हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु पर जुब्बे का असर
हज़रत फारूके आज़म रज़ियल्लाहु अन्हु के बारे में रिवायत है कि एक बार मस्जिदे नबवी में खुतबा देने के लिए तशरीफ लाए, उस वक़्त वह एक बहुत शानदार जुब्बा पहने हुए थे।
जब खुतबे से फारिग हो कर घर तशरीफ लाए तो जाकर उस जुब्बे को उतार दिया, और फरमाया कि मैं आइन्दा इस जुब्बे को नहीं पहनूंगा, इसलिये कि इस जुब्बे को पहनने से मेरे दिल में बड़ाई और तकब्बुर का एहसास पैदा हो गया, इसलिये मैं आइन्दा इसको नहीं पहनूंगा।
हालांकि वह जुब्बा अपने आप में ऐसी चीज़ नहीं थी, जो हराम होती, लेकिन अल्लाह तआला जिन हज़रात की तबीयतों को आईने की तरह साफ शफ़्फ़ाफ बनाते हैं, उनको जरा जरा सी बात भी बुरी लगती हैं, इसकी मिसाल यों समझिये कि जैसे एक कपड़ा दागदार है, और कपड़े पर हर जगह धब्बे ही धब्बे लगे हुए हैं, उसके बाद उस कपड़े पर एक दाग और आकर लग जाए तो उस कपड़े पर कोई असर जाहिर न होगा।
हमारा भी यही हाल है कि हमारा सीना दागों और धब्बों से भरा हुआ है, इसलिये अगर खिलाफे शरीअत कोई बात हो जाती है तो उसकी जुल्मत और उसकी अंधेरी और उसके वबाल का एहसास नहीं होता। लेकिन जिन हज़रात के सीनों को अल्लाह तआला आईने की तरह शफ़्फ़ाफ बनाते हैं, उनकी मिसाल ऐसी है, जैसे सफेद, साफ शफ्फ़ाफ कपड़ा हो,
उस पर अगर ज़रा सा भी दाग लग जायेगा तो वह दाग बहुत नुमायां नज़र आयेगा, इसी तरह अल्लाह वालों के दिल साफ शफ़्फ़ाफ होते हैं उन पर ज़रा सी भी छींट पड़ जाए तो उनको नागवार होती है। तो हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु के वाकिए से मालूम हुआ कि लिबास का असर इन्सान के अख़्लाक व किर्दार पर और उसकी ज़िन्दगी पर पड़ता है।
खूबसूरत वाक़िआ:हदिये की तारीफ | Hadiye ki tareef.
इसलिये लिबास को मामूली समझ कर नज़र अन्दाज़ नहीं करना चाहिए, और लिबास के बारे में शरीअत के जो उसूल हैं वे समझ लेने चाहिऐं और उनकी पैरवी करनी भी ज़रूरी है।
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….
🤲 Support Sunnat-e-Islam
Agar aapko hamara Islamic content pasand aata hai aur aap is khidmat ko support karna chahte hain,
to aap apni marzi se donation kar sakte hain.
Allah Ta‘ala aapko iska ajr ata farmaye. Aameen.
