी ऊंची उड़ान पर बड़ा गुरूर होता है।

ये भी पढ़ें: हज़रत काब बिन मालिक (रज़ि.) का हैरतअंगेज़ वाक़िया | रसूल ﷺ से सच्चा इश्क़ और तौबा की क़ुबूलियत

तो इन चारों परिंदों को ज़बह करने से इन चारों बुरी आदतों के ज़बह करने की तरफ इशारा है जब चारों परिंदे ज़बह हो गए तो हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को मुर्दों के जिंदा होने का मंज़र दिखा और इतमिनान नसीब हुआ।

अगर कोई चाहता है कि उसे नफ्से मुत मइन्ना नसीब हो यानी दिल मुतमइन हो जाये तो उसे चाहिए मुर्ग ज़बह करे मतलब अपनी शहवत पर छुरी फेर दे, और मोर ज़बह करे यानी अपनी खूबसूरती का घमंड ख़त्म कर दे,

और गिद्ध को ज़बह करे यानि अपनी लालच का गला काट डाले, और कबूतर ज़बह करे यानी अपने बलंद मर्तबे के गुरूर को ख़त्म करे।

अगर कोई इन चार बुरी आदतों को ख़त्म कर देगा तो वो इंशा अल्लाह अपने दिल के जिंदा होने का मंज़र अपनी आँखों से देख लेगा और उसको मुतमईन दिल नसीब हो जायेगा।

FAQ — सवाल और जवाब

सवाल 1: हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह तआला से क्या अर्ज़ किया था?
जवाब: उन्होंने अर्ज़ किया कि ऐ मेरे रब! मुझे दिखा दे कि तू मुर्दों को किस तरह ज़िंदा फ़रमाता है। उनका ईमान मुकम्मल था, लेकिन वह अपने दिल को और इत्मिनान देना चाहते थे।Hazrat Ibrahim Alaihissalam Aur Chaar Parindon Ka Waqia

सवाल 2: अल्लाह तआला ने हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को क्या हुक्म दिया?
जवाब: अल्लाह तआला ने उन्हें चार परिंदे लेने, उन्हें अपने से मानूस करने, फिर उनके गोश्त के टुकड़े अलग-अलग जगह रखने और उन्हें पुकारने का हुक्म दिया।Hazrat Ibrahim Alaihissalam Aur Chaar Parindon Ka Waqia

सवाल 3: चार परिंदों का ज़िक्र किस मक़सद से किया गया?
जवाब: इस वाक़िआ का बुनियादी मक़सद अल्लाह तआला की कुदरत और मुर्दों के दोबारा ज़िंदा होने को समझाना है।Hazrat Ibrahim Alaihissalam Aur Chaar Parindon Ka Waqia

सवाल 4: इस वाक़िआ से हमें सबसे बड़ी नसीहत क्या मिलती है?
जवाब: इंसान को अल्लाह तआला की कुदरत पर पूरा यक़ीन रखना चाहिए और अपने दिल को शक व ग़फ़लत से बचाना चाहिए।Hazrat Ibrahim Alaihissalam Aur Chaar Parindon Ka Waqia

सवाल 5: चार परिंदों को किन बुरी आदतों की मिसाल बताया गया है?
जवाब: इस बयान में मुर्ग को शहवत, मोर को खूबसूरती के घमंड, गिद्ध को लालच और कबूतर को अपनी बुलंदी पर गुरूर की तरफ़ इशारा बताया गया है।Hazrat Ibrahim Alaihissalam Aur Chaar Parindon Ka Waqia

सवाल 6: नफ़्स की इस्लाह क्यों ज़रूरी है?
जवाब: क्योंकि लालच, घमंड, गुरूर और नफ़्स की बुरी ख्वाहिशें इंसान के दिल को ग़ाफ़िल कर देती हैं। इनसे बचना दिल की इस्लाह का अहम हिस्सा है।Hazrat Ibrahim Alaihissalam Aur Chaar Parindon Ka Waqia

सवाल 7: नफ़्से मुतमइनना से क्या मुराद है?
जवाब: ऐसा दिल जो अल्लाह तआला की याद, उसके फ़ैसले और उसकी कुदरत पर इत्मिनान रखे और गुनाह व नाफ़रमानी से बचने की कोशिश करे।Hazrat Ibrahim Alaihissalam Aur Chaar Parindon Ka Waqia

सवाल 8: क्या अल्लाह तआला मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करने पर क़ादिर है?
जवाब: जी हाँ। अल्लाह तआला हर चीज़ पर क़ादिर है। क़ुरआन में हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के इस वाक़िआ के ज़रिए भी अल्लाह की कुदरत को बयान किया गया है।Hazrat Ibrahim Alaihissalam Aur Chaar Parindon Ka Waqia

सवाल 9: इस वाक़िआ से अपनी ज़िंदगी में क्या अमल लेना चाहिए?
जवाब: हमें अपने अंदर के घमंड, लालच, गुरूर और नफ़्स की गलत ख्वाहिशों का जायज़ा लेना चाहिए और उन्हें धीरे-धीरे ख़त्म करने की कोशिश करनी चाहिए।Hazrat Ibrahim Alaihissalam Aur Chaar Parindon Ka Waqia

सवाल 10: इस वाक़िआ का सबसे खूबसूरत पैग़ाम क्या है?
जवाब: अल्लाह तआला की कुदरत पर यक़ीन रखो, अपने नफ़्स की इस्लाह करो और दिल को अल्लाह की याद से ज़िंदा रखो। यही सुकून और इत्मिनान की राह है।Hazrat Ibrahim Alaihissalam Aur Chaar Parindon Ka Waqia

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।Hazrat Ibrahim Alaihissalam Aur Chaar Parindon Ka Waqia

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।Hazrat Ibrahim Alaihissalam Aur Chaar Parindon Ka Waqia

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।Hazrat Ibrahim Alaihissalam Aur Chaar Parindon Ka Waqia
खुदा हाफिज़ ….

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *